शुक्रवार, 22 अगस्त 2008

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की अनन्तिम सूची जारी

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की अनन्तिम सूची जारी

मुरैना 21 अगस्त 08/ एकीकृत बाल विकास परियोजना मुरैना ग्रामीण में चयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की अनन्तिम सूची जारी की गई है । इस सूची के सम्बध में आपत्तियां 25 अगस्त तक मुरैना ग्रामीण के परियोजना अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत की जा सकती है ।

       आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद हेतु आंगनवाड़ी केन्द्र सबजीतकापुरा में  श्रीमती मिथलेश चयनित एवं श्रीमती निर्मला को प्रतीक्षारत सूची में रखा गया है । इसी प्रकार सहायिका पद हेतु आंगनवाडी केन्द्र नाका में श्रीमती जानकी देवी चयनित एवं श्रीमती राजकुमारी प्रतीक्षारत और रामरतनकापुरा में श्रीमती गीता देवी को चयनित सूची में रखा गया है

 

किसान उर्वरकों का अग्रिम उठाव करें - कलेक्टर

किसान उर्वरकों का अग्रिम उठाव करें - कलेक्टर

मुरैना 21 अगस्त 08/ कलेक्टर श्री रामकिंकर गुप्ता ने कहा है कि इस वर्ष बहुत अच्छी वर्षा को देखते हुए जिले में रवी मौसम में बुआई का 25-30 प्रतिशत क्षेत्र बढने की संभावना है । किसानों को चाहिए कि वे रवी फसलों के लिए उर्वरकों का अग्रिम उठाव करें । सहकारी समितियों से प्रत्येक किसान को नगद विक्रय पर 5 बोरी डी.ए.पी. और 10 बोरी यूरिया उपलब्ध होगी । इसकी प्रविष्टि ऋण पुस्तिका में करानी होगी । श्री गुप्ता गत बुधवार को कृभको द्वारा तरसमा में आयोजित सहकारिता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे ।

       सम्मेलन में उप संचालक कृषि श्री बी.डी.शर्मा ने उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर बल दिया और किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी । वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. के.एन. बंसल ने संतुलित उर्वरकों के बारे में बताया और सरसों की फसल में गंघक के उपयोग की सलाह दी । डा. एम.एल. त्रिपाठी ने समय से बुआई, पौध संरक्षण की तकनीक से अवगत कराया और डा. आर.पी. यादव ने फसल सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी ।

       प्रारंभ में वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक कृभकों डा. एस.एस. राठौर ने अतिथियों का स्वागत किया । उन्होंने बताया कि जिले में एक हजार टन यूरिया उपलब्ध है और शीघ्र ही एक रेक यूरिया आने वाली है ।

       कार्यक्रम में कृषि प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई । जिसमें प्रथम आने वाले चार कृषकों को पुरस्कृत किया गया । इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी अम्बाह डा. एम.एल. दौलतानी, जिला विपणन अधिकारी श्री आर.पी.एस.चौहान, क्षेत्र के कृषि अधिकारी और कृषकगण उपस्थितथे । अंत में सभी की उपस्थिति के प्रति कनिष्ठ प्रबंधक कृभकों श्री यू.पी.एस. राठौर ने आभार व्यक्त किया ।

 

6 प्रकरणों में 12 हजार हेक्टर पड़त भूमि वंटन की अनुशंसा

6 प्रकरणों में 12 हजार हेक्टर पड़त भूमि वंटन की अनुशंसा

मुरैना 21 अगस्त 08/ कलेक्टर श्री रामकिंकर गुप्ता की अध्यक्षता में गत दिवस सम्पन्न गैरवन पड़त भूमि की जिला स्तरीय समिति की बैठक में 6 आवेदकों को दो- दो हजार हेक्टर भूमि के आवंटन की अनुशंसा की गई ।

