शुक्रवार, 4 जुलाई 2008

रूस्‍तम के भयमुक्‍त मुरैना में वारदातों का तूफान जारी, शहर से दो मोटर साइकिल चोरी, मोटर साइकिल सवार से छीने दस हजार

रूस्‍तम के भयमुक्‍त मुरैना में वारदातों का तूफान जारी, शहर से दो मोटर साइकिल चोरी, मोटर साइकिल सवार से छीने दस हजार

मुरैना 3 जुलाई 08, शहर मुरैना और अंचल में आया वारदातों का तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है, आज शहर मुरैना के बीचोंबीच से दो मोटर साइकिले चोरी होने की खबर है ।

एक मोटर साइकिल आज प्रधान डाकघर से एक अल्‍पबचत एजेण्‍ट योगेश कुमार गोयल पुत्र नरेन्‍द्र गोयल की उस वक्‍त गायब हो गयी जब वह एजेन्‍सी के किसी काम से डाकघर गया हुआ था । बमुश्किल 3 या 4 मिनिट बाद ही वह लौटा तो उसने देखा कि उसकी मोटरसाइकिल वहॉं से गायब थी । नरेन्‍द्र गोयल एक गरीब छोटा सा टायपिस्‍ट है जो मुरैना कलेक्‍ट्रेट में टायपिंग कार्य करता है । ग्‍वालियर टाइम्‍स से चर्चा करते करते वह फूट फूट कर रो पड़ा, उसने बताया कि उसकी यामाह लिबेरो कम्‍पनी की मैरून रंग की मोटर साइकिल है जो कि वर्ष 2003 में खरीदी गयी थी जिसका एन्जिन चेसिस नंबर 5 टी एस ओ /20/8 है । गाड़ी का नंबर MP 06 HA 7476 है । घटना आज दोपहर 12:30 बजे की है । पुलिस ने समाचार लिखे जाने तक घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी ।

 

दूसरी घटना कलेक्‍ट्रेट से किसी पटवारी की मोटर साइकिल गायब हो जाने की है, घटना का विस्‍तृत विवरण प्रतीक्षारत है ।

तीसरी घटना में मुरैना के ब्राह्मण पत्रकारों ने एस.पी. मुरैना को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि एक मोटर साइकिल सवार व्‍यक्ति से कुछ बदमाश 10 हजार रूपये छुड़ा कर भाग गये । इसी ज्ञापन में बताया गया है कि पचौरी हलवाई की दूकान से बदमाश 3 लाख 44 हजार रूपये से भरा  थैला चुरा कर भाग गये । 

 

ब्राह्मण पत्रकारों पर हो रहे इस अत्‍याचार के खिलाफ ब्राह्मण पत्रकारों ने आन्‍दोलन की धमकी दी है ।

अपहृत नितिन तिवारी रिहा, तीन डकैत पकड़े, रामसहाय गूजर अपने साथीयों सहित बच निकला

अपहृत नितिन तिवारी रिहा, तीन डकैत पकड़े, रामसहाय गूजर अपने साथीयों सहित बच निकला

मुरैना 3 जुलाई 08, मुरैना पुलिस द्वारा आज रात को एक मुठभेड़ का दावा करते हुये विगत 29 मई 2008 से डकैत रामसहाय गूजर द्वारा अपहृत किये गये गांधी कालोनी मुरैना निवासी नितिन तिवारी पुत्र विशम्‍भर तिवारी को मुक्‍त करा लिया ।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया हे कि नितिन तिवारी को उसके मित्रों शेरा उर्फ झबर सिंह गुर्जर निवासी पचोखरा, पपिया मुसलमान, एवं थान सिंह गुर्जर ने 29 मई को पीने खाने के बहाने एक नीले रंग की मारूति से लिवा ले गये और फरार डकैत रामसहाय गूजर निवासी ग्राम मोरोली जिला धौलपुर राजस्‍थान के गिरोह को सौंप दिया । डाकू रामसहाय गूजर द्वारा द्वारा अपहृत नितिन के परिजनों को लगातार धमकी देकर 30 लाख रूपये की फिरौती की मांग की जा रही थी । जिसके चलते पुलिस ने अपनी गुप्‍त रणनीति बनाई और अपहरणकर्ताओं के तमाम नाते रिश्‍तेदार दोस्‍त यारों से पूछताछ की गयी ।

