सोमवार, 3 नवंबर 2008

चम्‍बल पर सौ से अधिक जवानों की सीलबन्‍दी, जिले में पंजीकृत हथियार 26,782 बिना जमा हथियारों पर आर्म्‍स एक्‍ट के तहत कार्यवाही - पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह

चम्‍बल पर सौ से अधिक जवानों की सीलबन्‍दी, जिले में पंजीकृत हथियार 26,782 बिना जमा हथियारों पर आर्म्‍स एक्‍ट के तहत कार्यवाही - पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह

Narendra Singh Tomar"Anand"

मुरैना 3 नवम्‍बर 08, पिछले दिनों जिला कलेक्‍ट्रेट मुरैना के जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागृह में अपनी पहली पत्रकार वार्ता को 27 अक्‍टूबर को मुरैना के नव आगत कलैक्‍टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एम.के.अग्रवाल ने संबोधित किया जिला पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह, ए.डी.एम. श्री उपेन्‍द्रनाथ शर्मा एवं जिला ग्रामीण विकास अभिकरण एवं जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी श्री अभय कुमार वर्मा व जिला जनसम्‍पर्क अधिकारी श्री ओ.पी.श्रीवास्‍तव जिला कलेक्‍टर श्री अग्रवाल के साथ थे इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह ने पत्रकारों को जानकारी देते हुये बताया कि मुरैना जिला में पंजीकृत दर्ज शस्‍त्रों की अभिलेखीय जानकारी के मुताबिक संख्‍या 26,782 है इसमें 40 फीसदी हथियार धनतेरस तक 26 अक्‍टूबर की स्थिति में संख्‍या 10,781 जमा किये जा चुके थे । जिन लोगों द्वारा शस्‍त्र जमा नहीं कराये गये हैं या इस जिले अतिरिक्‍त अन्‍यत्र कहीं बाहर पंजीकृत व दर्ज हैं यदि उन पर शस्‍त्र जमा करने की अंतिम तिथि के पश्‍चात शस्‍त्र पाये जाते हैं तो उनके विरूद्ध आर्म्‍स एक्‍ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया जायेगा ।

पत्रकारों द्वारा सवाल किये जाने पर कि थानों में लम्‍बी कतारें लग रहीं हैं और लोगों को शस्‍त्र जमा करने में भारी परेशानी हो रही है, इस पर श्री संतोष सिंह ने कहा कि यह एक स्‍वाभाविक समस्‍या है और जिला पुलिस का प्रयास है कि प्रत्‍येक शस्‍त्र जमा करने आने वाले व्‍यक्ति का शस्‍त्र जमा हो जाये ।

श्री सिंह ने यह भी बताया कि चम्‍बल के वे इलाके जो कि उ.प्र. और राजस्‍थान की सीमा के निकट है और जहॉं दस्‍यु आतंक हैं तथा आपराधिक वारदातों का अंदेशा है वहॉं गुण दोष के आधार पर कुछ स्‍थानों के लोगों को शस्‍त्र जमा करने से छूट दी जा रही है । उन लोगों को अपने पास हथियार रखने की छूट रहेगी ।

श्री संतोष सिंह ने कहा कि अब तक (26 अक्‍टूबर तक) 161 लोगों के खिलाफ आदतन अपराध सम्‍बन्‍धी धारा 110 की कार्यवाही की गयी है, 15 लोगों के जिला बदर के प्रकरण प्रषित किये गये हैं, 2000 वारण्‍टी हैं जिसमें से 285 वारण्‍टीयों को दाखिल ए अदालत किया गया है ।

वे अपराधी जो पिछले 6 महीने से फरार अस्‍थायी वारण्‍टी हैं उनके नाम मतदाता सूची से पृथक किये जा रहे हैं ।

