रविवार, 7 फ़रवरी 2010

अ.भा. महौर ग्वारै वैश्य एकादश सामूहिक विवाह सम्मेलन अम्बाह में

अ.भा. महौर ग्वारै वैश्य एकादश सामूहिक विवाह सम्मेलन अम्बाह में

मुरैना...अखिल भारतीय महौर ग्वारै वैश्य एकादश सामूहिक विवाह सम्मेलन पहली बार अम्बरीश नगरी अम्बाह तहसील में आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन भारत माता के सपूत समाज के गौरव डा. भगवानदास महौर झांसी का शेर को सर्पित रूप में किया हैं। एक दिवसीय सम्मेलन में 16 फरवरी 2010 मंगलवार को अम्बाह में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि गिरीश संघी साांसद अध्यक्ष अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन में पधार रहे है। साथ ही विशिष्ट अतिथि मध्यप्रदेश के गृहमंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता एवं मुरैना जिले के प्रभारी सामान्य प्रशासन मंत्री केएल अग्रवाल एवं श्रीमती कृष्णकांता तोमर अध्यक्षता राज्य महिला आयोग रहेंगी। विशिष्ट अतिथि श्री एसडी अग्रवाल कमिश्नर चंम्बल संभाग एवं एम के अग्रवाल कलेकटर मुरैना समीक्षा गुप्ता महापौर नगर निगम ग्वालियर, रामसेवक गुप्ता चेयरमेनव्यवसायिक एवं औद्योगिक बैंक मुरैना इस सामुहिक विवाह के संयोजक विजय गुप्ता अंम्बाह एवं रघुवर दयाल बादिल पोरसा, समाज के अध्यक्ष मोहनचंद बांदिल एडवोकेट महामंत्री रामसेवक गुप्ता एडवोकेट कार्यकारी प्रभारी सामूहिक विवाह हरीशंकर गांगिल नगर मंत्री अम्बाह राकेश चांदिल आदि पदाधिकारी ने सामूहिक विवाह में अधिक से अधिक संख्या में समाज बंधुओं को आने का सपरिवार आमंत्रण दिया है। इस सामूहिक विवाह में देश के विभिन्न हिस्सों से जिसमें दिल्ली, भोपाल, लखनऊ, जयपुर, बनारस, अजमेर, अन्य विभिन्न प्रांतो से लगभग 15 से 20 हजार की संख्या में समाज बंधु आने की पूरी पूरी संभावना हैं। इस सामूहिक विवाह में 25 जोडे अपने दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करेंगे। जिसमें एक जोड़ा अग्रवाल समाज को व तीन नवबधुए माथुर समाज की सम्मिलित होंगी।

 

पॉच-पॉच हजार का इनाम घोषित

पॉच-पॉच हजार का इनाम घोषित

मुरैना. थाना बानमोर जिला मुरैना के अपराध क्रमांक 11,10 धारा 307,147,148,149, ता.हि.25,27 आर.ए. एमपीडीके ए फरार आरोपीगण जोगेन्द्र सिंह पुत्र जबर सिंह गुर्जर उम्र 19 वर्ष नि.पहाडी जिला मुरैना, श्रीकृष्ण उर्फ पठठा पुत्र बीरपाल गुर्जर उम्र 42  वर्ष नि.पहाडी थाना बानमोर जिला मुरैना, कुन्जी सिंह पुत्र मोहर सिंह गुर्जर उम्र 23 वर्ष नि.पहाडी ज़िला मुरैना, नरेश सिंह पुत्र देवी उर्फ लल्ला सिंह गुर्जर उम्र 38 वर्ष नि.पहाडी थाना बानमोर जिला मुरैना,पिन्टू उर्फ कान्हा पुत्र जनक सिंह गुर्जर उम्र 20 वर्ष नि.पहाडी बानमोर जिला मुरैना, श्यामबीर सिह पुत्र जनक सिंह गुर्जर उम्र 22 वर्ष नि.पहाडी थाना बानमोर जिला मुरैना, जिला मुरैना की गिरफतारी हेतु पुलिस अधीक्षक मुरैना द्वारा 3 फरवरी 2010 को प्रत्येक पर पॉच-पॉच हजार रूपये का इनाम घोषित किया गया है।