पुलिस को विगत रात खबर मिली कि डकैत रामसहाय अपने गिरोह के साथ अपहृत नितिन तिवारी को लेकर चम्‍बल नदी पार करके कैमरा के बीहड़ में भगवानदास बाबा की जग्‍गा पर पड़ाव डाले हुये है । इस सूचना पर कार्यवाही करते हुये पुलिस ने भगवानदास बाबा की जग्‍गा पर दविश दी तो रात्रि 1 बजे जग्‍गा के चबूतरे पर कुछ लोगों की हलचल प्रतीत हुयी । जिस पर पुलिस ने डकैतों को ललकारा तो डकैत बीहड़ों में तितर बितर होकर भागे, जिनका पीछा किया गया तो तीन बदमाश डकेत रणजीत सिंह पुत्र मुरारी लाल गुर्जर, निवासी चपरौली, मोहन प्रकाश पुत्र मुरारी लाल गुर्जर, निवासी चपरौली, मनोज कुमार पुत्र अतर सिंह कड़ेरा निवासी तोर जिला धौलपुर पकड़े गये । अपहृत नितिन तिवारी डरा सहमा वहॉं बने एक कमरे में दुबका हुआ मिला ।

बकौल जनचर्चा

पूरे आपरेशन में फायरिंग नहीं हुयी । और अपहृत नितिनि तिवारी के बदले दिल्‍ली से डकैत रामसहाय गूजर की पत्‍नी और उसके बच्‍चों को पुलिस ने बंधक बना लिया था और डकैत रामसहाय गूजर को नितिन तिवारी को रिहा करने के लिये बाध्‍य कर दिया था । उल्‍लेखनीय यह है कि पहली बार इतिहास में ऐसा हुआ है जब कोई अपहृत बिना फिरौती दिये छूटा हो । इस बार वाकई पुलिस ने बिना फिरौती के, केवल पकड़ के बदले पकड़ वाले फार्मूले से नितिन तिवारी को रिहा करा लिया है । नितिन तिवारी के परिवार की ऐसी हैसियत नहीं थी कि वह फिरौती दे पाता । 

गुरुवार, 3 जुलाई 2008

पत्रकार शर्मा के 36 हजार रूपये चोरी, कलेक्‍ट्रेट के सामने गुफा मन्दिर के पास से साढ़े तीन लाख की चोरी, पुलिस अपने कमीशन के इन्‍तजार में हाथ पर हाथ धरे बैठी, ब्राह्मण पत्रकारों ने एस.पी. को ज्ञापन दिया

पत्रकार शर्मा के 36 हजार रूपये चोरी, कलेक्‍ट्रेट के सामने गुफा मन्दिर के पास से साढ़े तीन लाख की चोरी, पुलिस अपने कमीशन के इन्‍तजार में हाथ पर हाथ धरे बैठी, ब्राह्मण पत्रकारों ने एस.पी. को ज्ञापन दिया   

मुरैना 3 जुलाई 08, एक ही दिन में 30 जून को वरिष्‍ठ पत्रकार रामगोविन्‍द शर्मा के 36 हजार रूपये कलेक्‍ट्रेट स्थित तहसील के सामने से चुरा लिये, एस.पी.आफिस यहॉं से चन्‍द कदम की दूरी पर है । इसी दिन एक अन्‍य व्‍यक्ति के साढ़े तीन लाख रूपये भी चोरों ने पार कर दिये । यह घटना भी कलेक्‍ट्रेट के ठीक सामने स्थित गुफा मन्दिर के निकट घटित हुयी । फिलहाल पुलिस हाथ पर हाथ धरे, चोरों से अपने कमीशन के आने का इन्‍तजार कर रही है । ब्राह्मण पत्रकारों ने एस.पी. को अपना ज्ञापन घटना के विरोध में सौंप दिया है । उल्‍लेखनीय है कि अन्‍य जाति के पत्रकारों के यहॉं चोरी लूट होने पर तथाकथित पत्रकार संघ मौन और लापता रहते हैं, सभी पत्रकार संघ एक जाति विशेष की जेबी संस्‍थायें बन कर रह गये हैं ।

 

मुरैना के विजयगढ़ में डेढ़ लाख की डकैती, चार को मरणासन्‍न किया, पुलिस को खबर थी डकैती की, गांधी कालोनी से जुड़े डकैती के तार

मुरैना के विजयगढ़ में डेढ़ लाख की डकैती, चार को मरणासन्‍न किया, पुलिस को खबर थी डकैती की, गांधी कालोनी से जुड़े डकैती के तार

