शनिवार, 28 नवंबर 2020

हे साग सब्जी ..... देवी कभी भगतों को दर्शन दे ...... किसी दिन मेरा दिल खुश कर दे , राम तेरा भला करे

                                                           - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' 

 ( सुफल मटर सस्ती है बाजार में - छिली हुई ताजी मटर 40 रूपये की आधा किलो यानि 80 रू की एक किलो है ) 

मुरैना/ दतिया/ ग्वालियर/भिंंड / श्योपुर , सरकारें जनता को अच्छी खबर देतीं सुनातीं आईं हैं यह एक परंपरा है , और अच्छे दिन का सपना और वायदा वोट की कीमत में बेचतीं आईं हैं , यह एक रिवाज है । 

जब सोने के दाम में प्रति दस ग्राम ( बाजारू एक तोला दस ग्राम का और पुराना पारंपरिक देश में प्रचलित एक तोला 12 ग्राम का होता है , जब से होलोग्राम वाले आये हैं तब से दो तोला होलोग्राम खा जाता है और यह तोला दस ग्राम का रह जाता है ) के वजन में एक हजार या 500 रू की कमी हो तो मीडिया की सुर्खी बन कर खबर बन जाती है और फ्रंट पेज हेडलाइन होती है , सोने के दामों में जबरदस्त धमाकेदार कमी ,गोया आम आदमी या हर अखबार पढ़ने वाला केवल सोना खरीदने और सोने के दाम पता करने के लिये ही अखबार खरीदता और पढ़ता है । 

चंद प्रतिष्ठित मीडिया को अपवादस्वरूप अगर छोड़ दें तो बाकी बकाया मीडिया को यह पता ही नहीं कि हर अखबार खरीदने पढ़ने वाला साग सब्जी और रोटी तो जरूर ही खाता है ।   

साग सब्जी रोटी हर आदमी जन्म से लेकर मरने तक संग संग ढोता खाता है , अपने संग बंधे चिपके और आश्रित परिवार वालों के पेट के लिये , जब वह जन्म के समय पेट साथ लेकर आता है और मरने तक इसी पेट को संग लिये घूमता है , तब तक कोई इसे मेहनत और ईमानदारी की ईंधन की खुराक डाल कर देह की गाड़ी चलाता है , भले ही उसकी स्पीड 500 मीटर प्रति घंटा हो या बेईमानी, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार ए दो नंबर , चार नंबर की औंधी सीधी कमाई का आलीशान मंहगा एयर पेट्रोल का ईंधन भर कर शताब्दी की स्पीड 140 किलो मीटर प्रतिघंटा या हवाई जहाज की स्पीड 600 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से इस नामुराद देह की गाड़ी चलाता या उड़ाता हो । 

बहरहाल ये साफ है कि जैसे हर स्कूटर मोटर सायकल वाले को पैदल चलता आदमी ओछा और छोटा तुच्छ गरीब इंसानी कीड़ा मकोड़ा नजर आता है तो हर कार वाले को स्कूटर मोटर सायकल वाले भी ऐसे ही नजर आते हैं , तो हर और बड़ी गाड़ीयों वालों जैसे बी एम डब्ल्यू, राल्स रायस या एम्पाला वालों को ये कारों वाले भी बड़े तुच्छ और ओछे छोटे कीड़े मकोड़े नजर आते हैं । क्या करिये इंसान की फितरत ही यही है , ग्वालियर के किले पर सास बहू यानि कि सहसबाहू के मंदिर से नीचे देखेंगे तो पूरा ग्वालियर ही , सब ई एम डब्ल्यू , बी एम डब्ल्यू , रेल गाड़ी अताब्दी शताब्दी , राजधानी वगैरह सब के सब ही रेंगते हुये छोटे मोटे तुच्छ और ओछे कीड़े मकोड़े नजर आने लगते हैं , यह फितरत नहीं , हकीकत है , दृष्टिकोण और दृष्टि युक्तिकरण है । और ऊपर लिखे बाकी सब इंसानी अहंकारी फितरत के दृष्टिभ्रम हैं । 

बिल्कुल कुछ ऐसा ही है , मीडिया भी एक दृष्टिभ्रम में रहता और चलता है , और जहां तक संभव हो यथार्थ व सचाई के धरातल से बचता है , वरना सच लिखने का कहने का ( नेता भी इसमें शामिल समझिये) अंजाम यह होगा कि जिनका सच कहा बोला  लिखा जाये उनके पास तो फूटी छदाम नहीं है देने को और जो दे सकते हैं या जिनकी कृपा से या वरद हस्त से मीडिया चलता है या विज्ञापन वगैरह या बिना विज्ञापन दो नंबर में कुछ मिल मिलू जाता है वही लोग इस देश का असत्य हैं , गलत काम करने वाले , भ्रष्ट बेईमान और रिश्वतखोर हैं , अब उनकी कृपा ओर पैसे से से ही मीडिया चलना है । तो गरीब आम आदमी तब जाकर एक छपा अखबार या टी वी चैनल पर कुछ खबर पढ़ या देख पाता है । सो मीडिया भी साग सब्जी के दामों की आवाज उठाने के बजाय सोने के ही दाम बतायेगा जिसे आम गरीब आदमी देख सुन तो ले और अखबार या चैनल को बहुत बड़ा माने और समझे , चमक दमक दीखे भले ही सारे कपड़े उतार कर दीखे मगर चमचमाती चीज दीखे , चकाचौंध में आखें चौंधिया जायें तो और देखने पढ़ने वाला बाकी सब गम , परेशानियां और समस्यायें बिसरा दे और ध्यान भूल कर सोने के दामों को राष्ट्रीय चर्चा व महत्व का विषय समझे । 