अत: जो पुलिस रेग्यूलेशन के पैरा क्रमांक 80 .1. में निहित प्रावधानों के तहत उक्त फरार आरोपी को उक्त अपराध में वन्दी वनवाये या बन्दी बनाने में या उके द्वारा बन्दीकरण का विरोध किये जाने पर विधिसंगत आवश्यक शक्तियों का प्रयोग कर बन्दी बनायेगा, या सूचना देगा उसे पुरस्कार से पुरूस्कृत किया जावेगा। पुरस्कार वितरण के संबंध में निर्णय पुलिस अधीक्षक मुरैना का होगा। 

 

किशोरी को सजातीययुवक ने छेडा

किशोरी को सजातीययुवक ने छेडा

मुरैना..रामपुर कला थाना क्षेत्र में एक किशोरी को अकेला पाकर मनचले युवक ने उसके साथ छेडखानी कर मारपीट की आरोपी पीडिता का सजातीय है। पुलिस ने उसके बिरूद्ध छेडखानी व मारपीट का मामला कायम कर लिया है। पुलिस के अनुसार ग्राम  सिधार देव के पास नाले में अकेला पाकर आरोपी कल्ला कुशवाह ने गांव की एक 14 बर्षीय किशोरी के साथ बुरी नियत से देडखानी की बिरोध करने पर मारपीट की गई पुलिस ने आरोपी के बिरूद्ध धारा 354,323, का मामला कायम कर लिया है। प्रकरण में पुलिस द्वारा आंगे विवेचना जारी है।

 

पुलिस ने दो सटोरिया दवोचे

पुलिस ने दो सटोरिया दवोचे

मुरैना.जिले की सुमावली थाना पुलिस ने कस्वे से दो सटोरियों को बंदी बना कर उनके कब्जे से नगदी व सट्टे की पर्ची जप्त कर मामला कायम कर लिया है पुलिस द्वारा गिरफतार सट्टा कारोवारियों में ख्याली व हनीफ खां शामिल है सुमावली के रहने वाले उक्त लोगों के बिरूद्ध पुलिस ने 4 क सट्टा एक्ट का मामला कायम कर लिया है।

 

बेटे समेत मां ने कुॅए में कूद कर जान दी ..ट्रेन से कट कर अज्ञात बृद्ध की मौत

बेटे समेत मां ने कुॅए में कूद कर जान दी ..ट्रेन से कट कर अज्ञात बृद्ध की मौत

मुरेना..पति की प्रताडना से तंग आकर एक युवती ने पुत्र समेत कुए में कूद कर आत्म हत्या कर ली पुलिस ने मग्र कायम कर जांच शुरू कर दी है। वही कैलारस में छोटी रेल से गिर कर अज्ञात बृद्ध की दौराने इलाज अस्पताल में मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार जिले के पहाडगड थाना क्षेत्र के ग्राम सियारू का पुरा गोलारी निवासी त्रिवेणी पत्नी भारत यादव 30 बर्ष ने अपने पुत्र अजय को लेकर गांव के हार में एक कुए में गिर गई जिससे मां बेटा की मौत हो गई मृतका का मायकाा सारंग पुरा गसवानी जिला श्योपुर में था। पुलिस के त्रिवेणी के मायके वालों ने बताया कि भारत की प्रताणना से तंग आकर ही उसने आत्महत्या की है पुलिस ने 25 जनवरी को हुई उक्त घटना पर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार कैलारश में गत दिवस छोटी टे्रन में यात्रा करने के दौरान अज्ञात व्यक्ति उम्र 60 साल की कौरस में टे्रन से कट गया उपचार हेतु अस्पताल में दाखिल करायागया जहां पर उसकी मौत हो गई पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक की शिनख्त के प्रयासशुरू कर दिये है।

