रविवार, 13 सितंबर 2020

चंबल अटल प्रोग्रेस-वे के लिये खुशी-खुशी जमीन दे रहे है किसान, मुख्यमंत्री ने कहा जिसकी जितनी जमीन ली जायेगी, उसे दुगनी जमीन दी जायेगी

 

मुरैना 12 सितंबर ( ग्वालियर टाइम्स - मुरैना ब्यूरो )  अटल प्रोग्रेस-वे के लिये खुशी-खुशी जमीन दे रहे है किसान। शनिवार को श्योपुर और मुरैना जिले से 6 किसानों ने चंबल कमिश्नर कार्यालय में आकर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कृषि ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले। सभी 6 किसानों ने मुख्यमंत्री जी के सामने खुश होकर कहा कि मुख्यमंत्री जी आपने चंबल अटल प्रोग्रेस-वे को स्वीकृति दिलाकर हमारे क्षेत्र को चमन कर दिया है। हमारी आगे आने वाली पीड़ी को इस प्रोग्रेस-वे से रोजगार धंधे मिलेंगे। सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि जो जमीन हमें बदले में मिल रही है वो भी विकसित करके दी जा रही है और चंबल अटल प्रोग्रेस-वे के किनारे की जमीन हमें दी है, जिस पर हम ढ़ाबा होटल सहित अन्य धंधे खोल सकते है।
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी 6 किसानों को धन्यवाद देते हुये कहा कि चिन्ता मत करना, मुख्यमंत्री शिवराज आपके साथ है। जितनी किसान जमीन देगा, उससे दोगुनी जमीन सरकार किसानों को देगी। सरकार आप सभी के साथ है।
    राज्यसभा सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सभी को सिंचित जमीन मिलेगी।  
    जमीन देने वाले किसानों में श्योपुर जिले के ग्राम सामरसा की जलेबीबाई है, जिन्होंने चंबल अटल प्रोग्रेस-वे को जमीन सर्वे क्रमांक 133 में से आधा हेक्टेयर जमीन दी है, बदले में इन्हें दातरदा में एक हेक्टेयर जमीन जलेबीबाई को दी गई है। श्योपुर के ही बनवाड़ा में नवलकिशोर प्रजापति ने जमीन सर्वे क्रमांक 95/1 में से दो बीघा जमीन दी है, बदले में सरकार ने 4 बीघा जमीन दी है। दातरदाकलां रामलखन बेरवा ने सर्वे नंबर 276 में से ढ़ाई बीघा जमीन प्रोग्रेस-वे को दी है। मुरैना जिले के रिठौनाकलां के पुरूषोत्तम पटेल ने सर्वे नंबर 11-10-15-24-191-197-199-200 में से 6 बीघा जमीन दी है। रिठौनाकलां के ही प्रदीप सिंह तोमर ने हल्का भुज 8 में से 6 बीघा जमीन दी है। इसी तरह अंबाह के ऐसाह गांव के जगदीश शर्मा ने सर्वे नंबर 171 में से 13 बीघा 16 वीसवा जमीन चंबल अटल प्रोग्रेस-वे को दी है। 
    मौके पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कृषि ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से भेंट की। प्रधानमंत्री आवास मिले, जिसमें बिचौना गांव के लक्ष्मण, जारह की श्रीदेवी दर्शनलाल ने मौके पर आवास मिलने की खुशी में मुख्यमंत्री को बधाई देते हुये कहा कि मुख्यमंत्री जी आप गरीबों सर्वहारा वर्ग के मददगार हो। 
    इस अवसर पर चंबल कमिश्नर श्री आर.के. मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक श्री मनोज शर्मा, कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया, जिला पंचायत के सीईओ श्री तरूण भटनागर, अतिरिक्त चंबल कमिश्नर श्री अशोक चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

मुरैना की दो अहम और महत्वपूर्ण सीटों के विधानसभा उपचुनाव के लिये कांग्रेस ने घोषित किये प्रत्यााशी , दिमनी और अंबाह से कांग्रेस ने फिर उतारे पुराने चेहरे

