शनिवार, 4 दिसंबर 2010

भारतीय क्षत्रिय राजपूत वंश और उपवंश - एक परिचय , एक सिंहावलोकन - नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

क्षत्रिय वंश KSHATRYA VANSH

[The link bar feature is not available in this web]

सूर्य वंश

ऋषि वंश

चन्‍द्र वंश

अग्नि वंश

सूर्य वंश एक परिचय

ऋषि वंश एक परिचय

चन्‍द्र वंश एक परिचय

अग्नि वंश एक परिचय

सूर्य वंश के उपवंश

ऋषि वंश के उपवंश

चन्‍द्र वंश के उपवंश

अग्नि वंश के उपवंश

रघुवंश (मतान्‍तर से इसे उपवंश की जगह मूलवंश में भी माना जाता है)

सैंगर

यदुवंशी

सोलंकी

कुशवाह

पुण्‍ढीर

तोमर

परिहार

सिसौदिया

धाकरे, ढाकरे

चन्‍देल

परमार, पमार, पवार

बड़गूजर

गर्ग वंश

सोमवंशी

चौहान

गहरवार

दाहिमा

कल्‍चुरी

 

राठौर

कदम्‍ब वंश

बनाफर

 

गौड़

महेला

बघेल

 

निकुम्‍भ

तरकन

झाला

 

कटिहरिया

काकन

कौशिक

 

श्रीनेत

उदमतिया

बैस

 

रैकवार

गौतम

 

 

 

विसेत्तिया

 

 

 

उपरोक्‍त समस्‍त विवरण भारतीय क्षत्रिय राजपूतों की छत्‍तीस कुरी और मूल वंशालियों तथा प्रमाणित एवं मान्‍य राजपूत इतिहास पर आध्‍धरित है । भारतीय क्षत्रिय राजपूतों की बृहद वेबसाइट तैयार की जा रही है , कृपया आवश्‍यक संपर्क एवं सहयोग हेतु हमारे ई मेल पते gwaliortimes@gmail.com  पर संपर्क स्‍थापित करें । धन्‍यवाद – नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

शिवराज सरकार की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि- ग्‍वालियर चम्‍बल में दीवाली के बाद फिर बिजली कटौती सिर चढ़कर बोली

शिवराज सरकार की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि- ग्‍वालियर चम्‍बल में दीवाली के बाद फिर बिजली कटौती सिर चढ़कर बोली

मुरैना/ ग्‍वालियर 4 December 2010 .  इससे पूर्व २८ नवम्‍बर २०१० को प्रकाशित,  ग्‍वालियर चम्‍बल के संभागीय मुख्‍यालयों पर १० घण्‍टे की घोषित  नियमित बिजली कटौती के बाद अब अंधाधुन्‍ध अघोषित बिजली कटोती - इस समाचार के प्रकाशन के वक्‍त तक संभागीय मुख्‍यालयों पर प्रात: ६ बजे से अभी तक बिजली नहीं थी ।

मुरैना एवं भिण्‍ड जिला में प्रतिदिन की जा रही 10 घण्‍टे की डिक्‍लेयर्ड बिजली कटौती के बाद दीपावली के त्‍यौहार पर तथा त्‍यौहार गुजरने के बाद अतिरिक्‍त बिजली कटौती का चम्‍बल संभाग के निवासियों को और अधिक सामना करना पड़ रहा है ।

नरक चतुर्दशी पर जहॉं रात में १० बजे  से ११ बजे तक की अतिरिक्‍त बिजली कटौती की गयी वहीं ऐन दीपावली यानि आज ५ नवम्‍बर २०१० को प्रात: ७ बजे से काटी गयी बिजली कटौती आज दिनांक २८ नवम्‍बर को इस समाचार के लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त तक समूचे शहर में बिजली कटोती जारी है । वर्ममान में शहर में शट डाउन चल रहा है । उल्लेखनीय है कि चम्‍बल के ६५ फीसदी ग्रामीण क्षेत्र में बिजली है ही नहीं वहीं जहॉं हैं वहॉं दो दिन छोड़ कर महज ४ घण्‍टे के लिये मात्र बिजली दी जा रही है । ऐन त्यौहार पर की जा रही अनाप शनाप भारी बिजली कटौती से जनता में भारी रोष व आक्रोश व्याप्‍त हो गया है । स्‍मरणीय है मुरेना शहर चम्बल संभाग का संभागीय मुख्‍यालय है । इस दरम्‍यान बिजली घर का शिकायत दर्ज कराने का फोन नंबर ०७५३२- २३२२४४ सहित सभी अधिकारीयों एवं कर्मचारीयों के फोन बन्‍द चल रहे हैं जो कि हरदम बिजली शट डाउन करने से पूर्व आउट ऑफ क्रेडल एवं स्विच आफॅ कर लिये जाते हें ।   