कार की टक्कर से युवक की मौत

मुरैना..कार की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई मृतक मोहना ग्वालियर का रहने वाला था पुलिस ने चालक के बिरूद्ध मामला कायम कर लिया है। पुलिस के अनुसार पहाडगड क्षेत्र में गत दिवस कार क्रमांक डीएन ए 7312 के चालक ने लापरवाही से चलाकर विजय राठोर को टक्कर मारदी जिससे वह गंभीर रूप से घायल को इलाज हेतु पहाडगड के शासकीय अस्पताल में दाखिल कराया जहा उसकी मृत्यु हो गई पुलिस ने धारा 279,337,304ए का मामला कायम कर लिया है।

 

जौरा,पहाडगढ़ में दो जगहों पर बलबा सात घायल.चुनावी रंजिश को लेकर हुए फसाद

जौरा,पहाडगढ़ में दो जगहों पर बलबा सात घायल.चुनावी रंजिश को लेकर हुए फसाद

मुरेना..पंचायत चुनाव को लेकर दो जगहों पर हुए बलबा में सात लोग घायल हो गये पुलिस ने हमलावरों के बिरूद्ध मामला कायम कर लिया है घटना जौरा व पहाडगढ़ थाना क्षेत्रों की है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जौरा क्षेत्र के ग्राम बैजनाथ का पुरा नरहेला में गत दिवस लाठी फरसा से लेस होकर हमलावर गंगाराम बंटी उपेन्द्र ओमप्रकाश बुद्धपाल छत्रपाल शिशुपाल श्यामपाल अजयपाल आठ अन्य  ने बजरंगी जादौन और उसके परिजनों पर हमला कर दिया हमले में बैजनाथ,बजरंगी हरपाल टीकाराम आदि घायल हो गये। पुलिस थाना जौरा ने बजरंगी की शिकायत पर बलबा मारपीट व जान से मारने की धमकी देने की धाराओं के तहत मामला कायम कर लिया है।

पुलिस द्वारा दी  गई एक अन्य जानकारी के अनुसार जिले के पहाडगड थाना क्षेत्र के ग्राम पूठ वेरारा में चुनावी रंजिश को लेकर दवंगों ने दलित परिवार पर हमला कर उसके परिवार के सदस्यों को घायल कर दिया हमले में श्रीनिवास जाटव,दिलीप व कप्तान जाटव  घायल हो गये , पुलिस ने श्रीनिवास जाटव की शिकायत पर हमलावर सूरज,गजराज,हरीपाल,दिलीप, प्रभूराम ,विकास,रघुनंदन विशम्भर,राजेन्द्र , सुरेश जगनाथ  निहाल आदि के बिरूद्ध बलबा मारपीट तथा हरिजन एक्ट का मामला कायम कर लिया है।

पुलिस ने मारपीट की घटनाओं में घायलों को इलाज हेतु अस्पताल में दाखिल करा दिया है।

 

मुंबई मुद्दे पर क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुप्पी का रहस्य? - निर्मल रानी

मुंबई मुद्दे पर क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुप्पी का रहस्य?

निर्मल रानी,    63011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा,  फोन-0171- 2535628 email: nirmalrani@gmail.com

                                  देश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाली मुंबई ने एक बार फिर देश की राजनीति  को गर्म कर दिया है। स्वयं को मुंबई के 'केयरटेकर' अथवा स्वयंभू 'सी ई ओ'  समझने वाले ठाकरे परिवार ने एक बार फिर 'मुंबई केवल हमारी है' का दावा सार्वजनिक रूप से ठोंक दिया है । चाचा बाल ठाकरे तथा भतीजे राज ठाकरे वैसे तो मुंबई के मुख्यमंत्री पद की खींचातान को लेकर आमने सामने एक दूसरे पर तलवारें खींचे नंजर आ रहे हैं परंतु मुंबई पर 'आधिपत्य' को लेकर दोनाें ही क्षेत्रीय सूरमा एक ही स्वर 'आमची    मुंबई' का नारा देते हुए उक्त नेतागण बड़े ही तल्ंख लहजे में तमाम तरह की ंगैर संवैधानिक बातें कर रहे हैं । हिंसा जैसे घटिया दर्जे के हथकंडे भी यह तथाकथित राजनैतिक तत्व अपना रहे हैं । यह कभी उत्तर भारतीयों की रेलगाड़ी में सरेआम पिटाई करने लगते हैं तो कभी यही लोग नौकरी हेतु मुंबई पहुंचे उत्तर भारतीयों पर हमलावर हो जाते हैं । टैक्सी ड्राईवर, दूध का व्यापार करने वाले, रेहड़ी खोमचेलगाने वाले तथा मंजदूरी करने वाले उत्तर भारतीय इनके निशाने पर हैं ।

