शुक्रवार, 19 मार्च 2010

मर्ग जांच बाद दहेज हत्या का मामला कायम

मर्ग जांच बाद दहेज हत्या का मामला कायम

मुरैना..बागचीन थाना पुलिस ने क युवती की हुई संदिग्ध मौत को मर्ग जांच बाद दहेज हत्या में तब्दील कर दिया पुलिस ने मृतका के ससुरालजनों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला कायम कर लिया है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम कुम्हेरी निवासी श्रीमती महेश्वरी पत्नी भरत शाक्य उम्र 27 साल को उसके ससुराल वालो ने दहेज की मांग पुर्ति न होने पर मारडाला घटना 11 बक्टूवर 09 की है । पुलिस ने युवती की मौत बाद मग्र कायम किया मर्ग जांच में पुलिस ने पाया कि युवती को उसके ससुरालजनों ने दहेज की मांग को लेकर सताया था। पुलिस ने मौत के लिये आरोपी भरत शाक्य,रमेश,मनोज,फूलवती, गुड्डे शाक्य को जिम्मेदार मानते हुए धारा 304वी 498ए तथा 3,4 दहेज एक्ट का मामला कायम कर लिया है।

 

कार की टक्कर से एक घायल

कार की टक्कर से एक घायल

मुरैना..बामौर में गत दिवस  श्रीराम कालेज के सामने ए वी रोड पर सेंन्ट्रों कार चालक ने लापरवाही से चलाकर एक युवक को टककर मार कर घायल कर दिया घायल रवी कांत शर्मा गोपाल पुरा मुरैना का रहने वाल है। पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर कार क्रमांक एमपी06 सीए 0587 के लापरवाह चालक के खिलाफ धारा 279,337 ,338 का मामला कायम कर लिया है।

 

रंजिश्न युवक को गोली मारी ..हत्या का प्रयास व बलबा का मामला कायम

रंजिश्न  युवक को  गोली मारी ..हत्या का प्रयास व बलबा का मामला कायम

मुरैना..जिले के सरायछोला थाना क्षेत्र के ग्राम कषाना का पुरा में गत दिवस जान से मारने के इरादे से एक युवक को गेली   मारी गई मगर वह वाल वाल बच गया पुलिस ने नामजद हमलवरों के खिलफ मामला कायम कर लिया है।

पुलिस सूत्रो ंसे मिली जानकारी के अनुसार पुरानी रंजिश के लेकर हुए झगडे में हमलावरों ने योगेन्द्र गुर्जर निवासी कषाने का पुरा को घ्ेर कर जान से मारने की नियत से बंदूक से  गोली मारी जो फरियादी के सिर से होकर गुजर गई हमलावरों ने मारपीट कर योगेन्द्र को जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर आरोपी सुरेन्द्र ,समोखन ,रांणाजीत गुर्जर निवासी गौरखा अचल सिंह ,करूआ,गुर्जर हाथी खाना धौलपुर के खिलाफ धारा 307, तथा बलबा की धाराओं के तहत मामला कायम कर लिया है।मुरैना शहर के गोपाल पुरा क्षेत्र में गत दिवस आरोपी कप्तान , कल्लू, श्रीकंात, आउि ने एक रायहोकर मुंशीलाल नामक युवक की मारपीट कर चोट पहुंचाइ र्आैर जानसे मारने की धमकी दी शहर कोतवाली पुलिसने हमलावरों के खिलाफ धारा 323,294 ,506 वी का मामला कायम कर लिया है।

 

नरेन्द्र सिंह एवं प्रभात झा की ग्वा. से श्योपुर तक छोटी लाइन से धन्यवाद यात्रा आज

नरेन्द्र सिंह एवं प्रभात झा की ग्वा. से श्योपुर तक छोटी लाइन से धन्यवाद यात्रा आज

मुरैना एवं श्येपुर जिले के भाजपा कार्यकर्ता करेंगे भव्य स्वागत

मुरैना.. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाअध्यक्ष व मुरैना-श्योपुर लोकसभा के लोकप्रिय सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर व राज्यसभा सांसद माननीय प्रभात झा 19  मार्च 2010 को छोटी लाइन को बडी रेल लाइन में परिवर्तित किये जाने पर जनता को बधाई देने के लिये छोटी रेल लाइन से ग्वालियर से श्योपुर तक की यात्रा करेंगें।

