मंगलवार, 25 अगस्त 2015

नदी तो साली कहीं है है ही नहीं , मगर मगरमच्छ चारा चुग रहे हैं करोड़ों का हर साल , किस्सा मुरैना की बिजली का

नदी तो साली कहीं है है ही नहीं , मगर मगरमच्छ चारा चुग रहे हैं करोड़ों का हर साल , किस्सा मुरैना की बिजली का - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' बिजली विभाग मुरैना ( मध्य क्षेत्र विद्य़ुत वितरण कंपनी) के आफिसर्स के विरूद्ध बड़ी पुलिस कार्यवाही ( आजीवन कारावास तक की सजा की ) करने की तैयारी , कलेक्टर मुरैना फर्जी बिलिंग और कूटरचित बिलिंग से नाराज , न खंबे न तार , फिर भी मुरैना के सारे गॉंवों के किसान बना दिये बिजली विभाग ने फर्जी बिल दे देकर डिफाल्टर कलेक्टर मुरैना शिल्पा गुप्ता ने दिये सत्यापन और प्रमाणीकरण के आदेश , दिये और कहा अगर निकला मामला फर्जी बिलिंग का सही तो दर्ज होगी एफ. आई.आर. बेशक कलेक्टर मुरैना शिल्पा गुप्ता चौपाल कार्यक्रम के तहत अब तक जहॉं जहॉं जिन जिन गॉंवों में गई हैं , हर गॉंव में यही आलम मिला है , न खंबे , न बिजली के तार , बरसों बरस से युग बीत गये गॉंव वालों ने बिजली कभी देखी नहीं , सुनी नहीं , मगर हर महीने बाकायदा हर गॉंव में हर किसान पर बिजली के बिल पहुँच रहे हैं , गोया आलम ये है कि मुरैना जिला विशेषकर कई चुनिन्दा क्षेत्र ऐसे हैं जहॉं , अत्याचार और जुल्म अपनी सारी सरहदें पार कर गया है । जहॉं बिजली है ही नहीं , या कभी पहुँची ही नहीं , वहॉं के लाखों किसान , बिजली विभाग के करोड़ों रूपये के अनबूझ डिफाल्टर हैं , मतलब साफ कि अपराधी हैं , मतलब साफ कि किसी प्रकार का कोई चुनाव नहीं लड़ सकते, मतलब ये कि सारे निर्दोष ही दोषी हैं , और दोषीयों की अदालत का हकुम औ फरमान ये कि सारे निदोष दोषी , अब वे न तो थाने में जमा आत्मरक्षार्थ अपनी बंदूकें वापस ले सकेंगें और न किसी बैंक से लोन , न खेती खाद के लिये कोई कर्ज या सहायता , न किसी योजना का लाभ ही उठा सकेंगें । आजीवन कारावास से दंडनीय है , फर्जी , कूटरचित , जाली और अशुद्ध बिल भेजना व डिफाल्टर कहना या डिक्लेयर करना इंडियन पैनल कोड की यानि भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत , फर्जी बिलिंग, कूटरचित बिल बनाना, अशुद्ध बिल बनाना , अप्रमाणित बिलिंग करना या बनाना , जालसाजी कर किसी को अवमानित कर ब्लैकमेल करना , जबरन फर्जी वसूली कर डिफाल्टर होने से बचाने का आपराधिक षडयंत्र रचना , किसी से सम्पत्त‍ि प्राप्त करने या उगाहने या वसूलने के लिये डराना , धमकाना, फर्जीवाड़ा कर फर्जी व जाली दस्तावेज तैयार करना तथा इन सबमें प्रति व्यक्त‍ि व प्रति परिवार उसकी मानहानि स्वत: ही सयुक्त व सहबद्धित हो जाती है । लिहाजा आजीवन कारावास से दंडनीय यह अपराध न केवल संज्ञेय अपराध हैं जिसमें पुलिस कभी भी बिना किसी वारंट के अरेस्ट कर सकती है , बल्कि गैर जमानतीय अपराध भी हैं । आई.पी.सी. की वे धारायें जिनके तहत बिजली आफिसर्स व बिलिंग कर्ताओं व फर्जीवाड़ा करने वालों के विरूद्ध दर्ज होगा अपराध - धारायें - 167, 171 ग एवं च , 176, 177, 178, 181, 182, 193, 195, 196, 197, 198, 199, 200, 201, 202, 203, 204, 209, 210, 211, 213, 214, 383, 385, 389, 406, 409, 420, 445, 452, 453, 464, 465, 466, 467, 468, 469, 471, 472, 474, 476, 477, 477- क, 499, 500, 503, 506 आदि के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत व इलेक्ट्र‍िसिटी एक्ट ( भारतीय विद्युत अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जा सकता है , कुल मिलाकर अब तलब पाये गये हजारों सबूतों के आधार पर आजीवन कारावास की सजा का केस दर्ज होना लगभग तय है , संभवत: व्यापम जैसा बहुत बड़ा तगड़ा घोटाला खुलना करीब करीब तय है । - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द '' www.gwaliortimes.in/ www.facebook.com/Tomarrajvansh

