बुधवार, 20 अगस्त 2008

स्‍व.राजीव गांधी के जन्‍म दिवस पर विशेष आलेख जरूरत अँगूठा छाप नेताओं से छुटकारे की, अब वक्‍त पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का- 1 भाग-1

स्‍व.राजीव गांधी के जन्‍म दिवस पर विशेष आलेख

जरूरत अँगूठा छाप नेताओं से छुटकारे की, अब वक्‍त पढ़ी लिखी वैज्ञानिक पीढ़ी का- 1

भाग-1 

नरेन्‍द्र सिंह तोमर 'आनन्‍द'

यह विडम्‍बना ही है देश की हम एक अरब से ऊपर की संख्‍या में भारतवासी आज भी देश के लिये साक्षरता अभियान, सर्व शिक्षा मिशन और अनौपचारिक शिक्षा की वैशाखीयों का सहारे चलने को मजूबर हैं, यह शर्मनाक और अफसोस जनक तथ्‍य है कि भारत जो युगों से कई मामलों में विश्‍व गुरू रहा, आज अपने नौनिहालों और भावी कर्णधारों को विशेष अभियान और योजनाओं के जरिये शिक्षित करने पर मजबूर है ।

भारत को आजाद हुये 62 साल गुजर गये, देश की भाषा में कहा जाये तो आजादी सठिया गई, हमारे लालू प्रसाद जी की भाषा में कहें तो साठा सो पाठा ( साठ के बाद आदमी पठ्ठा होता है) खैर जो भी है, एक लम्‍बा अन्‍तराल गुजर चुका है और यूं ही महज मसखरी में गुजर चुका है, केवल अधुनातन और नवीन प्रयोगों में ही हमारी सरकारें और नेता वक्‍त जाया करते रहे हैं, देश अभी तक केवल एक प्रयोगशाला के मानिन्‍द ही व्‍यवहृत होता रहा है ।

कोई दो बरस पहले मैंने अंग्रेजी में एक आलेख लिखा था जिसमें प्रश्‍न उठाया था कि आखिर कब तक भारत विकासशील ही बना रहेगा और विकासशील देश की संज्ञा से उच्‍चारित होता रहेगा, आखिर वह सुबह कब आयेगी जब भारत को विकसित देश कहा जा सकेगा । आज भारत विकसित देश क्‍यों नहीं हो सकता । मुझे खुशी है कि मेरी बात का इशारा भारत सरकार समझ गयी और कई एक बातें और कई कदम सरकार के कुछ इस तरह उठे कि विकासशील से विकसित भारत में तब्‍दीली की परिभाषा हेतु पर्याप्‍त माद्दा रखते थे । हॉं ठीक हैं, कुछ हुआ मगर न तो यह संतोषजनक है और न पर्याप्‍त, अभी तो महज एक शुरूआती नींव का पत्‍थर है और बगैर इन्‍तजार के अब धड़ाधड़ कदम दर कदम आगे बढ़ते हुये नयी बुनियाद पर भारत की नयी इमारत और नयी तस्‍वीर गढ़नी होगी ।

बिना लाग लपेट के कहें तो स्‍वामी विवेकानन्‍द के सूत्र के तुरन्‍त अमल में लाना होगा । उत्तिष्‍ठत, जागृत । इसमें श्रीकृष्‍ण का चेतना व कर्मयोग का सूत्र मिलाते हुये जेम्‍स एलन के परिच्‍छेद को उद्धृत कर अपनी परिभाषा स्‍वयं हि तुरन्‍त और तत्‍काल गढ़नी होगी, भारत को, भारत के नौजवानों को तुरन्‍त तत्‍काल चेतना होगा, जागना होगा और उठ खड़ा होना होगा फिर तत्‍काल ही सक्रिय भी होना होगा ।

देश पहले ही काफी फिजूल वक्‍त बर्बाद कर चुका है, भारत को स्‍वतंत्रता प्राप्ति के पश्‍चात आज तक महज प्रयोगशाला बना कर ही तमाम योजनाओं और नीतियों की अदल बदल कर केवल परीक्षण ही किया जाता रहा है, परिणाम यह हुआ कि न तो सरकारें और न नेता ही न जनता का भला कर पाये, तथाकथित कल्‍याण या लोक कल्‍याण या जन कल्‍याण महज एक नाटक नौटंकी ही बना रह गया । समूचे देश को प्रयोगशाला के रूप में नित नये प्रयोग कर सरकारें केवल देश और जनता का महज अहित ही करतीं रहीं, तमाशा यह है कि निष्‍कर्ष या ठोस परिणाम आज तक किसी भी प्रयोग के हमारे पास नहीं हैं ।