       समिति के निर्णय अनुसार में. एस.एस. इंटर प्राइजेज नोएडा, में. यू.पी. इन्फोरटेक नई दिल्ली, में. ओम इंटर प्राइजेज नई दिल्ली में. सत्या एग्रो गुडगांव, वूमेन डब्ल्पमेंट आर्गनाईजेशन नई दिल्ली और जोधना अल्टर नेटिव इनर्जी सोल्यूसन इंडिया प्रा. लिमिटेड नई दिल्ली को दो- दो हजार हेक्टर पड़त भूमि के वंटन की अनुशंसा सहित प्रकरण अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रबंध संचालक म.प्र. एग्रों को भेजे गये । ज्ञात हो कि मुरैना जिले में 35 हजार हेक्टर अकृषि योग्य गैरवन पड़त भूमि उपलब्ध है । इससे पहले मित्र नेचुरल को 1006 हेक्टर, चिनोनी चम्बल को 968 हेक्टर तथा इंडिया वायो क्वेल और के.एस. ऑयल मिल को दो- दो हजार हेक्टर भूमि वंटन की अनुशंसा कर प्रकरण आगामी कार्रवाई हेतु म.प्र. एग्रों को भेजे जा चुके हैं ।

 

पंचायत मंत्री आज विभिन्न सड़कों का भूमिपूजन करेंगे

पंचायत मंत्री आज विभिन्न सड़कों का भूमिपूजन करेंगे

 

मुरैना 21 अगस्त 08/ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह 22 अगस्त को प्रात: 10 बजे मुरैना से भिंड जिले के गोहद के लिए प्रस्थान करेंगे । श्री रूस्तम सिंह गोहद में दोपहर 12 बजे से सांय 5 बजे तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत चितौरा मौ रोड से इटायली, बेहट रोड से गुहीसर, मौ बेहट रोड से जमदारा, गोहद मौ रोड से गिरगांव, मौ सेवढा रोड से किटी और गोहद- बडागढ भगौरा रोड से निमरौल मार्गों का भूमिपूजन करेंगे । पंचायत मंत्री सांय 5 बजे गोहद से प्रस्थान कर सांय 7 बजे मुरैना आयेंगे ।

 

गुरुवार, 21 अगस्त 2008

गुरूवार भी गुल, सुबह 5 बजे से बिजली पर लगा है ग्रहण

गुरूवार भी गुल, सुबह 5 बजे से बिजली पर लगा है ग्रहण

मुरैना/भिण्‍ड/श्‍योपुर 21 अगस्‍त 08, सुबह 5 बजे से गुरूवार  21 अगस्‍त को शुरू हुयी बिजली कटौती खबर लिखे जाने यालि शाम 5 बजे बजे तक रह रह कर चल रही है । अब आगे क्‍या होता है शाम और रात कैसी होगी वक्‍त बतायेगा, फिलहाल बिजली गोल है ।

चालू है बड़े बाबू , अफसरों और मंत्री के मोहल्‍ले की बिजली

बकाया आधे पौने शहर में भले ही बिजली कहर ढाती रही हो लेकिन बड़े बाबू (कलेक्‍टर साहब) और अफसरों तथा लोकल मिनिस्‍टर और अखबार वालों की बिजली चालू बनी रही । हुम्‍फ ये डेमोक्रेसी है भईये, इसमें ऐसा ही चलता है, मियां कह जूती मियां की चांद पर ऐसे ही पड़ती है । 

दलाली मुक्‍त इण्‍टरनेट सेवायें और ई प्रशासन की ओर म.प्र. सरकार ने रखे कदम, स्कूली शिक्षकों की तनख्वाह भी हुई ऑनलाईन, यूनीक कोड वेबसाईट पर, अगस्त से शुरूआत

दलाली मुक्‍त इण्‍टरनेट सेवायें और ई प्रशासन की ओर म.प्र. सरकार ने रखे कदम, स्कूली शिक्षकों की तनख्वाह भी हुई ऑनलाईन, यूनीक कोड वेबसाईट पर, अगस्त से शुरूआत