रविवार, 28 जून 2015

क्या अब वकालत छोड़कर दस बीस को मारकर चंबल में बागी बन कर फरार हुआ जाये, म.प्र. सरकार ने तो यही हालात बना दिये र्हैं

खैर रिमांइंडर 8 भी भेज दिया है ....... जस का तस ज्यों का त्यों .... जो मैटर नीचे प्रकाशन किया गया है तदनुसार ....... चलिये सरकार अब या तो आप नहीं ....... या हम नहीं ...... युद्ध तो शुरू हो चुका है ..... अंजाम खुदा लिखेगा .......क्या वकालत का पेशा छोड़ दिया जाये ......  हम एडवोकेट का काम छोड़ दें .... और बंदूक उठाकर चंबल में फरार होकर दस बीस को मार कर फरार हो जायें .... हालात ये हैं .... आज भी फिर दिन भर से बिजली नहीं है ..... अब तो रोजाना धमकियां भी मिलने लगीं हैं .......  खैर आज फिर हमारे द्वारा सी.एम. हेल्पलाइन में धमकियां देने और बिजली नहीं देने तथा समस्या निराकरण संबंधी फर्जी रिपोर्ट भेजे जाने के बारे में मामला दर्ज करा दिया गया है .... और आप सब लोग भी जिन्हें इस ई मेल का सातवां रिमांइंडर भेजा गया है , कृपया तदनुसार अवगत हों - आपका उत्तर अपेक्षि‍त है और प्रतीक्षा में -  नरेन्द्र सिंह तोमर , एडवोकेट , मुरैना म.प्र.


शनिवार, 30 मई 2015

केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की चम्बल यात्रा , जाते जाते भव्य व आलीशान राजनीति करने का जलजला बिखेर नया इतिहास रच गये , सिखा गये नेताओं को कि चंबल में राजनीति कैसे की जाती है

केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की चम्बल यात्रा , जाते जाते भव्य व आलीशान राजनीति करने का जलजला बिखेर नया इतिहास रच गये , सिखा गये नेताओं को कि चंबल में राजनीति कैसे की जाती है
• चम्बल में भव्य स्वागत के साथ सारे विधायक , सारे नेताओं सहित करीब तीन चार लाख लाग उमड़े नरेन्द्र सिंह तोमर के स्वागत में * मुरैना सांसद को नहीं खोज पाये केन्द्रीय मंत्री भी , लापता व गुमशुदा ही रहे मुरैना सांसद
• तोमरघार क्षेत्र में जाकर अहसास दिला गये नेताओं को , सरकार को, अनाथ मत समझ लेना तोमरघार को , मैं यहीं का बेटा हूँ, लहू का एक एक कतरा इसी भूमि पर गिरेगा मेरा
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
ग्वालियर टाइम्स www.gwaliortimes.in

भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने एकदम अचानक चम्बल की धरती पर न केवल कदम धर दिया बल्कि् पूरी तरह से राजनीतिक व प्रशासनिक तौर पर अनाथ और अस्पृश्य एवं नजरअंदाज घोषि‍त कर दी गई तोमरघार बेल्ट में ही जाकर न केवल तमाम कार्यक्रम संपादित कर डाले , बल्किई यह भी कह गये कि , मैं इसी धरती का बेटा हूँ , कोई भूल से इसे अनाथ व नेतृत्व विहीन या अकेला समझने की भूल न करे , मेरे लहू का एक एक कतरा इसी तोमरघार की माटी से बना है , इसी पर गिरेगा ।
चम्बल की धरती पर किये गये जितने भी मेरे वायदे हैं या रूके हुये प्रोजेक्ट हैं या चम्बल के लोग जिस काम की भी कहेंगें या जिस काम को भी करवाना चाहेंगें , मैं बैठा हूँ , एक चिठ्ठी या एक खबर भी मुझे मिली , वही काम यहॉं हर हाल में अवश्य किया जायेगा और पूर्ण किया जायेगा ।
चम्बल की श्योपुर से लेकर ऐन पूरी तोमरघार गोरमी से मुरैना तक और भि‍ण्ड क्षेत्र की जनता के साथ सभी के सभी भाजपा विधायक और सारे भाजपा पदाधि‍कारीयों , नेताओं ने जहॉं पूरा मुरैना शहर और पूरी चम्बल नरेन्द्र सिंह तोमर के बैनरों और होडिंगों से पाट दी, तो पूरी चम्बल में ‘’नरेन्द्र सिंह तोमर जिंदाबाद’’ और देश का नेता कैसा हो ‘’ नरेन्द्र सिंह तोमर जैसा हो’’ के नारों से शहर मुरैना सहित जयकारों का गुजायमान कर दिया ।
जहॉं समूची भाजपा नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ एकजुट खड़ी नजर आई तो वहीं , केन्द्रीय मंत्री का पूरा ध्यान तोमरघार और मुरैना जिला पंचायत व मुरैना नगर निगम पर केन्द्रियत रहा ।
तोमर की चंबल यात्रा में हाशीये पर फेंकें गये लोग और विशेषकर राजपूत , गुर्जर, वैश्य, किरार सब के सब इकतारे के सुर में पहली दफा बरसों बाद एक सूत्र में बंधे नजर आये । क्या कहते हैं अखबार चम्बल के – लीजिये पढि़ये
विधायकों की जम कर तारीफ और – ग्वालियर मुरैना दोनों जगह के सांसद मुझे ही माने जनता और दोनों जगह के विकास की ली जिम्मेवारी
उपेक्षि‍त व नजरअंदाज एवं नाराज चल रहे लोगों ने दिखा दी जोश और ताकत , रच दिया एकता व भव्यता व आलीशानता का चम्बल की धरती पर इतिहास , पूरी चम्बल में मुरैना सांसद का न एक भी चित्र , न होडिंग , न बैनर , न नाम न पोस्टर, न विज्ञापन और न कहीं सूरत नजर आई । अलबत्ता मुरैना सांसद की बचे खुचे अस्तिरत्व को भी पूरी तरह समाप्त कर गये नरेन्द्र सिंह तोमर
उपेक्षित तोमरघार से लेकर ऐन श्योपुर तक गूंज गया आसमान , पूरे संसदीय क्षेत्र में केवल ‘’नरेन्द्र सिंह तोमर जिन्दाबाद’’ के सिवा कुछ सुनाई ही नहीं दिया , मंत्री के चित्रों होर्डिंगों बैनरों पोस्टरों से सज कर दुल्हन बनी चंबल बेशक नजारा ऐतिहासिक और आगाज बहुत जबरदस्त दमदार था


गुरुवार, 21 मई 2015

भारत वाणी BHARAT VAANI: मुरैना नगर निगम चुनावों की आहट में पेंचों खम के सा...

भारत वाणी BHARAT VAANI: मुरैना नगर निगम चुनावों की आहट में पेंचों खम के सा...: मुरैना नगर निगम चुनावों की आहट में पेंचों खम के साथ , राजनीतिक गुण्ताड़े और जुगाड़बाजी शुरू 70 फीसदी दिग्गज नेता खुद ब खुद ही मैदान ...

मंगलवार, 19 मई 2015

नौकरी छोड़ दें रूपेश उपाध्याय , नगर निगम का या सांसद का चुनाव लड़ कर नेता बन जायें

* नौकरी छोड़ दें रूपेश उपाध्याय , नगर निगम का या सांसद का चुनाव लड़ कर नेता बन जायें
* प्रेस क्लब ने नगरपालिका मुरैना के प्रशासक सी.एम.ओ. के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई , मुख्यसचिव एवं प्रमुख सचिव को भेजा जायेगा पत्र * कल पढि़ये ग्वालियर टाइम्स पर खास – मुरैना शहर के एक आधा भाग जो है शहर मुरैना में और नगरपालिका क्षेत्र में , मगर अछूत व अस्पृश्य तथा विकास से कोसों दूर , हालात गॉंवों से भी बदतर * परसों पढि़ये ग्वालियर टाइम्स पर – सांसद के कामकाज व कार्यप्रणाली से संघ व भाजपा नाखुश , मोदी चंबल की समस्याओं के प्रति बेहद गंभीर http://www.gwaliortimes.in

