रविवार, 22 नवंबर 2009

कर्मचारी संघों ने पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष शर्मा के निधन पर शोक सभा आयोजित की (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

कर्मचारी संघों ने पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष शर्मा के निधन पर शोक सभा आयोजित की

मुरैना.म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के पूर्व एवं म.प्र.पेशर्न्स एसो.के वर्तमान प्रांताध्यक्ष श्री नारायण प्रशाद शर्मा के आस्किमिक निधन के कारण 20 नवम्बर को म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय  कर्मचारी संघ म.प्र. लघुवेतन कर्मचारी संघ एवं म.प्र. पेंशर्न्स एसोसियन के साथियों द्वारा सयुक्त रूप से शोक सभा का आयोजन शासकीय मध्यमिक विद्यालय चम्बल कालोनी के प्रांगण में राघवेन्द्र सिंह तोमर जिलाअध्यक्ष म.प्र.तृतीय वर्ग शा.कर्मचारी संघ की अध्यक्षता में किया गया। इस  अवसर पर श्री चिम्मन सिंह सिकरवार, राघवेन्द्र सिंह तोमर, एम.एस. नांगलीय, बी.एल.टुण्डेले एवं दोलतराम शर्मा अनेक वक्ताओं द्वारा श्री शर्मा के कृतृत्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। श्री शर्मा को कर्मचारी संघ एवं वर्तमान में पेशर्न्स एसो. का जुझारू अजेय योद्धा निरूपित किया।  आपकी संघर्ष करने की क्षमता एंव शासन प्रशासन से अपनी मॉगे मागने वालों में अद्वितीय क्षमता का उल्लेख किया गया। इस अवसर पर दो मिनट का मौन धारण कर शर्मा की दिवंगत आत्मा को चिरशांन्ति प्रदान कर शोकाकुल परिवार को वह धैर्य, साहस एवं कर्तव्यपरायणता देने हेतु परमपिता परमात्मा से प्रार्थना की ताकि वे इस असहाय दु:ख को सहन करते हुए उनके शेष कर्तव्याें को पूर्ण कर सकें।

शोक सभा में मुख्य रूप से उपस्थित राघवेन्द्र सिंह तोमर, उमाशंकर शर्मा, एमएसनांगलीय, बीएल टुण्डेल, लक्ष्मीनारायण शर्मा, चिम्मन सिंह सिकरवार, भगवान सिंह तोमर, नरेश सिंह,दिनेश कुमार शर्मा, दौलत राम शर्मा, गजराज सिह, नरेन्द्र सिंह चौहान, आशारानी चौहान, उर्मिला शर्मा, मंजूजैन, चन्द्रकांता पाठक, राजकुमारी शर्मा, आशा पाराशर, अजय कुमार जैन, एस.के.एस. चौहान, रामेश्वर प्रशाद तिवारी, मुन्ना लाल शर्मा राममूर्ति शर्मा आदि।

 

कांग्रेस के जिला महामंत्री बने कुलदीप सिंह तोमर (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

कांग्रेस के जिला महामंत्री बने कुलदीप सिंह तोमर

मुरैना. केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया आर्शीदबाद  व म.प्र.युवा कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी की सहमति से गिर्राज डण्डोतिया जिला अध्यक्ष ग्रामीण युवा कांग्रेस ने कुलदीप सिह तोमर निवासी सिहोनिया को जिला कांग्रेस महामंत्री के पद पर मनोनीत किया गया है। तोमर कांग्रेस पार्टी में काफी समय से योगदान दे रहे है, तोमर ने अपनी नियुक्ति पर श्री सिंधिया, पटवारी, एवं डण्डौतिया का आभार किया है कुलदीप सिंह तोमर के इष्ट मित्रों ने जिला महामंत्री बनने पर उन्हे बधाई दी है।

 

बसपा छोडकर भाजपा में ली सदस्यता (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

बसपा छोडकर भाजपा में ली सदस्यता

बानमौर..बसपा नेता केदार सिंह कुशवाह एवं सुरेश कुशवाह ने किन्ही कारणों बस बसपा से नाता तोडलिया है। और उनकी इस घटना की जानकारी मिलते ही कुछ भाजपा नेता उनका पूर्व जिला अध्यक्ष  कालीचरण  कुशवाह के यहॉ ले पहुचे और उन्हेंनों ने सैकड़ो साथियों के साथ आन-फानन में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।  इस से कुछ उनके विरोधीयों में हडंकम्प मच गया श्री कुशवाह बानमोर के निवासी है। केदार सिंह कुशवाह एवं सुरेश कुशवाह के भाजपा में सदस्यता ग्रहण होने पर उनक ो बधाई दी है। बधाई देने वालों में पानसिंह, श्रीकृ ष्ण सिंह, अवतारसिंह, शियाराम सिंह, मुकेश सिंह, जहार सिंह, रघुवीर सिंह, नरेश सिंह आदि।