एक राय ग्‍वालियर टाइम्‍स की

यह समाचार रिलीज करने से पहले ग्‍वालियर टाइम्‍स की टीम ने इस वेबसाइट की स्थिति व गुणवत्‍ता का परीक्षण किया । हालांकि भारी बिजली कटौती के चलते कई बार व्‍यवधान आया लेकिन लोकहित में इस वेबसाइट पर टीप लिखना समीचीन व सामायिक है । अत: हम अपने पाइक वर्ग को बताना चाहेंगें । कि यह वेबसाइट म.प्र. के एजुकेशनल पोर्टल के नाम से विकसित की गयी है, वेबसाइट का डिजाइन और लोक सेवाओं की उपलब्‍धता यद्यपि अभी प्रारंभिक स्थिति में है तथा अपरिपक्‍व है किन्‍तु इसके बावजूद यह एक श्रेष्‍ठ व उपयोगी वेबसाइट है, आगे विकसित होकर संभवत: वाकई बेहतरीन ई सेवा उपलब्धि या ई प्रशासन की दिशा में मील का पत्‍थर होगी । वेबसाइट की गुणवत्‍ता बहुत उत्‍कृष्‍ट है वहीं फिलहाल केवल शिक्षकों से सम्‍बन्धित सेवाये हीं इसमें शुरू कीं गयीं हैं, आन लाइन लोक सेवाये मसलन ऑनलाइन स्‍कूल मान्‍यता आवेदन, निरीक्षण रिपोर्ट, स्‍कूल मान्‍यता स्थिति, स्‍कूल शिकायत, स्‍कूल मानदण्‍ड और ऑनलाइन स्‍कूल एडमीशन, ऑन लाइन शिक्षक हाजरी, ऑन लाइन योजनायें व कार्यक्रम आदि अभी यहॉं उपलब्‍ध नहीं हैं इसके साथ ही स्‍कूलों की स्थितियां, भौगोलिक अवस्थिति आदि जानकारीयो के साथ उनमें उपलब्‍ध सुविधायें आदि अभी यहॉं नहीं हैं । उम्‍मीद की जा सकती है कि निकट भविष्‍य में यह सब यहॉं उपलब्‍ध हो जायेगा ।

सबसे बड़ी बात इस वेबसाइट की यह है कि यह टाटा कन्‍सल्‍टेन्‍सी और भ्रष्‍ट एमपीएसईडीसी के चंगुल से बच निकली है और नेशनल इन्‍फारमेटिक्‍स सेण्‍टर (एन आई सी) ने इसे विकसित किया है, इस पर उपलब्‍ध हर सेवा निशुल्‍क तथा हर जगह से हर समय एक्‍सेसेबल है ।

एमपीऑन लाइन से बाहर रहने से उम्‍मीद है कि जनता सरकारी प्रायवेट पार्टनरशिप की लूटपाट से बची रहेगी  , वरना हमने तो म.प्र. में उम्‍मीद ही छोड़ दी थी कि म.प्र. की जनता को तथाकथित एमपी ऑन लाइन और उसके कियोस्‍कों के विषदन्‍तों से कभी राहत मिल सकेगी । पूर्णत: फ्री एक्‍सेसेबल और हर किसी के लिये फायदेमन्‍द यह वेबसाइट शीघ्र ही ग्‍वालियर टाइम्‍स की ई सेवाओं में जोड़ दी जायेगी और ग्‍वालियर टाइम्‍स के 58 लाख पाठक इसकी सेवाओं का उपयोग कर सकेगे । दलाली मुक्‍त इण्‍टरनेट सेवाओं की शुरूआत के लिये सरकार को साधुवाद । - सम्‍पादक ग्‍वालियर टाइम्‍स डॉट कॉम      

 

इन्टरनेट के मौजूदा दौर का फायदा अब प्रदेश के स्कूली शिक्षकों को भी अपनी तनख्वाह से जुड़ी जानकारियों के लिए मिलने जा रहा है। राज्य सरकार की इस सिलसिले में खास कोशिशों के चलते शिक्षा विभाग के अधीन सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की तनख्वाह इसी महीने से ऑनलाईन हो रही है। ये लोग इस मकसद से उन्हें आवंटित किए गए यूनीक कोड एन.आई.सी. की वेबसाईट पर देख सकेंगे।

स्कूली शिक्षा के सारे कर्मचारी जिनमें शिक्षक, प्राचार्य और लिपिक शामिल हैं, अब उनके वेतन की जानकारी कम्प्यूटरीकृत कर दी गई है। अब तक हो यह रहा था कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के सवा तीन हजार से ज्यादा प्राचार्य बतौर आहरण संवितरण अधिकारी की हैसियत से शिक्षकों के वेतन का कामकाज मेन्युअल के जरिए कर रहे थे। इसके चलते हर महीने इस काम में दस-बारह दिन लग जाते थे। अनावश्यक विलंब और वेतन की जानकारी हासिल करने की दिक्कतें आम बात थीं। बरसों से चली आ रही इस पुरानी परम्परा पर अब विराम लगा दिया गया है।

