मंगलवार, 9 मार्च 2010

पंचायतों का सशक्‍तीकरण

पंचायतों का सशक्‍तीकरण

सुधीर तिवारी

पंचायती राज संस्थायें भारत में लोकतंत्र की मेरूदंड है। निर्वाचित स्थानीय निकायों के लिए विकेन्द्रीकृत, सहभागीय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढावा देने और उन्हें सार्थक रूप प्रदान करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने अनेक कदम उठाए हैं।

 

पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष (बीआरजीएफ)

 

 इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त विकेन्द्रीकृत, सहभागीय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढावा देना है। यह विकास के अन्तर को पाटता है और पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और उसके पदाधिकारियों की क्षमताओं का विकास करता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में बीआरजीएफ अत्यधिक उपयोगी साबित हुआ है और पीआरआई'ज तथा राज्यों ने योजना तैयार करने एवं उन पर अमल करने का अच्छा अनुभव प्राप्त कर लिया है। बीआरजीएफ के वर्ष 2009-10 के कुल 4670 करोड़ रुपए के योजना परिव्यय में से 31 दिसबर, 2009 तक 3240 करोड़ रुपए जारी किये जा चुके हैं।

 

ई-गवर्नेंस परियोजना

 

 एनईजीपी के अन्तर्गत ईपीआरआई की पहचान मिशन पध्दति की परियोजनाओं के ही एक अंग के रूप में की गई है। इसके तहत विकेन्द्रीकृत डाटाबेस एवं नियोजन, पीआरआई बजट निर्माण एवं लेखाकर्म, केन्द्रीय और राज्य क्षेत्र की योजनाओं का क्रियान्वयन एवं निगरानी, नागरिक-केन्द्रित विशिष्ट सेवायें, पंचायतों और व्यक्तियों को अनन्य कोड (पहचान संख्या), निर्वाचित प्रतिधिनियों और सरकारी पदाधिकारियों को ऑन लाइन स्वयं पठन माध्यम जैसे आईटी से जुड़ी सेवाओं की सम्पूर्ण रेंज प्रदान करने का प्रस्ताव है। ईपीआरआई में आधुनिकता और कार्य कुशलता के प्रतीक के रूप में पीआरआई में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने और व्यापक आईसीटी (सूचना संचार प्रविधि) संस्कृति को प्रेरित करने की क्षमता है।

 

 ईपीआरआई में सभी 2.36 लाख पंचायतों को तीन वर्ष के लिए 4500 करोड़ रुपए के अनन्तिम लागत से कम्प्यूटरिंग सुविधाएं मय कनेक्टिविटी (सम्पर्क सुविधाओं सहित) के प्रदान करने की योजना है। चूंकि पंचायतें, केन्द्र राज्यों के कार्यक्रमों की योजना तैयार करने तथा उनके क्रियान्वयन की बुनियादी इकाइयां होती हैं, ईपीआरआई, एक प्रकार से, एमएमपी की छत्रछाया के रूप में काम करेगा। अत: सरकार, ईएनईजीपी के अन्तर्गत ईपीआरआई को उच्च प्राथमिकता देगी। देश के प्राय: सभी राज्यों (27 राज्यों) की सूचना और सेवा आवश्यकताओं का आकलन, व्यापार प्रक्रिया अभियांत्रिकी और विस्तृत बजट रिपोर्ट पहले ही तैयार की जा चुकी हैं और परियोजना पर अब काम शुरू होने को ही है।

 

महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण

 

 राष्ट्रपति ने 4 जून, 2009 को संसद में अपने अभिभाषण में कहा था कि वर्ग, जाति और लिंग के आधार पर अनेक प्रकार की वर्जनाओं से पीड़ित महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के फैसले से अधिक महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश का अवसर प्राप्त होगा। तद्नुसार मंत्रिमंडल ने 27 अगस्त, 2009 को संविधान की धारा 243 घ को संशोधित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया ताकि पंचायत के तीनों स्तर की सीटों और अध्यक्षों के 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये जा सकें। पंचायती राज मंत्री ने 26 नवम्बर, 2009 को लोकसभा में संविधान (एक सौ दसवां) सशोधन विधेयक, 2009 पेश किया।

