बुधवार, 25 अप्रैल 2007

उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश परीक्षा 6 मई को

उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश परीक्षा 6 मई को

आवेदन पत्र 25 अप्रेल तक लिए जायेगें

मुरैना 23 अप्रेल07- जिला मुख्यालय पर स्थित शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुरैना में कक्षा 9 वीं में प्रवेश हेतु परीक्षा 6 मई को प्रात: 8 बजे से 10 बजे तक आयोजित की गई है ।

       जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु आवेदन पत्र उत्कृष्ट विद्यालय एवं समस्त विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों से प्राप्त किये जा सकते हैं । भरे हुए आवेदन पत्र 25 अप्रेल तक 25 रूपये शुल्क सहित उत्कृष्ट विद्यालय मुरैना में जमा किये जा सकते है । इस वर्ष 2007 की कक्षा 8 वीं की परीक्षा में सम्मिलित परीक्षार्थी स्वकथन के अधार पर प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं ।

 

प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन का भ्रमण कार्यक्रम

प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन का भ्रमण कार्यक्रम

मुरैना 23 अप्रेल07- स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन 25 अप्रेल को सांय 7 बजे भोपाल से जी.टी.एक्सप्रेस द्वारा प्रस्थान कर रात्रि 1 बजे मुरैना पहुंचेगें । श्री जैन 26 अप्रेल को प्रात: 8 बजे रेस्ट हाउस मुरैना में जनप्रतिनिधियों एवं जन सामान्य से मुलाकात करेंगे तथा प्रात: 10 बजे कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में जिला योजना समिति और उसके पश्चात रोगी कल्याण समिति की बैठक तथा स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेगे ।

       प्रभारी मंत्री श्री जैन 27 अप्रेल को प्रात: 8 बजे से विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे तथा रात्रि 10.30 बजे जी.टी.एक्सप्रेस द्वारा मुरैना से भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे ।

 

बाल संजीवनी अभियान शुरू

कुपोषण से मुक्ति के लिए

बाल संजीवनी अभियान शुरू

 

मुरैना 23 अप्रेल07- बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए मुरैना जिले में आज से दसवें चरण का बाल संजीवनी अभियान शुरू हो गया है ।अगामी 22 मई तक चलने वाले इस अभियान के अन्तर्गत प्रत्येक आंगनवाडी केन्द्र पर तीन दिवसीय बजन मेले आयोजित किये जायेंगे तथा बच्चोंको विटामिन ए की दवा पिलाई जायेगी और टीकाकरण किया जायेगा ।

            जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रघुराज सिह कंषाना ने आज मुरैना नगर के वार्ड क्र. 30 में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र दुर्गापुरी में बच्चे का बजन लेकर और उसे विटामिन की दवा पिलाकर अभियान का शुभांरभ किया। उन्होने मातृ शिशु रक्षा कार्डों का वितरण भी किया। इस अवसर पर जिला पंचायत की महिला एवं बाल विकास समिति के अध्यक्ष श्री अशोक सिकरवार, क्षेत्रीय पार्षद, एस.डी.एम.श्री विजय अग्रवाल और महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती उपासना राय प्रमुख रूप से उपस्थित थे

       ज्ञात हो कि बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए वर्ष 2001 से संचालित बाल संजीवनी अभियान के तहत आज तक कुपोषण स्तर में 7 प्रतिशत की कमी आई है । महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती राय ने बताया कि दसवें अभियान के अर्न्तगत जिले के 1351 आंगनवाडी केन्द्रों पर बजन मेला आयोजित किये जायेगे । बजन के आधार पर चिन्हित कुपोषण बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार देकर कुपोषण स्तर में सुधार लाने के प्रयास किये जायेंगे । साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाया जायेगा । गम्भीर कुपोषित बच्चों को बाल शक्ति योजना के तहत उपचार दिलाया जायेगा ।

 

शनिवार, 21 अप्रैल 2007

जनशिकायतों का निराकरण राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

जनशिकायतों का निराकरण राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्य सचिव श्री आर.सी. साहनी

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री आर.सी. साहनी ने कहा है कि राज्य शासन ने प्रशासनिक सुधार और जनशिकायतों के निराकरण के लिये विभिन्न स्तरों पर अभिनव प्रयास किये हैं। श्री साहनी आज नई दिल्ली में केन्द्रीय केबीनेट सचिव श्री बी.के. चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।