बिजली के अभाव में लघु उद्योग बंद होने की कगार पर (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

बिजली के अभाव में लघु उद्योग बंद होने की कगार पर

मुरैना.नगर मुरैना स्थित लघु एवं मध्यस्तर के उद्योग बिजली आपूर्ति के अभाव में बंद होने के कगार पर खड़े हुये है। आज-कल बिजली की आपूर्ति पूरी तर अनियमित हो गयी है। शासन द्वारा निधार्रित समयाअवधि में भी कभी विद्युत रख रखाव के नाम पर कभी मरम्मत के नाम पर विद्युत विभाग द्वारा बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। परिणाम तह 24 घंटे में मात्र 3-4 घंटे ही बिजली व मुश्किल तमाम मिल पाती है। इस सबंध में विद्युत मंण्डल मुरैना के सक्ष्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों से समय समय पर जब भी सम्पर्ककिया जाता है तो वे कोई संतोष जनक उत्तर न देकर  केवल यह कह कर टाल देते है कि ठीक करा रहे है। अनेक बार जिला प्रशासन, सभ्भागीय प्रशासन राज्य शासन, एवं शासन के वरिष्ट तम सभी मंत्रीयों के लिये पत्रचार, व निजी भेट की जा चुकी है किन्तु किसी भी स्तर से छोटे उद्योग कर्मियों को आज परिर्यत कोई राहत प्राप्त नही हो सकी है। ऐसी दशा में यह विचार्णीय प्रश्न है कि विधुत आपूर्ति के अभाव में यदि नगर के लघु एवं मध्यस्तर के उद्योगो को बंद करने की स्थिति निर्मित होती है तब इस  उद्योगों से रोजगार प्राप्त बैरोजगारियों कि जीवन यापन की व्यवस्था किस प्रकार सम्भव होगी। अत: समाचार पत्र के माध्य से शासन को इन उद्योग कर्मियों द्वारा यह चेतावनी दी गयी हौ कि यह विद्युत आपूर्ति निरंतर नही की जाती है तो उद्योगों के होने वाली हानि एवं उद्योगों से जुडे रोजगार प्राप्त उन व्यक्तियों द्वारा वे वेरोजगार होगे शासन के विरूद्ध हानि पहुचाने के लिये उचित कदम उठाया जावेगा।

औद्योगिक क्षेत्र मुरैना की छोटी ईकाईयां बन्द  होने के कगार पर

मुरैना..जिले में बिजली कटोती के चलते यहा पर व्यापारियों का काम पूर्ण से बंद होने के कगार पर है। पता नही बिजली कब चली जाये, कटौती तो होती है लेकिन कटौती के अलावा विद्युत सप्लाई के समय में बिघुत कटौती भी की जाती है। जब विघुत मंण्उलके अधिकारियों से लाइट के जाने के बारे में पूछा जाता है तो उनका जबाब होता है कि शहर में लाईन का तार टुटजाने से काम चलरहा है इसलिये लाईट बंद कर दी है।  मुख्य मंत्री ने उद्योगों के लिए निर्वाध विद्युत सप्लाई की घोषणा की थी परन्तु मुरैना के औद्यौगिक क्षेत्र में स्थापित सूक्ष्म औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाई जो एल टी से जुडे हुए है। प्रति दिन 6 घंटा रेगूलर कटौती व 1 से 3 घंटे तक अघोषित कटौती का सामना करना पढ़रहा है। इस कारण कुछ इकाईयां बन्द हो चुकी है व कुछ इकाईया बन्द होने की स्थिति में हैे शासन से अनुरोध है कि आद्योगिक क्षेत्र मुरैना में एक सब स्टेशन कायम कर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जावे।

 

 

 

 

शनिवार, 21 नवंबर 2009

दल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग

दल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग

सम्मानीय देशवासियों,

       आज की दल तंत्रीय राजनीति ने देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखना प्रश्नांकित कर दिया है। समूचे देश में चारों तरफ देश का विद्यटन हो रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी अपनी सत्ता और संप्रभुता स्थापित करने में लगा है। जिसके लिये वह आये दिन दलवाद, जातिवाद, लिंगवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, आर्थिक सम्पन्नता/विपन्नता वाद आदि अनेकानेक वादों का जहर फैलाकर अपने अपने तरीके से अपने लक्ष्य को पाने के लिये अमर्यादित आचरण कर रहा है।

यदि समय रहते जनतंत्र को बचाने का कोई कारगर उपचार नहीं हुआ तो देश से जंनतंत्र पूरी तरह मिट जावेगा। देश टुकड़े-टुकड़े हो जावेगा। आज का शोषित वर्ग और अधिक शोषित होगा तथा दल तंत्रीय राजनीति के पोषक, स्वंयभू बन जावेगें।