 

 

 वर्तमान में, लगभग 28.18 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में से 36.87 प्रतिशत महिलायें हैं। प्रस्तावित संविधान संशोधन के बाद निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 14 लाख से भी अधिक हो जाने की आशा है।

 

पंचायती राज संस्थाओं को कार्यों, वित्त और पदाधिकारियों का हस्तान्तरण

 

 पंचायतें जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक संस्थायें हैं और कार्यों, वित्त तथा पदाधिकारियों के प्रभावी हस्तांतरण से उन्हें और अधिक सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है। इससे पंचायतों द्वारा समग्र योजना बनाई जा सकेगी और संसाधनों को एक साथ जुटाकर तमाम योजनाओं को एक ही बिन्दु से क्रियान्वित किया जा सकेगा।

 

ग्राम सभा का वर्ष

 

 पंचायती राज के 50 वर्ष पूरे होने पर 2 अक्तूबर, 2009 को समारोह का आयोजन किया गया। स्वशासन में ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के महत्व को देखते हुए 2 अक्तूबर, 2009 से 2 अक्तूबर, 2010 तक की अवधि को ग्राम सभा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। ग्राम सभाओं की कार्य प्रणाली में प्रभाविकता सुनिश्चित करने के सभी संभव प्रयासों के अतिरिक्त, निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं--पंचायतों, विशेषत: ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण के लिए आवश्यक नीतिगत, वैधानिक और कार्यक्रम परिवर्तन, पंचायतों में अधिक कार्य कुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु सुव्यवस्थित प्रणालियों और प्रक्रियाओं को और ग्राम सभाओं तथा पंचायतों की विशिष्ट गतिविधियों को आकार देना और ग्राम सभाओं तथा पंचायतों की विशिष्ट गतिविधियों के बारे में जन-जागृति फैलाना।

 

न्याय पंचायत विधेयक, 2010

 

 वर्तमान न्याय प्रणाली, व्ययसाध्य, लम्बी चलने वाली प्रक्रियाओं से लदी हुई, तकनीकी और मुश्किल से समझ में आने वाली है, जिससे निर्धन लोग अपनी शिकायतों के निवारण के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा नहीं ले पाते। इस प्रकार की दिक्कतों को दूर करने के लिए मंत्रालय ने न्याय पंचायत विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित न्याय पंचायतें न्याय की अधिक जनोन्मुखी और सहभागीय प्रणाली सुनिश्चित करेंगी, जिनमें मध्यस्थता, मेल-मिलाप और समझौते की अधिक गुंजाइश होगी। भौगोलिक और मनोवैज्ञानिक रूप से लोगों के अधिक नजदीक होने के कारण न्याय पंचायतें एक आदर्श मंच संस्थायें साबित होंगी, जिससे दोनों पक्षों और गवाहों के समय की बचत होनी, परेशानियां कम होंगी और खर्च भी कम होगा। इससे न्यायपालिका पर काम का बोझ भी कम होगा।

 

पंचायत महिलाशक्ति अभियान

 

 यह निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर) के आत्मविश्वास और क्षमता को बढाने की योजना है ताकि वे उन संस्थागत, समाज संबंधी और राजनीतिक दबावों से ऊपर उठकर काम कर सकें, जो उन्हें ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में सक्रियता से भाग लेने में रोकते हैं। बाइस राज्यों में कोर (मुख्य) समितियां गठित की जा चुकी हैं और राज्य स्तरीय सम्मेलन हो चुके हैं। योजना के तहत 9 राज्य समर्थन केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है। ये राज्य हैं-- आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, सिक्किम, केरल, पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह। योजना के तहत 11 राज्यों में प्रशिक्षण के महत्त्व के बारे में जागरूकता लाने के कार्यक्रम हो चुके हैं। ये राज्य हैं-- आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ, ग़ोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, केरल, असम, सिक्किम और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।

 

 संभागीय स्तर के 47 सम्मेलन 11 राज्यों (छत्तीसगढ, ग़ोवा, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह) में आयोजित किए गए हैं। गोवा और सिक्किम में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और निर्वाचित युवा प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर्स ईवाईआर्स) के राज्य स्तरीय संघ गठित किये जा चुके हैं।