वारण्‍टीयों को किसी भी दशा में मताधिकार का प्रयोग नहीं करने दिया जायेगा ।

पुलिस अधीक्षक श्री संतोष सिंह ने कहा कि हमें 4-5 अतिरिक्‍त बाहरी कम्‍पनीयों की आवश्‍यकता होगी । श्री सिंह ने बताया कि एक कम्‍पनी में 75 जवान और अफसरों सहित लगभग 85-90 लोग होते हैं ।

श्री सिंह ने कहा कि हमने 335 मतदान केन्‍द्रों को संवेदनशील चिह्नत किया है । इन केन्‍द्रों पर मोबाइलिंग की व्‍यवस्‍था भी रहेगी ।

पुलिस अधीक्षक श्री सिंह ने बताया कि चम्‍बल नदी पर 100 से अधिक जवानों का चौकस पहरा होगा जिससे निकटवर्ती राजस्‍थान एवं उत्‍तरप्रदेश से उपद्रवी तत्‍व यहॉं आकर निर्वाचन में अव्‍यवस्‍था पैदा न कर सकें ।

श्री सिंह ने बताया कि सम्‍पत्ति विरूपण मामलों में तुरन्‍त प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जायेगी । तथा ध्‍वनि विस्‍तारक यंत्रों का उपयोग माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेशानुसार प्रतिबन्धित रहेगा ।   

 

मतदाताओं की तीन कतारें होंगीं, आचार संहिता का पालन सख्‍ती से- कलेक्‍टर मुरैना

मतदाताओं की तीन कतारें होंगीं, आचार संहिता का पालन सख्‍ती से- कलेक्‍टर मुरैना

Narendra Singh Tomar"Anand"

मुरैना 3 नवम्‍बर 08, पिछले दिनों जिला कलेक्‍ट्रेट मुरैना के जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागृह में अपनी पहली पत्रकार वार्ता को 27 अक्‍टूबर को संबोधित करते हुये मुरैना के नव आगत कलैक्‍टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एम.के.अग्रवाल ने जिला पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह, ए.डी.एम. श्री उपेन्‍द्रनाथ शर्मा एवं जिला ग्रामीण विकास अभिकरण एवं जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी श्री अभय कुमार वर्मा व जिला जनसम्‍पर्क अधिकारी श्री ओ.पी.श्रीवास्‍तव के साथ पत्रकारों को विस्‍तार से समूची निर्वाचन प्रक्रिया की जानकारी दी और आचार संहिता पर प्रकाश डालते हुये इसके पालन पर ऐहतियात व सख्‍ती बरतने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किया ।

श्री अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया कि मतदान केन्‍द्रों की संवेदनशीलता के प्रति प्रशासन सजग है और निर्वाचन निष्‍पक्ष व पूर्ण पारदर्शी एवं शान्तिपूर्वक सम्‍पन्‍न हों यही हमारा एकनिष्‍ठ ध्‍येय होगा । किसी भी व्‍यक्ति को चाहे वह आम आदमी हो सामान्‍य व साधारण व्‍यक्ति हो या फिर कोई रूतबेदार ओहदेमन्‍द या प्रभावशाली व्‍यक्ति । सबके लिये कानून और व्‍यवस्‍था एक समान रहेगी किसी को भी निर्वाचन में अव्‍यवस्‍था फैलाने और शान्ति भंग करने की अनुमति नहीं होगी । और आगे आचार संहिता का और भी कठोर रूप से पालन कराया जायेगा । असामाजिक तत्‍वों और उपद्रवकारीयों को चिह्नित कर खदेड़ा जायेगा ।

श्री अग्रवाल ने कुछ और निर्वाचन केन्‍द्र बढ़ाने हेतु 25 मतदान केन्‍द्रों की वृद्धि का प्रस्‍ताव भी भेजा जाना बताया और कहा कि जहॉं जनसंख्‍या की वृद्धि हुयी है वहीं जनसंख्‍या घनत्‍व भी बढ़ा है तथा कतिपय दूरस्‍थ व संवेदन शील इलाकों में मतदाताओं को मतदान करने काफी दूर पहुँचना पड़ता है ऐसे में मतदान केन्‍द्रों की वृद्धि आवश्‍यक है ।

