शुक्रवार, 22 जून 2007

टीकाकरण में लापरवाही: 6 कर्मचारियों के विरूध्द कार्रवाई

टीकाकरण में लापरवाही: 6 कर्मचारियों के विरूध्द कार्रवाई

 

मुरैना 21 जून07- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. एच.एस.शर्मा ने टीकाकरण कार्य में लापरवाही पाये जाने के कारण 6 स्वास्थ्य कर्मियों के विरूध्द कार्रवाई की है ।

       एम.पी.डब्ल्यू सर्व श्री चन्द्रमोहन शर्मा, किशनसिंह तोमर, दिलीप शर्मा और हनुमंतसिंह तोमर तथा ए.एन.एम.सरोज मिश्रा और प्रर्मिला राठौर गत 19 जून को जिला टीकाकरण अधिकारी डा. जी.एस.तोमर के भ्रमण के दौरान अनुपस्थित पाये गये तथा टीकाकरण कार्य में भी लापरवाही बरतना पाया गया । इन कर्मचारियों का 19 जून07 अनुपस्थित दिवस का अकार्य दिवस घोषित किया गया तथा कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में कारण बताओं सूचना पत्र भी जारी किया गया ।

 

जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 29 जून को

जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 29 जून को

 

मुरैना 20 जून07- जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 29 जून को दोपहर 12 बजे जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की गई है । मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के अनुसार इस बैठक में स्वास्थ्य,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला बाल विकास, शिक्षा, लोक निर्माण और उद्योग विभाग की कार्य प्रगति तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा की जायेगी ।

 

निर्माण कार्य के लिए दो लाख रूपये मंजूर

निर्माण कार्य के लिए दो लाख रूपये मंजूर

 

मुरैना 20 जून07- कलेक्टर श्रीमती केरेलिन खोंग्वार देशमुख ने विधायक श्री मेहरवान सिंह रावत की अनुशंसा पर ग्राम पंचायत पनिहारी में झामक खोह नाले की रिटेनिंग बॉल निर्माण के लिए 2 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदाय की है । कुल 4 लाख 90 हजार रूपये की लागत के इस कार्य के लिए 2 लाख 90 हजार रूपये की राशि जिला पंचायत द्वारा स्वर्णजयंती ग्राम रोजगार योजना के तहत दी गई है । स्वीकृत कार्य का निर्माण सरपंच पनिहारी द्वारा कराया जायेगा ।

 

गैरवन पड़त भूमि के उपयोग के संबंध में जिला स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

प्रकरणों का परीक्षण नोडल एजेंसी करेगी

गैरवन पड़त भूमि के उपयोग के संबंध में जिला स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

 

मुरैना 20 जून07- कलेक्टर श्रीमती केरेलिन खोंग्वार देशमुख की अध्यक्षता में सम्पन्न गैर वन पड़त भूमि के उपयोग के संबंध में जिला स्तरीय समिति की बैठक में लिए गये निर्णय अनुसार राज्य शासन से वापस प्राप्त 50 हेक्टर से कम भूमि के पांच प्रकरणों का परीक्षण नोडल एजेंसी एम.पी.एग्रों करेंगी । बैठक में संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख श्री आशकृत तिवारी, उप संचालक कृषक कल्याण एवं कृषि विकास, जिला प्रबंधक म.प्र.कृषि उद्योग विकास निगम और सहायक संचालक उद्यानिकी के अलावा के.एस.ऑयल मिल के प्रतिनिधि अपनी कार्ययोजना के साथ उपस्थित थे ।

       अधीक्षक भू-अभिलेख ने कार्ययोजना की जानकारी समिति के समक्ष रखी । उन्होंने बताया कि समिति ने गैर वन पड़त भूमि के आवंटन के संबंध में प्राप्त 15 प्रकरण शासन की ओर प्रेषित किये थे । इनमें से 50 हैक्टर से कम भूमि के पांच प्रकरण जिला स्तरीय समिति के परीक्षण हेतु तथा शेष 10 प्रकरण निर्धारित मापदंडों की पूर्ति के पश्चात भेजने हेतु वापस किये गये ।