प्रयोगधर्मीयों ने देश को 62 साल तक नुकसान पहुंचाया है, अब वक्‍त आ गया है इनको एक झटके से उखाड़ने और भारत से बाहर धकेलने का ।

लोकतंत्र मजाक और तमाशा बनकर नेताओं की मसखरी का साधन मात्र हो गया । सरकारें और प्रयोगधर्मी नेताओं के साथ मिल कर प्रयोग करते रहे, योजनायें बदलतीं रहीं, नीतियां बदलतीं रहीं कोई योजना छ महीने चली तो कोई चल ही नहीं पायी, कोई बदल गयी कियी का नाम बदल गया किसी को नई बोतल में पुरानी शराब की तरह कई बार परोसा गया । पिछले कई साल से यह नौटंकी तमाशा भारत में चलता आ रहा है, अब एक झटके में बन्‍द हो जाना चाहिये सब । वरना हम विकासशील देश से कभी भी विकसित भारत नहीं बन सकते ।

मैं एक दृष्‍टान्‍त देता हूं, अधिक आसानी से विषय को समझा जा सकेगा ।

मैं उन दिनों वर्ष 1995 में नेशनल नोबल यूथ अकादमी के लिये शिक्षा और रोजगार पर एक वीडियो फिल्‍म तैयार करवा रहा था (यह फिल्‍म अभी हमारे पास है) मेरे मस्तिष्‍क में बेरोजगारों के लिये शिक्षा प्रशिक्षण और रोजगार पर महत्‍वपूर्ण योजनाओं और उनसे कैसे बेरोजगार युवा लाभ उठा सके यह कन्‍सेप्‍ट था और इसी विषय पर हम काम कर रहे थे । फिल्‍म में प्रायवेट व्‍यावसायिक व रोजगारोन्‍मुखी प्रशिक्षण केन्‍द्रों, तकनीकी प्रशिक्षण केन्‍द्रों, एजुकेशनल कोचिंगों के अलावा सरकारी कार्यालय प्रमुखों तथा, शिक्षा विभाग और प्रशिक्षण संस्‍थान, रोजगार कार्यालय, युवाओं के लिये कार्यरत सरकारी संस्‍थाओं मसलन नेहरू युवा केन्‍द्र, स्‍वयंसेवी संगठनों व संस्‍थाओं सहित कुछ बेरोजगारों के इण्‍टरव्‍यू शूट किये जाने थे साथ ही बेरोजगारी से संबंधित और प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों और संगठनों व संस्‍थानों को भी इसमें शामिल करना था । पहले इसे लघु फिल्‍म के रूप में बनाने का विचार था सोचा कि डाक्‍यूमेण्‍ट्री रिलीज कर देंगें लेकिन फिल्‍म शूट होते होते कई ऐंसीं अद्भुत चीजें निकल कर सामने आयीं कि फिल्‍म अपने आप ही बहुत लम्‍बी और अच्‍छी बन पड़ी, बस दिक्‍कत यह हुयी कि हम जितना भी सरकारी पक्ष को इकठ्ठा करके लाये, वह सारा समूचा ही निगेटिव और एब्‍सर्ड हो रहा था ।

सरकारी अधिकारीयों ने जहॉं अपने इण्‍टरव्‍यूओं में उल्‍टे सीधे बयान दे दिये थे वहीं कहीं से कोई उपयोगी यानि काम की बात निकल कर सामने नहीं आयी ।