श्री अग्रवाल ने बताया कि मतदान केन्‍द्रों पर तीन पंक्तियां कतारबद्ध होंगीं जिसमें दो कतारें उन लोगों की होंगीं जिनके पास मतदाता परिचयपत्र होगा यह दो कतारें पुरूष व महिला मतदाताओं की पृथक पृथक होंगीं । तीसरी कतार उन लोगों की होगी जिनके पास मतदाता परिचयपत्र नहीं हैं ।

जिला कलेक्‍टर श्री अग्रवाल ने बताया कि मास्‍टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के दरम्‍यान (यह प्रशिक्षण पत्रकार वार्ता से थोड़ी देर पहले ही सम्‍पन्‍न हुआ था) कुल छ: अधिकारी अनुपस्थित रहे हैं, जिनके निलम्‍बन की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गयी है ।

 

रविवार, 2 नवंबर 2008

विधानसभा निर्वाचन 08 ग्वालियर चंबल संभाग से दूसरे दिन तीन नामांकन

विधानसभा निर्वाचन 08 ग्वालियर चंबल संभाग से दूसरे दिन तीन नामांकन

ग्वालियर 1 नवम्बर 08। ग्वालियर एवं चंबल संभाग के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में एक नवम्बर को कुल तीन नामांकन भरे गये । जबकि 31 अक्टूबर को ग्वालियर चंबल संभाग से 4 प्रत्याशियों द्वारा नामजदगी के पर्चे दाखिल किये थे, इस प्रकार दोनों दिनों में कुल 7 प्रत्याशियों ने नामजदगी के पर्चे दाखिल किये जा चुके हैं

       प्राप्त जानकारी के अनुसार एक नवम्बर को ग्वालियर संभाग के गुना जिले के विधानसभा क्षेत्र गुना से श्री प्रदीप ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामजदगी का पर्चा दाखिल किया । जबकि ग्वालियर संभाग के ग्वालियर जिला समेत शिवपुरी, अशोकनगर एवं दतिया जिले से एक भी नामांकन प्राप्त नहीं हुआ । चंबल संभाग के मुरैना जिले के विधानसभा क्षेत्र मुरैना से श्री गोपाल दास गर्ग ने निर्देलीय उम्मीदवार के रूप में एवं भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र से श्री वीरेन्द्र सिंह ने नेशनल लोकतांत्रिक पाटी के प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा भरा । चंबल संभाग के श्योपुर जिले में कोई नामांकन एक नवम्बर को नहीं आया ।

       दो नवम्बर को सार्वजनिक अवकाश होने की वजह से नाम निर्देशन पत्र लेने का सिलसिला बंद रहेगा । निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 नवम्बर तक हर रोज प्रात: 11 बजे से 3 बजे तक उम्मीदवार नामजदगी के पर्चे दाखिल कर सकेंगें । नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 8 नवम्बर को होगी । उम्मीदवार 10 नवम्बर को अपनी नामजदगी वापस ले सकेंगे । विधानसभा निर्वाचन के लिये जारी की गई सूचना के अनुसार मतदान 27 नवम्बर को प्रात: 8 बजे से अपरान्ह 5 बजे तक होगा ।

 

शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2008

राष्ट्रीय संकल्प दिवस आज

राष्ट्रीय संकल्प दिवस आज

मुरैना 30 अक्टूबर 08/ स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि 31 अक्टूबर का दिन इस वर्ष भी राष्ट्रीय संकल्प दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन द्वारा रैलियों का आयोजन किया जायेगा। इन रैलियों में राष्ट्रीय भावना और देशभक्तिपूर्ण गीत गाये जायेंगे तथा भाषण और व्याख्यान होंगे।   