 

ग्रामीण व्यापार केन्द्र (आरबीएच) योजना

 

 भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक विकास को ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से पहुंचाने के लिए 2007 में आरबीएच योजना शुरू की गई थी। आरबीएच, देश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकास का एक ऐसा सहभागीय प्रादर्श है जो फोर पी अर्थात पब्लिक प्राईवेट पंचायत पार्टनरशिप (सरकार, निजी क्षेत्र, पंचायत भागीदारी) के आधार पर निर्मित है। आरबीएच की इस पहल का उद्देश्य आजीविका के साधनों में वृध्दि के अलावा ग्रामीण गैर-कृषि आमदनी बढाक़र और ग्रामीण रोजगार को बढावा देकर ग्रामीण समृध्दि का संवर्धन करना है।

 

 राज्य सरकारों के परामर्श से आरबीएच के अमल पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करने के लिए 35 जिलों का चयन किया गया है। संभावित आरबीएच की पहचान और उनके विकास के लिए पंचायतों की मदद के वास्ते गेटवे एजेन्सी के रूप में काम करने हेतु प्रतिष्ठित संगठनों की सेवाओं को सूचीबध्द किया गया है। आरबीएच की स्थापना के लिए 49 परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। भविष्य में उनका स्तर और ऊंचा उठाने के लिए आरबीएच का मूल्यांकन भी किया जा रहा है।

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वि.जोशी अवस्थी बिष्ट


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रविवार, 7 मार्च 2010

मध्‍यप्रदेश हाईस्‍कूल परीक्षा का कल होने वाला गणित का पेपर आउट

मध्‍यप्रदेश हाईस्‍कूल परीक्षा का कल होने वाला गणित का पेपर आउट

केवल 200 स्‍पये में सड़क पर खुलेआम बिका पेपर, छात्र ठगे गये या सही में पर्चा आउट हुआ कल पता लगेगा

मुरैना 07 मार्च 2010, आज मुरैना में सड़कों पर मध्‍यप्रदेश माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल का कल होने वाला गणित का पर्चा मात्र 200 रूपये में धड़ल्‍ले से सड़कों पर बिका । इससे पहले हाई स्‍कूल का संस्‍कृत व इण्‍टरमीडियेट का हिन्‍दी का पर्चा भी इसी तरह सड़कों पर बिका था । इस समय अन्‍य बिक रहे पर्चों में इण्‍टर के गणित व बायलोजी के पर्चे प्रमुख हैं यह पर्चे 500 रूपये में बेचे जा रहे हैं ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स को प्राप्‍त हुये कल होने वाले हाईस्‍कूल के गणित के पर्चे की प्रति प्राप्‍त हुयी है और पूरा पर्चा प्राप्‍त हुआ है । अब देखना यह है कि कल यही पर्चा परीक्षा में आता है या कोई गिरोह विशेष बच्‍चों को गुमराह कर तगड़ी ठगी कर रहा है , कुछ भी हो मामला गंभीर है । और माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल की पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में आ गयी है ।

हमें प्राप्‍त पर्चे के चार प्रश्‍न हम यहॉं मात्र उदाहरण के तौर पर दे रहे हैं , हमारे पास पूरा पर्चा सुरक्षित है ।

प्रश्‍न कुल प्रश्‍न 17 बताये गये हैं । प्रश्‍न वस्‍तुनिष्‍ठ प्रश्‍न (3)  एक समचतुर्भुज के विकर्ण 15 मीटर व 8 मीटर हैं तो उसका क्षेत्रफल 1. 120 वर्ग मीटर 2. 60 वर्गमीटर 3. 180 वर्गमीटर  (5) एक भवन के पाद से 25 मीटर की दूरी से भवन की शिखर का उन्‍नयन कोण 45 डिग्री है भवन की ऊंचाई होगी 1. 50 मीटर 2. 25 मीटर 3. 25/2 मीटर 4. 25√3 मीटर

प्रश्‍न 11 दो अंको वाली संख्‍या के अंको का योग 7 है । यह संख्‍या अंकों के पलटने पर प्राप्‍त संख्‍या के दुगुने से 2 अधिक है वह संख्‍या ज्ञात कीजिये ।