       समिति ने निर्णय लिया कि शासन से वापस प्राप्त 50 हेक्टर से कम भूमि के पांच प्रकरण प्रबंधक म.प्र.कृषि उद्योग विकास निगम को परीक्षण हेतु भेजे जाये । जिला प्रबंधक को सभी पांच प्रकरणों में आवेदकों द्वारा प्रस्तुत प्रोजेक्ट रिपोर्ट का 15 दिवस में परीक्षण कर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये । इस परीक्षण के आधार पर समिति तय करेंगी कि शासन के निर्देशानुसार कौन सा आवेदन भूमि वंटन के लिए योग्य है । शेष दस प्रकरणों में निर्धारित मापदंडों के आधार पर आवश्यक पूर्ति की कार्रवाई आवेदकों को पत्र जारी कर 15 दिवस में पूर्ण कराई जाये । समिति को प्राप्त एक नवीन आवेदन पत्र को भी नोडल एजेंसी को परीक्षण हेतु भेजने का निर्णय लिया गया ।

       कलेक्टर ने कहा कि आवेदक के.एस.ऑयल मिल के प्रतिनिधि ने जो अभिलेख प्रस्तुत किये हैं, उन्हें मूलत: म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम को भेजा जाये । साथ ही जिन आवेदन पत्रों में कमियां पाई गई हैं, उसकी पूर्ति संबंधित आवेदक से कराकर प्रकरण शासन की ओर प्रेषित किये जाये ।

 

आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की अनन्तिम सूची जारी

आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की अनन्तिम सूची जारी

 

मुरैना 20 जून07- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विकास खंड मुरैना और कैलारस में प्राप्त आवेदन पत्रों के परीक्षण उपरांत आंगनवाडी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की अनन्तिम सूची जारी कर दी गई है । इस सूची पर किसी भी तरह की आपत्ति सात दिवस के भीतर लिखित रूप में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत की जा सकती है ।

       विकास खंड मुरैना में आंगनवाडी कार्यकर्ता के पद पर आंगनवाडी केन्द्र कैमरा में श्रीमती गोमा टैगार प्रथम स्थान पर और श्रीमती लक्ष्मीदेवी प्रतीक्षा सूची में, रसीलपुर में श्रीमती अंजूदेवी प्रथम स्थान पर और श्रीमती गीतादेवी प्रतीक्षा सूची में, पुनीत का पुरा में श्रीमती सरिता कुशवाह प्रथम स्थान पर और श्रीमती रेनू प्रतीक्षा सूची में, सिकरौदा में श्रीमती मनीषा शर्मा प्रथम स्थान पर और श्रीमती लक्ष्मी शर्मा प्रतीक्षा सूची में तथा भूराडाढा में श्रीमती सुनीता प्रथम स्थान पर और श्रीमती सीमा प्रतीक्षा सूची में चयनित हुई है । आंगनवाडी सहायिका के पद पर पुनीत का पुरा में श्रीमती दीपा प्रथम स्थान पर, कैमरा में श्रीमती शारदा प्रथम स्थान पर और श्रीमती मुन्नी प्रतीक्षा सूची में, सिकरोदा में श्रीमती मीराबाई प्रथम स्थान पर और श्रीमती सुखिया प्रतीक्षासूची में तथा रसीलपुर में श्रीमती ममता जाटव प्रथम स्थान पर और श्रीमती राजकुमारी प्रतीक्षा सूची में रखी गई हैं ।

       विकासखंड कैलारस में आंगनवाडी कार्यकर्ता के पद पर वाल्हेरा में श्रीमती कन्याकुमारी शर्मा और भुरावली का पुरा में श्रीमती आशा धाकड प्रथम स्थान पर तथा वार्ड क्रमांक 2 में श्रीमती बसन्ती शाक्य प्रथम स्थान पर और श्रीमती पूजा शाक्य प्रतीक्षा सूची में, वार्ड क्रमांक 14 में श्रीमती अंजना शर्मा प्रथम स्थान पर और श्रीमती लता शर्मा प्रतीक्षा सूची में, भुरावली का पुरा लहर्रा में श्रीमती उम्मेदी धाकड़ प्रथम स्थान पर और श्रीमती नीरज धाकड़ प्रतीक्षा सूची में तथा वार्ड क्रमांक 4 में श्रीमती सुधा सोनी प्रथम स्थान पर और श्रीमती गुड्डी बंसल प्रतीक्षा सूची में चयनित की गई हैं ।

 

विकास के लिए नवाचार प्रोत्साहन योजना

विकास के लिए नवाचार प्रोत्साहन योजना

 

मुरैना 20 जून07- प्राकृतिक वित्तीय और मानव संसाधनों का समाज के विकास में बेहतर उपयोग करने तथा विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध श्रजनात्मक ऊर्जा को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा नवाचार प्रोत्साहन योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है ।