              मुंबई के इन स्वयंभू ठेकेदारों को मराठी भाषा के आगे हिंदी सुनना  भी पसंद नहीं है। यह खुले तौर पर देश से अधिक मुंबई को महत्व दे रहे हैं। और तो और देश का जो भी राष्ट्रभक्त अथवा राष्ट्र्रीय सोच रखने वाला व्यक्ति मुंबई को पूरे देश की गौरवपूर्ण महानगर बताने का 'साहस' कर बैठता है यह स्वयंभू 'सी ई आ'      उसे धमकी देने लग जाते हैं। उदाहरण के तौर पर राहुल गांधी ने कहा कि मुंबई पूरे देश की है तो इन ठाकरे बंधुओं ने राहुल को 'रोमपुत्र' के 'ंखिताब' से 'सम्मानित' कर दिया।  समाजवादी पार्टी के मुंबई से निर्वाचित विधायक अबु आंजमी ने राष्ट्रभाषा हिंदी में शपथ लेने का 'साहस' महाराष्ट्र विधान सभा में दिखलाया तो परिणामस्वरूप उन्हें थप्पड़ खाना पड़ा व इन्हीं क्षेत्रीय क्षत्रपों के चमचों के हाथों अपमानित होना पड़ा। मुकेश अंबानी जैसा व्यक्ति जिस पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था को गर्व है उसने मुंबई को पूरे देश वासियों की क्या कह दिया कि वह भी घटिया मानसिकता रखने वाले तीसरे दर्जे के इन राजनीतिज्ञों की आलोचना का पात्र बन गए। सचिन तेंदुलकर जैसा क्रिकेट खिलाड़ी जिस पर केवल हमारा देश या देशवासी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के क्रिकेट प्रेमी भी गर्व व उसका सम्मान करते हैं,ने भी मुंबई को भारत वासियों की बताया यह 'धूर्त राजनेता' उसे भी अनाप शनाप बकने लग गए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उत्तर भारतीयों तथा मुंबई के रिश्तों को न्यायसंगत बताने की कोशिश की तो 'ठाकरे एसोसिएटस' की ओर से उद्धव ठाकरे ने ंफरमाया -संघ मुंबई की चिंता न करे ं हम यहां बैठे हैं।

              समझ नहीं आता कि ठाकरे बंधु किस आधार पर मुंबई पर अपना एकाधिकार जता रहे हैं। न तो यह मराठी खानदान से हैं न ही मराठा राजनीति से इनका कभी कोई संबंध रहा है। सूत्र बताते हैं कि बाल ठाकरे के  पिता स्वयं मंजदूरी की तलाश में मुंबई जा पहुंचे थे। शायद उसी तरह जैसे आज कोई बिहारी अथवा उत्तर प्रदेश का निवासी रोंजी-रोटी कमाने हेतु मुंबई जाया करता है। ऐसे में इस परिवार को मराठा गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्तराधिकारी बनने का 'गौरव' कब और कहां से प्राप्त हो गया यह बात समझ से परे है। बड़ी हैरानगी की बात यह भी है कि जो बाल ठाकरे आज मुंबई से उत्तर भारतीयों को यह कह कर भगाना चाह रहे हैं कि मुंबई देश की धर्मशाला नहीं है वही बाल ठाकरे पूरे देश विशेषकर उत्तर भारत में क्या सोच कर अपने राजनैतिक संगठन शिव सेना का विस्तार करने के लिए इच्छुक रहते हैं्? लगभग पूरे उत्तर भारत में कहीं न कहीं कोई न कोई व्यक्ति ऐसा ंजरूर मिल जाएगा जो स्वयं को शिवसेना (बाल ठाकरे) का पदाधिकारी बताता हुआ मिलेगा। आख़िर क्षेत्रीय क्षत्रप के रूप में अपने चेहरे को बार-बार बेनंकाब करने वाले ठाकरे को जब उत्तर भारतीयों की शक्ल ही अच्छी नहीं लगती तो वे किस आधार पर उन्हीं उत्तर भारतीयों के मध्य अपनी संगठनात्मक घुसपैठ बनाने हेतु तत्पर रहते हैं।

