शनिवार, 24 नवंबर 2007

लाइनें बी.एस.एन.एल. कीं फोन सेठजी के, एक्‍सचेन्‍ज किसी का वसूली किसी और की

लाइनें बी.एस.एन.एल. कीं फोन सेठजी के, एक्‍सचेन्‍ज किसी का वसूली किसी और की

किस्‍सा ए बी.एस.एन.एल.भ्रष्‍टाचार बनाम अंधेरगर्दी विद गुण्‍डागर्दी

किश्‍तबद्ध रिपोर्ताज भाग- 4

 

मुरैना 24 नवम्‍बर 2007 । जैसा कि हम पिछले अंकों में बता चुके हैं कि बी. एस. एन. एल. के पालनहार और रखवालों ने ही उसे भ्रष्‍टाचार संचार निगम लिमिटेड में तब्‍दील कर उसे व उसके उपभोक्‍ताओं को प्राइवेट कंपनियों को थाली में परोसकर सौंप दिया । मुरैना शहर में एक प्राइवेट कम्‍पनी पर बी. एस. एन. एल. के भ्रष्‍टाचारी इस कदर महरबां हुये कि मुरैना शहर में इस प्राइवेट कंपनी को लगभग 67 किलोमीटर लम्‍बी बी. एस. एन. एल. की अंडरग्राउण्‍ड केबिलें उपहार में या यूं कहिये कि दहेज में दे डाली उल्‍लेखनीय है कि मुरैना शहर में बी. एस. एन. एल. के अलावा एक अन्‍य प्राइवेट कम्‍पनी द्वारा भी वर्ष 2003 से लेंड लाइन टेलीफोनिक एवं इंटरनेट सेवाऐं दी जा रही हैं, मजे की बात ये है कि इस प्राइवेट कंपनी का स्‍वयं का कोई कार्यालय और अधोसंरचना मुरैना शहर में नहीं हैं । एक सेठजी इसके फ्रेंचाइजी बनकर न केवल शहर को चूना लगा रहे हैं बल्कि बी. एस. एन. एल. को भी उनने लाखों करोड़ों से नाप दिया है ।

        उल्‍लेखनीय है कि मुरैना शहर में भूमिगत टेलीफोन केबिलों का बिछाव वर्षों पहले बी. एस. एन. एल. द्वारा किया गया था, और प्राइवेट कंपनी के तथाकथित फ्रेंचाइजी के पास न तो इतनी अधिक अधोसंरचना उपलब्‍ध थी और न इतनी अनुमतियां कि सारी मुरैना शहर में अपनी ओवरहैड और अंडरग्राउण्‍ड लाइनें बिछा सकें । बी. एस. एन. एल. के भ्रष्‍ट नुमाइंदों की महरबानी से प्राइवेट फ्रेंचाइजी यानि सेठजी की प्रोब्‍लम सोल्‍व हो गयी और बी. एस. एन. एल. ने अपनी लगभग 67 किलोमीटर लम्‍बी केबिलें प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी सेठजी को सुपुर्द व समर्पित कर दीं । ग्‍यातव्‍य है कि इसकी कोई लिखत-पढ़त बी. एस. एन. एल. में नहीं है, और स्थिती यह है कि लाइनें बी. एस. एन. एल. की हैं और उनमें टैग एवं सर्किट प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी के हैं । ग्‍वालियर टाइम्‍स द्वारा इस तथ्‍य की तहकीकात की गयी जिसमें हर परीक्षित जगह पर बी. एस. एन. एल. की लाइनों में ही प्राइवेट कंपनी के फ्रेंचाइजी की पैरेलल केबिलें और पैरेलल टेग एवं सर्किट मिले ।

         मजे की बात ये है कि जब भी प्राइवेट कंपनी का कोई टैग या सर्किट फेलुअर या डिसेबल्‍ड या डैमेज होता है, तो प्राइवेट कम्‍पनी वाले अपनी लाइन ट्रेसिंग में बी. एस. एन. एल.  की केबिलें खोद और काट डालते हैं । परिणाम यह होता है कि बी. एस. एन. एल.  के लाइनमैन शहर में यही खोजते रहते हैं कि लाईन कहां कटी ।

     बी. एस. एन. एल. के टेलीफोन और इण्‍टरनेट कनेक्‍शन इस कदर आये दिन ठप्‍प ओर नेटवर्क ध्‍वस्‍त ही बने रहते हैं ।

इसके अलावा और भी चौंकाने वाली और हैरतगंज बात ये है कि बी. एस. एन. एल. के फोनों में कभी कभी प्रायवेट कम्‍पनी के फ्रेंचाइजी सेठजी की लाइन भी मिश्रित हो जाती है और लोगों का नम्‍बर कहीं लगाते लगाते कहीं और लग जाता है या कभी कभी फोन अज्ञात जगह से अपने आप आने लगते हैं ।

 

   क्रमश: जारी अगले अंक में .........

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