भाजपा कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जिला मिडिया प्रभारी नीरज सिंह भदौरिया ने बताया कि लोकसभा  चुनाव पर सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर ने आमजनता से बादा किया  कि  अगर वे सांसद बने तो छोटी रेल लाइन को बड़ी लाइन में बदलवाने का वह पूरा प्रयास करेंगें। और जनता से किये हुये वादे को आवश्य पूरा करेंगें। और उन्होंने अपना वादा निभाया। लम्बे समय से जनता की मांग पूरी होने जा रही है। अपने क्षेत्र के सांसद ने आपके बल पर प्रयास किया और सफलता मिली अब ग्यालियर से श्योपुर की छोटी लाइन बड़ी लाइन में परिवर्तित होगी और कोटा तक उसका विस्तार होगा। मुरैना सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर व राज्य सभा सांसद श्री प्रभात झा 19 मार्च 2010 को छोटी रेल लाइन से आमजनता को बधाई देने पधार रहें हैं।

यात्रा सुबह 6.25 मिनट पर ग्वालियर रेल्वे स्टेशन से प्रारंभ होगी, ग्वालियर से होते हुये घोसीपुरा 6.45 मिनट मोती झील 7.6 मिनट से होती हुयी 7.25 मिनट पर मुरैना जिले में प्रवेश कर मिलावली स्टेशन पर पहूचेंगी, वहाँ पर जिले के सभी कार्यकर्ता यात्रा का भव्य स्वागत करेंगें। वहा से होते हुये बानमोर,सुमावली, थरा, सिकरोदा, भटपुरा, कैलारस,पीपल वाली चौकी, सबलगढ, रामपहाडी, विजयपुर रोड, कैमरकला, वीरपुर, सिलीपुर, इकडोरी, ताराकलां, सेरोनी, खेजीपुर, दुर्गापुरी, गिरधर, दातरदा, श्योपुर, 4.25 मिनट पर पहुचेगी। सभी स्टेशनों पर यात्रा का जगह-जगह आमकर्ताओं व जनता द्वारा भव्य स्वागत किया जावेगा।

 

गुरुवार, 18 मार्च 2010

मुरैना तेल माफिया का चक्रव्‍यूह अभी बरकरार, पंजाब के किसानों को पकड़ कर बंद कराया

मुरैना तेल माफिया का चक्रव्‍यूह अभी बरकरार, पंजाब के किसानों को पकड़ कर बंद कराया

सी.बी.आई. दस्‍ते मुरेना पहुँचने की खबर से हड़कम्‍प

मुरैना 18 मार्च 10, कल अचानक तेल माफिया के काला बाजार नेटवर्क ने एक और तगड़ा काण्‍ड कर डाला । लम्‍बे समय से चम्‍बल के किसानों का एकक्षत्र शोषण का रहे तेल माफिया नेटवर्क के लोगों द्वारा बाहर से चम्‍बल के किसानों से गॉंव गॉंव जाकर सरसों की खरीद फरोख्‍त करने वाले 28 किसानों को मुरैना के तेल माफिया की पालतू मण्‍डी नेटवर्क ने न केवल अवैध रूप से पकड़ लिया बल्कि पुलिस के हवाले कर दिया , साथ ही तकरीबन 700 क्विंटल सरसों और लाखों रूपये भी उनसे छीन लिये ।

पुलिस ने किसानों पर कोई आपराधिक मामला बनते न देख हाथ खड़े कर दिये और आनन फानन में मामले को शान्ति भंग का मामला बना कर धारा 151 में बंद कर के मामले की खानापूर्ति कर दी ।

गौर तलब है कि तेल माफिया में मुरैना जिला की मण्डियों समेत कई व्‍यापारीयों के साथ मिलकर एक आपराधिक गिरोह नुमा नेटवर्क बना रखी है जो कि चम्‍बल के किसानों से न केवल दवाब डालकर उद्दीपन के जरिये कम दामों पर अपनी फसल बेच कर जाने को मजबूर करते हैं बल्कि उनसे भारी कमीशन और रिश्‍वत भी जबरन वसूलते हैं अन्‍यथा दूर दूर से माल बेचने आये किसान हफ्तों तक पड़े रहते हैं उनका माल न तो खरीदा जाता है उल्‍टे कई तरह से उन लोगों को तंग भी किया जाता है ।