गुरुवार, 14 मई 2015

विश्व का दूसरे नंबर का और भारत का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल मुरैना , विश्व की सबसे बड़ी टूरिस्ट सरकार - भारत सरकार , विश्व की सबसे बड़ी बनिये की दूकान - भारत का लोकतंत्र व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

विश्व का दूसरे नंबर का और भारत का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल मुरैना , विश्व की सबसे बड़ी टूरिस्ट सरकार - भारत सरकार , विश्व की सबसे बड़ी बनिये की दूकान - भारत का लोकतंत्र
व्यंग्य - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
क्या यार मुरैना में आज सबेरे 4 बजे से बिजली नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं है कि ( सी.एम. हेल्पलाइन में चार चार कंपलेाट कर तो रखीं हैं , अब बहरे को सुनाई न दे , अंधे को दिखाई न दे तो इसमें हम क्या करें ) अब भइया सिब्बू को बहरा और नंदू को अंधा और कलेक्टर को लंगड़ा मत कह देना ...... ........ हमने कालीचरण कालीराम का खुल गया पोल ..... टूरिस्ट सांसद कह कर उसका सारी दुनियां में नाम रोशन कर डाला उसके मामा के नाम की योजना पर ही कलंक लगा रहा कालीराम सारी दुनियां में 6 करोड़ लोगों तक वर्ल्डवाइड ब्राडकास्ट और रिलज कर मशहूर कर दिया ........ तो इसका मतलब ये नहीं कि ......... उसी तर्ज पर ..... मोदी जी को सूट बूट वाला चोर , सूटकेस सोने का टूरिस्ट प्राइम मिनिस्टर कहा जाये ..... इससे तो ऐसा लगता है कि साली पूरी सरकार ( अकेली बेचारी विदेश मंत्री को छोड़कर ) जो विदेशी जगह की सांसद जरूर है मगर कभी विदेश नहीं जाती, आप लोग पूरी की पूरी सरकार को ही बनियों की दूकान और तखरी तराजू वाला प्रशासन , और हर सांसद व मिनिस्टर को ही टूरिस्ट कहें .... एम.पी. के गधा गोबर नंदू भैया की तो जो कल से बुरी तरह धोती खींच ऐसी की तैसी की जा रही है , दुगत बनाई जा रही है , हम तो फेसबुक , ट्व‍िटर और व्हाटस एप्प पर पढ़ पढ़ के पक गये ..... अखबार और दनादन धोती लंगोट खींचने में , उतारने में लगे हैं बेचारों के , अरे ठीक है बेचारों ने सारे बनियों को प्रशासन की दूकान सौंप दी तो क्या हुआ , पैसे देकर आये हैं बेचारे , थानेदारी भी आजकल थाने के महीने के रूपये बंधे होने से मिलती है, मास्टरी की दूकान , डाक्टरी की दूकान, व्यापम की सब्जी मण्डी, इंजीनियर बनाने की फैक्ट्र‍ियां , नोट गिनने की मशीनें चौकीदारों के घर में लगानी पड़ रहीं हैं तो क्या हुआ, अरे यार कमाता कौन नहीं है, नेताओं के मील तो नहीं चलते , तेल तो तिली से ही निकलेगा न , और बनियों से बड़ा कमाऊ पूत कभी कोई सुना है क्या , चलो अब शांत हो जाओ , जादा पोस्ट मत डालो सूट बूट की टूरिस्ट कमाऊ विदेशी बनियों की दूकान सरकार पर ...... वरना हमारी खुपडि़या अगर घूम गई तो ..... हम फिर एक खतरनाक लेख लिख डालेंगें और ..... वर्ल्डवाइड ब्राडकास्ट और रिलीज कर मारेंगें ..... फिर मत कहयो के बताई नहीं हती के मूरैना की कलेक्टर ग्वालियर रहती है, कबहूं फेान नहीं उठाती , मुरैना टूरिस्टों का अड्डा है, भारत का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल है ...... हियां सांसद से लेकर अफसर , कर्मचारी सब टूरिस्ट ही टूरिस्टूरिस्ट ही भरे पड़े हैं जनता मरे तो मरे .... अपनी बला से ..... इसलिये अब चुप्प हो जाओ ..... हमारा भेजा मत घुमाओ ...... वरना आलतू फालतू में ही किसी बनिये की दूकान लुट जायेगी यूं ही ख्वामख्वाह ही ...... टिचक्यूं - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

