मंगलवार, 24 नवंबर 2009

दो लाख से अधिक शहरी मतदाता - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

दो लाख से अधिक शहरी मतदाता   - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

अपनी पसंद तय करेंगे 11 व 14 को

मुरैना..राजनैतिक दल अपनी अपनी पार्टी प्रत्याशी की चयन प्रक्रिया में उलझे हुए है और मतदाता  खामोश है, मुरैना जिला अंतर्गत 4 नगरपालिका परिषद एवं चार नगर पंचायतों में मतदान दिनांक 11 एवं 14 दिसम्बर को होगा। मतदान में 223575 मतदाता अपने मताअधिकार का प्रयोग करेंगे। इस दिन वें किस दल को विजय बनाना है अपनी पंसद का इजहार करेंगे। इनमें 123190 पुरूष व 100385 महिलाऐं शामिल है। किन्तु प्रत्याशियों के चयन का निश्चय न होने से मतदाता का कोई रूझान सामने नही आ रहा है। फिर भी यह तय है कि कांग्रेस या भाजपा दोनों में से कोई एक दल या कही भाजपा या कही काँग्रेस ही मतदाताओं की पसंद मजबूरी होगी। मिनी विधान सभा चुनाव की तर्ज पर हो रहे नगरीय निकाय चुनावों में विधानसभा लोकसभा के बाद एक बार फिर राजनैतिक दलों को नया जनादेश प्राप्त करने का अवसर होगा।

नोट- दो कॉलम में  समाचार इसी में लगाना है।

कहा कितने मतदाता है     -

क्र. नपा-नपं        पुरूष        महिला      योग

1.नपा पोरसा-      11336      9566       20902

2. नपा अम्बाह-   12200      10472     22672

3.नपा मुरैना -    59147      46109     105256

4.नपा सबलगढ.-   11111       9287      20398

5.नपं बानमौर -   7576       6692     14268

6.नपं जौरा-       11646       9733     21379

7.नपं कैलारस-    7353       6143     13496

8.नपं झुण्डपुरा-   2821        2383     5204

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 कुल          123190     100385     223575

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राजनैतिक दलों के कार्यालयों पर रौनक लौटी - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

राजनैतिक दलों  के कार्यालयों  पर रौनक लौटी - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

मुरैना..लोक सभा चुनाव के बाद बिगत छं. माह से सभी राजनेतिक दलों के कार्यालय बंद पडे थे स्थानीय निकाय के चुनाव की घोषणा के साथ ही ये कार्यालय पुन: खुल गये है भाजपा एवं कांग्रेस दोनों ही राजनेतिक दलो के कार्यालयों पर रौनक लौट आयी है। किन्तु अन्य दलों के कार्यालय अभी बीरान से दिखाई देते है भाजपा एवं कांग्रेस दोनों के कार्यालयों पर अध्यक्ष एवं पार्षदों का टिकिट प्राप्त करने के लिये प्रत्याशियों के मध्यघमासान खाींचातानी चल रही है। हर प्रत्याशी अपने आप को श्रेष्ट जताने में लगा हुआ है है तथा ऐनकेन प्रकारेण टिकिट पाने का हर संभव प्रयास कर रहा है लाटरी किस की खुलेगी ये आने वाला कल बतायेगा वेसे आम जनता के मध्य हर टिकिट मांगने वाला यही संदेश दे रहा है कि उसका टिकिट फायनल है। कांग्रेस के दो प्रत्याशियों ने यह मान कर कि उनका टिकिट फायनल हो गया है निर्वाचन अधिकारी के समक्ष  अपने अपने नामांकन भी दाखिल कर दिये है।आने वाले दिनों में कांग्रेस एवं  भाजपा दोनों ही दलों के अन्य प्रत्याशी भी अपना टिकिट फायनल मान कर नामांकन दाखिल कर सकते है।

 

निकाय चुनाव में होगी भाजपा कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर- दैनिक मध्यराज्य मुरैना

निकाय चुनाव में  होगी भाजपा कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर- दैनिक मध्यराज्य मुरैना