ताजा इंतजाम के जरिए वेतन का पत्रक अब ऑनलाईन तैयार होगा। इससे हर महीने कर्मचारियों के पे-बिल तैयार करने की कवायद नहीं करनी पड़ेगी। सिर्फ उस जानकारी को अपडेट किया जाएगा जिसके तहत किसी कर्मचारी की वार्षिक वेतन वृध्दि लगना है या फिर ऐसे कर्मचारी की जानकारी जिसकी पदस्थापना में परिवर्तन किया गया है। शिक्षकों के वेतन की जानकारी ऑनलाईन होने का एक और फायदा यह होगा कि विभाग को स्कूलवार भरे हुए पद और बजट एवं व्यय की सूचना भी मिलती रहेगी। इन जानकारियों की ताजा स्थिति जिला, संभाग और राज्य स्तर पर ऑनलाईन मिल जाएगी। इसके चलते स्कूलों में शैक्षिक, प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन भी पुख्ता किया जा सकेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग में कम्प्यूटरीकरण के कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का जिम्मा राज्य शिक्षा केन्द्र के आयुक्त श्री मनोज झालानी को सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि अगले चरण में शिक्षकों की सेवा पुस्तिका के कम्प्यूटरीकरण पर भी विचार शुरू हो चुका है। ससे कर्मचारियों की पदस्थापना, क्रमोन्नति और वित्तीय स्वत्वों के मामले निपटाने में भी गति आ जाएगी। इसी तरह विभाग की वरिष्ठता सूची भी ऑनलाईन हर वक्त उपलब्ध रहेगी।

फिलहाल स्कूली शिक्षा के कर्मचारियों को आवंटित किए गए यूनीक कोड का इस्तेमाल भविष्य में उनसे जुड़े हर प्रशासकीय काम में होगा। कर्मचारी इसके जरिए सिर्फ एक क्लिक कर अपने वेतन के ब्यौरे, वेतन पर्ची और सालाना आमदनी के पत्रक को इंटरनेट पर देख सकेंगे। एन.आई.सी. की इस जानकारी वाली वेबसाईट का पता http://demo.mp.nic.in/educationportal रहेगा।

 

बुधवार, 20 अगस्त 2008

स्‍व.राजीव गांधी के जन्‍म दिवस पर विशेष आलेख जरूरत अँगूठा छाप नेताओं से छुटकारे की, अब वक्‍त पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का- 1 भाग-1

स्‍व.राजीव गांधी के जन्‍म दिवस पर विशेष आलेख

जरूरत अँगूठा छाप नेताओं से छुटकारे की, अब वक्‍त पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का- 1

भाग-1 

नरेन्‍द्र सिंह तोमर 'आनन्‍द'

यह विडम्‍बना ही है देश की हम एक अरब से ऊपर की संख्‍या में भारतवासी आज भी देश के लिये साक्षरता अभियान, सर्व शिक्षा मिशन और अनौपचारिक शिक्षा की वैशाखीयों का सहारे चलने को मजूबर हैं, यह शर्मनाक और अफसोस जनक तथ्‍य है कि भारत जो युगों से कई मामलों में विश्‍व गुरू रहा, आज अपने नौनिहालों और भावी कर्णधारों को विशेष अभियान और योजनाओं के जरिये शिक्षित करने पर मजबूर है ।

भारत को आजाद हुये 62 साल गुजर गये, देश की भाषा में कहा जाये तो आजादी सठिया गई, हमारे लालू प्रसाद जी की भाषा में कहें तो साठा सो पाठा ( साठ के बाद आदमी पठ्ठा होता है) खैर जो भी है, एक लम्‍बा अन्‍तराल गुजर चुका है और यूं ही महज मसखरी में गुजर चुका है, केवल अधुनातन और नवीन प्रयोगों में ही हमारी सरकारें और नेता वक्‍त जाया करते रहे हैं, देश अभी तक केवल एक प्रयोगशाला के मानिन्‍द ही व्‍यवहृत होता रहा है ।