अथवा

2 कुर्सी और 3 मेजों का मूल्‍य 800 रूपया है, और 4 कुर्सी तथा 3 मेजों का मूल्‍य 1000 रूपया है , 3 कुर्सी और 3 मेजों का मूल्‍य ज्ञात कीजिये ।

प्रश्‍न 9 दो घन जिनकी प्रत्‍येक भुजा 15 से.मी. है को आपस में सिरों पर जोड़ा गया है, इस प्रकार प्राप्‍त घनाभ का सम्‍पूर्ण पृष्‍ठ ज्ञात कीजिये ।

अथवा

एक ही त्रिज्‍या व एक ही ऊंचाई वाले बेलन व शंकु के अनुपात ज्ञात कीजिये ।

 

प्रश्‍न 13 एक बेलन के आधार की त्रिज्‍या और ऊंचाई में 2:3 का अनुपात है यदि बेलन का आयतन 1617 घन से.मी. है तो बेलन का सम्‍पूर्ण पृष्‍ठ ज्ञात कीजिये ।

 

गुरुवार, 4 मार्च 2010

सचिन: क्रिकेट के महानायक- राकेश अचल

सचिन: क्रिकेट के महानायक

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल के वरिष्‍ठ एवं विख्‍यात पत्रकार हैं )

 

      दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर मे एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलते हुए सचिन रमेश तेंदुलकर ने एक नया इतिहास लिख दिया। सचिन ने नाबाद दोहरा शतक लगाकर साबित कर दिया कि क्रिकेट की दुनिया में वे इस सदी के सबसे बडे महानायक है।

      क्रिकेट इतिहास में सचिन ने जो किया, वह पहले कभी नही हुआ। सचिन की इस उपलब्धि पर क्रिकेट के समीक्षको ने सचिन की क्रिकेट का भगवान तक कह डाला। वे लोग जो कल तक सचिन के एनर्जी लेबल को लेकर आशंकित थे अब सचिन के सबसे बडे प्रसंशक है।

      सचिन की आतिशी पारी के गवाह ग्वालियर के रूपसिंह स्टेडियम में 24 फरवरी 2010 को जो हुआ सो अविश्वसनीय, अकल्पनीय और अकथनीय था। मै सचिन को पहले दिन से खेलते देख रहा हूं। मैने सचिन को लडखडाते और सम्हलते कई बार देखा है। सचिन को रनों का पहाड खडा करते भी देखा है, लेकिन 24 फरवरी को सचिन ने रनों का एवरेस्ट तान दिया। रनों के इस एवरेस्ट को दक्षिण अफ्रीका की फौलादी क्रिकेट टीम भी नही लांघ सकी।

      भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता ने रातों रात कई खिलाडियो को साधारण खिलाडी से नायक और महानायक बनाया है। भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी इसका उदाहरण है। धोनी सचिन की कप्तानी में खेले है अब अपनी कप्तानी में सचिन को खिला रहे है। इससे सचिन का न तो रूतबा कम हुआ न उन्हे कोई चुनौती मिली। वे निरंतर क्रिकेट का इतिहास लिखते जा रहे है।

      भारतीय क्रिकेट के महानायक कपिल देव भी सचिन की इस उपलब्धि पर लट्टू है। उन्हे लगता है कि सचिन ने जो किया वह केवल सचिन ही कर सकते है। कपिल को सचिन की तुलना इग्लेंड में क्रिकेट के देवता माने जाने वाले सर ब्रेडमेन से करने में संकोच होता है। कपिल कहते है कि मैने सर ब्रेड मैन को खेलते नही देखा। मैने सचिन को देखा है इसलिए मे कह सकता हूं कि सचिन सचमुच महान है।

सचिन तेंदुलकर को तलाशने और तराशने का काम कर चुके भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर तो सचिन के दोहरे शतक के बाद इतने ज्यादा अभिभूत हो गए है कि कह बैठे कि मै सचिन के पैर छू लूंगा। यह अतिरेक है ा सचिन के पैर छूने की जरूरत नही है जरूरत है सचिन के हाथ चूमने की। क्योकि सारा ज्यादू इन्ही मजबूत हाथो का है।