मुरैना 3 जुलाई 08, मुरैना में चल रही आपराधिक वारदातों का तूफान थम नहीं रहा है, अम्‍बाह तहसील के महुआ थाना क्षेत्र में ग्राम विजयगढ़ में मंगलवार की रात कच्‍छा बनियान गिरोह ने एक ब्राह्मण परिवार के यहॉं धावा बोल कर चार लोगों को घायल कर मरणासन्‍न कर डेढ़ लाख की डकैती डाल दी । पूरे गॉंव में घटना के दरम्‍यान किसी को कानों कान खबर नहीं लगी ।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक विजयगढ़ के राधेश्‍याम शर्मा के घर में बीती रात लगभग आधा दर्जन कच्‍छा बनियान धारी बदमाश घुस आये । बदमाशों ने घर में रखे सोने चांदी के जेवरात लूट लिये । परिवार पर सरियों व डण्‍डों से वार कर दिया जिससे घर के सदस्‍य घायल हो गये । बदमाश रात करीब ढाई बजे घर में घुसे । जब वे सोने चांदी के जेवरात आदि ढूंढ़ने लगे तो घर की महिलायें जाग गईं, उन्‍होंने बदमाशों का मुकाबला किया लेकिन बदमाशों ने उन पर डण्‍डों व सरियों से हमला कर दिया जिसमें राधेश्‍याम के घर के मनोज, आशीष, संगीता, और मनीषा गंभीर रूप से जख्‍मी हो गये । रात में ही चारों को मरणासन्‍न अवस्‍था में जिला अस्‍पताल मुरैना में लाया गया । पुलिस ने डकैती का मामला कायम कर लिया है ।

पुलिस को खबर थी डकैती की, गांधी कालोनी से जुड़े डकैती के तार

घटना वाली रात ग्‍वालियर टाइम्‍स डॉट कॉम के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी एडवोकेट नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द'' ने रात 1 और 1:15 बजे के बीच कच्‍छा बनियान पहने करीब चार पॉंच लोगों को गॉंधी कालोनी मुरैना में गायों और कुत्‍तों को पत्‍थरों से मार मार कर भगाते देखा था जो विभिन्‍न तीन तिराहों चौराहों पर अलग अलग ग्रुप में खड़े थे, श्री तोमर ने इसकी खबर फोन से पुलिस को तुरन्‍त दी थी लेकिन पुलिस ने इत्‍तला को हवा में उड़ा दिया, संभवत: वे वही लोग हों जिन्‍होंने विजयगढ़ में घटना वाली रात डकैती डाली अथवा संभवत: उसी गिरोह का पार्ट-2 रहा हो और शहर मुरैना या गांधी कालोनी में ही किसी वारदात की नीयत से घूम रहा हो । यदि पुलिस समय पर कार्यवाही करती तो या तो विजयगढ़ की वारदात नहीं होती अथवा डकैत हाथ आ जाते । श्री तोमर ने अकेले ही बदमाशों का पीछा किया था, और तोमर को देख बदमाश गांधी कालोनी पार्क तथा रामअवतार शर्मा की गली की ओर भागे लेकिन गांधी कालोनी में स्‍ट्रीट लाइटें न होने से वे अंधेरे में गायब हो गये ।

उल्‍लेखनीय है कि हाल ही में श्री तोमर के घर में चोरी हुयी है, जिससे वे अब रात भर जाग कर अन्‍य मोहल्‍लेवासीयों तथा घर के अन्‍य सदस्‍यों की मदद से खुद ही जाग कर पहरा देते हैं । और कई इत्‍तलायें अब तक पुलिस को दे चुके हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती जिससे हर बार बदमाश और चोर हाथ से निकल जाते हैं । स्‍ट्रीट लाइटों के अभाव में भी उनका लम्‍बी दूर तक पीछा नहीं किया जा सकता है ।

 

बुधवार, 2 जुलाई 2008

सूचना आयोग ने मुरैना न्‍यायालय को आवेदक को 15 दिन में सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये, आयोग के निर्देश पर मिली आवेदक को सूचनायें, आयोग की लताड़ के बाद अब अधिनियम की धारा 4 का भी पालन करेगा मुरैना न्‍यायालय

सूचना का अधिकार में सूचनायें न देने पर मुरैना न्‍यायालय के विरूद्ध 25 हजार के जुर्माने की कार्यवाही प्रारंभ

खास रपट नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

सूचना आयोग ने मुरैना न्‍यायालय को आवेदक को 15 दिन में सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये

आयोग के निर्देश पर मिली आवेदक को सूचनायें, आयोग की लताड़ के बाद अब अधिनियम की धारा 4 का भी पालन करेगा मुरैना न्‍यायालय

मुरैना 2 जुलाई 08, अंतत: लड़ते लड़ते आवेदक की विजय हुयी । हालांकि मुकाबला टेढ़ा था कठिन था, और किस्‍सा जल में रहकर मगर से वैर करने वाला था, लेकिन लड़ाई अधिकारों को पाने और हक की थी, सत्‍य की शक्ति और हौसलों की सवारी पर चढ़कर गरीब तथा लाचार होने के बाद भी वह जंग जीत गया ।