सरकारी कार्यालयों में 98 फीसदी यह हालत थी कि उन्‍हें अपने विभाग की योजनाओं और हितग्राही मूलक किसी भी कार्यक्रम की लेशमात्र भी जानकारी नहीं थी । और वे काम की बात बताने के बजाय इधर उधर बहक जाते थे, हमें कैमरा बार बार रूकवा कर दोबारा दोबारा सीन शूट करने पड़ते थे, अधिकारी बार बार अपने बाबूओं को बुलाते और पूछते क्‍यों भई एक वो योजना भी तो थी, उसका क्‍या हुआ चल रही है कि बन्‍द हो गयी , बाबू सिर खुजाता, और कहता सर पता नहीं हैं, रोज तो योजना बदल जातीं हैं, कहॉं तक ध्‍यान रखें अब देखना पड़ेगा कि चल रही है कि नहीं । बाबू फाइलों में योजनायें और कार्यक्रम खंगालते, खोज खोज कर पगला जाते मगर योजनाओं के न सिर मिल पाते न पैर । राम राम कह कर जैसे तैसे हमने फिल्‍म पूरी की और चन्‍द दिनों के भीतर जान लिया कि इस देश में बेरोजगारों कैसे उद्धार हो रहा है ।

हमारा कैमरा जब शिक्षा विभाग में पहुँचा (सीन मजेदार और देखने लायक हैं) तब उपसंचालक शिक्षा का जिला स्‍तर पर कार्यालय होता है अब आजकल इसे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कहा जाता है ।

कूड़े कबाड़ के मानिन्‍द योजनायें कहीं बस्‍तों में बन्‍द दबी पड़ीं तो कहीं योजना का अता पता नहीं, पूरा शिक्षा विभाग खंगाल डाला कहीं कोई योजना नहीं मिली । कहीं शराब के दौर (कैमरा सभी कक्षों में अचानक घुमाया गया था) तो कहीं सिगरेटों के कश, कहीं टेबलों पर लात पसारे बैठे मक्‍खीयां मार रहे बाबू तो कहीं, मॉं बहिन की गालीयों से आपस में उलझ रहे सरकारी कर्मचारी, कहीं रिश्‍वत की खलेआम मांग तो कहीं कक्षों के बंटवारे को लेकर विवाद, कहीं अटैचमेण्‍ट के लिये मारामारी तो कहीं नियुक्ति और ट्रान्‍सफर की सेटिंग । बड़ा ही अजीबो गरीब सा माहौल था । (मुझे बाद में जिला पर्यावरण समिति के तहत डेढ़ साल तक इसी कार्यालय में बैठने और काम करने का मौका मिला, तब मैंने अपनी रिसर्च बहुत अधिक पुख्‍ता ढंग से की) लेकिन मैं दंग था सारा सब कुछ देख कर ।

कुल मिला कर निष्‍कर्ष यह है कि रोजाना आने वाली और बदलती रहने वाली योजनाओं का हितग्राही तक खैर क्‍या लाभ पहुँचता होगा जब सम्‍बन्धित विभाग या उसके बाबूओं को भी उनकी जानकारी न हो, अफसर लोक कल्‍याण और उसकी योजनाओं के प्रति सर्वथा निरक्षर और अज्ञानी हों । खैर ये तब की बात है जब देश में इण्‍टरनेट नहीं था और इतने अधिक संसाधन व स्‍त्रोत नहीं थे तथा देश पूरी तरह आश्रित होकर सरकारी अफसरों को भगवान और बाबूओं को महाराज मान कर पूजता था तथा काम की किसी योजना की जानकारी मात्र के लिये सरकारी कार्यालयों और बाबूओं अफसरों को रिश्‍वत भी देता था उनके घर चक्‍कर मार मार कर चकरघिन्‍नी हो जाता था । आज इण्‍टरनेट ने मामला पलट उलट दिया है, अब जानकारीयां व सूचनायें अपनी पहुँच खेत, गॉंव और घरों तक बना चुकीं हैं, अब अधिकतर चीजों के लिये दफ्तरों और अफसर बाबूओं के चक्‍कर नहीं लगाने पड़ते ।

अब योजना की तस्‍वीर भी दिख जाती है, और उसकी ताबीर भी । उसकी तब्‍दीली भी साफ दृष्टिगोचर होती है और अर्जी फर्जीवाड़ा और फिजूल प्रयोगधर्मिता तथा नकली नाटक नौटंकी भी साफ दिख जाती है ।

