रविवार, 10 मई 2009

शासकीय योजना का 285 बोरी गेंहू जप्त, जीवाजी गंज में प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही -- दैनिक मध्यराज्य

शासकीय योजना का 285 बोरी गेंहू जप्त, जीवाजी गंज में प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही

मुरेना..शासकीय योजना के तहत गरीबों को बितरण हेतु आबंटित गेंहू की कालाबाजारी का गोरख धंधा मुरेना में खूब फलफूल रहा है। अधिकारियो की मिली भगत से संस्थाओं के कर्ताधर्ता ब्यापारियों को ब्लैक में गेंहू बेच कर गरीबों के हको पर डांका डाल रहे है। मुरेना पुलिस ने आज स्थानीय जीबाजी गंज में छापामार कार्यवाही कर 285 बोरी गेंहू को जप्त करने में सफलता प्राप्त की है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जीवाजी गंज में कालाबाजारी कर लाया गया  गेहूं का ट्रक खाली होने की सूचना मिलने पर एस डी एम संदीप माकिन मय पुलिस बल के मौके पहुंचें  और  उक्त गेंहू और ट्रक को जप्त कर लिया है मगर पुलिस को देखकर पल्लेदार और क्रेता -विक्रेता  दोनो भाग निकले।

बताया जाता है कि बडोदा श्योपुर की एक संस्था को शासन की योजना के तहत गरीबों क ो गेंहू बाटने के लिये उक्त गेंहू आवंटित किया था मगर संस्था ने गेंहू का वितरण न करते हुए मुरैना के एक व्यापारी को ब्लैक में बैच  दिया बताया जाता है कि शास. योजना के गेहू को कम कीमत पर खरीद कर कतिपय  व्यापारी अधिकारीयों से सांठ-गांठ कर समर्थन मूल्य पर गेंहू का विक्रय कर मुनाफा कमा रहे है।

पुलिस ने गेहू और ट्रक को जप्त कर विवेचना शुरू कर दी हैं। ज्ञातवय रहे पिछले दिनों पोरसा में भी शासकीय योजना का 700 बोरी गेहू पुलिस और प्रशासन ने जप्त किया था।

अंचल के किसानों को नही मिल रहा है गेंहू का समर्थन मूल्य, ब्यापारियों की पौबारह -- दैनिक मध्यराज्य

अंचल के किसानों को नही मिल रहा है गेंहू का समर्थन मूल्य, ब्यापारियों की पौबारह

मुरैना- जिला एवं तहसील मुख्यालय तथा ग्रामीण अंचलों में सर्मथन मूल्य के केन्द्रों पर किसानो की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गयी है। किसान को अपने माल को व्यापारियों के लिए विक्रय करने को विवश होना पड़ रहा है। क्यों कि किसान को माल बेचने को मजबूर केन्द्र संचालक की मिली भगत से किया जाता है। फिर वह गेहूं  व्यापारी को 900 से 1000 रूपये देने को मजबूर हो जाता है। मुरैना जिले में जौरा, कैलारस, सबलगढ, अम्बाह और पोरसा मण्डी में किसानों का शौषण होता है। जब भी किसान अपनी फरियाद लेकर वरिष्ठ अधिकारी के पास जाता है तो उसे आश्वासन के अलावा कुछ नही मिलता काम जैसा का तैसा चलता रहता हैं। मुरैना जिला  10 वर्षो से सूखे एवं सिंचाई के पानी की कमी के कारण किसान की स्थिति वैसे ही खराव बनी हुई है। इसके वावजूद जैसे तेसे करके वह अपना समय काट कर जीवन यापन कर रहा है। आज किसान की यह स्थिति हैं कि अगर एक वर्ष सूखा या किसी कारण वश फसल नही हो पाती है या उत्पादन कम होता है तो उसको एक वर्ष का भरण पोषण करीबन 5 वर्षो में पूरा हो पाता है।

इस वर्ष अच्छी फसल होने के कारण किसान के चेहरे पर खुशी आई लेकिन केन्द्र संचालकों की मन मर्जी के चलते काफी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केन्द्र संचालक सरकारी वारदाना जो कि किसानों के माल के लिए आता है उसे व्यापारियों को देकर कमीशन खोरी के चलते सप्लाई कर दिया जाता है।