सभी विधान सभा क्षेत्रों के लिए रिटर्निंग आफीसर जिला मुख्यालय पर ही नामांकन फार्म जमा करेंगे

विधान सभा निर्वाचन-2008 आज से भरेंगे नामजदगी के पर्चे वक्त रहेगा 11 से 3 बजे तक आखिरी तारीख 7 नवंबर होगी

मुरैना 30 अक्टूबर 08/ विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न उम्मीदवारों द्वारा नामजदगी के पर्चे दाखिल करने का सिलसिला 31 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। इसी दिन कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एम.के. अग्रवाल द्वारा निर्वाचन की अधिसूचना जारी की जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार पर्चे भरने का वक्त पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक रहेगा । सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर 7 नवंबर तक पर्चे भरे जाएंगे।

सभी विधान सभा क्षेत्रों के लिए रिटर्निंग आफीसर जिला मुख्यालय पर ही नामांकन फार्म जमा करेंगे ।

विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 03 सबलगढ़ के लिए नामांकन पत्र रिटर्निंग आफीसर अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ़ श्री एच.एस. भदौरिया अपर कलेक्टर न्यायालय कक्ष मुरैना में प्राप्त करेंगे । विधान सभा निर्वावन क्षेत्र क्रमांक 04 जौरा के नामांकन पत्र कलेक्टर न्यायालय कक्ष मुरैना में रिटर्निंग आफीसर अनुविभागीय अधिकारी जौरा श्री आर.पी.एस.जादौन द्वारा प्राप्त किये जायेंगे । विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 05 सुमावली के लिए नामांकन पत्र रिटर्निंग आफीसर डिप्टी कलेक्टर वित्त श्री एम.के. जैन के समक्ष कलेक्टर न्यायालय कक्ष के बगल वाले कक्ष में प्रस्तुत किये जायेंगे । विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 06 मुरैना के नामाजदगी पर्चे रिटर्निंग आफीसर अनुविभागीय अधिकारी मुरैना श्री संदीप मांकिन अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय कक्ष मुरैना में प्राप्त करेंगे । विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 07 दिमनी के नामांकन पत्र रिटर्निंग आफीसर अपर कलेक्टर (विकास) श्री अभय वर्मा द्वारा अपर कलेक्टर (विकास) कक्ष में प्राप्त किये जायेंगे । विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 08 अम्बाह के नामांकन प्रपत्र रिटर्निंग आफीसर अनुविभागीय अधिकारी अम्बाह डा. एम.एल.दौलतानी तहसीलदार न्यायालय कक्ष मुरैना में प्राप्त करेंगे।

 

 

नामांकन दाखिल करते वक्त उम्मीदवार द्वारा 5000 रुपए की सुरक्षा निधि जमा की जाएगी लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवार को इसकी आधी रकम के बतौर केवल 2500 रुपए ही जमा करने होंगे। भले ही ये उम्मीदवार सामान्य सीट से ही चुनाव लड़ें।

नामांकन दाखिल करते वक्त रिटर्निंग और सहायक रिटर्निंग अफसर की तयशुदा जगह पर 100 मीटर के दायरे में उम्मीदवारों के साथ तीन से ज्यादा गाड़ियों और उम्मीदवार समेत अधिकतम पाँच लोगों के प्रवेश की इजाजत दी जाएगी। पर्चा उम्मीदवार द्वारा खुद या उसके प्रस्तावक द्वारा पेश किया जाएगा। किसी भी उम्मीदवार द्वारा उसी निर्वाचन क्षेत्र में उसके या उसकी तरफ से अधिकतम चार पर्चें भरे जाएंगे। इसी तरह किसी भी उम्मीदवार द्वारा दो से ज्यादा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से पर्चें नहीं भरे जा सकेंगे।