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

भारत में जाति व्‍यवस्‍था और आज का युवा – अहससासे आफताब नहीं, कब्‍जा ए आफताब कीजिये

भारत में जाति व्‍यवस्‍था और आज का युवा – अहससासे आफताब नहीं, कब्‍जा ए आफताब कीजिये

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

राजपूत नौजवान हों या कि ब्राह्मण नौजवान हों या कि वैश्‍य या शूद्र, हिन्‍दू हों मुस्लिम हो या ईसाई तकरीबन सभी को अवस्‍था विशेष तक अनेक झंझावातों से गुजरना होता है कई सवालों से जूझना पड़ता है, जब तक जवाब मिल पाते हैं उमर गुजरती चली जाती है और अनेक महत्‍वपूर्ण अवसरों को वे खोते जाते हैं । यह आलेख नौजवानों को समर्पित है, यद्यपि मुझे वक्‍त नहीं मिल पाता फिर भी मैंने आपके लिये वक्‍त निकाला है इसे लिखने के लिये । यदि किंचित भी यह आपके लिये उपयोगी हुआ या आपके काम आ सका तो यह मेरे वक्‍त का एवं श्रम का समुचित प्रतिफल होगा ।

भारतीय सामाजिक व्‍यवस्‍था

अनेक युवा इस बात पर भ्रमित हैं कि भारत की सामाजिक व्‍यवस्‍था और ढांचा कई छोटी जाति या अन्‍य धर्मावलम्बियों के लिये कष्‍टकारक व फर्क बताने वाला है । विशेषकर शूद्र वर्ग के युवा अक्‍सर भारतीय सामाजिक व्‍यवस्‍था से आहत एवं क्षुब्‍ध हैं, अक्‍सर वे मनुवाद की प्रत्‍यक्ष आलोचना करते रहते हैं और वर्ण व्‍यवस्‍था आदि को दोष देकर उसकी निन्‍दा करते रहते हैं । आपको यह जानकर हैरत होगी कि मैं शूद्र जाति के लोगों के द्वारा लिखी पुस्‍तकें गंभीरता से पढ़ता हूं उन पर चिन्‍तन एवं मनन भी करता हूं ।

ब्राह्मण , क्षत्रिय व वैश्‍य सभी के कर्म विभाजित हैं शूद्र का कर्म सेवा नियत है, अब यदि आज के युग से देंखें तो शूद्र अध्‍यापन का कार्य कर रहे हैं और ब्राह्मण सेवा का, कलेक्‍टर शूद्र है और चपरासी ब्राह्मण, कलेक्‍टर को ब्राह्मण चपरासी पानी भी पिलाता है उसका सामान भी उठाता है और उसे गाड़ी का दरवाजा खोल कर गाड़ी में भी घुमाने ले जाता है ।

कई बार युवा कहते हैं कि नाम के साथ उपनाम न लिखा जाये, जाति संबोधन न लगायें जायें, ठीक बात है लेकिन प्रश्‍न यह है कि जाति संबोधन या उपनाम लगाने की व्‍यवस्‍था आखिर आई कहॉं से और क्‍यों शुरू हुयी ये परम्‍परा , क्‍या आदिकाल से ऐसा था । इसका स्‍पष्‍ट जवाब है कि नहीं, आदि काल से कतई ऐसा नहीं था, अब सवाल है कि क्‍या ये मनुवाद है या मनु की देन है या मनुस्‍मृति के कारण जाति व्‍यवस्‍था बनी तो भी जवाब है कि नहीं ।

आदिकाल से वर्ण व्‍यवस्‍था विद्यमान रही है जाति व्‍यवस्‍था नहीं, त्रेतायुग में वर्ण व्‍यवस्‍था थी और केवट मल्लाह निषादराज, रावण का एवं उसे कुल का ब्राह्मण होना, धोबी की घटना, शबरी भीलनी जैसे कई उदाहरण हैं जो त्रेताकाल में वर्ण व्‍यवस्‍था का उल्‍लेख करते हैं ।