 

       अभियान का किसी दल से या दल के प्रत्याशी से कोई विरोध नहीं है अपितु दल तंत्रीय शासन प्रणाली से विरोध है। दल का प्रत्याशी कहने को जनप्रतिनिधि होता है किन्तु व्यवहारिक सत्य यह है कि वह जनप्रतिनिधि के नाम वास्तविक तौर पर वह अपने दल का प्रतिनिधि होता है। उसकी निष्ठा पूर्णत: अपने दल के प्रति होती है। दल का प्रत्याशी देश, देश के संविधान, देश की जनता या क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति कतई वफादार नहीं होता। वह केवल अपने दल के प्रति ही वफादार रहता है। लोकसभा या विधानसभा में प्रस्तुत विषयों पर वह अपने दल के हितों के अधीन अपना वोट देता है न कि जनहित में। इस प्रकार जनहित, दलीय राजनीति में नष्ट हो जाता है।

       दल का प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 173 (क) अंतर्गत बारम्बार यह शपथ लेता है कि वह विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण रखेगा। किन्तु व्यवहार में वह इस शपथ को भूल जाता है और दलीय दल-दल में उलझ जाता है।

इस सत्य का प्रमाण आये दिन सदन में सभी दलों द्वारा किये जा रहे आचरण से स्पष्ट प्रमाणित हो रहा है। कोई भी दल तथा उसके प्रतिनिधि स्परूप चुना गया प्रतिनिधि, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति न तो सच्ची श्रध्दा रखता है और न ही निष्ठा।

जनता द्वारा चुनें गये ये सभी जनप्रतिनिधि, भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण न रखकर, केवल अपने-अपने दल की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये भारत के संविधान तथा उसके अंतर्गत निर्मित एवं स्थापित विधि के विपरीत प्राय: अविधिक आचरण कर सदनों को आये दिन शर्मसार करते रहते है। सभी राजनीतिक दलों का यह आचरण, जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्र की महत्ता को प्रतिस्थापित करने की ओर अग्रसर होना इंगित करता है।

       जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप-प्रत्यारोप एक दल, दूसरे दल पर आये दिन लगाता रहता है किन्तु रिश्वत लेने व देने के लिये निर्मित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत अपेक्षित कार्यवाही करने या कराने की पहल किसी भी दल द्वारा नहीं की जाती है। राजनीतिक दलों का यह आचरण भारत की जनता को यह संदेश देता हैं कि कोई भी दल भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा नहीं रखता है और न ही संसद द्वारा बनाये गये किसी कानून के अनुपालन में उनकी स्वयं की कोई रूचि ही है।

       भारत देश में संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का शासन है जो देश के प्रत्येक राजनीतिक दल, दल के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं नागरिक पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से प्रभावी है। किन्तु आये दिन देखने में यह आ रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का पालन नहीं करना चाहता है तथा संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून को कानून मानने के लिये तैयार नहीं है।

प्रत्येक राजनीतिक दल स्वविचारित विचार को ही कानून की संज्ञा देकर, जनहित के नाम पर, अपने-अपने दलों की श्रेष्ठता व महत्ता को प्रतिष्ठित व प्रतिपादित करने के लिये आये दिन समूचे देश में हड़ताल, बाजार बंदी, चक्काजाम, तोड़-फोड़, लूटपाट, दंगाफसाद, धार्मिक उन्माद, बम विस्फोट आदि अनेकानेक भिन्न-भिन्न विद्यटनात्मक तथा हिंसात्मक तरीके अमल में लाते हुये राष्ट्रीय सम्पत्तियों को क्षति तथा देश की आम जनता को जन-धन की हानि पहुचाने जैसी गतिविधियों में संलग्न रहता है। दलबंदी के इस आचरण से देश में भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार और महगांई में आये दिन उत्तरोत्तर वृध्दि होती जा रही है। राजनीतिक दलों का यह आचरण जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्रीय राष्ट्र्र्र की स्थापना किये जाने का द्योतक है।

      इसलिये दलतंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान का दीप प्रज्वलित करना आज के समय की प्रासंगिकता है।

       दल तंत्र को भगाना और जनतंत्र को बचाना हमारे अभियान का लक्ष्य है। लक्ष्य प्राप्ति के चार कारक है 1. निष्ठा 2. श्रम 3. कर्म 4. साधना। यदि आप देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत है और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु संकल्पित, देश पर अपनी जान न्यौछावर करने हेतु तत्पर, किसी भी प्रकार के लालच से परे, निष्ठा के धनी, श्रम को समर्पित, कर्म के पुजारी और साधना के साधक है तो इस अभियान को गति प्रदान करने में अपना योगदान दे सकते है।

      दलतंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओं अभियान के दीप - प्रज्जवन का प्रथम चरण, हमारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुरैना विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना था। इस कार्य के लिये हमें किसी भी प्रकार के धनबल व बाहुबल की कतई दरकार नहीं रही। हमने सिर्फ मतदाता के जनमत समर्थन को शीर्ष प्राथमिकता दी। हम यह अच्छी तरह जानते है कि दलतंत्र का खात्मा धनबल या बाहुबल से नहीं किया जा सकता है। दल तंत्र का खात्मा केवल जनमत से ही हो सकता है।

भारत देश के वासियों एवं मतदाताओं से अभियान की यह अपील है कि दलतंत्र को भगाकर जनतंत्र को बचाने के लिये भारत का प्रत्येक मतदाता भावी चुनावों (लोकसभा/विधानसभा/स्थानीय संस्थाओं के चुनाव) में अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट दलों के किसी भी प्रत्याशी को न देकर केवल निर्दलीय प्रत्याशियों को ही अपना वोट दे। एवं दल तंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान को सफल बनाने में अपनी महती  भूमिका निर्वहन करें।

 

     अपीलार्थी

   गोपाल दास गर्ग

      संयोजक

                               दलतंत्र भगाओ- जनतंत्र बचाओ अभियान

                                       गणेशपुरा, मुरैना म0प्र

07532-227836

 

पॉलिमर के करंसी नोट

पॉलिमर के करंसी नोट

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

लोक सभा

        

       सरकार ने बैंक नोटों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रायोगिक आधार पर 10 रूपए के 1 अरब पॉलिमर नोट जारी करने की घोषणा की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रायोगिक आधार पर यह पॉलिमर के नोट चलाने की पहल की है। शुरू में  10 रूपए के नोट ही मॉलिमर के होंगे क्योंकि दस रूपए के नोटों में नकली नोटों की आशंका बहुत कम है।

 

       यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीणा ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में दी ।

 

पकड़े गये जाली नोटों की संख्‍या

पकड़े गये जाली नोटों की संख्‍या

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

लोकसभा

 

       वित्त राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीना ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को आज सूचित किया कि मुद्रा प्रबंधन के गतिशील तत्त्वों का अध्ययन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 1988 में नाइक समिति गठित की गई थी। समिति ने नकली नोटों के बारे में कोई अध्ययन नहीं किया।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत की गई सूचना के अनुसार विगत तीन वर्षों के दौरान बरामद किए गए और जब्त किए गए जाली करेंसी नोटों की कुल संख्या निम्नलिखित है-

 

वर्ष

 

मूल्यवर्ग

 

 

1000 रुपये

 

500 रुपये

 

100 रुपये

 

50 रुपये

 

20 रुपये

 

10 रुपये

 

2006

 

19,606

 

81,399

 

2,20,419

 

30,570

 

1,392

 

3,653

 

2007

 

21,130

 

1,22,858

 

2,23,505

 

19,778

 

834

 

349

 

2008

 

59,631

 

3,49,380

 

2,20,233

 

31,257

 

604

 

269

 

2009

(30.9.09)

28,916

 

1,64,252

 

1,25,856

 

10,370

 

438

 

149

 

 

       भारतीय रिजर्व बैंक ने सूचित कि है किया बैंक-वार और स्थान-वार अभियोजन और दोषसिध्दि की सूचना का रिकार्ड नहीं रखा जाता। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने बताया कि उनके पास भी इस प्रकार की सूचना उपलब्ध नहीं है।

 

       देश में नकली भारतीय करेंसी नोटों के परिचालन को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों में नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल और सीमा शुल्क प्राधिकारियों द्वारा सतर्कता बढाना, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सुरक्षा विशेषताओं संबंधी सूचना का प्रसार करना और बैंकों के सभी प्रधान कार्यालयों में नकली नोट सतर्कता प्रकोष्ठों की स्थापना करना शामिल हैं। नकली नोट बनाना बहुत मुश्किल करने के लिए 2005 में बैंक नोटों में अतिरिक्त सुरक्षा विशेषताओं को शामिल किया गया है। बैंक नोटों की सुरक्षा को और सुदृढ बनाने के लिए नवीनतम सुरक्षा विशेषताओं के समावेशन की प्रक्रिया चल रही है। नकली भारतीय करेंसी नोटों के परिचालन की मानीटरी करने और उनका परिचालन रोकने के लिए केन्द्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है जिसमें केन्द्रीय एजेंसियों के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। राज्यों में भी इसी तरह के निकाय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, भारत सरकार ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नकली करेंसी नोटों के मामलों की जांच-पड़ताल की मानीटरी करने के लिए एक नोडल एजेंसी के तौर पर नामजद किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने नकली नोटों का पता लगाने के तंत्र को भी सुदृढ क़िया है।