 मंण्डीओं में किसान अधिक तरह ट्रोली में अपना  अनाज भरकर घंटो धूप में तपते रहते है। कई खाते की किताबे फर्जी तरीके से लगाई जाती हैं। जिनमें आज तक फसल न उगाई हो। लेकिन प्रशासन भ्रष्टाचारी के बंद कमरे में उसे न तो किसानों से मतलब है ना ही कार्यवाही से लेकिन यह बात प्रशासन के लिये शर्म का विषय है क्षेत्रीय किसान जिला अधिकारी व कलेक्टर से मांग करता है कि किसानों के हित का ध्यान रखा जाये।

 

सल्फास का सेवन कर,युवती मरी-- दैनिक मध्यराज्य

सल्फास का सेवन कर,युवती मरी

मुरैना- सल्फास की गोलियों का सेवन  करने से एक युवती की मौत हो गई। घटना जिले के टेंटरा थाना क्षेत्र के ग्राम कैमरा कला की हैं।

पुलिस के मुताबिक कैमरा कला निवासी रामकेसी पत्नी भागीरथ रावत 22 वर्ष ने अज्ञात कारणों के चलते सल्फास की गोलियो का सेवन कर लिया। उपचार हेतु परिजनों ने जयारोग अस्पताल ग्वालियर में भर्ती कराया गया जाह पर उसकी मौत हो गई पुलिस ने विजय कुशवाह की रपट पर से घारा 174 का मामला कायम कर युवती द्वारा की गई आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी हैं।

 

जेठ व ससुर की प्रताडना से तंग आकर की थी नगमा ने आत्महत्या -- दैनिक मध्यराज्य

जेठ व ससुर की प्रताडना से तंग आकर की थी नगमा ने आत्महत्या

मुरैना। जिले के माता बसैया थाना अन्तर्गत ग्राम काजी बसई में जेठ और ससुर की प्रताडना से तंग आकर एक युवती ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मर्ग जांच की बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया हैं।

पुलिस सूत्रो से घटना के सम्बन्ध में मिली जानकारी के अनुसार काजी बसई में  14.3.09 को नगमा बैगम पत्नी अंसार उम्र 28 वर्ष ने आत्म हत्या कर ली थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर युवती की मौत के कारणों की जांच शुरू की गई।

पुलिस द्वारा गई मर्ग  विवेचना में मृतका के जेठ भूरा, और ससुर इकरार को नगमा की मौत के लिये जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ धारा 306 का मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस का कहना है कि नगमा को उसके जेठ व ससुर ने इतना प्रताडित किया कि उसको आत्महत्या के लिये मजबूर  होना पड़ा।

 

शराव तस्कर गिरफतार-- दैनिक मध्यराज्य

शराव तस्कर गिरफतार

मुरैना। शराव का अवैध करोवार करने के आरोप में माता बसैया थाना पुलिस ने एक युवक को गिरफतार कर उसके कब्जे से अवैध शराब वरामद कर आरोपी के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस के अनुसार ग्राम माता बसैया में रहने वाला श्रीकृष्ण गुर्जर गांव में ही शराब का अवैध कारोवारकरता था। पुलिस ने उसे गिरफतार कर 25 क्वाटर शराव के बरामद किये जिसक ा बाजार मूल्य करीबन 750 रूपये बताया गया हैं।

 

दम्‍पत्ति पर कुल्‍हाड़ी से प्राण घातक हमला - दैनिक मध्यराज्य

दम्‍पत्ति पर कुल्‍हाड़ी से प्राण घातक हमला

मुरैना। आपसी विवाद के चलते घर में घुस कर कुल्हाडी से किये गये हमले में पति पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गये घायलों को इलाज  हेतु अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। तथा हमलावरों के विरूद्ध हत्या के प्रयास का पुलिस ने मामला कायम कर लिया हैं।

पुलिस सूत्रो से घटना के सम्बन्ध में मिली जानकारी के अनुसार चिन्नोनी थाना क्षेत्र के ग्राम बीलगाव में  रहने वाले रामभजन मल्लाह के घर में घुसकर हमलवरों ने कुल्हाडी से जान से मारने की नियत से हमला कर रामभजन और उस की पत्नी शीला को गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावर सजातीय है और राज. के घौलपुर जिले के रहने वाले है।