वर्ण विभाजन के बाद कर्म आधार पर जाति व्‍यवस्‍था कलियुग में अस्तित्‍व में आयी, जबकि द्वापरकाल तक केवल वर्ण व्‍यवस्‍था ही अस्तित्‍व में रही । जाति व्‍यवस्‍था अस्तित्‍व कलियुग काल में आया । द्वापर काल तक यह व्‍यवस्‍था रही कि अधिक निर्देशांक प्रयोग नहीं किये जाते थे, पहचान करने के लिये अधिक सटीक निर्देंशांक मान एवं मानदण्‍ड तय नहीं करने होते थे ।

आईये जाति व्‍यवस्‍था का असल गणितीय रूप समझें और जानें कि जातियां क्‍यें व कैसे बनी –

जो लोग गणित के छात्र होंगें वे जानते होंगें कि गणित में एक महत्‍वपूर्ण विषय निर्देशांक ज्‍यामिति होता है जो कि वर्तमान में दो प्रकार की प्रचलन में है एक तो सामान्‍य द्विविमीय निर्देशांक ज्‍यामिति और दूसरी त्रिविमीय निर्देशांक ज्‍यामिति । निर्देशांक ज्‍यामिति गणित की वह विकट अकाट्य विधा है जिससे पता चलता है कि कोई चीज कहॉं स्थित है, उसका पता ठीया क्‍या है । तयशुदा निर्देंशांक किसी भी चीज की असल स्थिति तक एक क्षण मात्र में पहुंचा देते हैं । बिल्‍कुल इसी शास्‍त्र के आधार पर भूगोल के नक्‍शे, देशान्‍तर व अक्षांश आधार पर स्थिति पहचान, पता प्रणाली , डाकप्रणाली, संचार प्रणाली आदि आधारित हैं । जिससे पहचाना जाता है कि अमुक व्‍यक्ति या चीज कौन है और कहॉं है ।

डाक पते में में नाम के साथ पते में मकान का नंबर, गली का नाम, मोहल्‍ले का नाम , बिल्डिंग का नाम , मोहल्‍ले का नाम और शहर का नाम, राज्‍य का नाम, पोस्‍ट यानि डाकखाने का नाम, जिला आदि सब लिखने पड़ते हैं इसके बाद नंबर आता है पिन कोड का जिसमें 6 अंक का पिन कोड बहुत से भेद छिपाये रहता है मसलन पिन कोड का पहला अंक जोन का नंबर होता है इसके बाद के दो अंक स्‍थानीय संभागीय जोन और अंतिम तीन अंक स डाकखाने का जोन के अंक रहते हैं , इस प्रकार एक पत्र सही गंतव्‍य और सही आदमी तक पहुंच पाता है ।

बिल्‍कुल इसी प्रकार अत्‍याधुनिक संचार प्रणाली में मोबाइल नंबर 10 अंक का होने या फोन नंबर में एस.टी.डी. कोड के जोड़ने या ई मेल या इण्‍टरनेट कम्‍यूनिकेशन में आई .पी. पते की प्रणाली जिसमें चार वर्ण होते हैं और इसमें यानि इस आई पी में आपके व्‍यक्तिगत कम्‍प्‍यूटर तक पहुंचने का राज छिपा रहता है । जो कि असल गंतव्‍य या व्‍यक्ति तक पहुचा देते हैं , आप किसी के ई मेल पते को लिखते हैं या किसी वेबसाइट को खोलने के लिये उसका पता भरते हैं तो दरअसल छिपे हुये रूप में उसमें गंतव्‍य मशीन के मशीनी अंक यानि आई पी पते आदि छिपे रहते हैं ।

वर्ण व्‍यवस्‍था एवं जाति व्‍यवस्‍था का यही सूत्र है, किसी समाज में या देश में कोई व्‍यक्ति विशेष कहॉं स्थित है यह उसके नाम उपनाम आदि से ज्ञात होता है, मसलन धर्म से आप एक बृहद जोन विशेष तक पहुंच जाते हैं , जाति या उपनाम से उस धर्म या जोन विशेष के एक जाति समुदाय तक जा पहुंचते हैं यह छोटा जोन कहा जा सकता है, पिता का नाम से आप एक परिवार विशेष तक जा पहुंचते हैं और अंत में नाम से आप उस व्‍यक्ति विशेष तक जा पहुंचते हैं ।