मुख्य सचिव ने आडियो-विजुअल प्रेजेन्टेशन देते हुये बताया कि राज्य शासन ने सुराज, समाधान ऑन लाईन, परख और समाधान एक दिवस कार्यक्रम, जनशिकायत निवारण के लिये शुरू किये हैं। उन्होंने बताया कि समाधान ऑन लाईन के तहत हर महिने के प्रथम मंगलवार को 15 जनशिकायतें चुनी जाती हैं और संबंधित अधिकारियों को सुबह प्रेषित की जाती हैं। संबंधित अधिकारी का दायित्व होता है कि वह उन शिकायतों का शाम 4 बजे से पहले उसी दिन निराकरण करें । शाम को मुख्यमंत्री वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित शिकायतकर्ता से रूबरू होकर उसकी शिकायत के संबंध में चर्चा करते हैं और कान्फ्रेंसिंग के दौरान उपस्थित संबंधित अधिकारी शिकायत पर की गई कार्यवाई से अवगत कराता है। साथ ही विलम्ब के कारण भी बताता है।

मुख्य सचिव ने बताया कि इसी प्रकार समाधान एक दिवस कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसमें नागरिकों के लिये सहायता केन्द्र स्थापित किये गये हैं। इस व्यवस्था में नागरिक अपनी चाही गई जानकारी#प्रमाण-पत्र#नकल आदि इस संबंध में सुबह आवेदन करता है और शाम को कार्यालय समय समाप्त होने के पूर्व संबंधित आवेदन पर कार्यवाई कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से 99 प्रतिशत तक प्रकरणों का निराकरण होने लगा है। इसी प्रकार परख कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत आधारभूत सेवाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की निगरानी की जा रही है।

श्री साहनी ने बताया कि इन कार्यक्रमों के अलावा प्रदेश के कोषालयों का कम्प्यूटरीकरण किया गया है। प्रोजेक्ट क्लीयरेन्स एण्ड इम्प्लीमेंटेशन बोर्ड का गठन किया गया है। सी.एम. मॉनीटरिंग सिस्टम अपनाया गया है। वाहन चालक लायसेंस के लिये स्मार्ट कार्ड तथा वाहन पंजीयन के लिये भी नई व्यवस्था शुरू की गई है। इस प्रकार प्रदेश शासन ने जन शिकायतों एवं समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये अभिनव कार्यक्रम शुरू किये हैं।

 

बाबुल की दुआयें लेती जा...........

बाबुल की दुआयें लेती जा...........

मुख्‍समंत्री कन्‍यादान योजना एक बेवाक आलेख

नरेन्‍द्र सिंह तोमर''आनन्‍द'' प्रधान सम्‍पादक ग्‍वालियर टाइम्‍स

 

मुरेना 21 अप्रेल 2007 । इसमें कोई शक नहीं कि हर पिता का अरमान अपनी प्‍यारी बेटी को हसरतों से विदा करने का । बहुतेरे ऐसे भी लोग हम सबके बीच हैं, जहॉं समूचे के समूचे परिवारों को दो जून रोटी भी मयस्‍सर नहीं है ।

एक मशहूर कहावत है , कि तीन काम आदमी को तोड़ भी देते हैं, और बर्बाद कर कर्जदार भी बना देते हैं जिसमें बेटी का ब्‍याह करना और किसी चुनाव का लड़ना तथा मकान का बनवाना । यह तीन काम जिसने भी किये वही तबाह होता आया है । यह तीनों काम अच्‍छे अच्‍छों को हाथ फैलाने पर मजबूर करते हैं ।

गरीबों की कहानी भी अजीब होती है, जीवन भर रोटी के टुकड़े के लिये सारा परिवार जूझता रहता है, पूर्ति नहीं होने पर उनके परिवार के लोग उस काम को भी करने पर बाध्‍य हो जाते हैं, जिसे आम खाता पीता आदमी हेय, घृणित या तुच्‍छ समझता है । तो कई बार ऐसे परिवार मजबूरी में अपराध की राह पर कदम रख बैठते हैं ।

पेट की आग बुझाने के लिये कई बार गरीबों की बेटियों को देह व्‍यापार जैसे व्‍यवसाय मजबूरन करना पड़ते हैं ।