किसानों के शोषण और चम्‍बल के पीले सोने में को कारोबार के दाग का सरगना के.एस. आयल्‍स समूह हालांकि पतन और बर्बादी के हत्‍थे चढ़ चुका है लेकिन उसकी जमी जमाई नेटवर्क अभी ज्‍यों की त्‍यों है जिसमें जिले की मण्डियां और कई व्‍यापारी एवं आढ़तिये शामिल है ।

सी.बी.आई. के दस्‍ते की खबर से हड़कम्‍प मचा

हालांकि पंजाब के पकड़े गये किसानों को भले ही धारा 151 लगा कर हाल फिलहाल भले ही बंद कर दिया हो लेकिन उनकी 700 क्विंटल सरसों और लाखों रूपये कहॉं गये यह अभी रहस्‍य में है । मण्‍डी की भूमिका पर काफी प्रश्‍नचिह्न एवं आरोप खड़े हो गये हैं । वहीं आज सुबह हवा उड़ी कि पंजाब के किसान सी.बी.आई. की नेशनल नेटवर्क के सदस्‍य हैं और सी.बी.आई. की तेल माफिया के खिलाफ सी.बी.आई. द्वारा की जा रही विशेष खुफिया पड़ताल में यह सदस्‍य किसान व्‍यापारी बनकर चम्‍बल के गॉंवों में हाल और हालात टटोल कर सरसों के पीले सोने के छिपे काले कारोबार के सुराग ढूंढने में लगे थे और बदकिस्‍मती तेल माफिया के नेटवर्क में शामिल मण्‍डीयों और व्‍यापारीयों की यह रही कि सी.बी.आई. के गुप्‍त दस्‍ते के इन सदस्‍यों को ही धर दबोचा । और भ्रष्‍टाचार तथा गड़गड़ी के सारे रंग भी जम कर व खुल कर दिखा डाले ।

सी.बी.आई. का विशेष दस्‍ता होने की खबर से जहॉं अफसरों की हवाईयां उड़ रहीं थीं तभी अचानक खबर आयी कि एक और नेशनल नेटवर्क का ही अगला गुप्‍त दस्‍ता भी आज रात चम्‍बल में पहुँच गया है । सी.बी.आई के दस्‍ते की खबर की हकीकत चाहे कुछ भी हो , भ्रष्‍ट व चोरों में भारी खौफ , दहशत व आतंक के चित्र उनके चेहरे पर साफ नजर आते हैं ।     

 

बुधवार, 17 मार्च 2010

भारी बिजली कटौती के कारण अपडेट नहीं : आलेख श्रंखला जारी रहेगी

भारी बिजली कटौती के कारण अपडेट नहीं : आलेख श्रंखला जारी रहेगी

हमें खेद है मुरैना में चल रही भारी बिजली कटौती के कारण समाचारों एवं आलेखों के अपडेट समय पर नहीं हो पा रहे हैं , पूरे दिन भर सुबह 6 बजे से देर रात्रि 11 बजे तक की जा रही बिजली कटौती के कारण चालू श्रंखलाबद्ध आलेख '' के.एस. आयल्‍स बनाम रमेश चन्‍द्र गर्ग खाकशाह से भामाशाह और शहंशाह तक का सफर '' की अगली किश्‍त प्रकाशित नहीं की जा पा रही है , सुचारू बिजली प्राप्‍त होने पर यह श्रंखला जारी रहेगी और प्रकाशित की जायेगी, इसी प्रकार नवरात्रि पर्व से संबंधित आलेखों का प्रकाशन भी किया जा सकेगा ।  