एक चींटीं जब किसी हाथी को चुनौती देती है, तो उपहास का पात्र बन जाती है, वह भी बन गया था लेकिन चींटीं ने आखिर हाथी को पछाड़ दिया । और भारत के उन हजारों आसधारीयों को आशा और हौसलों की एक किरण दे दी जो सूचना का अधिकार पाने के लिये आज तक संघर्षरत हैं ।

मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग ने न्‍याय व सच्‍चाई का साथ देते हुये थोड़ी सी हिम्‍मत दिखाई है इसे कुछ हद तक शुभ ही माना जा सकता है । ऐसे मिसाली (माइल स्‍टोन्‍ड) फैसले आयोग थोड़ी सी हिम्‍मत जुटाकर सुनाता रहे तो लोगों में सूचना का अधिकार के प्रति पुन: विश्र्वास जागेगा और लगभग विस्‍मृत किये जा चुके इस जन अधिकार को पुनर्जीवन प्राप्‍त होगा । मेरी नजर यह प्रतीकात्‍मक अलार्म बनना चाहिये और मीडिया में ऐसे निर्णयों को खास तवज्‍जो दी जाना चाहिये ।

मुरैना जिला की छोटी सी तहसील कैलारस में वकालत करने वाले एडवोकेट लज्‍जाराम पाण्‍डेय की मध्‍यप्रदेश के राज्‍य सूचना आयोग को की गयी द्वितीय अपील में यह निर्णय आया है । आयोग ने अपने ताजे निर्णय में मुरैना जिला न्‍यायालय को 15 दिवस के भीतर सूचनायें उपलब्‍ध कराने के सख्‍त आदेश के साथ ही जिला न्‍यायालय मुरैना के लोकसूचना अधिकारी एस.आर.अनगरे के खिलाफ 25 हजार रूपये की जुर्माना वसूलने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है ।

कैलारस के एडवोकेट लज्‍जाराम पाण्‍डेय द्वारा 4 जनवरी 2007 को सूचनायें चाहे जाने के लिये अपना आवेदन मुरैना जिला न्‍यायालय के लोकसूचना अधिकारी एस.आर.अनगरे के समक्ष प्रस्‍तुत किया, अनगरे द्वारा अपने लोकसूचना अधिकारी होने सम्‍बन्‍धी तथ्‍य से इंकार किया जिस पर आवेदक लज्‍जाराम द्वारा मुरैना के तत्‍कालीन जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश बी.डी.राठी के समक्ष अपना आवेदन प्रस्‍तुत किया, बी.डी. राठी उस समय जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश होने के साथ ही सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मध्‍यप्रदेश के माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा अपीलीय अधिकारी नियुक्‍त किये गये थे, इसी आदेश के तहत माननीय उच्‍च न्‍यायालय म.प्र. ने न्‍यायालय अधीक्षक एस.आर. अनगरे को मुरैना जिला न्‍यायालय का लोकसूचना अधिकारी नियुक्‍त किया था । लेकिन आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय द्वारा सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्‍तुत किया तो दोनों ही लोगों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपनी नियुक्तियों को जो कि मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय द्वारा की गयी, दरकिनार करते हुये, अपीलीय अधिकारी बी.डी.राठी ने खुद को लोकसूचना अधिकारी के रूप में प्रकट कर आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय से उसका आवेदन ग्रहण कर लिया जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाही करने और पंजीबद्ध करने के बजाय नियमित न्‍यायालयीन कार्यवाही में लेकर आवेदन क्रमांक 53 पर पंजीकृत कर लिया, इसके अलावा एक तमाशा और भी किया आवेदक द्वारा अपने आवेदन के साथ अधिनियम के तहत आवेदन शुल्‍क के रूप में मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 10 रूपये का नान जूडिशियल स्‍टाम्‍प भी संलग्‍न किया था इसके अतिरिक्‍त आवेदक से 10 रूपये अतिरिक्‍त और भी दोबारा आवेदन के साथ ही शुल्‍क के रूप में वसूल लिये जिसकी रसीद क्रमांक 94/1734 काट दी गयी ।

उपरोक्‍त बातों के अलावा और भी अधिक गंभीर बात थी कि आवेदक ने बी.डी.राठी पर नोटरी नियुक्ति के पैनल भेजे जाने में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाते हुये, बी.डी.राठी द्वारा संपादित कार्यालयीन कार्यवाहीयों के दस्‍तावेज मांगे गये थे । और खुद के खिलाफ आरोपग्रस्‍त सूचना के अधिकार के आवेदन को न केवल स्‍वयं ही अनाधिकृत रूप से ग्रहण किया बल्कि उसकी सुनवाई भी कर डाली और निर्णय भी सुना डाला ।