       जिला योजना अधिकारी के अनुसार नये नवाचार पायलट के आधार पर लागू किये जा सकेंगे एवं इससे प्राप्त अनुभव के आधार पर आवश्यक संशोधन उपरांत उनका विस्तार भी किया जा सकेगा । प्राप्त प्रस्तावों का प्रारंभिक स्तर पर राज्य योजना मंडल द्वारा परीक्षण करने के उपरांत सक्षम समिति द्वारा अनुमोदन किया जायेगा ।

       नवाचार प्रोत्साहन योजना के परीक्षण हेतु प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में गठित समिति में प्रमुख सचिव आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण, प्रमुख सचिव और सचिव योजना आर्थिक एवं साख्यिकी, प्रस्ताव से संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष तथ संबंधित जिला कलेक्टर सदस्य होंगे । यह समिति 10 करोड़ रूपये तक की पंचवर्षीय परियोजना की स्वीकृति दे सकेगी । इसके लिए विभागीय मंत्री के अनुमोदन उपरांत वित्त मंत्री का अनुमोदन आवश्यक होगा ।

       दस करोड़ रूपये से अधिक और 25 करोड़ रूपये तक के परियोजना व्यय की स्वीकृति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा दी जायेगी । इसके लिए विभागीय मंत्री के अनुमोदन के उपंरात समन्वय में मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी होगा । पच्चीस करोड़ रूपये से अधिक परियोजना व्यय की स्वीकृति भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा दी जायेगी और इसके लिए मंत्रिपरिषद का अनुमोदन आवश्यक होगा । इन दोनों समितियों में प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण, प्रमुख सचिव और सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, तथा प्रस्ताव से संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव एवं विभागाध्यक्ष और जिला कलेक्टर सदस्य होंगे

 

बुधवार, 20 जून 2007

ताजमहल अपनी संरक्षा और देख रेख के लिये किसी विदेशी सहायता का मोहताज नहीं

ताज महल : अपना खर्च खुद उठाने में सक्षम

भारत को प्रतिवर्ष कमा कर देता है करोड़ो रू.

ताजमहल की सुरक्षा को खतरे की बात केवल कोरी अफवाह: भारत सरकार ने किया खण्‍डन

ताजमहल अपनी संरक्षा और देख रेख के लिये किसी विदेशी सहायता का मोहताज नहीं

 

आज भारत सरकार द्वारा ताजमहल के बारे में फैलायी जा रही भ्रांतियों और बेबुनियाद तथ्‍यों का खण्‍डन आलेख जारी किया है , इस आलेख में स्‍पष्‍ट किया गया है कि ताजमहल पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित है । न तो इसको किसी प्रकार का कोई खतरा है और न इसकी संरक्षा और देखभाल के लिये किसी विदेशी इमदाद की जरूरत है , भारत सरकार और स्‍वयं ताजमहल अपना संधारण व्‍यय उठाने में ही सक्षम नहीं है बल्कि उल्‍टे देश को कई करोड़ हर साल कमा कर देता है ।  नीचे सरकार द्वारा आज जारी आलेख नीचे यथावत प्रकाशित है ।  

 

       ताजमहल भारत के सबसे शानदार स्मारक के रूप में जाना जाता है और इसमें कोई शक नहीं है कि यह मुगल समाट्रों द्वारा बनाए गए श्रृंखलाबध्द मकबरों में से सबसे भव्य स्मारक है। शाहजहाँ ने अपनी दूसरी पत्नी मुमताज महल की याद में इस विशाल मकबरे का यमुना के किनारे निर्माण करवाया था। ताज महल का निर्माण 1631 में प्रारम्भ होकर और करीब 22 वर्षो में पूरा हुआ। इसके निर्माण कार्य में 20 हजार लोगों को लगाया गया और इसके लिए निर्माण सामाग्री पूरे भारत के अलावा मध्य एशिया से मंगाई गई।

       ताज महल लाल रेत की उंची बुनियाद पर खड़ा है जिसके उपरी हिस्से पर सफेद संगमरमर की छत है, जिस पर महरावदार मीनारों से घिरा प्रसिध्द गुम्बद टिका है। इस गुम्बद के भीतर जवाहरातों से जड़ी महारानी की कब्र है।

ताज महल को 1920 में प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 के अंतर्गत एक संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया।