कोई दो बरस पहले मैंने अंग्रेजी में एक आलेख लिखा था जिसमें प्रश्‍न उठाया था कि आखिर कब तक भारत विकासशील ही बना रहेगा और विकासशील देश की संज्ञा से उच्‍चारित होता रहेगा, आखिर वह सुबह कब आयेगी जब भारत को विकसित देश कहा जा सकेगा । आज भारत विकसित देश क्‍यों नहीं हो सकता । मुझे खुशी है कि मेरी बात का इशारा भारत सरकार समझ गयी और कई एक बातें और कई कदम सरकार के कुछ इस तरह उठे कि विकासशील से विकसित भारत में तब्‍दीली की परिभाषा हेतु पर्याप्‍त माद्दा रखते थे । हॉं ठीक हैं, कुछ हुआ मगर न तो यह संतोषजनक है और न पर्याप्‍त, अभी तो महज एक शुरूआती नींव का पत्‍थर है और बगैर इन्‍तजार के अब धड़ाधड़ कदम दर कदम आगे बढ़ते हुये नयी बुनियाद पर भारत की नयी इमारत और नयी तस्‍वीर गढ़नी होगी ।

बिना लाग लपेट के कहें तो स्‍वामी विवेकानन्‍द के सूत्र के तुरन्‍त अमल में लाना होगा । उत्तिष्‍ठत, जागृत । इसमें श्रीकृष्‍ण का चेतना व कर्मयोग का सूत्र मिलाते हुये जेम्‍स एलन के परिच्‍छेद को उद्धृत कर अपनी परिभाषा स्‍वयं हि तुरन्‍त और तत्‍काल गढ़नी होगी, भारत को, भारत के नौजवानों को तुरन्‍त तत्‍काल चेतना होगा, जागना होगा और उठ खड़ा होना होगा फिर तत्‍काल ही सक्रिय भी होना होगा ।

देश पहले ही काफी फिजूल वक्‍त बर्बाद कर चुका है, भारत को स्‍वतंत्रता प्राप्ति के पश्‍चात आज तक महज प्रयोगशाला बना कर ही तमाम योजनाओं और नीतियों की अदल बदल कर केवल परीक्षण ही किया जाता रहा है, परिणाम यह हुआ कि न तो सरकारें और न नेता ही न जनता का भला कर पाये, तथाकथित कल्‍याण या लोक कल्‍याण या जन कल्‍याण महज एक नाटक नौटंकी ही बना रह गया । समूचे देश को प्रयोगशाला के रूप में नित नये प्रयोग कर सरकारें केवल देश और जनता का महज अहित ही करतीं रहीं, तमाशा यह है कि निष्‍कर्ष या ठोस परिणाम आज तक किसी भी प्रयोग के हमारे पास नहीं हैं ।

प्रयोगधर्मीयों ने देश को 62 साल तक नुकसान पहुंचाया है, अब वक्‍त आ गया है इनको एक झटके से उखाड़ने और भारत से बाहर धकेलने का ।

लोकतंत्र मजाक और तमाशा बनकर नेताओं की मसखरी का साधन मात्र हो गया । सरकारें और प्रयोगधर्मी नेताओं के साथ मिल कर प्रयोग करते रहे, योजनायें बदलतीं रहीं, नीतियां बदलतीं रहीं कोई योजना छ महीने चली तो कोई चल ही नहीं पायी, कोई बदल गयी कियी का नाम बदल गया किसी को नई बोतल में पुरानी शराब की तरह कई बार परोसा गया । पिछले कई साल से यह नौटंकी तमाशा भारत में चलता आ रहा है, अब एक झटके में बन्‍द हो जाना चाहिये सब । वरना हम विकासशील देश से कभी भी विकसित भारत नहीं बन सकते ।