बुधवार, 13 मई 2015

मुरैना अपराध डायरी : किस्सा ए लैला मजनूं , एक नादर्ज अपराध ख् एक कूटरचित और फर्जी अटल ज्योति योजना का

मुरैना अपराध डायरी : किस्सा ए लैला मजनूं , एक नादर्ज अपराध ख् एक कूटरचित और फर्जी अटल ज्योति योजना का
सच तो आखि‍र सच है, कब तक और कहॉं तक दबाया जायेगा, , और यूं ही खत्म नहीं हो गई हुकूमत और सल्तनत ए कांग्रेस
अटल ज्योति बनाम म.प्र. का कलंक , एक घोर व संगीन आपराधि‍क जुर्म, फर्जी योजना और उसमें हुये फर्जीवाड़े, मिथ्या घोषणा करने , मिथ्या व असत्य कृत्य अमूल्य व बहुमूल्य संपत्ति अर्जि‍त करने पर दर्ज हो सकती है शि‍वराज सिंह पर और भाजपा नेताओं सहित बिजली अधि‍कारीयो व अन्य सरकारी अफसरो पर एफ.आई.आर.
• अटल कटौती जो कि म.प्र. की जनता पर आफत का परकाला बन चुकी , पर कांग्रेस करती रही फर्जी नौटंकी व सतही दिखावा , वरना चाहती तो शि‍वराज सिंह चौहान सन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही अपनी प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी सहित जेल में होते 
• धरना प्रदर्शनों और आंदोलनों के बजाय सीधे मैदान में उतरकर कांग्रेस को दर्ज करानी थी एफ.आई.आर. , मगर नहीं कराई , संदेह के घेरे में कांग्रेस के नेता वरना सन 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले सन 2008 में ही म.प्र. में सरकार बदल जाती
मुरैना अपराध डायरी – प्रथम किश्त
• नरेन्द्र सिंह तोमर ‘आनन्द’’ , एडवोकेट Gwalior Times   Worldwide News & Broadcasting Services                          www.gwaliortimes.in