      24 फरवरी 2010 को देश के हर समाचार चैनल और अखबार सचिन को विचलित न कर दे इसलिए आवश्यक है कि सचिन को सचिन ही बनाकर रखा जाए। सचिन को भगवान बना देने से बात नही बनेगी। भगवान क्रिकेट नही खेलते। क्रिकेट सचिन खेलते है। उन्हे अगले विश्वकप तक क्रिकेट खेलना है। अत: सचिन की पीठ थपथपाइए, शाबासी दी जाए, अभिनंदन किया जाए। कीजिए।

      सचिन की उपलब्धियों पर देश को गर्व है। हम भारत के लोग सचिन को लेकर इतरा सकते है। देश की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के अलावा प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के भी सचिन को बधाईया दी है। पूरा देश सचिन की उपलब्धि की खुशिया मना रहा है। रोशनी की जा रही है जाहिर है कि सचिन अब सिर्फ एक क्रिकेटर नही बल्कि एक किंवदंती बन गए है सचिन देश की थाती है। सचिन पर पूरे देश को नाज है।

      दरअसल सचिन के बल्ले से निकलने वाले रन किसी भूखे का पेट नही भर सकते, लेकिन किसी भी भूखे की आंखो में सचिन के रन देख कर चमक जरूर आ जाती है। यही सचिन की कामयाबी है। सचिन ने क्रिकेट जीवन में 17 हजार से ज्यादा रन बनाए। 47 शतक ठोके। हमारी कामना है कि उनका रनो की खातिर शुरू किया गया अश्वमेघ यज्ञ लगातार चलता रहे-चलता रहे (भावार्थ)

मकबूल पर फिदा है हिंदुस्तान- राकेश अचल

मकबूल पर फिदा है हिंदुस्तान

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल के वरिष्‍ठ एवं विख्‍यात पत्रकार हैं )

      मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन फिर चर्चा में है इस बार चर्चा की वजह हुसैन का ब्र नही बल्कि उन्हे कतर गणराज्य की ओर से पेश की गई नागरिकता है।

      95 वर्ष के मकबूल फिदा हुसैन भारत मे जन्मे है। उनके कैनवास पर सातो रंग पूरी शिद्दत के साथ सांस लेते है। मकबूल साहब अपनी मौलिकता की वजह से सदैव विवादो में रहते है। कभी विवाद की जड़ उनका अपना सौदंर्यबोध होता है, तो कभी भारतीय मान्यताओं, आस्थाओं को लेकर उकेरी गई आकृतियां।

      मकबूल फिदा हूसैन वर्षो से पेरिस में रह रहे है। भारत के कट्टरवादी हिंदू संगठन कई बार मकबूल साहब को कबूल करने के बजाय उन्हे नकार चुके है। उनके पुतले जला चुके है, गिरफ्तार की मांग कर चुके है। मकबूल फिदा हुसैन पर आरोप है उन्हे हिंदू देवी देवताओ की आपत्जिनक आकृतियां बनाकर उनका मजाक उडाया।

मकबूल साहब जिस मजहब से ताल्लुक रखते है, उसमें बुतपरस्ती की साफ मुमानियत है। बावजूद इसके मकबूल फिदा हुसैन ने अपनी पूरी उम्र कागजो पर बुत बनाने में खर्च कर दी। कभी  उनके बुश से पशु-पक्षी जीवित हुए तो कभी जीवन की जटिल जाएं। कभी उन्होने नारी सौदंर्य को गजगमिनी बनाकर उकेरा तो कभी भारतीय देवी देवताओं की नृत्य करती मुद्राएं। इस पर मकबूल का विरोध करने वालो से पूछा जाना चाहिए कि क्या कोई व्यक्ति भारतीय दर्शन को समझे बिना यह सब कर सकता है?