चिन्नोनी थाना पुलिस ने शीला पत्नी रामभजन मल्लाह की शिकायत पर हमलावर रामहेत पप्पू मातादीन मुशी मल्लाह .काली तीर धौलपुर राज. के खिलाफ धारा 452,307,34 आईपीसी का मामला कायम कर लिया है। प्रकरण में पुलिस द्वारा आगे विवेचना जारी है।

 

जैविक खेती – जैविक खाद निर्माण विधियां

जैविक खेती – जैविक खाद निर्माण विधियां

द्वितीय किश्‍त

Article Presented By: Zonal Public Relations Office – Gwalior Chambal Zone

जैविक खेती जीवों के सहयोग से की जाने वाली खेती के तरीके को कहते हैं। प्रकृति ने स्वयं संचालन के लिये जीवों का विकास किया है जो प्रकृति को पुन: ऊर्जा प्रदान करने वाले जैव संयंत्र भी हैं । यही जैविक व्यवस्था खेतों में कार्य करती है । खेतों में रसायन डालने से ये जैविक व्यवस्था नष्ट होने को है तथा भूमि और जल-प्रदूषण बढ़ रहा है। खेतों में हमें उपलब्ध जैविक साधनों की मदद से खाद, कीटनाशक दवाई, चूहा नियंत्रण हेतु दवा बगैरह बनाकर उनका उपयोग करना होगा । इन तरीकों के उपयोग से हमें पैदावार भी अधिक मिलेगी एवं अनाज, फल सब्जियां भी विषमुक्त एवं उत्तम होंगी । प्रकृति की सूक्ष्म जीवाणुओं एवं जीवों का तंत्र पुन: हमारी खेती में सहयोगी कार्य कर सकेगा ।

 

जैविक खाद बनाने की विधि 

अब हम खेती में इन सूक्ष्म जीवाणुओं का सहयोग लेकर खाद बनाने एवं तत्वों की पूर्ति हेतु मदद लेंगे । खेतों में रसायनों से ये सूक्ष्म जीव क्षतिग्रस्त हुये हैं, अत: प्रत्येक फसल में हमें इनके कल्चर का उपयोग करना पड़ेगा, जिससे फसलों को पोषण तत्व उपलब्ध हो सकें ।

       दलहनी फसलों में प्रति एकड़ 4 से 5 पैकेट राइजोबियम कल्चर डालना पड़ेगा । एक दलीय फसलों में एजेक्टोबेक्टर कल्चर इनती ही मात्रा में डालें । साथ ही भूमि में जो फास्फोरस है, उसे घोलने हेतु पी.एस.पी. कल्चर 5 पैकेट प्रति एकड़ डालना होगा ।

       खाद बनाने के लिये कुछ तरीके नीचे दिये जा रहे हैं, इन विधियों से खाद बनाकर खेतों में डालें । इस खाद से मिट्टी की रचना में सुधार होगा, सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या भी बढ़ेगी एवं हवा का संचार बढ़ेगा, पानी सोखने एवं धारण करने की क्षमता में भी वृध्दि होगी और फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा । फसलों एवं झाड पेड़ों के अवशेषों में वे सभी तत्व होते हैं, जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है :-

नाडेप विधि

       नाडेप का आकार :- लम्बाई 12 फीट     चौड़ाई 5 फीट    उंचाई 3 फीट आकार का गड्डा कर लें। भरने हेतु सामग्री :-  75 प्रतिशत वनस्पति के सूखे अवशेष, 20 प्रतिशत हरी घास, गाजर घास, पुवाल, 5 प्रतिशत गोबर, 2000 लिटर पानी ।

       सभी प्रकार का कचरा छोटे-छोटे टुकड़ों में हो । गोबर को पानी से घोलकर कचरे को खूब भिगो दें । फावडे से मिलाकर गड्ड-मड्ड कर दें ।

       विधि नंबर -1 - नाडेप में कचरा 4 अंगुल भरें । इस पर मिट्टी 2 अंगुल डालें । मिट्टी को भी पानी से भिगो दें । जब पुरा नाडेप भर जाये तो उसे ढ़ालू बनाकर इस पर 4 अंगुल मोटी मिट्टी से ढ़ांप दें ।