अत: धर्म, समुदाय या जाति का अभिव्‍यक्‍तन पूर्ण और विशुद्ध रूप से गणितीय है न कि सामजिक अंतर को व्‍यक्‍त करने के लिये, यह उल्‍लेख किसी को छोटी या बड़ी जाति का नहीं बताते बल्कि सटीक व सही व्‍यक्ति का ठीया ठौर व्‍यक्‍त करते हैं ।

अब सवाल यह है कि जाति व्‍यवस्‍था के कारण किसी को ओछापन या उच्‍चपन का अहसास होता है जिससे सामाजिक विषमता आती है तो क्‍या किया जाये , इसका जवाब यह है कि यह सामाजिक विषमता कभी समाप्‍त नहीं हो सकती यह एकदम उसी प्रकार से है जिस प्रकार एक कलेक्‍टर को एक चपरासी हीन नजर आता है या चपरासी को कलेक्‍टर उच्‍च नजर आता है , यदि कलेक्‍टर और चपरासी के बीच का नीचपन और ओछापन दूर होगा तो जातियों का भी नीचापन और ओछापन दूर हो जायेगा । जातियों के बीच नीचापन और ओछापन आज उतना नहीं रहा है जितना कि कलेक्‍टर और चपरासी के बीच नीचापन और ओछापन बढ़ा है ।

कलेक्‍टर एक धर्म है इस धर्म को आई ए एस कहते हैं , कलेक्‍टर एक संप्रदाय है जिसे ब्‍यूरोक्रेट कहते हैं कलेक्‍टर एक जाति है जिसे कलेक्‍टर कहते हैं , इसी प्रकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एक धर्म है , संबंधित विभाग उसकी जाति है और चपरासी उसकी जाति है । यह जाति धर्म और संप्रदाय अब नये रूप में विद्यमान है और धड़ल्‍ले से पूरे नीचेपन और ऊंचेपन के साथ प्रचलन में है बिगाडि़ये मिटाये या उखाडि़ये इसका क्‍या उखाड़ेंगें साथ में उनके अन्‍य धर्म यनि आई पी एस, अन्‍य संप्रदाय पुलिस और जाति एस.पी. है । आप क्‍या कर सकते हैं । अव्वल यह व्‍यवस्‍था प्रशासनिक व्‍यवस्‍था है इसी प्रकार जाति व्यवस्‍था सामाजिक प्रशासनिक व्‍यवस्‍था रही है । जाति व्‍यवस्‍था तो काफी हद तक सुधर कर निखरे रूप में आज सामने आ गई लेकिन प्रशासनिक व्‍यवस्‍था बुरी तरह सड़ गल चुकी है , आप प्रशासनिक ऊंच नीच से छुटारे की कोशिश कीजिये तब आप जाति व्‍यवस्‍था का असल मर्म जान समझ पायेंगें । जय हिन्‍द                           

रविवार, 28 नवंबर 2010

शिवराज सरकार की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि- ग्‍वालियर चम्‍बल में दीवाली के बाद फिर बिजली कटौती सिर चढ़कर बोली

शिवराज सरकार की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि- ग्‍वालियर चम्‍बल में दीवाली के बाद फिर बिजली कटौती सिर चढ़कर बोली

मुरैना/ ग्‍वालियर २८ नवम्‍बर २०१०,  ग्‍वालियर चम्‍बल के संभागीय मुख्‍यालयों पर १० घण्‍टे की घोषित  नियमित बिजली कटौती के बाद अब अंधाधुन्‍ध अघोषित बिजली कटोती - इस समाचार के प्रकाशन के वक्‍त तक संभागीय मुख्‍यालयों पर प्रात: ६ बजे से अभी तक बिजली नहीं थी ।

मुरैना एवं भिण्‍ड जिला में प्रतिदिन की जा रही 10 घण्‍टे की डिक्‍लेयर्ड बिजली कटौती के बाद दीपावली के त्‍यौहार पर तथा त्‍यौहार गुजरने के बाद अतिरिक्‍त बिजली कटौती का चम्‍बल संभाग के निवासियों को और अधिक सामना करना पड़ रहा है ।