इण्‍टरनेट ने काफी कुछ बदल दिया है, नये भारत की तस्‍वीर भी रचना शुरू कर दी है । लेकिन राकेट में बैठकर अंतरिक्ष व ग्रहों की सैर करते इस विश्‍व में अब भी कई मूसलपंथी हैं जो आज तक बैलगाड़ी का पहिया थामें हैं औंर माया मोहवश उसे छोड़ना ही नहीं चाह रहे, इन कूप मण्‍डूकों ने भारत का बहुत नुकसान किया है । घुन की तरह देश को खाया है । देशभक्ति की खाल में भ्रष्‍ट और देशद्रोहीयों की पूरी एक फौज छिपी बैठी है । जल्‍द से जल्‍द और तुरन्‍त भारत को इन तत्‍वों से मुक्ति पानी होगी ।

भला कौन ऐसा देशभक्‍त होगा, जो भारत को विकासशील से विकसित भारत में बदलते नहीं देखना चाहेगा, या कौन ऐसा देश का सपूत होगा जो भारत में लगे दीमक या घुन रूपी भ्रष्‍टाचार को सतत रहने देना चाहेगा, इसके बावजूद देशभक्ति और अलां फलां सेनानी का राग अलापने और देश को कुयें में ढकेलने या 'खाओ और खाने दो ' के सिद्धान्‍त को निरन्‍तर रखने के हामी हैं तो ऐसे लोगों को तो देश भक्‍त कहना या मानना ही सबसे बड़ा देश द्रोह है ।

जो भी भारतवासी भ्रष्‍ट है, रिश्‍वत लेता है वह कतई देशभक्‍त तो ही नहीं सकता उसे भारतीय तो कहा ही नहीं जा सकता । रिश्‍वत देना मजबूरी हो सकती है लेकिन रिश्‍वत लेना तो क्‍लीयरकट देशद्रोह है ।

अगर इस प्रकार के लोगों की बर्दाश्‍तगी जारी रही तो और हम इन तत्‍वों को यदि इस देश में रहने देते हैं तो सबसे बड़े देशद्रोही तो हम सब ही हैं ।

 

अगले अंक में जारी ............

 

मुरैना में हलवाई को दिन दहाड़े काटा, सरेआम हुआ वीभत्‍स हादसा, 37 हजार रूपये लूटे

मुरैना में हलवाई को दिन दहाड़े काटा, सरेआम हुआ वीभत्‍स हादसा, 37 हजार रूपये लूटे

मुरैना 19 अगस्‍त 08 । मुरैना शहर के बींचो बीच वनखण्‍डी रोड गोपालपुरा में एक जैन हलवाई को कुछ लोगों ने शाम पॉंच बजे के आसपास बका और तलवारों से काट डाला ।

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक हलवाई के पूरे शरीर को बका और तलवारों से लोहूलुहान कर दिया गया है, हलवाई लगभग आधा घण्‍टे तक सड़क पर पड़ा तड़पता रहा, उसके बीवी बच्‍चे चिल्‍ला चिल्‍ला कर लोगों से मदद के लिये और हलवाई को उठा कर अस्‍पताल पहुँचाने के लिये गुहार लगाते रहे लेकिन कोई मदद को नहीं आया तब तक हलवाई बेहोश और मूर्छित हो गया था । और उसका काफी खून बह कर सड़क खून के तालाब में तब्‍दील हो गयी थी । उसे मरणासन्‍न अवस्‍था में पुलिस ने अस्‍पताल में भर्ती कराया है । 

काफी देर बाद पहुँची पुलिस ने उसे घटनास्‍थल से उठाया । प्रत्‍यक्षदर्शीयों के मुताबिक संभवत: हलवाई का जिन्‍दा बचना मुश्किल है । जिस स्‍थान पर घटना घटित हुयी है वहॉं चोबीस घण्‍टे भारी यातायात रहता है और हमेशा भारी भीड़ रहती है ।