कांग्रेस प्रत्याशीयों की 15 विधानसभा क्षेत्रों के लिये उपचुनाव हेतु सूची जारी , 3 सामान्य तो शेष 12 आरक्षित सीटों हेतु प्रत्याशी घोषित हुये , दिमनी सै रवीन्द्र सिंह तोमर , अंबाह से सत्यप्रकाश शेकरवार (गलत सरनेम लिख कर आया है सूची मैं एस सी सीट पर राजपूतों का सरनेम लिख दिया गया है ) जौरा सीट पर इस सरनेम का असर पडेगा , ग्वालियर सीट से प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुकाबले में कांग्रेस ने किसी सुनील शर्मा को टिकिट दिया है , कांग्रेस प्रत्याशीयों की पहली सूची आते ही , उपचुनावों के परिणाम करीब करीब साफ हो गये , और आने वाले उपचुनावों के बाद किसकी सरकार म प्र में 2023 तक रहेगी इस पर से कुहासा हट गया । कांग्रेस की पहली सूची में सिंधिया समर्थकों और दिनेश गुर्जर के लेन देन और सिफारिश‌ वालों को ही टिकिट दिये गये हैं ।

 

शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

सायबर क्राइम से कैसे बचें , पुलिस कार्यवाही न करे तो पुलिस को भी सह अभियुक्त बनायें

 