      मकबूल फिदा हुसैन अगर अश्लील होते, असामान्य होते,  अराजक होते तो क्या दुनिया उनकी कृतियों को हीरे-जवाहरात की कीमत पर खरीदती? शायद नहीं। लेकिन मकबूल के हर केनवास की कीमत है। यह कीमत ही साबित करती है कि मकबूल के हर रंग में इंसानियत की जिंदगी पर फिदा होने की ताकत देने का माद्दा है।

      जिंदगी को अपने ठंग से जीने वाले इस महान और सर्वकालिक कलाकार पर पूरा देश गर्व करता है। मकबूल साहब पूरी दुनियां में भारतीय कला का प्रतिनिधित्व करते है। कला के माध्यम से जीवन मूल्यो को समझने परखने की अंर्तदृष्टि किसी भी कट्टरपंथी के पास नही होती। अगर होती तो मकबूल फिदा हुसैन को गरियाया नहीं जाता। धमकाया नही जाता।

      भारत में फिलहाल दोहरी नागरिकता का प्रावधान नही है। इसलिए मकबूल साहब के लिए कतर की नागरिकता कबूल करना उचित नही है। वे अपनी सरजमीन पर आकर सुकून से रह सकते है। यह मुल्क उनका अपना है, वे मुल्क के अपने है।

      जो लोग मकबूल फिदा हुसैन को जानते है उन्हे पता है कि वे आम हिंदुस्तानी से कहीं ज्यादा समर्पित हिंदुस्तानी है। उन्होने एक बार भी ऐसा नहीं कहा कि वे अपनी जन्मभूमि से मुक्ति चाहते है। उनका पेरिस में रहकर काम करना कोई अजूबा नही है पेरिस दुनियां के तमाम मकबूल कलाकारों की कर्मस्थली रही है। पेरिस में होने का मतलब यह कतई नहीं होता कि वहा रहने वाले दूसरे मुल्को के लोग अपना वतन भूल गए।

      मकबूल फिदा हूसैन पर हम भारतवासियों को उसी तरह गर्व है, जिस तरह कि हरगोविंद खुराना पर है, अर्मत्य सेन पर है, मदर टैरेसा पर है। इन सबकी वजह से दुनियां में हिंदुस्तान का मान बढा है। दुनिया से मकबूल की कद्र उनकी कूची की वजह से तो ही है, लेकिन एक उम्दा हिंदुस्तानी होने के नाते भी है।

      मकबूल साहब को कतर की पेशकश की वजह से एक बार फिर राजनीति में घसीटा जा रहा है, लेकिन ऐसा करने वालो को नही पता मकबूल को मशहूर करने वाली कोई राजनीतिक पार्टी या खानदान नही है। मकबूल अपनी कला की दम पर मशहूर और दुनिया भर में कबूल किए गए है। इसलिए उन्हे मशविरा देने या कोसने का हक किसी भी राजनीतिक दल को नही है। (भावार्थ)

 

 

श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन सागर में 6 व 7 को

श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन सागर में 6 7 को

ग्वालियर। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन 6 7 मार्च को सागर में आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव संगठनात्मक चर्चा की जाएगी। यह जानकारी संघ के प्रांतीय संयुक्त सचिव विनय अग्रवाल व संभागीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने दी है।

श्री अग्रवाल व श्री शर्मा ने सभी जिला इकाईयों को कहा है कि वह अधिक से अधिक संख्या में सागर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संभाग भर से बड़ी संख्या में पत्रकार सागर जाएंगे।

 

रविवार, 28 फ़रवरी 2010

व्‍यंग्‍य: होरी की वेदना ..;; रंग के बादर फट गये - नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