उम्मीदवार को चुनाव में यदि किसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्य के राजनैतिक दल द्वारा खड़ा किया जा रहा है तो नामांकन के लिए उस निर्वाचन क्षेत्र का ही एक मतदाता उसका प्रस्तावक होगा। लेकिन, यदि उम्मीदवार किसी पंजीकृत पर गैर मान्यता प्राप्त दल द्वारा खड़ा किया जाता है या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ता है तो उसके प्रस्तावकों की संख्या 10 होगी और इनका उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना जरूरी होगा। नामांकन पत्र संशोधित फार्मों में भरे जाएंगे जो रिटर्निंग अफसर देंगे। इन्हें दाखिल करने का सिलसिला 31 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होते ही शुरू हो जाएगा। एक शपथपत्र का प्रारूप, चुनाव संचालन नियम और आयोग के निर्देश की प्रतियाँ भी उन्हें दी जाएंगी।

 

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2008

बांस का फूल - वनस्पति जगत का रहस्य

बांस का फूल - वनस्पति जगत का रहस्य

पृष्ठभूमिका

       संभवत: बांस से परिचित हरेक व्यक्ति ने यह सुना होगा कि जब बांस से फूल निकलता है तो वह मर जाता है। हालांकि कभी-कभार ही ऐसा होता है न कि सदैव। इसके बावजूद भी बांस के पौधे में फूल आने की घटना को अक्सर ही उसकी मौत की भविष्यवाणी से जोड़ेकर देखा जाता है।

       बांस में फूल आना वनस्पति जगत की एक पहेली है। वे तथ्य जो बांस के पौधे को वनस्पति के सदृश उगने वाले पौधे के स्थान पर फूल देने वाले पौधे के रूप में समझने के लिए प्रेरित करते हैं, पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। बांस की प्राय: सभी प्रजातियों के जीवन संबंधी अपने-अपने इतिहास हैं। भारतीय एशियाई क्षेत्र से बाहर बांस की कुछ प्रजातियां और इस क्षेत्र की गिनी चुनी प्रजातियों के पौधे ऐसे हैं जो वयस्क होकर कई वर्षों तक प्रतिवर्ष फूल और उसके बाद बीज देते हैं। फूल देनेवाला तना फल विकसित होने के बाद अक्सर मर जाता है लेकिन अन्य तने जिंदा रहते है। बांस की भारतीय-एशियाई सामान्य प्रजातियों में से कई प्रजातियां ऐसी हैं जो नियमित रूप से एक ही समय में और एक वर्ष से अधिक के अंतराल में बीज देती हैं। बांस की विभिन्न प्रजातियों का जीवनकाल तीन वर्ष से लेकर 120 वर्ष तक है और एक क्षेत्र की प्रत्येक प्रजाति के लगभग सभी पौधे फूल देते हैं और इस  प्रकार काफी संख्या में बीज देकर खुद मर जाते हैं। ये बीच या तो शीघ्र अंकुरित होते हैं अथवा बरसात की शुरूआत में।

       फूल देने के तरीके के आधार पर बांस के तीन प्रकार हैं। पहले प्रकार का पौधा वार्षिक आधार पर अथवा लगभग उतने ही समय में फूल देता है। भारत में अरूंदीनारिया और थाईलैंड में स्चीजोस्टाचियम ब्राचीक्लैडम इसका उदाहरण है। दूसरे प्रकार के बांस में फूल आने की घटना अनियमित रूप से होती है। एशिया के कटिबंधीय क्षेत्र में बम्बूसा और डेंड्रोकालामस और जापान में फिलोस्टाचिस आदि इसके उदाहरण हैं। तीसरे प्रकार के बांस में वे प्रजातियां हैं जिनमें फूल आने की घटना भिन्न-भिन्न प्रकार से होती हैं, अथवा फूल या तो एक छोटे क्षेत्र में आते हैं अथ्वा कुछेक तनों में। यद्यपि इन पौधों में फूल आने की घटना के अपने चक्र हैं जो एक क्षेत्र में तो समान अवधि के होते हैं किन्तु दूरस्थ स्थानों के लिए उनकी अवधि भिन्न-भिन्न होती हैं। पी.इडुलिस इसका उदाहरण है।