भाजपा को बिजली का करंट तो कांग्रेस को मंहगाई का खतरा

राजेश  चिंतक  (लेखक चम्‍बलघाटी के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

मुरैना...मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा होते ही राजनेतिक सरगर्मिया तेज होगई है प्रदेश  में  सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी और केन्द्र में  सत्तारूढ कांग्रेस के बीच ही इस वार भी सीधा मुकावला होने की संभावना है। विधान सभा चुनाव में मात खाने के बाद कांग्रेस ने लोक सभा में अपने प्रदर्शन को सुधारा मगर अब नगरीय निकायचुनाव में क्या वह लोक सभा के प्रदर्शन को दोहरा पायेगी या भाजपा  एक बर्ष पूर्व हुए विधान सभा चुनाव में पार्टी को मिले अपार जनसमर्थन को बापिस अपने पक्ष में लाने में कामयाव होगी ? दोनों ही दलों के लिये नगरीय निकाय चुनाव में कठिन परीक्षा है। एक ओर प्रदेश की सत्ता पर काविज भाजपा के लिये प्रदेश में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से न होना नगरीय निकाय के चुनावों में प्रतिकूल स्थिति बना सकती है तो दूसरी ओर केन्द्र की सत्ता पर काविज कांग्रेस के लिये दिनो दिन बढ रही मंहगाई का खतरा भी पैदा हो सकता है। भाजपा बिजली की आपूर्ति पर नियंत्रण नही कर पा रही है और कांग्रेस मंहगाई को नियंत्रित न कर पाने की असमर्थता जता रही है। आम मतदाता बिजली  एवं मंहगाई दोनों से ही बुरी तरह पीडित है ऐसी स्थिति में वह भाजपा या कांग्रेस दोनों में से किसे चुने  दोराहे पर खडाहुआ है। यद्धपि स्थानीय निकाय के चुनाव का संबन्ध बिजली एवं मंहगाई जैसे संबेदनशील मुद्दों को अधिक प्रभावित इसलिये नही करेगा क्यों  कि इन मुद्दों का हल स्थानीय निकाय के सीमा क्षेत्र में नही आता फिर भी किसी सीमा तक ये मुद्दे स्थानीय निकाय के चुनाव में दोनों ही राजनैतिक दलों के लिये सरदर्द बन सकते है।

बहरहाल प्रदेश में  अभी तो दोनो राजनैतिक दल प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया में ही उलझे हुए है जिससे दिनांक 25 तक सुलझने की संभावना है चयन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद ही इन दलों का चुनाव प्रभावित करने वाले मुद्दो की ओर जावेगा तब ये तय करेगे कि चुनाव जीतने के लिये ऐसी कौन सी लोक लुभावन एवं मतदाता को रिझााने की रणनीति बनाई जाये जिससे स्थानीय निकाय के चुनावों में विजयश्री हासिल की जा सके।

कांग्रेस एवं भाजपा से प्रथक अन्य राजनेतिक दल बसपा,सपा,भाजशपा,राष्ट्रीय सवर्ण समाजपार्टी ,लोकदल अथवा बामदलों का अस्तित्व लोक सभा की तरह स्थानीय निकायचुनावों में भी लुप्त होता दिखाई पडता है। क्यो कि केन्द्र या राज स्तर पर इन दलों की सरकारें न होना तथा राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक स्थिति का अधिक सुदृड न होना इन दलों के अस्तित्व मिटाने में सहायिक सिद्ध हो सकता है। ऐसा इसलिये परलक्षित होता है क्यो कि इन दलों में प्रत्याशियों के चयन की कोई ल चल दिखाई नही देती है। इन दलों से टिकिट माांगने वालों की संख्या नगण्य है। टिकिट के लिये टिकिट चाहने वाले प्रत्याशियों का अभाव है और आपसी कोई प्रतिस्पर्धा भी दिखाई नही देती है। सभी दलों के दल प्रमुख टिकिट मांगने वालों का इंतजार कर रहे है। किन्तु आम तोर पर इन दलों से टिकिट चाहने वाले सामने नही आ रहे है।