व्‍यंग्‍य: होरी की वेदना ..;; रंग के बादर फट गये

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

होरी की हुरियारी में छायी मस्‍ती चारों ओर ।

छायी मस्‍ती चारों ओर मगर कछु दुबके फिरते ।।

लिये हाथ में रंग सफेदा, भरें अबीर, गुलाल चहकते ।

भरें अबीर गुलाल चहकते, मगर कछु बिल में घुसते ।।

बिलवाले दिलवाले से होरी वारे कह रहे ।

काहे बिल में दिल घुसा, सब चिन्‍ता कर रहे ।।

कब तक बिल में घुसे पड़े दिल की खैर मनाओगे ।

बिन धड़कन के दिल बिल की कब तक आह छुपाओगे ।।

कोई चोर डकैत आवेगा बिल खोद खाद ले जायेगा ।

दिल चोरी हो या लुट जावे कोई रोज रात को आयेगा ।।

कब तक जाग जाग ऑंखों में पहरेदारी कर पाओगे ।

कब तक चोरी चोरी आ आ कर नजर निगाही कर पाओगे ।।

इक सलाह हुरियारे दे रहे बात बता कर खास ।

छिप्‍पन और छिपावन कर दिल बचने की ना आस ।।

गर दिलवाले बिल में घुसकर दिल जो बचाते ।

तो सब दिलवाले अब तक बिल में घुस जाते ।।

इक मिला था लवली स्‍वीट था, दिल का बस ये रोना है ।

अब चला गया तो चला गया, तेरे छिपने सा का होना है ।।

कौन ले गया लेने वाला, ले गया जो ले गया ।

ले गया कैसे गया, अब गया चला तो चला गया ।।

क्‍या हो गया चोरी दिल ये, या हो गयी लूट ।

बिल में दुबकी सोच रही, मेरी किस्‍मत गयी है फूट ।।

किस्‍मत गयी है फूट, सबको क्‍या मुख दिखलाऊं ।

बिन दिल के अब इस बिल से कैसे बाहर जाऊं ।।

बाहर कुत्‍ते हैं खड़े, करते इंतजार मनुहार ।

पूंछ हिला कर कह रहे, आओ जी सरकार ।।

आओ जी सरकार, हमारे यार, डिनर तैयार रखा है ।

मुर्गे की है स्‍वीट बनाई नहीं जो अब तक चखा है ।।

प्‍लीज जागिये, उठ बैठिये, मैडम अक्‍कलमंद ।

सारे कुत्‍ते आये हैं ले लेकर अपने बिस्‍तर बंद ।।

लेकर बिस्‍तर बंद, द्वार पर वे खड़े भुंकियावैं ।  

देसी और विलाइती सारे अदायें वे दिखलावैं ।।

सारे कुत्‍ते कर रहे पिछले दो हफ्ता से उपवास ।

मैडम संग इक डिनर करिहे पूरी सबकी आस ।।

होगी पूरी सबकी आस, सोच लाइन कुत्‍तन की लग गई ।

बिन दिलवाली मैडम की, भौंका भाकी में निंदिया खुल गई ।।

 

इक अंगड़ाई मार के, फेंक नजर के तीर ।

सब कुत्‍तन को देख के, मैडम भई गंभीर ।।

मैडम भई गंभीर, और फिर दौड़ के बाहर आई ।

मैं इक कुत्‍ते की थी प्‍यारी ये लाइन कहॉं से आयी ।।

है मेरा अलबेला कहॉं, झबरू काला रंग ।

दिल मेरा जो ले गया, कित गया भुजंग ।।

मैं कुत्‍ते की, कुत्‍ता मेरा, पिया वो परम सुहावन ।

डिनर करूं और रूप रचूं  बार बार फिर देखूं दरपन ।।

मेरा झबरू मेरा गबरू नहीं लाइन में आता नजर ।

कित्‍थे है वो मेरा डमरू मैं कराऊंगी उसे डिनर ।।

तभी बीच कुत्‍तों में से था झबरू दौड़ा आया ।

मैं भी इस लैन बिच्‍च में अपनी संगत लाया ।।

ओ हसीना नाजनीना जरा याद करो वो बात बड़ी मशहूर ।

कुत्‍ते सदा झुण्‍ड में रहते मिल बांट कर खाते हैं भरपूर ।।

बीच बीच में भौं भौं कूं कूं, उवाय उवाय भ्‍वयाय ।

जम कर सेवा पूंछ हिलाना, बिना बखत चिल्‍लाय ।।

पर अपनी अपनी किस्‍मत होती क्‍या करिये इसको ठीक ।

जैसी लीला रची विधि ब्रह्मा ने वही होवेगा याद रहे ये सीख ।।

याद ये रखना सीख, नहीं झुण्‍ड शेरों के होते ।

इक अकेला कूद जाये जब सब पानी भरते ।।

नहीं डिनर ना सोवा सावी ना सस्‍ती मस्‍ती करो इन कुत्‍तन के संग ।

शेर कहत बुरा न मानो होली है, आप पर अब आपका फेंक दिया है रंग ।।