मैं एक दृष्‍टान्‍त देता हूं, अधिक आसानी से विषय को समझा जा सकेगा ।

मैं उन दिनों वर्ष 1995 में नेशनल नोबल यूथ अकादमी के लिये शिक्षा और रोजगार पर एक वीडियो फिल्‍म तैयार करवा रहा था (यह फिल्‍म अभी हमारे पास है) मेरे मस्तिष्‍क में बेरोजगारों के लिये शिक्षा प्रशिक्षण और रोजगार पर महत्‍वपूर्ण योजनाओं और उनसे कैसे बेरोजगार युवा लाभ उठा सके यह कन्‍सेप्‍ट था और इसी विषय पर हम काम कर रहे थे । फिल्‍म में प्रायवेट व्‍यावसायिक व रोजगारोन्‍मुखी प्रशिक्षण केन्‍द्रों, तकनीकी प्रशिक्षण केन्‍द्रों, एजुकेशनल कोचिंगों के अलावा सरकारी कार्यालय प्रमुखों तथा, शिक्षा विभाग और प्रशिक्षण संस्‍थान, रोजगार कार्यालय, युवाओं के लिये कार्यरत सरकारी संस्‍थाओं मसलन नेहरू युवा केन्‍द्र, स्‍वयंसेवी संगठनों व संस्‍थाओं सहित कुछ बेरोजगारों के इण्‍टरव्‍यू शूट किये जाने थे साथ ही बेरोजगारी से संबंधित और प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों और संगठनों व संस्‍थानों को भी इसमें शामिल करना था । पहले इसे लघु फिल्‍म के रूप में बनाने का विचार था सोचा कि डाक्‍यूमेण्‍ट्री रिलीज कर देंगें लेकिन फिल्‍म शूट होते होते कई ऐंसीं अद्भुत चीजें निकल कर सामने आयीं कि फिल्‍म अपने आप ही बहुत लम्‍बी और अच्‍छी बन पड़ी, बस दिक्‍कत यह हुयी कि हम जितना भी सरकारी पक्ष को इकठ्ठा करके लाये, वह सारा समूचा ही निगेटिव और एब्‍सर्ड हो रहा था ।

सरकारी अधिकारीयों ने जहॉं अपने इण्‍टरव्‍यूओं में उल्‍टे सीधे बयान दे दिये थे वहीं कहीं से कोई उपयोगी यानि काम की बात निकल कर सामने नहीं आयी ।

सरकारी कार्यालयों में 98 फीसदी यह हालत थी कि उन्‍हें अपने विभाग की योजनाओं और हितग्राही मूलक किसी भी कार्यक्रम की लेशमात्र भी जानकारी नहीं थी । और वे काम की बात बताने के बजाय इधर उधर बहक जाते थे, हमें कैमरा बार बार रूकवा कर दोबारा दोबारा सीन शूट करने पड़ते थे, अधिकारी बार बार अपने बाबूओं को बुलाते और पूछते क्‍यों भई एक वो योजना भी तो थी, उसका क्‍या हुआ चल रही है कि बन्‍द हो गयी , बाबू सिर खुजाता, और कहता सर पता नहीं हैं, रोज तो योजना बदल जातीं हैं, कहॉं तक ध्‍यान रखें अब देखना पड़ेगा कि चल रही है कि नहीं । बाबू फाइलों में योजनायें और कार्यक्रम खंगालते, खोज खोज कर पगला जाते मगर योजनाओं के न सिर मिल पाते न पैर । राम राम कह कर जैसे तैसे हमने फिल्‍म पूरी की और चन्‍द दिनों के भीतर जान लिया कि इस देश में बेरोजगारों कैसे उद्धार हो रहा है ।

हमारा कैमरा जब शिक्षा विभाग में पहुँचा (सीन मजेदार और देखने लायक हैं) तब उपसंचालक शिक्षा का जिला स्‍तर पर कार्यालय होता है अब आजकल इसे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कहा जाता है ।

कूड़े कबाड़ के मानिन्‍द योजनायें कहीं बस्‍तों में बन्‍द दबी पड़ीं तो कहीं योजना का अता पता नहीं, पूरा शिक्षा विभाग खंगाल डाला कहीं कोई योजना नहीं मिली । कहीं शराब के दौर (कैमरा सभी कक्षों में अचानक घुमाया गया था) तो कहीं सिगरेटों के कश, कहीं टेबलों पर लात पसारे बैठे मक्‍खीयां मार रहे बाबू तो कहीं, मॉं बहिन की गालीयों से आपस में उलझ रहे सरकारी कर्मचारी, कहीं रिश्‍वत की खलेआम मांग तो कहीं कक्षों के बंटवारे को लेकर विवाद, कहीं अटैचमेण्‍ट के लिये मारामारी तो कहीं नियुक्ति और ट्रान्‍सफर की सेटिंग । बड़ा ही अजीबो गरीब सा माहौल था । (मुझे बाद में जिला पर्यावरण समिति के तहत डेढ़ साल तक इसी कार्यालय में बैठने और काम करने का मौका मिला, तब मैंने अपनी रिसर्च बहुत अधिक पुख्‍ता ढंग से की) लेकिन मैं दंग था सारा सब कुछ देख कर ।