सायबर क्राइम और हेकिंग कैसे पहचानें और क्या कानूनी कार्यवाही करें कि हैकर्स और आनलाइन आपको सोशल मीडिया तथा अन्य जगह हतोत्साहित करने वाले क्रिमिनल्स को सजा दिलाकर जेल भिजवायें -- नरेन्द्र सिंह तोमर '' आनंद'' एडवोकेट , सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट
बहुत खतरनाक है माइक्रोसाफ्ट का एज क्रोमियम ब्राउजर ..... हेकर्स के लिये बेहद आसान और प्राक्सी वेबसाइट ... नकली वेबसाइटों की ओर रीडायरेक्ट करना .... नये एज क्रोमियम वेब ब्राउजर की विशेषता है , सेव्ड पासवर्ड का हैकर्स के लिये आसानी से इस्तेमाल करना तथा मनमाने नकली प्रदर्शन करना आदि नये एज क्रोमियम ब्राउजर की खासियतें हैं , बच कर रहिये , इसे एंटीवायरस भी सिक्यारिटी प्रदान नहीं करता है , इसमें व्हाटस वेब भी नहीं चलता है और इस एज क्रोमियम ब्राउजर को डिनाई कर देता है ,जबकि इसके उलट इंटरनेट एक्सप्लोरर , गूगल क्रोम ब्राउजर सही काम करते हैं , जबकि फायर फॉक्स को एंटीवायरस सिक्योरिटी प्रदान नहीं करता , हालांकि इसमें व्हाटस एप्प वेब सही चलता है .... अत: इंटरनेट इस्तेमाल करते समय या सर्फिंग करते समय ब्राउजर का चयन काफी सोच समझ कर करें और सिस्टम के सेव पासवर्डों को हर 36 र्घंटे पर बदलते रहें , हालांकि मात्र अकेला माइक्रोसाफ्ट अपने ई मेल में हर 72 घंटे पर पासवर्ड बदलने की सुविधा देता है लेकिन अन्य कोई नहीं , लिहाजा आप कोई सा अकाउंट इस्तेमाल करें दो चरणीय सत्यापन अवश्य लागू करें ।
हैकर इसके बाद अपने आपकी मोबाइल सिम को कनेक्ट करने/ हैक करने का प्रयास करेगा , आप बड़ी आसानी से पकड़ सकेंगें कि हैकर अगल बगल में है या दूर से रिमोट कंट्रोल किया जा रहा है , दूर से कंट्रोल करने वाला मोबाइल सिम कंट्रोल नहीं कर पायेगा और लोकल में ही अगर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी का एजेंट या मांबाइल सिम बेचने वाले कारिंदे या इंटरनेट सामान रूटर या वायरलेस डिवाइसेज , कैमरे वाइफाइ या वेबकैम बेचने या इस्तेमाल करने वाले किसी के द्वारा गड़बड़ी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में आ जायेगी , यह गड़बड़ी ट्रांसमिशन टावर से भी की जा रही होगी तो आसानी से पकड़ में लाने के लिये अपने मोबाइल फोन को एक टावर से दूसरे स्थान की ओर ले जाते वक्त स्विच आफ करके ले जाइये , दूसरे तीसरे चौथे टावर लोकेशन पर इसी तरह अलग अलग चेक कर लीजिये , गड़बड़ी वाला टावर आसानी से पकड़ में आ जायेगा , आपको आई टी एक्ट 2000 के संशोधित अधिनियम व सभी संशोधित प्रावधानों का बेहतर ज्ञान किसी अच्छे सायबर क्राइम स्पेशलिस्ट एडवोकेट से पाना चाहिये ।
उसके उपरांत ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश और दिशा निर्देशों के अनुसार पुलिस को एफ आई आर धारा 154 द प्र सं के तहत देना चाहिये , उसके उपरांत जिला पुलिस अधीक्षक को द प्र सं की धारा 154(3) के तहत और वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयो को द प्र सं की धारा 36 के तहत आई जी , डी आई जी से लेकर डीजीपी तक इसी धारा 36 के तहत शामिल हैं एफ आई आर भेजना चाहिये, अपराध के सबूत इकठ्ठे करना और अपराध सिद्ध करना पुलिस का काम है , यदि फिर भी पुलिस कार्यवाही न करे तो ललिता कुमारी बनाम बिहार राज्य के अनुसार आप पुलिस को केस देने के 15 दिन गुजरने ( 15 दिन गुजरने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सन 2019 में जारी किया है ) के बाद कभी भी आप जिला अदालत में धारा 200 का परिवाद लायें और जिला अदालत उसे रिजेक्ट करे या न सुने तो हाईकोर्ट में धारा 482 की पिटीशन लायें हाईकोर्ट एफ आई आर दर्ज करने और विवेचना करने व उसका धारा 173 के तहत रिपोर्ट यानि कि चालान पेश करने का आदेश जारी करेगा । इसमें खास ख्याल रखने वाली बात यह होगी कि आपने खुद ने जो भी जानकारी या साक्ष्य या सबूत इकठ्ठे करें हैं उन्हें बाकायदा किसी तकनीकी स्पेश्लिस्ट या किसी ऐसे एडवोकेट की मदद से जिसने कि बी एस सी गणित से या इंजीनियरिंग करने के बाद एल एल बी की हो ,
उसकी यानि ऐसे एडवोकेट की सहायता से एक डायरी में सारे ब्यौरे कलमबद्ध कर लेने चाहिये , यह न केवल हाईकोर्ट में काम देंगें बल्कि बाद में एफ आई आर के अदालत में मुकदमें में यानि क्रिमिनल केस के रूप में चलने में मुलजिमों को सजा दिलाने में काम आयेंगेंं , क्योंकि इलेक्ट्रानिक एविडेसेज और इलेक्ट्रानिक रिकार्डस कितने भी बार डिलीट करने के बावजूद कभी ख्त्त्म नहीं होते , ये डिलीट हो जाने के बाद भी बड़ी आसानी से रिकवर हो जाते हैं । चूंकि इन मामलों में एफ आई आर दर्ज न करने वाले या इससे जिम्मेवार सभी पुलिस कर्मी भी इस अपराध में मुलजिम बनते हैं और उनकी नौकरी तो जाती ही है , वेतन पेंशन तो जप्त होते ही हैं , जेल भी तुरंत ही जाना पड़ता है , लिहाजा वे आखरी दम तक साक्ष्य सबूत नष्ट करेंगें और आपको अदालतों तक जाने से रोकेंगें ही , क्योंकि उन्हें अपनी हर चीज जाजी और सीधे सीधे सजा और जेल नजर आती है , इसलिये इस प्रकार के मामले में जिला स्तर पर भी और हाई कोर्ट के स्तर पर भी एडवोकेट सही सोचसमझ कर चयन करें , जिसे पुलिस के खिलाफ और सायबर क्राइमों का लड़ने का बेहतरीन ज्ञान और तजुर्बा हो । ........
-- नरेन्द्र सिंह तोमर ,एडवोकेट , म. प्र. उच्च न्यायालय , खंडपीठ ग्वालियर एवं समस्त अधीनस्थ जिला एवं सत्र न्यायालय ।