नरक चतुर्दशी पर जहॉं रात में १० बजे  से ११ बजे तक की अतिरिक्‍त बिजली कटौती की गयी वहीं ऐन दीपावली यानि आज ५ नवम्‍बर २०१० को प्रात: ७ बजे से काटी गयी बिजली कटौती आज दिनांक २८ नवम्‍बर को इस समाचार के लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त तक समूचे शहर में बिजली कटोती जारी है । वर्ममान में शहर में शट डाउन चल रहा है । उल्लेखनीय है कि चम्‍बल के ६५ फीसदी ग्रामीण क्षेत्र में बिजली है ही नहीं वहीं जहॉं हैं वहॉं दो दिन छोड़ कर महज ४ घण्‍टे के लिये मात्र बिजली दी जा रही है । ऐन त्यौहार पर की जा रही अनाप शनाप भारी बिजली कटौती से जनता में भारी रोष व आक्रोश व्याप्‍त हो गया है । स्‍मरणीय है मुरेना शहर चम्बल संभाग का संभागीय मुख्‍यालय है । इस दरम्‍यान बिजली घर का शिकायत दर्ज कराने का फोन नंबर ०७५३२- २३२२४४ सहित सभी अधिकारीयों एवं कर्मचारीयों के फोन बन्‍द चल रहे हैं जो कि हरदम बिजली शट डाउन करने से पूर्व आउट ऑफ क्रेडल एवं स्विच आफॅ कर लिये जाते हें ।   

शनिवार, 27 नवंबर 2010

National Human Rights Commission - SAKSHI N.G.O. case - Sexual Harassment at work place - Case No. 1775/35/2003-2004-WC

Sexual Harassment at work place - Case No. 1775/35/2003-2004-WC

The Commission took cognizance of a complaint, dated 12.3.2004 referred by Ms. K. Geeta, Programme Coordinator of SAKSHI, an NGO alleging sexual harassment of Ms. Asha Rajora, Technical Assistant in the Herbal Research and Development Institute, Gopeshwar, Uttaranchal by the Director of the Institute. Allegations of further harassment by way of non-renewal of her job contract with effect from 1.5.2004 were also levelled.

The Commission directed the Chief Secretary, Uttaranchal and District Magistrate, Dehradun to submit their reports in the matter. The Commission also directed the State Authorities to inform (i) whether the Vishakha Guidelines are being followed in letter and spirit, while holding the inquiry; and (ii) whether any protection has been given to the complainant in the meanwhile.

An interim report received from the Chief Secretary, Govt. of Uttaranchal indicated that the Commissioner, Garhwal Circle, has been requested to inquire into the matter as he was heading the Divisional Vigilance Committee. The interim report was however silent about the constitution of Divisional Vigilance Committee and whether it is in conformity with the guidelines laid down by the Supreme Court of India in Vishakha's case, which requires that the Complaints Committee should be headed by a woman and not less than half of its members should be women. Further, to prevent the possibility of any undue pressure or influence from senior levels such Complaints Committee should involve a third party, either NGO or other body who is familiar with the issue of sexual harassment. The Chief Secretary, Uttaranchal was therefore requested to clarify as to whether the Divisional Vigilance Committee is in conformity with Vishakha Guidelines.

The Principal Secretary, Govt. of Uttaranchal informed the Commission that on the basis of the recommendations made by the Vigilance Committee, which was constituted in accordance with the guidelines in Vishakha case, the services of Dr. J. S. Rawat, Director, HRDI, Gopeshwar were terminated with effect from 4.10.2004. Since action had been taken by the Government in the case of sexual harassment the case was closed on 17.1.2005.

 

Presented By:

Narendra Singh Tomar

Advocate

Highcourt of Madhya Pradesh

बुधवार, 17 नवंबर 2010

ग्‍वालियर टाइम्‍स वेब पोर्टल के 6 वर्ष पूरे हुये , 7 वें साल में गौरवशाली प्रवेश

ग्‍वालियर टाइम्‍स वेब पोर्टल के 6 वर्ष पूरे हुये , 7 वें साल में गौरवशाली प्रवेश

अकेले चले थे जानिबे मंजिल मगर ..  लोग साथ आते गये कारवां बनता गया

मुरैना 17 नवम्‍बर 2010 , मुरैना और चम्‍बल के नाम से नाक भौंह सिकोड़ने वालों के लिये एक गौरवपूर्ण चुनौती देकर उभरी एक छोटी सी वेबसाइट मजाक ही मजाक में केवल निजी शौक पूरा करने के लिये वर्ष सन 2004 में मुरैना के एक छोटे से कमरे में एक छोटे से कम्‍प्‍यूटर से पूरी तरह संसाधन विहीन नौजवान ने मुरैना की एक प्रसिद्ध स्‍वयंसेवी संस्‍था नेशनल नोबलयूथ अकादमी के बैनर तले बना कर शुरू की थी । शुरूआत में यह वेबसाइट लोक सेवाओं एवं लोकोपयोगी सेवाओं की वेबसाइटों का लिंक संग्रह के रूप में शुरू हुयी और पूरी तरह निजी उपयोग के लिये इसका प्रसारण प्रारंभ किया गया ।

लेकिन बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक जानकारी के भरपूर संग्रह के चलते ही चन्‍द माह में ही वेबसाइट बेहद लोकप्रिय हो गयी । लेकिन वेबसाइट की पूरी पूरी नकल और तर्ज पर भारत सरकार सहित अन्‍य राज्‍य सरकारों द्वारा कॉमन सर्विस सेण्‍टर योजना चालू कर देने से वेबसाइट के खाके में वर्ष सन 2005 में काफी फेरबदल कर इसमें समाचार प्रकरशन और प्रसारण को अंदर के पेजों से हटा कर मुख्‍यपृष्‍ठ पर लाया गया और लोक सेवाओं व लोकसेवाओं को हिडन कर दिया गया ।

वेबसाइट ने लम्‍बे समय तक धन के और सहयोग के अभाव का सामना किया । इस वेबसाइट की दूसरी ओर दिनों दिन बढ़ती लोकप्रियता और हिटस से जहॉं अन्‍य लोग अचम्भित थे वहीं खुद वेबसाइट के डिजाइनर व जन्‍मदाता नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द'' भी हैरत और अचम्‍भे में थे । वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ते बढ़ते इस हद पर आ गई कि जिन सर्वर पर वेबसाइट चलाई जाती वे ही सर्वर फेल हो जाते और हाथ खड़े कर देते ।

अंतत: संघर्ष के दौर में ही म.प्र. सरकार की यी विज्ञापन नीति से वेबसाइट को सरकारी विज्ञापन मिलने की कुछ आशा बंधी लेकिन म.प्र. में भ्रष्‍टाचार इतनी बुरी तरह हावी था कि नाममात्र के या बिल्‍कुल भी नहीं हिटस और पाठक दर्शक वाली वबसाइटों को म.प्र. जनसम्‍पर्क विभाग ने विज्ञापन दे डाले और चम्‍बल की धरती पर मुरैना मध्‍यप्रदेश में जन्‍मी पली बढ़ी और धुआंधार हिटस वाली वेबसाइट को जनसम्‍पर्क विभाग ने 30 – 40 पत्र लिखने के बावजूद न तो विज्ञापन सूची में शामिल करने की जहमत ही उठाई और न किसी पत्र का उत्‍तर देना ही आवश्‍यक ही समझा ।