जब आरोपी ही जज हो तो फैसला क्‍या होगा, वही हुआ आवेदक के आवेदन को अधिनियम में प्रावधानित कोई भी कार्यवाही किये बगैर सीधे ही 10 एवं 11 जनवरी (दो भिन्‍न आदेश) 2007 को खारिजी आदेश जारी कर आवेदक को सूचना दिये जाने से अधिनियम की धारा 8(1) (जे) की शक्ति की आड़ लेकर खारिज कर दिया ।

आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय के इस आवेदन के खारिज होने के बाद बड़ी विचित्र स्थिति उत्‍पन्‍न हो गयी । आवेदक के आवेदन को लोकसूचना अधिकारी के बजाय अपीलीय अधिकारी ने ग्रहण कर फैसला सुना दिया था, सो अब प्रश्‍न यह था कि आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय अधिनियम की धारा 19 के तहत अपनी पहली अपील कहॉं व किसे प्रस्‍तुत करे । ऐसी स्थिति में आवेदक ने अधिनियम की धारा 19 को पालन करते हुये अपनी पहली अपील मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय के ग्‍वालियर व जबलपुर के अपीलीय अधिकारीयों तथा स्‍वयं पुन: बी.डी.राठी को अपीलीय अधिकारी के रूप में प्रस्‍तुत कर दी साथ ही एक प्रति मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग को भी भेज दी ।

विचित्र स्थिति निर्मित हो जाने से, उच्‍च न्‍यायालय ने बी.डी.राठी को नियमित स्‍थानान्‍तरण प्रक्रिया के तहत मुरैना से अन्‍यत्र स्‍थानान्‍तरित कर दिया । लेकिन तकनीकी विसंगति व त्रुटि प्रकरण में आ जाने से प्रथम अपील अनिराकृत ही रही । तब आवेदक ने मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग अपनी द्वितीय अपील प्रस्‍तुत की । इस द्वितीय अपील को म.प्र. के राज्‍य सूचना आयोग द्वारा क्रमांक ए-0195 पर पंजीकृत कर लिया और सुनवाई प्रारंभ की ।

लगभग एक साल बाद आयोग ने आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय की अपील का निराकरण करते हुये मुरैना जिला न्‍यायालय के खिलाफ अपना फैसला 10 अप्रेल 2008 को सुनाया और आवेदक को 15 दिन के भीतर सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये । और मुरैना जिला न्‍यायालय के लोकसूचना अधिकारी के खिलाफ 25 हजार रूपये जुर्माना वसूलने की कार्यवाही अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रारंभ कर दी ।

आयोग के फैसले के लगभग 50 दिन बाद मुरैना जिला न्‍यायालय ने आवेदक को सूचनायें उपलब्‍ध करवा दीं । लेकिन आवेदक द्वारा अपने आवेदन में मुरैना जिला न्‍यायालय द्वारा अधिनियम की धारा 4 के पालन किये जाने एवं इण्‍टरनेट पर जानकारीयां उपलब्‍ध कराये जाने सम्‍बन्‍धी सवाल पर हैरत अंगेज उत्‍तर देते हुये सारा दोष म.प्र.उच्‍च न्‍यायालय के ऊपर पटक दिया है और कहा है कि म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय ने इस धारा का पालन करने के आदेश 24 मई 2008 को दिये जाना बताया गया है ।

आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय को सूचनायें प्राप्‍त हुयीं इस लम्‍बी लड़ाई से अवश्‍य ही अन्‍य लोगों को प्रेरणा प्राप्‍त होगी । उल्‍लेखनीय है कि लज्‍जाराम पाण्‍डेय गरीब अभिभाषक है, इसके बावजूद वह लड़ा और जीता ।  

मंगलवार, 1 जुलाई 2008

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था –भाग- 1, मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था भाग- 1

किश्‍तबद्ध रिपोर्ट ऑंखों देखी, भुक्‍त भोगी- नो कायमी नो चालान

मजे की बातें पते की बातें- 100 प्रतिशत सच

 मय सबूत

टीप इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया जाने से पहले सारी सच्‍चाई का स्‍पष्‍ट ध्‍यान रखा गया है साथ ही सावधानी बरती गयी है कि , हम यह जानते हैं इसके प्रकाशन का अंजाम क्‍या हो सकता है, इसके लिये हमने अपने स्‍तर पर पूर्ण व्‍यवस्‍था की है । और हम अपने सूत्र वाक्‍य '' यदा यदा हि धर्मस्‍य ग्‍लानिर्भवति भारत...'' तथा ''स्‍वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:'' एवं '' धर्म युक्‍त युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिये अन्‍य कोई कल्‍याण कारक कर्तव्‍य नहीं है , को स्‍मरण व आधार बना कर इस धर्म युद्ध व सत्‍य संग्राम का प्रारंभ करते हैं । ''यत्र योगेश्‍वर कृष्‍णो यत्र पार्थो: धनुर्धर: । तत्र श्री: र्विजयोर्भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।   