       बांस की कुछ भारतीय प्रजातियों में  फूल आने की घटना निम्नानुसार भिन्न-भिन्न चक्रों में होती हैं। इंडोकैलेमस विटियानस, ओक्लेंड्र स्क्रीप्टोरिया, ओ.रीडी, ओ.स्ट्रीडुला नामक बांस की प्रजातियां एक वर्ष के अंतराल में फूल देती हैं। ओ.ट्रावेंकोरिया प्रजाति के पौधे 7 वर्ष की अवधि में  एक बार फूल देते हैं। थामनोकैलेमस स्पैथीपऊलोरस प्रजाति के पौधे 16-17 वर्षों में और डेंड्रोकैलेमस स्ट्रीक्टस 25-65 वर्षों में फूल देते हैं। भारत में बांस की कुछ अन्य प्रजातियां भी हैं जिनमें से थेमेनोकैलेमस फाल्कोनेरी, चिमोनोबम्बूसा फाल्काटा 28-30 वर्षों में, ऑक्सीथेनांतेरा एबीसीनिका, मेलोकान्ना बेसीफोरा, बम्बूसा अरूंदीनेसिया 30 वर्षों के अंतराल में, डेंड्रोकैलेमस हेमिल्टोनी 30-40 वर्षो में, बम्बूसा टूल्डा 30-60 वर्षों में, बम्बूसा पॉलीमोर्फा 35-60 वर्षों में और चिमोनोबम्बूसा जैंसरेंसिस 45-55 वर्षों के अंतराल में फूल देती हैं। थायरोस्टेचिस ओलीवेरी प्रजाति के बांस के पौधे 47-48 वर्ष में, बम्बूसा कोपेलेंडी और स्यूडोस्टेचियम पॉलीमार्फम 48 वर्ष में और फाइलोस्टेचिस बम्बूसोइड्स 60 वर्षों में (जापान में 120 वर्षों) में पुष्पित होते हैं।

       हालांकि बांसों के पुष्पित होने के बारे में अनेकानेक अनुसंधान और चर्चाएं जारी हैं फिर भी यह विषय वर्णनातीत होने के साथ-साथ रहस्यपूर्ण बना हुआ है। बांस में फूल आने और इसकी मौत होने के बारे में कई सिध्दांत प्रतिपादित किए गए हैं। इसके बार में एक रोग विज्ञान सिध्दांत है जो बताता है कि नीमैटोडों, फफूंदियों, कीटाणुओं और जीवाणुओं जैसे सूक्ष्म जीवों के कारण बांस के विनाश के लिए फूल निकल आते हैं। इसके बारे में सावधिक सिध्दांत के अनुसार अलैंगिक विधि द्वारा बांस के पुनर्जनन हेतु इसकी परिपक्वता होने पर इसका पुष्पित होना शुरू हो जाता है। बांसों के पुष्पित होने के बारे में एक रूपांतरण सिध्दांत है जिसके अनुसार यह घटना अलैंगिक प्रजनन की एक विधि है। इस बारे में पोषण सिध्दांत का कहना है कि बांसों का पुष्पित होना और उसमें फल आना सामान्य रूप से एक प्रकार के शारीरिक व्यवधान के परिणामस्वरूप है जो मुख्य रूप से वानस्पतिक कोशिकाओं के अल्प-विकास के कारण और कार्बन नाइट्रोजन अनुपात में असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है। बांसों के फूल के बारे में एक मानवीय सिध्दांत भी है जो बताता है कि बांसों को काटने और जलाने जैसी मानवीय व्यवहारों के कारण ये पुष्पित होते हैं।

       सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि बांस के पुष्पित होने की परिणति उसकी मृत्यु के रूप में होती है। पुष्पित हाने के बाद बांस कई प्रकार के मृत्यु संबंधी लक्षण दर्शाते हैं। बांसों के पुष्पित होने से न तो वायु में मौजूद इसके हिस्से और न ही भूमिगत हिस्से की मृत्यु होती है। अरूंदिनारिया, फाइलोस्टाचिस, बम्बूसा एट्रा की कुछ प्रजातियां इसका उदाहरण हैं। इनके पुष्पित होने के परिणामस्वरूप केवल पौधे के वायु वाले हिस्से की ही संपूर्ण मृत्यु होती है। राइजोम जीवित रहता है और पौधों का पुनर्जनन होता है। अरूंदिना एमाबिलिस, ए सिमोनी, फाइलोस्टेचिस निदुलारिया इसके उदाहरण हैं। बांसों के पौधे के पुष्पित होने के परिणास्वरूप पौधे के वायु में मौजूद हिस्से और भूमिगत हिस्से की पूरी तरह मौत हो जाती है और ऐसे में इनका पुनर्जीवन केवल बीजों से ही संभव हो पाता है। ओलीवेरी, बम्बूसा अरूंदिनेसिया, बी टुल्डा प्रजाति के बांस इसके उदाहरण हैं।

       बांस  के अधिकांश पौधे अपनी प्रजाति के एक ही क्लोन से संबंधित होते हैं। हालांकि उनके जीनों में कुछ ऐसी विशेषताएं छुपी हुई हो सकती हैं जो इसक उत्पादकों के लिए उपयोगी हों। बीजों से उत्पन्न इसके नये क्लोन अधिक मजबूत होने के साथ-साथ बीमारियों अथवा कीटाणुओं के प्रति अधिक प्रतिरोधी और संभवत: अधिक सजावटी भी हो सकते हैं। कुछ लोगों के पास बांस की उन्नत किस्मों के निर्माण की जानकारी है। बीजों से नये पौधे तैयार करने का प्रयास भी किया जाना चाहिए। अक्सर ऐसा पाया जाता है कि बीजों के माध्यम से खास विशेषताओं वाले क्लोन नहीं तैयार हो पाते इसलिए वानस्पतिक रुप से ही इसके संरक्षण का प्रयास करना महत्वपूर्ण है।

       फूल देने वाले बांस के पौधे को पुनर्जीवन प्रदान करने के अनेक तरीके सुझाए गए हैं, जिनमें से कुछ तरीके कुछ मामलों में कारगर पाए गए हैं और ज्यादातर तरीके बेअसर साबित हुए हैं।

       फूल देने वाले बांस के पौधे हमारे सामने एक अवसर उपस्थित करते हैं। बांस के ऐसे सारे पौधे हमेशा नहीं मरते, किंतु अधिकांश मामले में वे मर ही जाते हैं। ऐसा  पौधा जिसने विशेष तौर पर फूल देने के लिए नये तने का विकास करना छोड़ दिया हो उनकी मृत्यु होना अवश्यंभावी है।

       बांस के कई पौधों में फूल आने आने की घटना होती है, किन्तु यह जरूरी नहीं है कि उस प्रजाति अथवा क्लोन के सारे पौधों में ऐसा हो। कई बार ऐसा देखा जाता है कि एक बड़े क्षेत्र में बांस की एक प्रजाति एक ही समय में फूल देती है। सामान्य तौर पर उगाये जाने वाले बांस के पौधे एक ही क्लोन से संबंधित होते हैं अथवा उसके करीब होते हैं और ऐसे में इस बात का जोखिम होता है कि उस प्रकार के सारे पौधे अथवा अधिकांश पौधे फूल दे सकते हैं और मर भी सकते हैं। कई बांस  ऐसे  हैं जो फूल नहीं देते और इस कारण वे बीज भी नहीं दे पाते। किन्तु ऐसे बांस जंगल में विकसित होते नहीं पाये जाते और वे उगाए गए पौधे होते हैं। पुष्पित होने के बाद बांस के पौधे के मरने का सबसे अधिक संभावित कारण यह होना चाहिए कि इसे आवश्यकतानुसार जल,पोषक तत्व, स्थान और धूप न हीं मिल पाते हैं। मृतप्राय पौधे का मलबा बांस के नये पौधों को ढक लेता है। बांस के पौधों में फूल आने और उसके मरने की घटना के लिए समय निर्धारण की प्रणाली को समझ पाना अब तक संभव नहीं हो पाया है और यह प्रकृति की एक अनबुझी पहेली के रूप में विद्यमान है।