कुल मिला कर निष्‍कर्ष यह है कि रोजाना आने वाली और बदलती रहने वाली योजनाओं का हितग्राही तक खैर क्‍या लाभ पहुँचता होगा जब सम्‍बन्धित विभाग या उसके बाबूओं को भी उनकी जानकारी न हो, अफसर लोक कल्‍याण और उसकी योजनाओं के प्रति सर्वथा निरक्षर और अज्ञानी हों । खैर ये तब की बात है जब देश में इण्‍टरनेट नहीं था और इतने अधिक संसाधन व स्‍त्रोत नहीं थे तथा देश पूरी तरह आश्रित होकर सरकारी अफसरों को भगवान और बाबूओं को महाराज मान कर पूजता था तथा काम की किसी योजना की जानकारी मात्र के लिये सरकारी कार्यालयों और बाबूओं अफसरों को रिश्‍वत भी देता था उनके घर चक्‍कर मार मार कर चकरघिन्‍नी हो जाता था । आज इण्‍टरनेट ने मामला पलट उलट दिया है, अब जानकारीयां व सूचनायें अपनी पहुँच खेत, गॉंव और घरों तक बना चुकीं हैं, अब अधिकतर चीजों के लिये दफ्तरों और अफसर बाबूओं के चक्‍कर नहीं लगाने पड़ते ।

अब योजना की तस्‍वीर भी दिख जाती है, और उसकी ताबीर भी । उसकी तब्‍दीली भी साफ दृष्टिगोचर होती है और अर्जी फर्जीवाड़ा और फिजूल प्रयोगधर्मिता तथा नकली नाटक नौटंकी भी साफ दिख जाती है ।

इण्‍टरनेट ने काफी कुछ बदल दिया है, नये भारत की तस्‍वीर भी रचना शुरू कर दी है । लेकिन राकेट में बैठकर अंतरिक्ष व ग्रहों की सैर करते इस विश्‍व में अब भी कई मूसलपंथी हैं जो आज तक बैलगाड़ी का पहिया थामें हैं औंर माया मोहवश उसे छोड़ना ही नहीं चाह रहे, इन कूप मण्‍डूकों ने भारत का बहुत नुकसान किया है । घुन की तरह देश को खाया है । देशभक्ति की खाल में भ्रष्‍ट और देशद्रोहीयों की पूरी एक फौज छिपी बैठी है । जल्‍द से जल्‍द और तुरन्‍त भारत को इन तत्‍वों से मुक्ति पानी होगी ।

भला कौन ऐसा देशभक्‍त होगा, जो भारत को विकासशील से विकसित भारत में बदलते नहीं देखना चाहेगा, या कौन ऐसा देश का सपूत होगा जो भारत में लगे दीमक या घुन रूपी भ्रष्‍टाचार को सतत रहने देना चाहेगा, इसके बावजूद देशभक्ति और अलां फलां सेनानी का राग अलापने और देश को कुयें में ढकेलने या 'खाओ और खाने दो ' के सिद्धान्‍त को निरन्‍तर रखने के हामी हैं तो ऐसे लोगों को तो देश भक्‍त कहना या मानना ही सबसे बड़ा देश द्रोह है ।

जो भी भारतवासी भ्रष्‍ट है, रिश्‍वत लेता है वह कतई देशभक्‍त तो ही नहीं सकता उसे भारतीय तो कहा ही नहीं जा सकता । रिश्‍वत देना मजबूरी हो सकती है लेकिन रिश्‍वत लेना तो क्‍लीयरकट देशद्रोह है ।

अगर इस प्रकार के लोगों की बर्दाश्‍तगी जारी रही तो और हम इन तत्‍वों को यदि इस देश में रहने देते हैं तो सबसे बड़े देशद्रोही तो हम सब ही हैं ।

 

अगले अंक में जारी ............