·          पॉंच साल में एक भी चोर नहीं पकड़ पाई मुरैना पुलिस (सबूत हमारे पास है)

·          हाईकोर्ट के आदेश से दर्ज मामलों एवं पुलिस विवेचना में सिद्ध पाये गये अपराधों में छह साल में एक भी अपराधी नहीं गिरफ्तार कर पायी न चालान पेश कर पायी मुरैना पुलिस, फर्जी खात्‍मा रिपोर्ट भी लगा देती है पुलिस

·          थाने बने व्‍यावसायिक परिसर और दलाली केन्‍द्र, नहीं दर्ज होतीं थानों में एफ.आई.आर., दिल बहलाने को गालिब ख्‍याल अच्‍छा बनकर रह गयी दण्‍ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154, 154(3) और इण्‍टरनेट से दर्ज रिपोर्टें

·          पुलिस की नौकरी बनाम अपराध करने का खुला लायसेन्‍स और कमाई का बेस्‍ट जरिया, महज राजनेताओं और अपराधियों के नौकर और दलाल बन कर रह गयी है पुलिस

·          नवाचार प्रणाली और इण्‍टेलीजेन्‍सी क्राइम तथा सायबर क्राइम में शून्‍य बटा सन्‍नाटा है मुरैना पुलिस

·          दिनदहाड़े सुबह शाम और रात हर घड़ी घटित हुये अपराध, दिन के सोलह प्रहर चौबीस घण्‍टे जनजीवन असुरक्षित

·

·          पुलिसिया बदला, फर्जी मुठभेड़ों, फर्जी केसों में फंसाने में अव्‍वल एवं माहिर है मुरैना पुलिस

·

·          दण्‍ड प्रक्रिया संहिता एवं उसके संशोधनों का , पुलिस एक्‍ट (संशोधित) का ज्ञान शून्‍य बटा सन्‍नाटा, खुलेआम सरे थाने रात दिन टूटता है कानून 

·          डकैत खुल कर होते हैं डकैत, मगर पुलिस है लायसेन्‍स्‍ड डकैत, चोर, ठग, और जेबकट   

 

मुरैना 1 जुलाई 08, शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों ताबड़तोड़ वारदातों का सिलसिला जारी है । मजे की बात ये है कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठकर महज तमाशाई बन कर रह गयी है । और मलाल ये है कि घट रहे अपराधों में से 70 फीसदी मामलों में पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती । सबसे अधिक बुरे हालात सिटी कोतवाली मुरैना के क्षेत्र के हैं । हमने इस रिपोर्ताज के लिये पुखता सबूत जुटाये हैं ।  

अभी इस साल की होली के आसपास से शुरू हुआ वारदातों का सिलसिला खत्‍म होने के बजाय दिनोंदिन रफ्तार पकड़ता जा रहा है । सबसे अधिक बुरे हालात मई जून के महीने में रहे । जिसमें चोरी, लूट, अपहरण और हत्‍याओं की आंधी सी चल पड़ी ।

हमारे सूत्रों से संकलित जानकारी के मुताबिक महज मई जून के महीने में समूचे जिले को छोड़कर केवल शहर मुरैना में 7 अपहरण, 71 लूट, 13 हत्‍यायें और लगभग ढाई सैकड़ा चोरीयां हुयीं । अफसोस जनक तथ्‍य यह है कि पुलिस ने 70 फीसदी मामलों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की । सर्वाधिक घटनायें मोबाइल लूटने, चोरी किये जाने और छीनने की घटनायें हुयीं केवल मई जून में मुरैना शहर से 1700 मोबाइल छीने, लूटे और चोरी किये गये । पुलिस ने अधिकांश या लगभग सभी मामलों में (अपवाद स्‍वरूप कुछ मामले छोड़ दीजिये) रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कीं ।

मुरैना को भयमुक्‍त व आतंकमुक्‍त करने का नारा और वायदा देकर चुनाव जीतने वाले मध्‍यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रूस्‍तम सिंह स्‍थानीय मुरैना विधानसभा से ही विधायक हैं । उनके मुरैना जिला को भय व आतंक से मुक्‍त करने की बात तो छोड़ कर फेंक ही दीजिये उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र विशेषकर शहर मुरैना में सबसे ज्‍यादा भय व आतंक का कहर इस समय व्‍याप्‍त है ।