              जब देश की राजनीति करने की इच्छा करती है तब यही ठाकरे घराना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व भाजपा का सहयोगी बनकर 6 दिसंबर 1992 की विवादास्पद अयोध्या घटना का भी भागीदार बनता दिखाई पड़ता है। आख़िर क्या है ठाकरे घराने की राजनीति की दिशा और दशा? यह घराना भारतवासी है, हिंदु है, मराठी है अथवा मुंबईया घराना या फिर शोध कर्ताओं के अनुसार मध्य प्रदेश से जुड़ा कोई मंजदूर परिवार? जो भी हो इस घराने ने ंफिलहाल मुंबई क ो देश से अलग करने का मानो ठेका ले रखा हो।   आंखिर मुंबई की समृद्धि से इस घराने का क्या लेना देना हो सकता है? मुंबई की समृद्धि में समुद्री तट का एक अहम योगदान है। भारत की संरचना तथा इसमें समुद्री प्राकृतिक सौंदर्य और इसके माध्यम से होने वाला समुद्री रास्ते का व्यापार मुंबई की समृद्धि में बुनियाद की भूमिका अदा करता है। ठाकरे घराने कामुंबई की इस प्राकृतिक उपलब्धि से क्या लेना -देना? मुंबई की दूसरी बड़ी पहचान यहां का ंफिल्मोद्योग है। ंफिल्म उद्योग की पूरे देश व दुनिया में प्रतिष्ठा का कारण वहां बनने वाली हिंदी ंफिल्में हैं। इससे भी ठाकरे घराने का लेना तो है और हो भी सकता है। परंतु देना कुछ भी नहीं। मुंबई उद्योग के लिहांज से देश का सबसे बड़ा औद्योगिक महानगर है। धन उगाही के लिहांज से इन्हें यहां से भी लाभ ही पहुंचता है। इस ठाकरे घराने का महानगर के औद्योगिक विकास में भी क्या योगदान है?देश का सबसे बड़ा शेयर बांजार मुंबई में स्थित है। इसका आधारभूत ढांचा भी शिवसेना या ठाकरे घराने द्वारा नहीं खड़ा किया गया है।      

                           हां यदि मुबंई में ठाकरे घराने का कोई योगदान है तो ख़ुशहाल मुंबई में सांप्रदायिकता का ंजहर फैलाने का, क्षेत्रवाद की  दीवारें खींचने का और मराठों को शेष भारतीयों से अलग करने की कोशिश करने का। कुंए के मेंढक सरीखी राजनीति करने वाले बाल ठाकरे की नंजर केवल इस एकमात्र लक्ष्य पर केंद्रित है कि किसी प्रकार वे मुंबई वासियों तथा मराठों व शेष भारतीयों के मध्य नंफरत व अलगाव की खाई इतनी गहरी करने में सफल हो जाएं कि भविष्य में उनका चश्मे-चिरांग उद्धव ठाकरे मराठा मतों का ध्रुवीकरण कर पाने में सफल हो सके तथा इस रास्ते पर चलते हुए राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में सफल हो जाए। अब चाचा ठाकरे की इस 'कुशल रणनीति' को भला भतीजे राज ठाकरे से बेहतर कौन समझ सकता था। अत: राज ठाकरे ने भी बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह की कहावत को चरितार्थ करते हुए स्वयं को बाल ठाकरे व उद्धव ठाकरे से भी बड़ा मुंबई का 'केयरटेकर' अथवा स्वयंभू 'सी ई ओ'  प्रमाणित करना शुरु कर दिया है। इन दोनाें ठाकरे बंधुओं में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप उत्तर भारतीयों पर चाराें ओर से हमले तेंज हुए हैं तथा राष्ट्रभाषा हिंदी को भी इन्हीं बंधुओं के चलते अपमानित होना पड़ रहा है।