हालात इतनी खराब थी कि जब नई विज्ञापन नीति के मुताबिक वेबसाइटों को विज्ञापन नीति में शामिल किये जाने वाला आवेदन पत्र जब विभाग से सम्‍पर्क करके अनेक बार मांगा गया तो यह नया आवेदन पत्र श्रीमान भ्रष्‍ट महोदय गण द्वारा कभी बनाया ही नहीं गया , केवल विज्ञापन नीति घोषित करके चुपके से बैठ गये और वेबसाइटों को विज्ञापन के लिये स्‍वीकृति मात्र स्‍वीकार कर अपने कर्तव्‍य की इति कर ली । यह नया आवेदन पत्र आज दिनांक तक जनसम्‍पर्क विभाग संचालनालय तक में उपलब्‍ध नहीं है , बावजूद इसके अनेक घटिया वेबसाइटों को किस आधार पर या किस फार्म पर विज्ञापन सूची में शामिल किया गया या विज्ञापन दिये गये , इसका जवाब आज दिनांक तक मध्‍यप्रदेश के किसी अधिकारी कर्मचारी के पास नहीं है । खैर ये तो फर्जीवाड़े और भ्रष्‍टाचार की कहानी है जो कि मध्‍यप्रदेश की पत्रकारिता की जड़ यानि जनसम्‍पर्क विभाग में ही पेबस्‍त है ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स ने इस सरकारी विज्ञापन के आसरे को भी दर किनार करते हुये अपना काम जारी रखा और धीरे धीरे कर के वेबसाइट से वेबपोर्टल और फिर धीरे धीरे बहुत बड़ा वेबसमूह बन गई । अनेक संघर्षों के और संसाधनों के अभाव के चलते हुये भी मुरैना और चम्‍बल जैसी जटिल जगह पर अपना काम जारी रखते रखते अपना काफिला धीरे धीरे ही सही आगे बढ़ाया । लेकिन दुर्भाग्‍य से बिजली के अभाव यानि भारी बिजली कटौती ने वेबसाइट की राह अत्‍यधिक दुश्‍वार कर दी । परिणामस्‍वरूप वेबसमूह को अपने सदा नियमित अपडेट होने वाले अनेक महत्‍वपूर्ण भागों का प्रकाशन ओर अपडेशन रोकना पड़ा । चम्‍बल की आवाज , इण्डिया न्‍यज , हिन्‍दी विकास, भिण्‍ड समाचार, मुरैना समाचार, मध्‍यप्रदेश की आवाज, ग्‍वालियर समाचार जैसे कई भाग लेख आलेख फीचर्स , हास्‍य व्‍यंग्‍व जैसे नियमित अपडेट किये जाने वाले भागों का अपडेशन स्‍थगित करके बैठना पड़ा । हालांकि इस स्‍थगन से नुकसान सरकार का ही हुआ क्‍योंकि इन भागों में 70- 80 फीसदी प्रकाशन और प्रसारण सरकारी ही जाता था । इसके अलावा दन में तीन या चार बार अपडेट किये जाने वाले लोकल फोटो भी अपडेशन से स्‍थगित करने पड़े ।

तमाम संघर्ष और व्‍यथाओं के चलते भी समूह अपना काम जारी रखे रहा और अंतत: मुरैना में ही तुरन्‍त तत्‍काल डोमेन रजिस्‍ट्रेशन सुविधा और वेबसर्वर सुविधा उपलब्‍ध करा दी गयी ।

आज वेबसाइट ने संघर्ष करते हुये अपने कीमती 6 साल पूरे कर लिये हैं और 7 वें वर्ष में प्रवेश कर गई है । 16 नवम्‍बर 2004 को पंजीकृत होकर अस्तित्‍व में आई छोटी सी शुरूआत हालांकि आज बहुत बड़ा आगाज बन गई है और जन जन की आवाज बन गई है ...  अभी तो हमें और आगे जाना है .. बहुत आगे ..  हमारे प्रिय सुधी पाठकों, दर्शकों और सहयोगियों ने सदा हमारा साथ दिया , हमें समर्थन दिया अपना प्‍यार बनाये रखा और हमें जर्रे से आफताब और नाकुछ से तूती की आवाज को बुलन्‍द आवाज में बदला , हम आप सबके हृदय से आभारी है और आपका दिल से शुक्रिया करते हैं ..  आपका हमारा साथ, प्रेम, समर्थन और सहयोग सदा बरकरार रहे, हम अपने फसबुक और ऑरकुट मित्रों के भी आभारी है जिन्‍होनें इतनी विशाल संख्‍या में हमारा साथ देकर हमें काम करने तथा और अधिक बेहतर काम करने की असीम ऊर्जा दी ...   इसी आशा और विश्‍वास के साथ ..

आपका

काफिला चलता रहे , वक्‍त भी चलता रहे , तेरा मेरा साथ न छूटे कभी, बस इतनी इनायत बनी रहे .....  

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

प्रधान सम्‍पादक एवं प्रधान संचालक व सी.ई.ओ.