       ताज महल को देखने के लिए प्रतिवर्ष 20 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। पिछले तीन वर्षो के दौरान ताज महल को निहारने आए पर्यटकों की संख्या नीचे दर्शायी गई है :-

वर्ष

भारतीय

 

विदेशी

 

कुल संख्या

 

2004

1847955

364997

2212952

2005

1885286

593637

2478923

2006

2048120

491351

2539471

 

       ताज महल में प्रवेश शुल्क के साथ लिये जाने वाला पथकर आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा लिया जाता है। ताज महल में प्रवेश के लिए पथकर सहित लिया जाने वाला शुल्क भारतीयों और विदेशियों के लिए इस तरह से है :-

 

                प्रवेश शुल्क(एएसआई)             पथकर             कुल (रू0 में)

भारतीय               10               10                 20

विदेशी नागरिक  250                 500               750

 

 

      

वर्ष 2004-07 के दौरान भारतीय पुरातत्वीय सर्वेक्षण, एएसआई द्वारा ताज महल से अर्जित किया गया राजस्व नीचे दर्शाया गया है :-

 

वर्ष

राजस्व

भारतीय रू0 में

राजस्व

अमरीकी डॉलर में

कुल अर्जित राजस्व

(रू0 में)

2004

61665800

961260

106845020

2005

55952610

1326190

118283540

2006

53506950

1796240

137930230

2007(मार्च तक)

18436390

675975

50207215

 

 

ताज की ढांचागत मजबूती

       ताज महल का ढांचा असाधारण रूप से मजबूत है। एएसआई, रूड़की विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय भूभौतिकी अनुसंधान संस्थान और केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान(सीबीआरआई) रूड़की जैसे जाने माने संस्थानों के साथ नियमित रूप से ताज महल की ढांचागत मजबूती की देखरेख कर रही हैं। इसकी ढांचागत मजबूती को लेकर दबाब विश्लेषण, भवन सामाग्री की स्थिति, तकनीकी अभियांत्रिकी और भूकम्पीय सुरक्षा जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अनेक वैज्ञानिक अध्ययन किये जा चुके हैं। सीबीआरआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक स्मारक को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। इस अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्मारक की मजबूती के साथ-साथ नींव में भी किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं है।

 

मीनारें

       ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि ताज महल की मीनारें झुक रही हैं। यह वास्तविकता से परे है। एएसआई मीनारों के शीर्ष कोणों की नियमित देखरेख भारत सर्वेक्षण के सुपर्द कर चुकी है। इसके लिए 1940 से अध्ययन किये जा रहे हैं। भारत सर्वेक्षण द्वारा किए गये अध्ययनों से यह पता चलता है कि ताज महल की चारों मीनारों के शीर्ष कोणों में कोई बदलाव नहीं है। उनकी हाल की रिपोर्ट में, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि चारों मीनार और ताज का ढांचा आज भी उतना ही मजबूत है जितना कि अपने निर्माणकाल में था। भूगणितीय प्रेक्षण की मानक त्रुटियों में ही कुछ बदलाव नजर आए।

 

संरक्षण

       भारतीय पुरातत्वीय सर्वेक्षण (एएसआई) ताज महल पर नियमित रूप से संरक्षण और प्रतिरक्षण का कार्य करता है। 1970 में आगरा से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में मथुरा में तेल परिष्करण-शाला के स्थापित हो जाने के बाद से ताज महल का संरक्षण एक गहन चिंता का विषय बन गया। एएसआई ताज महल के आस-पास की वायु मात्रा में सल्फर-डाई-ऑक्साइड(एसओ2), नाइट्रो ऑक्साइड और एसपीएम(धूल) की नियमित रूप से निगरानी रख रहा है। हालाकि एसओ2 और एनओ की मात्रा एक निश्चित सीमा के भीतर है पर शुष्क मौसम में एसपीएम(धूल) तय मानकों से कहीं ज्यादा होती है।

       वर्ष 2001-03 में, एएसआई ने ताज महल के मुख्य मकबरे की मार्बल सतह पर जमीं धूल और गंदगी को साफ करने के लिए मुलतानी मिट्टी का प्रयोग किया। इसके तहत रसायनिक रूप से परिष्कृत एल्मुनियम सिलिकेट(मुलतानी मिट्टी) का प्रयोग किया गया जोकि एक अक्रिय सामाग्री है और इसका मार्बल की सतह पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। मुलतानी मिट्टी का गाढ़ा घोल बनाकर मार्बल की सतह पर लगाया गया। इस घोल को कुछ दिनों के लिए मार्बल पर लगाकर अपने आप ही गिरने के लिए छोड़ दिया गया। मिट्टी के छूटने के बाद सतह को नमक रहित पानी से साफ कर दिया गया। मुलतानी मिट्टी का प्रयोग आमतौर पर पांच वर्षो में एक बार अथवा जरूरत के मुताबिक किया जाता है।