       विधि नंबर-2- कचरे के ऊपर 12 से 15 किलो रॉक फास्फेट की परत बिछाकर पानी से भिंगो दें । इसके ऊपर 1 अंगुल मोटी मिट्टी बिछाकर पानी डालें । गङ्ढा पूरा भर जाने पर 4 अंगुल मोटी मिट्टी से ढांप दें ।

       विधि नंबर-3- कचरे की परत के ऊपर 2 अंगुल मोटी नीम की पत्ती हर परत पर बिछायें। इस खाद नाडेप कम्पोस्ट में 60 दिन बाद सब्बल से डेढ़-डेढ़ फुट पर छेद कर 15 टीन पानी में 5 पैकेट पी.एस.बी एवं 5 पैकेट एजेक्टोबेक्टर कल्चर को घोलकर छेदों में भर दें । इन छेदों को मिट्टी से बंद कर दें ।

केंचुआ खाद

       छायादार स्थान में 10 फीट लम्बा, 3 फीट चौड़ा, 12 इंज गहरा पक्का ईंट सीमेन्ट का ढांचा बनायें । जमीन से 12 इंच ऊंचे चबूतरे पर यह निर्माण करें । इस ढांचे में आधी या पूरी पची (पकी) गोबर कचरे की खाद बिछा दें । इसमें 1न्1न्1 फीट में 100 केंचुऐ डालें । इसके ऊपर जूट के बोरे डालकर प्रतिदिन सुबह, शाम पानी डालते रहें । इसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा नमी ना रहे दो माह बाद यह खाद बन जायेगी । जिसका 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से इस खाद का उपयोग करें।

बीजोपचार

1.     प्रति एकड़ बीज हेतु 3 से 5 लीटर देशी गाय का खट्टा मठ्ठा लें । इसमें प्रति लीटर 3 चने के आकार के बराबर हींग पीस कर घोल दें । इसे बीजों पर डालकर भिगों दें तथा 2 घंटे रखा रहने दें । उसके बाद बोयें । इससे उगरा नियंत्रित होगा ।

2.    3 से 5 लीटर गौ मूत्र में बीज भिगोकर 2 से 3 घंटे रखकर वो दें । उगरा नहीं लगेगा । दीमक से भी पौधा सुरक्षित रहेगा।

मटका खाद

      गौ मूत्र 10 लीटर, गोबर 10 किलो, गुड 500 ग्राम, बेसन 500 ग्राम- सभी को मिलाकर मटके में भकर 10 दिन सड़ायें फिर 200 लीटर पानी में घोलकर गीली जमीन पर कतारों के बीच छिटक दें । 15 दिन बाद पुन: इस का छिड़काव करें।

कीट नियंत्रण

1.     देशी गाय का मट्ठा 5 लीटर लें । इसमें 3 किलो नीम की पत्ती या 2 किलो नीम खली डालकर 40 दिन तक सड़ायें फिर 5 लीटर मात्रा को 150 से 200 लिटर पानी में मिलाकर छिड़कने से एक एकड़ फसल पर इल्ली /रस चूसने वाले कीड़े नियंत्रित होंगे ।

2.    लहसुन 500 ग्राम, हरी मिर्च तीखी चिटपिटी 500 ग्राम लेकर बारीक पीसकर 150 लीटर पानी में घोलकर कीट नियंत्रण हेतु छिड़कें ।

3.    10 लीटर गौ मूत्र में 2 किलो अकौआ के पत्ते डालकर 10 से 15 दिन सड़ाकर, इस मूत्र को आधा शेष बचने तक उबालें फिर इसके 1 लीटर मिश्रण को 150 लीटर पानी में मिलाकर रसचूसक कीट /इल्ली नियंत्रण हेतु छिटकें।

इन दवाओं का असर केवल 5 से 7 दिन तक रहता है । अत: एक बार और छिड़कें जिससे कीटों की दूसरी पीढ़ी भी नष्ट हो सके।

बेशरम के पत्ते 3 किलो एवं  धतूरे के तीन फल फोड़कर 3 लिटर पानी में उबालें । आधा पानी शेष बचने पर इसे छान लें । इस छने काढ़े में 500 ग्राम चने डालकर उबालें। ये चने चूहों के बिलों के पास शाम के समय डाल दें। इससे चूहों से निजात मिल सकेगी।