रविवार, 14 मार्च 2010

के.एस. आयल्‍स बनाम रमेश चन्‍द्र गर्ग : खाकशाह से भामाशाह और शहंशाह तक का सफर -2

के.एस. आयल्‍स बनाम रमेश चन्‍द्र गर्ग : खाकशाह से भामाशाह और शहंशाह तक का सफर -2

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

कुतवार के बनिये बेहद समृद्धि शाली थे पहले बैंक वगैरह नहीं होतीं थी सो अधिकतर लोग अपना माल जमीन में तहखाने खोद कर जिन्‍हें अक्‍सर गॉंवों में खौंह कहा जाता है में बड़े बक्‍सों, घड़ों , कलसों, तम्‍हेडि़यों  जैसी चीजों में या सीधे ही नांद या चपटों में जमीन में गाड़ का दबा कर रखते थे । भय व आतंक से भागे बनियों के मालमत्‍ते केवल कुतवार ही नहीं बल्कि अधिकांश गॉंवों में रह गये । कुतवार पर मुझे रिसर्च का मौका मिला । बनियों की खाली पड़ी हवेलियों और दूकानों पर आसपास रहने वाले तथा इधर उधर से रिश्‍तेदारों आदि को बुला कर काछीयों ने कब्‍जे कर लिये । बमुश्किल अपवाद स्‍वरूप दीगर जाति का एकाध आदमी ही बनियों के खाली पड़े मकानों तक पहुँचा । बनियों की खेती की जमीनों पर भी काछीयों का कब्‍जा हो गाया । बनिये सब जान कर भी चुप रहे और यही सोचते रहे कि चलो इस बहाने मकानों दूकानों की देख रेख साफ सफाई भी होती रही , ठौर सुरक्षित रहेगा तथा शान्ति आने पर वापस लौट जायेंगे । और दबे माल की जानकारी काछीयों को तो है नहीं सो वो भी सुरक्षित रहेगा ।

बची खुची पुंजी जो वे साथ लेकर आ सकते थे यानि कैश इन हैण्‍ड के साथ में मुरैना या अन्‍य कस्बों, अम्‍बाह पोरसा सबलगढ़, पहाड़गढ़, बामौर, जौरा, कैलारस जैसी जगह थोड़ी बहुत जमीन मकान लेकर या मकान आदि बनवा कर छोटे छोटे काम धंधे और व्‍यवसाय प्रारंभ कर दिये साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शांति का इंतजार करते रहे ।

चम्‍बल में दिक्‍कत ये थी कि एक डकैत या बागी गिरोह से छुटकारा मिलता और दूसरा पैदा हो जाता । बनिये सब्र धारण कर कभी अपने अपने क्षेत्र में साहूकार, सेठ जी, नगर सेठ, जमीन्‍दार, जागीरदार, वसूलीदार, चौधरी आदि नामों से जाने जाने वाले लोग जिन्‍होंने प्रतिष्‍ठा और वैभव की जो दुनियां देख रखी थी और समृद्धि का उनका जो इतिहास था उन्‍हें बार बार याद आता । लेकिन भारी कष्‍ट आर्थिक विपन्‍नता और तंगहाली झेल कर भी बनिये महज आस पर जिन्‍दा बने रहे हालांकि कई बनिये पागल भी हो गये, और अपना छोटे मोटे कारोबार के साथ ही अपना और परिवार का पेट पालते रहे ।

इधर ये होता रहा उधर उनके मकानों पर काबिज हुये काछीयों ने उनके खजानों की सुगन्‍ध पा ली और धीरे धीरे कुतवार में काछीयों ने खोज खोज कर खुदायी शुरू की । और बनियों के खजाने काछीयों के हाथ लगते गये , काछी मालदार होते चले गये, अब तो शायद ही कुछ जगह मात्र बची हैं जहॉं अभी माल शेष बचा रह गया है और वह जगह भी केचल उन्‍हीं बनियों को या उनके बच्‍चों को ही मालुम है । अब क्षेत्र में डाकूओं और बागीयो का आतंक नहीं रहा , शान्ति है बनिये इस बीच में जा जा कर थोड़ा बहुत माल गुप्‍त रूप से निकाल कर लाते भी रहे , लेकिन उनका अधिकांश माल काछीयों ने ही निकाल लिया ।

बात दबे खजाने की है अत: कई झगड़े विवादों के बावजूद भी दोनों में से एक भी पक्ष पुलिस या सरकार के पास नहीं गया । मुझे कुछ बनिये अपने घर ले गये और मुझे काछीयों द्वारा खुदायी के चिह्न व सुरंगें दिखाईं । मजे की बात ये रही कि दोनों ही पक्ष स खजाने के लिये जो कि बनियों का खुद का पैतृक और काछीयों लिये छप्‍पर फाड़ के आ टपकने वाला था जम कर तंत्र मंत्र यंत्र और पूजा पाठ कराते रहे ।