       उच्चतम न्यायालय भी ताज महल पर पड़ने वाले वायु प्रदूषण के संभावित प्रभावों पर ध्यान दे चुका है। 1996 में, उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में आगरा में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए श्रृंखलाबध्द उपायों को अपनाने के आदेश जारी किए थे। इसके तहत छोटे स्तर पर चल रही प्रदूषित ईकाईयों(लौह ढलाईघरों) पर प्रतिबंध लगाने का एक बड़ा कदम उठाया गया था। यह भी आदेश दिया गया था कि स्मारक के 500 मीटर के दायरे में यात्रियों के प्रदूषित वाहनों को चलने की अनुमति न दी जाए और इसकी चाहरदीवारी के 200 मीटर के क्षेत्र में सभी नए निर्माणों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।

       भारत सरकार ने करीब 10400 वर्ग किलोमीटर के इलाके में आने वाले मथुरा फिरोजाबाद, हाथरस, भरतपुर आदि कस्बों को एक नियंत्रित विकास क्षेत्र के रूप में ताज समलम्ब क्षेत्र घोषित कर दिया है।

 

       पिछले तीन वर्षो में ताज महल के संरक्षण पर आने वाला एएसआई का व्यय ब्यौरा नीचे दर्शाया गया है :-

                                                                              (रूपए लाख में)

 

                                               

2004-05

2005-06

2006-07

परिदृश्य और बागबानी

24.44

24.65

10.18

रसायनिक संरक्षण और

वायु गुणवत्ता की देखरेख

20.99

23.50

31.73

ढांचागत संरक्षण और रख-रखाव

77.92

90.15

117.67

कुल

123.55

138.30

159.58

 

ताजमहल का रात्रि अवलोकन

       पर्यटकों द्वारा ताज महल को रात्रि में निहारने की विशेष मांग को ध्यान में रखते हुए एएस आई ने पूर्णमासी के दिनों में रात्रि में ताज का अवलोकन खोल दिया था। लेकिन सुरक्षा कारणों से, रात्रि अवलोकन को 1996 से रोक कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई एक गुजारिश के बाद, उच्चतम न्यायालय ने कुछ निश्चित शर्तो के बाद नवम्बर, 2004 में रात्रि अवलोकन की फिर से इजाजत दे दी। पूर्णमासी एवं पूर्णमासी के दो दिन पहले और दो दिन बाद एक माह में पांच दिन तक रात्रि अवलोकन की इजाजत दी गई।(शुक्रवार और रमजान के महीनें के अतिरिक्त) रात्रि अवलोकन शाम 8 बजकर 30 मिनट से रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक खुला है और इसमें प्रत्येक दिन 50 पर्यटकों के एक समूह में कुल 400 पर्यटकों को इजाजत दी गई है। पर्यटकों को मुख्य प्रवेश द्वार के निकट लाल रेतीले पत्थरों के परिसर से आगे जाने की इजाजत नहीं है और इसके लिए उन्हें प्रति व्यक्ति 500 रू0 का अतिरिक्त प्रवेश शुल्क अदा करना होता है। यह अतिरिक्त शुल्क ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था की लागत और संख्या को कम करने के मद्देनजर लगाया गया है।

ताज संग्रहालय का सुधार

       एएसआई, आगरा क्षेत्र ने ताज संग्रहालय के सुधार हेतु कुछ चुनिंदा कंम्पनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे और स्वीकृति के बाद, एक विशेषज्ञ कंपनी को वैचारिक योजना की तैयारी को पूर्णरूप देने के लिए निर्धारित कर लिया गया। कंपनी ने एक वैचारिक योजना को प्रस्तुत किया जिसे संग्रहालय विशेषज्ञों और निदेशालय द्वारा मंजूरी दे दी गई। सलाहकार अब एक विस्तृत परियोजना को अंतिम रूप दे रहे है। संग्रहालय के सुधार का कार्य शीघ्र ही प्रारम्भ हो जाएगा। इस वर्ष इस कार्य के लिए 26 लाख रूपए प्रदान करने की व्यवस्था की गई हैं।