बताया जाता है कि नरेश उर्फ ललई सिकरवार पुत्र पूरन सिंह सिकरवार निवासी गोपालपुरा एवं विक्रम नगर मुरैना दिनांक 16 अगस्‍त रक्षाबन्‍धन के दिन हलवाई रामअवतार जैन पुत्र रामविलास जैन उम्र 45 वर्ष जैन मिष्‍ठान्‍न भण्‍डार वनखण्‍डी रोड गोपालपुरा मुरैना पर उधार मिठाई लेने आया था जिस पर हलवाई रामअवतार जैन ने इन्‍कार किया तो नरेश पुत्र पूरन सिकरवार ने हलवाई को जान से मारने और परिणाम भुगतने की धमकी दी । इस पर हलवाई ने दूसरे दिन सिटी कोतवाली मुरैना में रिपोर्ट दर्ज करा दी । जिससे चिढ़ कर रिपोर्ट दर्ज कराने का बदला लेने आज 19 अगस्‍त को सायं 5 बजे के आसपास नरेश उर्फ ललई सिकरवार पुत्र पूरन सिंह सिकरवार निवासी गोपालपुरा एवं विक्रम नगर मुरैना, विनोद पण्डित निवासी खासखेड़ा, और जयप्रकाश उर्फ जेपी लाला निवासी पुराना बस स्‍टेण्‍ड मुरैना एवं अपने अन्‍य साथियों के साथ हलवाई के यहॉं पहुँचा और बका से हमला बोल कर उसे काट डाला । हलवाई मरणासन्‍न अवस्‍था में अस्‍पताल मुरैना में भर्ती है । उसके बचने की संभावनायें कम ही बताई जा रही है । पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों नामजद आरोपियों तथा अन्‍य अज्ञात साथियों के विरूद्ध भा.द.वि. की धाराओं 307 एवं 34 के तहत कार्यवाही प्रांरंभ कर दी है, पुलिस हलवाई के होश में आने और बयान लेने की प्रतीक्षा कर रही है, हलवाई के बीवी बच्‍चों ने बताया कि रक्षाबन्‍धन पर आये 37 हजार रूपये भी बदमाश साथ में लूट ले गये हैं । पुलिस ने खबर लिखे जाने तक लूट या डकैती की कायमी नहीं की थी ।

मंगलवार, 19 अगस्त 2008

मुरैना में हलवाई को दिन दहाड़े काटा, सरेआम हुआ वीभत्‍स हादसा

मुरैना में हलवाई को दिन दहाड़े काटा, सरेआम हुआ वीभत्‍स हादसा

मुरैना 19 अगस्‍त 08 । अभी समाचार लिखे जाने से लगभग एक घण्‍टे पहले मुरैना शहर के बींचो बीच वनखण्‍डी रोड गोपालपुरा में एक जैन हलवाई को कुछ लोगों ने शाम पॉंच बजे के आसपास बका और तलवारों से काट डाला ।

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक हलवाई के दोनो हाथ धड़ से अलग कर दिये गये हैं और पूरे शरीर को बका और तलवारों से लोहूलुहान कर दिया गया है, हलवाई लगभग आधा घण्‍टे तक सड़क पर पड़ा तड़पता रहा, उसके बीवी बच्‍चे चिल्‍ला चिल्‍ला कर लोगों से मदद के लिये और हलवाई को उठा कर अस्‍पताल पहुँचाने के लिये गुहार लगाते रहे लेकिन कोई मदद को नहीं आया तब तक हलवाई बेहोश और मूर्छित हो गया था । और उसका काफी खून बह कर सड़क खून के तालाब में तब्‍दील हो गयी थी ।  

काफी देर बाद पहुँची पुलिस ने उसे घटनास्‍थल से उठाया । प्रत्‍यक्षदर्शीयों के मुताबिक संभवत: हलवाई का जिन्‍दा बचना मुश्किल है । लोगों ने कुछ अपराधी तत्‍वों का नाम लिये हैं जो बहुत बड़ी संख्‍या में उकठ्ठे होकर गाड़ीयों में सवार होकर आये थे, और अंचल में चड्डी बनियान गिरोह के नाम से मशहूर हैं । और अस्‍त्र शस्‍त्रों से लेस थे । जिस स्‍थान पर घटना घटित हुयी है वहॉं चोबीस घण्‍टे भारी यातायात रहता है और हमेशा भारी भीड़ रहती है ।

घटना के पूरे विवरण की प्रतीक्षा है ।    

इलाज के लिए सहायता

इलाज के लिए सहायता

 

मुरैना 18 अगस्त 08/ कलेक्टर श्री रामकिंकर गुप्ता ने जल संसाधन मंत्री श्री अनूप मिश्रा की स्वेच्छानुदान राशि से दो हितग्राहियों को इलाज हेतु 20 हजार रूपये की सहायता मंजूर की है