बनियों के काफी दौलतखाने यूं ही बेआवाज लुट गये ।

तब उधर सन 1972 में माधौ सिंह मोहर सिंह, माखन सिंह आदि के गिरोहों के ऐतिहासिक समर्पण के बाद एक तरफ मंहगायी ने सिर चढ़कर भन्‍नाना शुरू किया उधर शहरों कस्‍बों विशेष  कर जिला मुख्‍यालय मुरैना पर बनियों ने ही राजनीति व नेतागिरी का दामन भी व्‍यवसाय के साथ संभाल लिया ।

उधर नहर आने के बाद हालांकि जिले में सरसों तथा अन्‍य फसलों एएवं गन्‍ना आदि की पैदावार तो शुरू हो चुकी थी लेकिन वह फिर भी बहुत कम थी तथा उतनी नहीं होती थी, ऊपर से चकबन्‍दी, नसबन्‍दी, मंहगायी, लेव्‍ही आदि से गॉवों और शहरों में भारी खौफ था । शहरों और गॉंवों में लोग डरे और दुबके रहते थे तथा किसी भी सरकारी आदमी को या सरकारी टीम को देख कर शहर गॉंव छोड़ कर भाग जाते थे । शक्‍कर उस समय बेहद मंहगी हो गयी थी शक्‍कर का दाम उस समय 8 स्‍पये किलो पर पहुंच गया था उधर देश में आपातकाल लागू कर दिया गया था । जरा सा भी विरोध करने वाले को जेल में ठूंस दिया जाता था, मीसा में बन्‍द कर उसका खीसा निपोर दिया जाता था यह भी पता नहीं लगता था कि कहॉ की किस जेल में बन्‍द है , मर गया या अभी तक जिन्‍दा है ।

चारों ओर दहशत ही दहशत और खौफ का मंजर था । उधर उसी समय नब्‍बा कुम्‍हार चम्‍बल में फरार हो गया नब्‍बा डाकू या नब्‍बा बागी बनियों का बहुत बड़ा दुश्‍मन था और बनियों में उसेकी भारी दहशत और खौफ था । उसने जींगनी मुरैना के एक बम्‍बे के पास एक यात्री बस को गोलीयां चला कर रोकने की कोशिश की लेकिन ड्रायवर ने गाड़ी भगाने की कोशिश की संकरी ऊबड़ खाबड़ सड़क, कण्‍डम डिब्‍बा सरकारी बस ने अधिक साथ नहीं दिया , कण्‍डक्‍टर को गोली लग गई , ड्रायवर को गाड़ी रोकनी पड़ी और नब्‍बा यात्रीयों की पकड़ कर के सफलता पूर्वक पहले क्‍वारी नदी के और फिर चम्‍बल के बीहड़ों में गुम हो गया ।

लोग खेतों में उर्वरकों के प्रयोग से दहशत खाते थे और अपने खुद के घूरे की ही खाद खेतों में देते थे । लोगों के पास नहर होने के बावजूद उसमें से पानी लेने का कोई साधन नहीं था , सिंचाई अधिकारी और सरकार किसानों के लिये नहरों पर कुलावे मंजूर नहीं करते थे, एक कुलावा बनवाने के लिये बहुत बड़ी सिफारिशों की जरूरत होती थी जो किसानों के पास नहीं होती थी, भ्रष्‍टाचार व रिश्‍वत उन दिनों अधिक नहीं था , किसानों के पास पैसे ही नहीं होते थे सरकारी अफसरों की तनख्‍वाहें भी अधिकांशत: तीन सौ या पॉंच सौ रूपये मात्र होतीं थीं जिसमें महीना भर घर चलाने के लाले पड़े रहते थे फिर बाबूओं की दशा तो और भी ज्‍यादा खराब थी । इसके बावजूद लोग न रिश्‍वत लेते थे न भ्रष्‍टाचार करते थे क्‍योंकि किसी के पास कुछ भी लेने देने को था ही नहीं ।