       अब प्रश्न यह उठता है कि बांस के किसी पौधे में जब फूल आए तो हमें क्या करना चाहिए। एक विकल्प तो यह है कि हमें इसके लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में पौधे बच सकते हैं। अथवा वे मर जाएंगे। एक दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि हमें बांस के बीजों का संग्रह करके नये सिरे से उसकी पीढी तैयार करने में जुटना चाहिए और मृत अथवा मृतप्राय पौधों को हटा देना चाहिए। यदि कुछ शाखाओं में ही फूल आ रहे हों तो निश्चित तौर पर किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर यदि पूरे पौधे में फूल आ रहे हों तो फूलवाले पौधे को काटकर हटाना चाहिए।

       बांसों में फूल आने और उनके पुनर्जीवन के बारे में चीन में कई अनुसंधान कार्य किए गए हैं। पी विवेक्स प्रजाति के बांसों में जियांगसू और झेजियांग प्रांतों में वर्ष 1969 से लेकर 1976 तक फूल आने की घटनाएं हुई। सियंग एट अल की रिपोर्ट इनके साथ किए गए प्रयोगों के आधार पर 1981 में प्रकाशित हुई। जिन पौधों में फूल आये थे उनके तीव्र पुनर्जीवन के लिए उनके मूसलों को खोद कर निकाला गया और उनके 30-50 सेंटीमीटर के टुकड़े बनाकर पांच घंटे तक जिबरेलिक अम्ल में डुबाकर रखने के बाद क्यारियों में रोपा गया। जब नये अंकुर आए तो प्रत्येक दो सप्ताह में उनपर छिड़काव किया गया। तीन महीने बाद इस प्राकर उपचारित मूसलों में से 36 प्रतिशत में फूल आए जबकि बिना उपचारित मूसलों में से 64 प्रतिशत में फूल आने की घटनाएं हुईं। एक वर्ष के बाद ऐसा पाया गया कि उपचारित मूसलों से अधिक सामान्य और बिना फूल वाले पौधे तैयार हुए। सियूंग इस बात की चेतावनी देते हैं कि यह आवश्यक नहीं है कि नाइट्रोजन उर्वरक बांसों में फूल आने से रोक सके और कई बार तो यह उनके पुनर्जीवन की गति को धीमी करते हैं।

 

अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए ऑनलाइन मीडिया मान्यता शुरू

अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए ऑनलाइन मीडिया मान्यता शुरू

सूचना एवं  प्रसारण मंत्रालय के तहत पत्र सूचना कार्यालय ने भारत के 39वें अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह 2008 के लिए मीडिया को  ऑनलाइन मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह समारोह 22 नवम्बर से 02 दिसम्बर, 2008 तक गोवा में होगा। मीडिया से जुड़े व्यक्ति मीडिया मान्यता के लिए पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट    www.pib.nic.in  पर जाकर पंजीकरण कराने के लिए मीडिया मान्यता आईएफएफीआई 2008 (इपऊफी) पर क्लिक कर सकते हैं। यह लिंक   www.iffi.nic.in  पर भी उपलब्ध है।

       पंजीकरण कराने वाले पत्रकारों के पास फिल्म समारोह का तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए तथा उनके आवेदन संगठन से अनुसंशित होने चाहिए। मान्यता लेने की अन्तिम तिथि 15 नवम्बर, 2008 है।