इसमें तो खैर कोई शक ही नहीं तथाकथि‍त ‘’अटल ज्योति’’ नामक योजना पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से बोला कहा गया एक सरासर सफेद झूठ , मिथ्या अवलंबन, मिथ्या साक्ष्य रचना, कूटरचना , जालसाजी , जनता के साथ छल एवं धोखाधड़ी कर जनता की अमूल्य व बहुमूल्य संपत्ति ( वोट) को हासिल करना, ‘’अटल ज्योति नामक योजना के कूटरचित दस्तावेज ‘’ तैयार करना, एक दिखावटी कार्यक्रम आयोजन कर जनता को छल कपट पूर्वक आपराधि‍क षडयंत्र रच कर बरगलाना , फुसलाना और उससे प्राप्त वोट का उपयोग करना तथा उससे सत्ता हासिल कर सत्तानशीं हो जाना ।
भारतीय दण्ड विधान ( आई.पी.सी.) के तहत ये सब कृत्य घोर व गंभीर प्रकृति के संगीन व गैर जमानतीय अपराध हैं , और जहॉं इनमें जमानत बमुश्कि‍ल होगी तो वहीं इनकी सजा आजीवन कारावास से कम किसी हाल में नहीं है ।
ऐसे किसी भी कार्य में किसी भी प्रकम पर , चाहे वह ऐसी कूटरचित फर्जी योजना की घोषणा कराने, बनाने या उसे जालसाजी कर लागू करने के दिखावटी या कृत्रिम सम्मेलन या कार्यक्रम या किसी आयोजन में उपस्थि‍त किसी भी व्यक्तिे को जो इस पूरे प्रकम पर कहीं भी दखल या मौजूदगी रखता हो , आई.पी.सी. की धारा 34 या 120 बी के तहत स्वयं ही मुल्जिम बन जाता है
25 नवंबर 2013 को शाम से ही मतदान के बाद से ही म.प्र. में बिजली का वितरण, संवितरण प्रभावित हो गया था और अटल ज्योति नामक योजना का कूटरचित व फर्जी होना एवं प्रदेश की जनता के साथ एक बड़ी जालसाजी होने का एक साक्षात साक्ष्य व सबूत बन गया था ।
लेकिन उसके बाद जो म.प्र. में बिजली ने कहर ढाया वह कहर आज तक नहीं थमा , अब तो म.प्र. का आलम यह है कि अघोषि‍त बिजली कटौती के साथ साथ घोषि‍त बिजली कटौती भी भरी भीषण गर्मी में बदस्तूर जारी है गांया कुल मिलाकर घटित अपराध आज दिनांक तक और इस वक्त तक बदस्तूर जारी है ।
इस सम्बंध में बेहद व्यापक , रोचक व मजेदार तथ्य यह है कि , महज दो साल के या पौने दो साल के अल्पकार्यकाल में ही म.प्र. के मुख्यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने दो बार तथाकथि‍त सी.एम. हेल्प लाइन की घोषणा कर डाली , एक बार एक मोबाइल नंबर जारी किया गया , दूसरी बार 181 के नाम से पुरानी हेल्पलाइन को खत्म कर नई हेल्पलाइन शुरू की गयी । सी.एम. हेल्पलाइन 181 वैसे तो लगती ही नहीं , अगर बार बार प्रयास करते रहें और लग भी जाये तो करीब 70 फीसदी शि‍कायतों को दर्ज करने से इंकार कर दिया जाता है । यदि भूले भटके कोई शि‍कायत दर्ज भी कर ली गई तो अव्वल तो वह कभी निराकृत की ही नहीं जायेगी , हमारी सूचना के अनुसार करीब 90 फीसदी दर्ज शि‍कायतें आज दिनांक तक अनिराकृत हैं ।
अब जरा शि‍कायतों के निराकरण पर या फर्जी सरकारी जवाबों पर भी गौर फरमाया जाये तो आईये पहले वह अपराध आपको बताते हैं जो सरकारी क्षेत्र के कर्मचारी या अफसर या सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनी के लोग करते हैं , और किसी शि‍कायत के निराकरण में सरासर झूठ व फर्जी , मिथ्या असत्य उत्तर देते हैं । पहली बात यह कि किसी लोकसेवक द्वारा ( भले ही महज टेलीफोन से, ई मेल से या एस.एम.एस. या अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यम द्वारा केवल मौखि‍क सूचना ही प्राप्त हुई हो)  सूचना या इत्तला का दर्ज न किया जाना घोर व संज्ञेय प्रकृति का गैर जमानती अपराध है , इस सम्बन्ध में आई.पी.सी. सहित , सूचना का अधि‍कार अधि‍नियम 2005 , एवं भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सन 2008 में दिया गया स्पष्ट प्रावधान वर्णिीत एवं उपलब्ध है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि ‘’ सूचना या इत्तला या एफ.आई.आर. दर्ज करने में असफल व्यक्ति को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर , जेल में भेजा जाये ‘’ कुल मिलाकर आपको हर हाल में किसी भी सूचना या इत्तला या एफ.आई.आर. को दर्ज करना ही होता है , चाहे आप उससे पूरी तरह से असहमत हों, और स्वयं उसे असत्य मानते हों । 
आई.पी.सी. में किसी सूचना का लोकसेवक को ( पुलिस को या ऊपर से कार्यवाही कर रहे इस प्रक्रम की कार्यवाही कर रहे विभाग या अधि‍कारी को) न देना , सूचना या जानकारी का लोप करना, इत्तला छिपाना , अपराध हैं और पुलिस द्वारा ऐसे मामलों में एफ.आई.आर. दर्ज करना अनिवार्य है । इसी प्रकार किसी लोकसेवक द्वारा अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान गलत व भ्रामक इत्तला देना, असत्य सूचना देना, असत्य व मिथ्या जानकारी भेजना या देना , लोकसेवक का कर्तव्य निर्वहन करते हुये असत्य व अशुद्ध  लेखन या असत्य व अशुद्ध अंकन , असत्य कथन या बयान या घोषणा अपराध हैं व पुलिस द्वारा इस अपराध की भी एफ.आई.आर. दर्ज करनी अनिवार्य है । 
अपराध डायरी का यही अपराध जारी रहेगा मुरैना अपराध डायरी के अगले अंक में
इससे अगला अपराध–इसी डायरी में पढि़ये एक नादर्ज आपराधि‍क मामला, एक महाघोटाला और फर्जीवाड़ो का बाप महाफर्जीवाड़ा ......  और रातों रात शहर के बीचों बीच से गायब हो गई भारत सरकार की करोड़ों रूपये की इमारत, योजना और अमला सहित सैकड़ो महिलायें