बड़े लोग गलत करें चाहे सही, उन्‍हें किसी बात पर दोष नहीं दिया जाता, उनके द्वारा किया हर कार्य चाहे वह सरासर गलत या आपराधिक ही क्‍यों न हो, उसे नियम या कानून का दर्जा तुरन्‍त मिल जाता है, जबकि गरीब कितना भी सही करे, उसके हर काम में दोष व गलती ढूंढ़ कर आरोपित, प्रताडि़त व लांछित करना भारतीय समाज की पुरानी आदत है । इसी लिये तुलसीदास ने कहा 'समरथ को नहिं दोष गुसाईं'

गरीब के लिये भारतीय परिवेश हमेशा दोहरे मानदण्‍ड अपनाता आया है, हम गरीब को हमेशा चोर, अपराधी और कौमजात अपराधी के नजरिये से ही नापते आये हैं, अपराध शास्‍त्र में तो खुलकर कुछ विशेष जाति और रंग रूप वाले लोगों को आपराधिक जाति कह दिया गया है, जबकि सच्‍चाई ठीक इसके विपरीत है, मेरे पास सैकड़ों उदाहरण हैं तहॉं वे राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री बनने के अलावा उच्‍च प्रशासनिक पदों तक पहुँचे हैं । लेकिन मिथ्‍या अवधारणाओं ने समाज को बहुत गहराई तक अपने में लपेट रखा है ।

गरीब की बेटी की शादी भी एक मजाक मात्र बनकर रह गयी है, अव्‍वल तो उसकी शादी या तो मजबूरन या परिस्थितियों वश हो ही नहीं पाती या यदि हो भी तो भारतीय समाज उसमें भी सौ छिद्र खोजने की कोशिश कर किसी न किसी तरह उसका चुटकुला बनाने का काम करता आया है ।

ऐसी विकट परिस्थितियों में मध्‍यप्रदेश सरकार विशेषकर व्‍यक्तिगत तौर पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह ने गरीबों की बेटियों के विवाह कराने का एक विकट अश्‍वमेध यज्ञ प्रारंभ किया है, वाकई तहे दिल से काबिल ए तारीफ है । मध्‍यप्रदेश सरकार और शिवराज सिंह को इन गरीब कन्‍याओं का धर्म पिता कहा जाये तो कोई शक नहीं कि यह सम्‍बोधन मेरी नजर में एकदम उचित ही है, वाकई शिवराज सिंह जो कर सकता था , उससे कहीं ज्‍यादा उसने कर भी दिया और करने की हिम्‍मत भी दिखाई । हजारों लाखों बेटियों का बाबुल या जनक बन पाना हरेक की कूबत भी नहीं और मुकददर भी नहीं । भई वाकई कमाल किया है, अच्‍छी बात है ।

लाड़ली लक्ष्‍मी योजना जहॉं बेटियों के लिये वरदान ही नहीं हुयी बल्कि उनकी जीवन दायिनी भी बन गयी, इसके अलावा गरीबों के आत्‍म सम्‍मान की रक्षा का भी एक दीर्घ कालीय मूल भी सिद्ध होगी, इसमें भी शक नहीं ।

मेरी नजर में इन योजनाओं को जाति, धर्म, सम्‍प्रदाय और वर्ग विशेष के अर्जी फर्जी एजेण्‍डों के बजाय सारे के सारे समाज के लिये बिजा लाग लपेट और बिना भेदभाव लागू किये जाना ही इनका सकारात्‍मक उपलब्धियों का प्रमुख कारण रहा है ।

इससे पहले सरकारें किसी जाति या वर्ग विशेष को केन्द्रित कर योजनायें बनाती और चलाती आयी है परिणामत: न केवल वे असफल हों गयीं बल्कि सामाजिक विषमता की गहरी खाई को और पारस्‍परिक घृणा को बढ़ाती ही आयीं हैं ।

निसंदेह मध्‍यप्रदेश सरकार को और उसके मुखिया शिवराज सिंह को इसके लिये साधुवाद दिया जाना चाहिये , बल्कि पुरूस्‍कार और सामाजिक सम्‍मान भी दिया जाना चाहिये ।