 

आबकारी उपनिरीक्षक पर लगाया लूट का आरोप - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

आबकारी उपनिरीक्षक पर लगाया लूट का आरोप - दैनिक मध्यराज्य मुरैना

मुरैना..प्रिन्स ट्रवल्स भोजनालय न्यू हाऊसिंगबोर्ड कालोनी मयूवन के सामने ए वी रोड पर लूटपाट और मालिक के साथ मारपीट करने का आरोप आवकारी उपनिरीक्षक जितेन्द्र गुर्जर व आरक्षक मोहर सिंह परमार पर लगाया है। भोजनालय के प्रोपराइटर एवं पुलिस सहयोग संघ के राष्ट्रीय सदस्य चंद्रपालसिंह सिकरवार ने आरोप लगाया है कि आवकारी टीम ने मारपीट कर दुकान पर लूटपाट की गई है। चंद्रपाल ने बरिष्ठ अधिकारियों से कार्यवाही की मांग की है।

 

सोमवार, 23 नवंबर 2009

आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- राकेश अचल

आसपड़ौस :  अबू नहीं, संविधान पिटा

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है।

       भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है।

       मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है।

       दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है।

       विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया।

       मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी?

       वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है।

       दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा।

       मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है।

       बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की।

       संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है।

       मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ''महा-राष्ट्र'' नही रह जाएगा।

       महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें।

       आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके।

       समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ''महान भारत'' बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ''महाराष्ट्र'' का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)

                             

                                                                                                   Rakesh Achal

 

रविवार, 22 नवंबर 2009

विहिप प्रांत मंत्री व संगठन मंत्री आज मुरैना में (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

विहिप प्रांत मंत्री व संगठन मंत्री आज मुरैना में

मुरैना...विश्‍व हिन्दू परिषद के विभाग की बैठक 22 नवंवर 09 रविवार को रखी गई जिसमें मुरैना एवं भिन्ड जिले के दायित्ववान कार्यकर्ता भाग लेंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांत मंत्री राजेश तिवारी एवं प्रांत संगठन मंत्री रोहित भाई जी मुख्य रूप से उपस्थित रहेगे । स्थानीय पंचायती धर्म शाला में आयोजित बैठक के बाद विहिप नेता सायं चार वजे प्रेस से भी रू व रू होंगे उक्त आशय की जानकारी विहिप के जिला मंत्री संजीव खेमरिया विभाग मंत्री राममिलन शर्मा ने एक प्रेस विज्ञिप्त में दी ।

 

सड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायलसड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायल (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

सड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायल

मुरैना..दो अलग अलग सडक दुर्घटनाओं में एक युवक की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गये घायलों को इलाज हेतु जिला अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है जहां पर हालत खतरे सेबाहर बताई गई है।

जिले के सवलगढ थाना क्षेत्र में सवलगढ टेंटरा रोड पर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से एक युवक की दौराने उपचार मौत हो गई मृतक ग्राम केमराकला का रहने वाला था। मृतक भीमसेन रावत राति के समय अपने गांव जा रहा था उसी दौरान अज्ञात वाहन के चालक ने लापरवाही से चलाकर टक्क्रर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई मृतक के भाई गिरधर रावत की सूचना पर पुलिस ने मामला कायम कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों से मिली एक अन्य जानकारी के अनुसार अंबाह रोड पर आज दिमनी खुर्द के बीच अज्ञात वाहन की टक्कर से दो वाईक सवार घायल हो गये जिन्हे उपचार के लिये जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है प्राप्त जानकारी के अनुसार के पी चौहान निवासी गणेशपुरा मुरैना और वनकीलाल प्रजापति निवासी मुतावली डांग बसई राज. वाईक पर सवार होकर अंबाह से मुरैना की ओर आ रहे थे उसी दौरान अज्ञात वाहन चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाकर वाईक में टक्कर  मार दी जिससे दो सुवक घायल हो गये घायलों को इलाज हेतु जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस ने वाहन चालक के बिरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है चिकित्सकों ने घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई है।