ग्‍वालियर टाइम्‍स वेब समूह एवं राजहंस वेब रजिस्‍ट्रेशन एवं वेब होस्टिंग सेण्‍टर     

 

एक मूर्खतापूर्ण सरकारी फरमान से लोग परेशान, सरकारी दफ्तर ठप्‍प

एक मूर्खतापूर्ण सरकारी फरमान से लोग परेशान, सरकारी दफ्तर ठप्‍प

मुरैना 17 नवम्‍बर 2010 , कभी कभी कुछ मूर्खतापूर्ण सरकारी फरमान न केवल आम जनता के लिये परेशानी का सवब बन जाते हैं बल्कि खद सरकारी कामकाज को ही ठप्‍प करा देते हैं । ऐसा ही एक विचित्र सरकारी फरमान पिछले एक साल से मुरैना में जिला प्रशासन ने जारी करके न केवल जिले के व्‍यावसायियों को चौपट करने के कगार पर ला खड़ा किया है बल्कि मुरैना के सरकारी कार्यालयों में कुर्सियॉं खाली रहने का भी सवब बन गया है ।

गुमाश्‍ता एक्‍ट या शॉप एक्‍ट के तहत लगभग एक साल पहले जिला प्रशासन ने मुरैना में रविवार को सभी दूकानें व प्रतिष्‍ठान बन्‍द रखने का या जबरदस्‍ती बन्‍द कराने का एक मूर्खतापूर्ण फरमान न केवल जारी ही कर दिया बल्कि डण्‍डे के जोर से जबरन इसे लागू भी करा दिया ।

हुआ ये कि बकौल भारत सरकार और मध्‍यप्रदेश सरकार की वर्षो पुरानी पारम्परिक सोच और रिवाज के मुताबिक लोगों को हफ्ते में एक तयशुदा दिन का अवकाश यानि रविवार का पारम्‍परिक अवकाश दिया जाता है । वह इसलिये कि लोग हफ्ते भर की थकान और सुस्‍ती दूर कर लें अपने परिवार को थोड़ा वक्‍त दे सके उनकी जरूरतें पूरी कर सकें तथा साथ ही अपने अवश्‍यक घरेलू कामकाज व खरीददारी आदि भी कर सकें ।

बकौल हुक्‍म ए जिला प्रशासन मुरैना इसी घोषित पारम्‍परिक रकारी अनिवार्य अवकाश को सारा शहर मुरैना इस दिन बन्‍द रहता है । लोग जो हफ्ते भर बाद अपने या अपने परिवार के लिये जरूरत का कुछ भी सामान खरीदना चाहें तो या बाजार घूना चाहें तो सारा का शहर और दूकानें बन्‍द देखकर यहॉं तक कि पान की दूकानें और चाय ठेले तथा सब्‍जी भाजी तक की दूकानें बन्‍द पाकर मुँह बाये घर वापस आने के और कोई चारा नहीं रहता ।

हालांकि ग्‍वालियर जैसे बड़े शहर में भी सप्‍ताह के अलग अलग दिन अलग अलग बाजार बन्‍द रखने का नियम है जैसे बाड़ा मंगलवार को तो लोहिया बाजार या अन्‍य बाजार अन्‍य दिन को लेकिन मुरैना का हाल ये है कि समूचा शहर एक ही दिन को पूरी तरह बन्‍द और वह भी रविवार को ।

परिणाम ये होता है कि रविवार को शहर में त्राहि त्राहि मच जाती है । सभी चाय पानी और सब्‍जी भाजी तक को तरस जाते हैं ।

केवल आम जनता ही इससे परेशान हो ऐसा नहीं है, सरकारी कर्मचारी भी इसी दिन इसी हाल से गुजरते हैं । प्रायवेट कार्यालयों के कर्मचारीयों और फैक्‍ट्री मजदूरों का हाल तो इससे भी बुरा है । उनका साप्‍ताहिक अवकाश लगभग पूरी तरह बेकार ही जाता है । मजे की बात ये है कि इसका परिणाम ये है कि सरकारी गाडि़यों में साहबों की बीवियॉं , साहब और उनके बच्‍चे साप्‍ताह के अन्‍य दिनों में दिन भर न केवल मुरैना शहर की दूकानों में मटरगश्‍ती करते हैं बल्कि सरकारी दफ्तर और सरकारी कामकाज छोड़कर घरेलू खरीददारी और बाजारी काम काज में लगे रहते हैं , मौके नजाकत और हालात का लाभ उठाकर अफसरों की देखा देखी नीचे के मातहत कर्मचारी भी साहब , साहब की बीवी और साब के जरखरीद गुलामों की देखा देखी साहब के पग चिह्नों पर चल पड़ते हैं , और सरकारी कार्यालय और सीट कामकाज छोड़कर फरार रहते हैं ।