मुरैना शहर तो इन दिनों अपराधियों की राजधानी या यूं कहिये कि स्‍वर्ग है । जहॉं आप शौक से कहीं भी कभी भी वारदातें करिये, मजे से रहिये, खुले आम घूमिये । पुलिस आपको न तंग करेगी न परेशान बल्कि फुल प्रोटेक्‍शन मिलेगा और अगले क्‍लास या लेवल तक उन्‍नत वारदातें सीखने के तौर तरीके भी जानने को मिलेंगें ।

हमारी रिसर्च के मुताबिक मध्‍यप्रदेश तो क्‍या भारत के किसी भी पुलिस वाले या उसके रिश्‍तेदार को यदि मोबाइल फोन की जरूरत है तो उसका कोई परिचित मुरैना पुलिस में होना चाहिये । आप मुरैना पुलिस के अदने से सिपाही से लेकर बड़े अफसर तक से फ्री के मोबाइल आसानी से प्राप्‍त कर सकते हैं । इन मोबाइल सेटों की कीमत हजार ग्‍यारह सौ रूपये से लेकर तीस चालीस हजार रूपये तक होती है लेकिन सब फ्री में या चार पॉंच सौ रूपये में आपको मुरैना से उपलब्‍ध हो जाते हैं ।

मुरैना के केवल स्‍थानीय वाशिन्‍दों के ही मोबाइल छीने, लूटे या चोरी जाते हों ऐसी बात नहीं है । बाहर से आने वाले लोगों के सड़क चलते, बस से उतरते ट्रेन में चढ़ते मोबाइल छीन, लूट या चोरी कर लिये जाते हैं ।

कौन छीनता लूटता या चोरी करता है मोबाइल

मोबाइल छीनने, लूटने और चोरी करने वालों के कई जुदा रैकेटस हैं लेकिन आश्‍चर्य जनक तथ्‍य यह है कि इन सभी की किशोर वय या नवयुवा अवस्‍था है जो कि 13-14 साल की उम्र से लेकर करीब 27 -28 साल के दरम्‍यान ही हैं । सबके लगभग जुदा ग्रुप हैं । ये लोग रास्‍ता चलते मोबाइल पर बात कर रहे लोगों से या उनके कपड़ो की जेबों में से पलक झपकते या कुछ ही सेकण्‍डों के भीतर मोबाइल उड़ा देते हैं, आदमी तब तक सारा माजरा समझे तब तक मोटर साइकिल या बाइक से उड़नछू हो जाते हैं । घरों में चोरी होने की 60-65 फीसदी वारदातों में मोबाइल अवश्‍य ही चुराये गये । घरों में रात को या दिन को कूदने या गृह भेदन के मामलों में इन किशोरों के नाम आना निसंदेह भारत के भविष्‍य के लिये चिन्‍ताजनक है । जहॉं इन किशोरों को छात्र होने का कानूनी लाभ और सहानुभूति मिलती है वहीं किशोर वर्ग में शराब, जुआ, चोरी, सट्टा और लूट की बेतहाशा रूचि वृद्धि कुछ खतरनाक संकेत भी देती है । समझने वाले समझ सकते हैं कि इन कुप्रवृत्तियों के पीछे क्‍या कारण और मकसद हैं ।

मैंने लम्‍बा समय अपराधीयों के रिसर्च और तरीकों पर गुजारा है, मुझे हैरत है कि कभी बम्‍बई या मुम्‍बई में घटित होने वाली क्राइम प्रणाली चम्‍बल में आज आम हो गयी है, जबकि कुछ समय पहले यहॉं की अपराध प्रणाली सर्वथा भिन्‍न थी । आज किशोरों को लाभ, लोभ, ऐश, आराम और शराब, पैसे तथा नाम रूतबा बुलन्‍दी के लिये आसानी से लोग हायर कर लेते हैं । जिसे दूसरी भाषा में गुण्‍डे पालना या सुपारी देना कहा जाता है । चम्‍बल का हर अदना या बड़ा नेता इन किशोर गुण्‍डों को हायर कर रहा है यह बात ठीक है लेकिन समाज का व्‍यवसायी वर्ग या प्रतिष्ठित वर्ग भी इन्‍हें हायर करने में लगा है, पुलिस ने व्‍यावसायिक तौर पर एवं बदला कार्यवाही के लिये इन्‍हें हायर करना शुरू कर दिया है यह चिन्‍ताजनक है । कई लोगों को नहीं मालुम होगा कि उनकी संतान गलत संगत में है या हायर्ड है लेकिन बहुतेरे लोगों को बाकायदा यह पता होता है कि उनकी संतान हायर्ड है और कई कारणों से वे इस हायरिंग को कन्‍टीन्‍यू रहने देते हैं । मसलन एक गुण्‍डे के आतंक से बचने का अच्‍छा उपाय है दूसरे गुण्‍डे की शरण में बने रहो, या उनकी किशोर संतान उन्‍हें मरने या आत्‍महत्‍या करने की धमकियां देतीं हैं, या आत्‍महत्‍या के प्रयास तक एकाध बार करके दिखा देते हैं , जिससे घर परिवार के लोग भयवश मौन हो जाते हैं । यह सतत प्रक्रिया है । कभी कभी घर वाले खुद ही लोभ लालच में फंस कर उनकी संतान के आपराधिक लाभों में भागीदार बन कर इलेक्‍ट्रानिक सामानों और कई चीजों व रूपये पैसे से समृद्ध होने लगते हैं । हालांकि कई कारण इस सम्‍बन्‍ध में प्रखर हैं किन्‍तु हर कारण इन किशोर युवाओं को आपराधिक दलदल में प्रविष्‍ट होने और सतत रहने की ओर ही प्रेरित करता है । सबसे अधिक खतरनाक तथ्‍य यह है कि केवल बालक किशोर युवा ही नहीं वरन बालिकायें किशोर नवयुवतियां भी इब इन गिरोहों में शामिल हो गयीं हैं । पिछले दिनों कई मामलों में मुरैना शहर में इस तरह की लड़कियों को पकड़ा गया ।  