       जौरा नगर के वार्ड क्रमांक 11 निवासी श्री पूरन चंद गोयल को 15 हजार रूपये और ग्राम नावली निवासी श्रीमती भूरीबाई को पांच हजार रूपये की सहायता इलाज हेतु स्वीकृत की गई है ।

 

राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक आज

राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक आज

 

मुरैना 18 अगस्त 08/ कलेक्टर श्री रामकिंकर गुप्ता की अध्यक्षता में 19 अगस्त को दोपहर 12.30 बजे राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई है ।  कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में राजस्व कार्यों के साथ ही फोटो निर्वाचक नामावली, मतदाता फोटो परिचय पत्र , नवीन मतदान केन्द्रों का भौतिक सत्यापन आदि पर चर्चा की जायेगी । बैठक में समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार, अधीक्षक भू- अभिलेख तथा निर्वाचन, राजस्व, लेखा, नजूल , डायवर्सन के प्रभारी अधिकारी उपस्थित रहेगें ।

 

सी.सी.खरंजा निर्माण के लिए 51 लाख 77 हजार रूपये मंजूर

सी.सी.खरंजा निर्माण के लिए 51 लाख 77 हजार रूपये मंजूर

 

मुरैना 18 अगस्त 08/ कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक श्री रामकिंकर गुप्ता ने मुरैना जिले की लगभग दो दर्जन ग्राम पंचायतों में सी.सी.खरंजा निर्माण कार्य के लिए 51 लाख 77 हजार 434 रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदाय की है । स्वीकृत राशि में 10 लाख 74 हजार 312 रूपये की राशि 12 वां वित्त आयोग निधि से तथा 15 लाख 09 हजार 250 रूपये की राशि विधान सभा क्षेत्र विकास निधि से संयोजित की गई है । शेष 25 लाख 93 हजार 872 रूपये की राशि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम म.प्र. के अन्तर्गत स्वीकृत की गई है ।

        पहाडगढ जनपद की ग्राम पंचायत जलालपुर, धूरकूडा, मानपुर, कहारपुरा, बर्रेड, सेंथरी, निचली वहराई, अहरौली और कुकरौली तथा मुरैना जनपद की ग्राम पंचायत खेडामेवदा और जगतपुर में 12 वां वित्त आयोग निधि के संयोजन से 21 लाख 61 हजार 834 रूपये की राशि सी.सी. खरंजा निर्माण हेतु मंजूर की गई है । इसी प्रकार विधान सभा क्षेत्र विकास निधि के संयोजन से मुरैना जनपद की ग्राम पंचायत सेवा, डोंगरपुर लोधा, मितावली और लभनपुरा, पोरसा जनपद की ग्राम पंचायत हिंगावली और कीचौल, कैलारस जनपद की ग्राम पंचायत कैलारस ग्रामीण, सबलगढ जनपद की ग्राम पंचायत पासौन कलां और जमुनीपुरा तथा जौरा जनपद की ग्राम पंचायत नन्दपुरा में सी.सी. खरंजा निर्माण के लिए 30 लाख 15 हजार 600 रूपये की स्वीकृति दी गई है ।

       स्वीकृत कार्य की क्रियान्वयन एजेंन्सी संबंधित ग्राम पंचायत रहेगी । कार्य में ठेकेदारों और बिचौलियों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा तथा मजदूरों द्वारा किये जा सकने वाले कार्य में मशीनों के उपयोग पर रोक रहेगी । ग्राम स्तरीय निगरानी समिति के गठन के पश्चात ही कार्य प्रारंभ किये जायेंगे । कार्य पूर्ण होने के उपरांत उसके रख-रखाब की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत की होगी । कार्य स्थल पर लोगों की जानकारी के लिए सूचना फलक लगाना होगा । मजदूरी का भुगतान जॉवकार्ड धारी मजदूर को बैंक खाते के माध्यम से किया जायेगा । कार्य की विभिन्न अवस्थाओं के फोटो ग्राफिक अभिलेख रखने होंगे ।

 

सोमवार, 18 अगस्त 2008

पत्‍थर गाड़ा कब्रिस्‍तानी सरकार ( शिलान्‍यास बनाम कब्रिस्‍तानों का प्रदेश मध्‍यप्रदेश)