मरल में मिलावट उन दिनों नहीं की जाती थी, देशी घी जो कि चम्‍बल का बहुत मशहूर रहा है या फिर तेल हो या बूरा या अन्‍य कुछ एकदम शुद्ध और स्‍वच्‍छ मिलता था , घी रई का बहुत मशहूर और तेल कच्‍ची घानी का , दोनों ही बहुतायत से उपलग्‍ध और मारे मारे फिरते थे देशी घी का दाम पहले चार रूपये किलो था जो मंहगाई आने पर छ: स्‍पये किलो हो गया था इसके बावजूद एकदम शुद्ध मिलता था अज्ञेर मारा मारा फिरता था । दरअसल असल माल ही सड़ता रहता था उसी का कोई खरीददार नहीं होता था तो फिर मिलावट करनी ही नहीं पड़ती थी । शुद्ध माल और कम कीमत के माल के लिये चम्‍बल देश भर में विख्‍यात रही इसका फल ये मिला कि यहॉं का माल धीरे धीरे बाहर सप्‍लाई होने लगा आयात निर्यात के शुरू होते ही चम्‍बल की तकदीर के बदलाव का फिर एक नया अध्‍याय शुरू हुआ । लेकिन तब भी बनियों को माल खरीदने के लिये गॉंव गॉव किसानों के घर घर जाना पड़ता था यह काम उन गॉंवों में या आसपास के गॉवों में शेष बचे बनिये अपने आसपास के गॉंवों से माल इकठ्ठा कर शहर के बनियों को पहुंचाते थे और बीच में कमीशन या दलाली या आढ़त निकाल कर खाते थे , इससे स्‍थानीय ग्रामीण बनियों और शहर के बनियों दोनों को ही माल व धन्‍धा मिल जाता था, और किसानों को नकद पैसा । इन आढ़त निकाल कर खाने वाले बनियों को समय रहते आढ़तिये कहा जाने लगा । आढ़तियों ने बेशक चम्‍बल में ब्रिगड़ी ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को धीरे धीरे पटरी पर लाना शुरू किया । लेकिन बाद में इसी दलाली ने बहुत खतरनाक रूप धारण कर किसानों का जम कर शोषण भी किया ।

आढ़तियों की माल आवक से कुछ व्‍यापारी पैदा हो गये और आयात निर्यात से मोटा माल बनाने लगे, सेठ फिर पैदा हुये गद्दियां फिर कायम होने लगीं । मुरैना में जीवाजी गंज जहॉं बड़े बनिये रहते थे और काफी खुला मैदान था मण्‍डी में तब्‍दील हो गया और अनाज या दाल दलहन के लिये खरीद फरोख्‍त की मण्‍डी के रूप में विकसित हो गया । किसाानों को जब ये राज मालुम हुआ कि आढ़तिया उन्‍हें कम पैसा देता है और मण्‍डी में बनियों को सीधा माल बेचने पर अधिक पैसा मिलता है तो वे अपना माल लाद कर सीधे मण्‍डी पहुँचने लगे और मुनाफा कमाने लगे । मण्‍डी ने भी विशाल रूप धारण किया और दो अलग अलग ब्‍लाक बन गये सिकरवारी के बनिये सिकरवारी ब्‍लाक और तोमरघार के बनिये तंवरघारी ब्‍लाक में क्षेत्रवार माल लगवा कर खरीदने लगे । उधर किसानों ने धीरे धीरे अंग्रेजी खाद यानि उर्वरकों का प्रयोग शुरू करने की कोशिश की पहले रेखड़ा आजमाया गया , यूरिया को लेकर अंचल में काफी अफवाहें थीं और किसान यूरिया का प्रयोग करने से भारी डरते थे । लोगों का कहना था कि यूरिया एक बार जिस खेत में डल गया उस खेत को खत्‍म ही समझों उसमें फिर गोबर घूरे की खाद कोई असर नहीं करती और हर बार यूरिया ही डालना पड़ेगा । अत: क्षेत्र में यूरिया का प्रयोग काफी विलम्‍ब से शुरू हुआ , लेकिन कुछ तब के आधुनिक प्रयोगधर्मी किसानों ने हिम्‍मत दिखाई और खेतों में यूरिया डाला । फसल कई गुना अधिक और कई गुना फायदा देख यूरिया का प्रचलन अंचल में धीरे धीरे शुरू हुआ ।