 

क्रमश : जारी अगले अंक में .....      

 

सोमवार, 30 जून 2008

पंचायत मंत्री ने दी परीक्षा गांव में अनेक सौगातें

पंचायत मंत्री ने दी परीक्षा गांव में अनेक सौगातें

मुरैना 29 जून 08/ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह आज मुरैना जनपद के ग्राम परीक्षा में ग्रामीणो से रू ब रू हुए । उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा पानी, बिजली और सड़क की व्यवस्था में सुधार कर तेजगति से विकास कर प्रदेश को समृध्द शाली राज्य बने । श्री सिंह ने 25 लाख रूपये से नलजल योजना स्थापित करने की घोषणा की । इस अवसर पर भ्रमण के समय अनुविभागीय अधिकारी डा.एम.एल. दौलतानी, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, प्रधान मंत्री सड़क योजना, महिला एवं बाल विकास, जनपद सीईओ मुरैना आदि विभागों के अधिकारी, बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला, पुरूष उपस्थित थे ।

       पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा है कि हर वर्ग के अंतिम छोर तक के व्यक्ति को विभिन्न कल्याणकारी संचालित योजनाओं का लाभ मिले । उन्होंने प्रधान मंत्री सड़क योजनान्तर्गत परीक्षा ग्राम से बुध्दसिंहकेपुरा तक चार किलो मीटर रोड के प्राकलन तैयार करने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये जिसमें गांव में सी.सी.रोड बनाने को कहा । उन्होंने कहा कि इस गांव को रिठौरा फीटर से जोडा जायेगा, जिससे ग्रामीणों को प्रर्याप्त मात्रा में बिजली की आपूर्ति मिल सकेगी । उन्होंने परीक्षा से दतहरा ग्राम को जोड़ने हेतु 2 कि.मी. रोड़ का भी आश्वासन दिया । श्री सिंह ने गांव में चार नये हैण्ड पम्प की स्वीकृति भी दी और तालाब का जीर्णोध्दार करने की बात कही । 

       श्री सिंह ने कहा कि पूर्व से स्वीकृत भगपुरा का हाईस्कूल परिवर्तित कर परीक्षा गांव में 1 जुलाई से प्रारंभ किया जायेगा । जिसमें बालक/बालिकाओं को मध्यान्ह भोजन और बालिकाओं को साइकिल, ड्रेस आदि प्रदाय की जायेगी । उन्होंने कहा कि गरीब की बेटी को अब बोझ नहीं रहने देंगे, बल्कि उसे वरदान बनाकर ही दम लेंगे । प्रदेश शासन की लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत माधुरी और महक 2 बालिकाओं के अभिभावकों को 6-6 हजार रूपये के राष्ट्रीय बचत पत्र वितरित किये।

ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए आगे कहा कि सरकार ने घाटे की खेती को फायदे का धंधा बनाने का संकल्प लिया है । इसके लिए कृषि लागत को कम करने के प्रयास किये गये हैं । खाद-बीज के ऋण पर ब्याज दर घटा दी गयी है और राजस्व पुस्तक परिपत्र में संशोधन कर फसल क्षति की राहत में वृध्दि की गई है ।

       इस अवसर पर सरपंच श्री दर्शन सिंह राठौर ने मंत्री जी को मांग पत्र पढ़कर सुनाया और स्वागत भाषण भी दिया श्री गंगा प्रसाद सिंह मावई, श्री दण्डोतिया, रामबीर सिंह कंषाना, श्री अरबिन्द भदौरिया ने भी बिचार व्यक्त किये ।