सोमवार भी काला लटका बिजली पे फिर ताला, बिजली ने बरपाया कहर बिजली कटौती चालू आहे  

मुरैना 18 अगस्‍त 08, आज सोमवार 18 अगस्‍त को सुबह बिजली ने आठ बजे से कटौती काण्‍ड प्रारंभ किया, उसके बाद समाचार लिखे जाने के वक्‍त यानि दोपहर 3 बजे तक मुरैना शहर सम्‍भागीय मुख्‍यालय पर बिजली कटौती ने कोहराम मचा दिया है । खबर लिखे जाने तक शहर की सप्‍लाई डम्‍प थी ।

उल्‍लेखनीय है कि विगत 20 दिनों से मुरैना के सम्‍भागीय मुख्‍यालय पर बिजली सप्‍लाई पूरी तरह डम्‍प होकर ठप्‍प पड़ी है । शहर के अनेक मोहल्‍लों में पूर्णत: अंधेरा कायम है ।

सप्‍ताह में कुछ दिन ऐसे होते हैं जब शहर के कुछ मोहल्‍लों में लगभग औसतन हर बीस मिनिट बाद बिजली कटती रहती है और रात को डेढ़ बजे से दो बजे तक बिजली कटने के बाद ही यह सिलसिला चलता है । अनेक बार तो कई कई दिन तक लोग बिजली दर्शन के लिये तरस जाते हैं । यह सम्‍भागीय मुख्‍यालय के हालात हैं । अब जिलो, तहसील और विकासखण्‍ड तथा गॉंवों की क्‍या दशा है यह स्‍वत: समझने की बात है ।

उल्‍लेखनीय है कि अंचल के भिण्‍ड, मुरैना और श्‍योपुर जिलों के क्षेत्र इस समय अघोषित व अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती से परेशान हैं, बिजली कम्‍पनी के अधिकारी भारी रिश्‍वत लेकर उद्योगों और मिलों तथा कोल्‍ड स्‍टोरेज को करोड़ों रूपये की बिजली चोरी कराते हैं जिसकी भरपाई के लिये आम जनता को बिजली से महरूम कर इस चोरी की बिल भरपाई नियमित बिल भरने वालों उपभोक्‍ताओं से बिना बिजली दिये बिल वसूली कर की जाती है । ज्ञातव्‍य हो कि प्रदेश की भाजपा सरकार पूर्णत: व्‍यापारीयों व उद्योगपतियों के लिये आत्‍म समर्पित सरकार है । सादकिल चलाकर पेट्रोल बचाने वाले मुख्‍यमंत्री हेलीकॉप्‍टर में हजारों गुना पेट्रोल फूंक कर पहले से ही दागदार और कलंकित हो चुके हैं ।

इन्‍वेस्‍टर मीट और डेस्टिनेशन म.प्र. के नाम पर म.प्र. के अकूत श्रम खजाने और आर्थिक शक्ति को व्‍यापारीयों तथा उद्योगपतियों के हवाले कर देने वाली सरकार गरीब किसानों को महज पत्‍थर गाड़ गाड़ कर ही खुश रहती है ।      

पत्‍थर गाड़ा कब्रिस्‍तानी सरकार ( शिलान्‍यास बनाम कब्रिस्‍तानों का प्रदेश मध्‍यप्रदेश)

और गरीब किसान तथा आम जनता महज लाचार होकर अपने म.प्र . को पत्‍थर गाड़ा कब्रिस्‍तान में तब्‍दील होते देखते रहते हैं । ज्ञातव्‍य है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने म.प्र. के हर जिले में हजारों पत्‍थर अपने नाम के खुदवा कर गड़वा दिये हैं और काम कहीं भी एक भी शुरू नहीं हुआ है । तमाशा यह भी है कि कई जगह तो शिलान्‍यासी कब्रिस्‍तानी पत्‍थर एक ही योजना या निर्माण के तीन तीन चार चार बार लगा दिये गये हैं अर्थात एक ही योजना के तीन तीन चार चार बार शिलान्‍यास कर डाले हैं खुद सरकार को ही ध्‍यान नहीं रहता कि वह कब किसका कितनी बार शिलान्‍यास कर चुकी है । इस पर पृथक से आलेख हम प्रकाशित करने जा रहे हैं । बिजली कभी आयी तो अवश्‍य आप इसे पढ़ पायेंगें ।