              इस पूरे घटनाक्रम में एक और अदृश्य राजनैतिक घटनाक्रम भी चल रहा है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। और वह अदृश्य घटनाक्रम है ठाकरे घराने द्वारा मुंबई को लेकर किए जाने वाले नंगे नाच के विरुद्ध देश के किसी भी क्षेत्रीय क्षत्रप का वक्तव्य न आना। राहुल गांधी, सचिन तेंदुलकर,पी चिदंबरम,मुकेश अंबानी,कांग्रेस,आर एस एस,भाजपा,समाजवादी पार्टी,बहुजन समाज पार्टी,जेडीयू,आरजेडी व वामपंथीजैसे राष्ट्रवादी सोच रखने वाले कुछ राजनैतिक  संगठनों द्वारा तो यह ंजोर देकर कहा जा रहा है कि मुंबई पर पूरे देश का अधिकार है तथा मुंबई पूरे भारत की है। परंतु देश में ठाकरे की शिवसेना की ही तरह अन्य भी दर्जनों ऐसे राजनैतिक दल हैं जिनके नेता वैसे तो क्षेत्रीय क्षत्रपों की सी हैसियत रखते हैं परंतु केंदी्रय गठबंधन सरकारों के  दौर में यही क्षेत्रीय क्षत्रप देश की राजनीति करते भी दिखाई पड़ जाते हैं। प्रश् यह है कि आज के दौर में जबकि यह सांफ नज़र आ रहा है कि ठाकरे घराना अलगाववाद की दिशा में आगे बढ़ रहा है ऐसे में कांग्रेस व भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की ही तरह तथा सचिन तेंदुलकर व मुकेश अंबानी जैसे राष्ट्रीय सोच रखने वाले राष्ट्र भक्तों की ही तरह देश के अन्य राज्यों के क्षेत्रीय क्षत्रप मिलकर एक स्वर में या फिर अलग-अलग ही सही मुंबई मुद्दे पर अपना मुंह क्यों नहीं खोल रहे हैं  ''

              मुंबई मुद्देपर क्षेत्रीय क्षत्रपों की इस रहस्यमयी चुप्पी को साधारण चुप्पी नहीं समझना चाहिए। देश की राजनीति में स्वयं को स्थापित कर पाने में असफल रहने वाले यह क्षेत्रीय क्षत्रप कहीं ठाकरे घराने द्वारा चली जा रही घटिया राजनैतिक चालों का बारीकी से अध्ययन तो नहीं कर रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम के परिणाम की प्रतीक्षा तक चुप्पी बनाए रखने का निश्चय तो नहीं कर चुके हैं। यदि ऐसा है फिर तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए और भी अधिक ख़तरनाक संकेत है। और यदि ऐसा नहीं है ,सभी क्षेत्रीय क्षत्रप अथवा क्षेत्रीय राजनैतिक दल अथवा क्षेत्रीय राजनैतिक नेता भारत की एकता व अखंडता को सर्वोपरि मानते हैं,कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रत्येक स्थान पर, प्रत्येक भारतीय नागरिक के आने-जाने,रहने-सहने व कामकाज करने की पूरी स्वतंत्रता के पक्षधर हैं फिर उन्हें एकमत हो कर अब तक ठाकरे घराने को यह संदेश सांफतौर से दे देना चाहिए था कि मुंबई पूरे देश की है केवल ठाकरे घराने की 'जागीर' नहीं। परंतु क्षेत्रीय सोच रखने वाले नेताओं द्वारा ऐसा करने के बजाए अभी तक रहस्यमयी ढंग से चुप्पी धारण किए जाने का निश्चय किया गया है और इस चुप्पीका रहस्य क्या है भारतवासी यह ंजरूर जानना चाहते हैं।   

                                                                     निर्मल रानी