मुरैना में एक बड़ा सरसों के तेल का करखाना लग गया और राठी इण्‍डस्‍ट्रीज के नाम से इस तेल कारखाने ने क्षेत्र के सरसों उत्‍पादकों को कई हौसले दिये । राठी परिवार का तेल उद्योग जहॉं काफी विख्‍यात और चमबल को नयी जीवनरेखा देने वाला था वहीं राठी परिवार की पहचान भी नगर सेठ के रूप में हो गयी । और राठी नाम चम्‍बल में चारों ओर गूंजने लगा , राठी परिवार पर भी काफी अनाप शनाप दौलत आने लगी । लेकिन राठी परिवार ने पैसा कमा कर भी मुरैना के तेल का नाम देश भर में विख्‍यात कर दिया, राठी तेल उद्योग में तेल में मिलावट नहीं की जाती थी, न व्‍यवसाय बढ़ाने के औने पौने औछ हथकण्‍डे इस्‍तेमाल किये जाते थे । न उस समय बिजनिस एक्‍जीक्‍यूटिव्‍हज या एम.बी.ए. प्रोफेशनल होते थे । लेकिन एकदम शुद्ध व गुणवत्‍ता युक्‍त आधुनिक मशीनों और बड़ी मशीनों से बड़े स्‍तर पर बृहद तेल उत्‍पादन के इस कारखाने ने मुरैना के तेल की धाक देश भर में बुलवा दी और अपना सिक्‍का मनवा लिया ।

मुरैना के सरसों उत्‍पादन को नया जीवन और नया बल मिला सरसों काफी फायदेमंद खेती बन गई मुरैना पूरे देश को तेल पिलाने लगा । तब तक के.एस. आयल इण्‍डस्‍ट्रीज जैसी इकाईयों का कोई वजूद व वर्चस्‍व नहीं था ।

राठी परिवार को तेल से मालामाल होते देख जहॉं कई बनियों की महात्‍वाकांक्षायें जागने लगीं वहीं कई बनिये राठी परिवार के लिये अपने अपने घरों, गोदामों, प्रतिष्‍ठानों में स्‍पेलर्स लगा कर तेल पेर कर रेडीमेड तेल कारखाने को सप्‍लाई करने लगे । माल की बढ़ती मांग और अधिक खपत तथा पूर्ति में कमी के मद्दे नजर राठी तेल उद्योग अपने कारखाने में पैदा हुये तेल के साथ अन्‍य बनियों द्वारा प्रदत्‍त तेल के साथ मिला कर पैकिंग करवा कर बाहर भिजवाने लगा । इस तरह तेल उत्‍पादन की कई छोटी मोटी दो नंबर की कई गुप्‍त यूनिटें शहर व कस्‍बों में पैदा हो गयी । एक समय के नामी गिरामी इस तेल उद्योग के सामने समस्‍याओं व कठिनाईयों का दौर उस वक्‍त प्रारंभ हुआ जब प्रतिद्वंद्विता में कल्‍लूमल सांवलदास यानि के.एस. परिवार के ओमप्रकाश गर्ग और रमेशचन्‍द्र गर्ग ने एक फर्म कायम कर प्रतिद्वंद्वी तेल व्‍यवसायी के रूप में काम करना शुरू किया ।

पहले महज एक छोटी सी फर्म के रूप में काम प्रारंभ करने वाले ओमप्रकाश गर्ग आसैर रमेश चन्‍द्र गग्र की इस टीम ने समानान्‍तर तेल व्‍यवसाय व उत्‍पादन को जन्‍म देकर हालांकि एक नया आगाज किया लेकिन यह फर्म शुरूआत में कुछ खास थी ही नहीं अव्‍वल तो फर्म के पास पूंजी की कमी थी और दूसरे नामवरी की कमी । लेकिन मुरैना के तेल व्‍यवसाय ने इसी फर्म के जन्‍म के साथ एक नया टर्न लिया हालांकि राठी परिवार को शुरू में इस खतरे का आभास तक नहीं हुआ लेकिन बाद में उसे इस नजर अंदाजी का न केवल तगड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा बल्कि राठी तेल उद्योग भी पूरी तरह खत्‍म और चौपट हो गया ।

क्रमश: जारी