इन अच्‍छी योजनाओं का अब वर्तमान तकाजा यह है , कि इन योजनाओं में केन्‍द्र सरकार को विस्‍तार दृश्‍य लागू करना चाहिये, जिससे गरीबों को इन योजनाओं में मिलने वाली इमदाद में कुछ बढ़ोत्‍तरी हो सके । और यदि ऐसा हुआ, तो सचमुच गजब हो जायेगा, मध्‍यप्रदेश सरकार जो कर सकती थी, उसने अपनी क्षमता से कहीं ज्‍यादा कर दिखाया है, अब केन्‍द्र सरकार की बारी है कि जाति वर्ग समुदाय के अर्जी फर्जी ढकोसले छोड़ कर हर तबके और हर समाज के हर आदमी के लिये एकसार विस्‍तार दृश्‍य कल्पित करे और अमल में लाये, तभी कुछ वास्‍तविक कमाल हो पायेगा ।

कोई चोर नहीं आया

इन योजनाओं के क्रियान्‍वयन और पालन की सबसे बड़ी चमात्‍कारिक विशेषता यह रही है कि ,सरकार द्वारा सबके लिये खुल्‍लेआम योजनायें छोड़ देने से लाभ लेने वाले हितग्राही केवल वही लोग रहे जो वाकई इसके पात्र थे, किसी चोरी और बेईमानी का कोई मामला सामने नहीं आया, वाकई हैरत अंगेज है । क्‍या जनता ने संदेश दिया है कि अगर चोर कहोगे तो जरूर चोरी करेंगें और बेईमानी भी वरना भारतवासीयों से अधिक ईमानदार और सच्‍चा समूचे विश्‍व में दूसरा कौन है ।

चरम उपलब्धि और सफलता के भावी संकेत इन योजनाओं की भावी सफलता सम्‍भवत: अतुलनीय हो सकती है, ऐसे पूर्वाभास हो रहे हैं । चूंकि अभी तक इन योजनाओं का ग्रास रूट लेवल यानि जमीनी स्‍तर पर प्रचार व फैलाव नहीं हो पाया था लेकिन जंगल की आग की तरह फैलती इनकी शोहरत वाकई बहुत बड़े परिणाम का खुद ब खुद आगाज करती है ।

मीडिया का रोल शर्मनाक यह सचमुच शर्मनाक व चिन्‍ताजनक है कि जब मध्‍यप्रदेश गरीब की बेटियों की शादीयां करवा रहा था, मीडिया बेशर्मी से अमीरों की शादी की प्रतीक्षा के सामने प्रतीक्षा कर रहा था, वह भी ऐसी जगह जहॉं न उसे बुलाया गया न तवज्‍जुह दी गई, फिर भी मीडिया दीवालें दरवाजें ताक ताक कर अपने को धन्‍य मानता रहा, मगर धन्‍य है अमिताभ बच्‍चन जिसने भारतीय मीडिया को उसकी जात और औकात बता कर कुत्‍तों की तरह दरवाजे के बाहर ही भौंकते रहने दिया । जब गरीब बेटियों की हजारों शादीयां हो रही थीं, मीडिया वहॉं से नदारद था, गरीब की लुगाई सारे गांव की भौजाई, यह पुरानी कहावत है, मगर भारत के मीडिया के लिये शर्मनाक और चुल्‍लू भर पानी में डूब मरने लायक ।

''वे कत्‍ल भी कर दें तो चर्चा नहीं होता, हम आह भी भरें तो हो जाते हैं बदनाम''

गरीब की बेटियों की शादी के इवेण्‍ट तो इवेण्‍ट नहीं होते, वे कवरेज योग्‍य भी नहीं होते ।

 

नवीन राशन कार्डों पर ही मिलेगा कैरोसिन

नवीन राशन कार्डों पर ही मिलेगा कैरोसिन

मुरैना 20 अप्रैल 07/ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत माह अप्रैल से प्रत्येक राशन कार्ड पर चार लीटर कैरोसिन का वितरण किया जायेगा। कैरोसिन का वितरण केवल नवीन राशनकार्ड धारियों को ही किया जायेगा। पुराने राशन कार्डों पर कैरोसिन का वितरण नहीं किया जायेगा।

 

बार्ड क्रमांक 30 के उपभोक्ताओं को 23 अप्रैल से बटेंगा कैरोसिन

बार्ड क्रमांक 30 के उपभोक्ताओं को 23 अप्रैल से बटेंगा कैरोसिन

मुरैना 20 अप्रैल 07/ जिला आपूर्ति अधिकारी श्री आश्रकृत तिवारी के अनुसार बार्ड क्रमांक 30 के उपभोक्ताओं को नगर पालिका कार्यालय के पीछे परिसर से 26,27 और 28 अप्रैल के स्थान पर 23,24 और 25 अप्रैल को कैरोसिन का वितरण किया जायेगा।