अगर साग सब्जी जैसे मसले और चीजें टी वी चैनल पर या अखबारों में देखने पढ़ने को मिलेंगी तो चमक दमक का खेल खत्म हो जायेगा और ओछी व तुच्छ चीजें नेशनल लेवल पर दिखने लगेंगी और राष्ट्रीय चर्चा , महत्व और प्रोटेस्ट का आधार बन जायेंगी , दाम यकायक गिरकर बाबाज के लंगोट के माफिक कम और कम होते जाकर ऐसे धड़ाम से गिरेंगें जैसे लंगोट की पट्टी अचानक से खुल कर बिकनी की तरह फस्स् और सररर करती खिसक गई हो । गोया किसान से खरीदी कोई चीज पांच रूपया प्रति किलों केवल दह रूपये प्रतिकिलो के दाम पर आ जायेगी । 

मतलब ये कि जब बेचने वाला ही एक रूपये प्रतिकिलो के मुनाफे पर धंधा करेगा तो , बाकी दल्ले , नेता , अफसर , और लग्गा तग्गा मसलन मीडिया और .... वगैरह वगैरह कहां से पलेंगें , कहां से खायेंगें । उसी चीज को जब पचास रू प्रतिकिलो बेचा जायेगा तो बेचने वाले को भी पांच रू मुनाफे के और बाद बाकी , चुनाव टाइम पर नेताओं और पार्टीयों को चंदा , मंडी में दूकान या ठेला लगाने की रोजाना की नगरनिगम या नगरपालिका की रोजनदारी वसूली , पुलिस वाले बीट प्रभारी का लेन देन, और बीच बीच में बीट प्रभारी के बजाय फीती लगाये आ जाने वाले सिपहिया , जब तब पत्रकार और न जाने कितनों के हिसाब किताब के बाद अगर पांच रू प्रति किलो किसान से खरीदी चीज कोल्ड स्टोरेज में डाल कर बी एच सी यानि बैंजीन हैक्सा क्लोराइड और मैलाथियान तथा भैंस का इजेक्शन लगाकर लंबी मोटी कर बढ़ाई गईं सब्जियां जैसे लौकी , तोरई , कद्दू , बैंगन , खीरा  और  सेम आदि इन सबके खर्चों को निकाल कर अपने आप ही दाम उस पांच रू का पचास रू हो ही जाता है । 

मतलब साफ है ,कोल्ड स्टोरेज किसान को भी खा रहे और लूट रहे हैं तो जनता यानि आम आदमी को भी । एक बार मुरैना में हजारों टन आलू कोल्ड स्टोरेजों को बाहर सड़क पर यानि हाई वे पर फेंकना पड़ा था , ऐसा तब हुआ जब नया आलू किसान ले आया और वह कोल्उ स्टोरेज वाले आलू से पच्चीस गुना सस्ता था । लिहाजा कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों का मासिक किराया देना बंद कर दिया और नया माल ( आलू ) खरीद  कर कोल्ड स्टोरेज ले जाना शुरू कर दिया ,बाजार में उस समय आम आदमी को कोल्ड स्टोरेज वाला आलू चालीस से पैंतीस रू प्रति किलो बेचा जा रहा था , मगर किसान का नया आलू मंडी में पांच रू प्रतिकिलो और मोहल्लों घरों में वह आठ रूपये और सात रू प्रतिकिलों के दाम पर हाथठेले वालों द्वारा बेचा जाने लगा तो , ऐसी सूरत में वही चालीस पैंतीस रू प्रतिकिलो वाला कीटनाशक दवायें मिला हुआ हजारों टन आलू सड़कों पर फेंकना पड़ा  । 

उक्त घटनाक्रम से जाना जा सकता है कि सिस्टम में दोष कहां पर है , अलबत्ता कोल्ड स्टोरेजों की स्थापना इसलिये की गई थी कि किसान अपना माल यानि फसल उसमें रख सके और साल भर साग सब्जी आम जनता को हर मौसम में मिल सके , इसलिये नहीं कि दलाल , व्यापारी और विक्रेता , किसी किसान से सस्ते में माल खरीद कर सालभर मुनाफाखोरी , ब्लेकमार्केटिंग के लिये जमाखोरी कर सकें । 

किसी किसान ने अपना माल कोल्डस्टोरेज में रखा होता तो न कभी साग सब्जी के दाम बढ़ते और किसान आज तक इतना गरीब , परेशान और मजबूर व लाचार ही नहीं होता । सरकार अगर मंडी में फसल खरीदने और तुलाई के लिये किसानों का पंजीयन कर एस एम एस से नंबर लगवाती है कि केवल किसान ही बेच पाये अन्य कोई दलाल या व्यापारी नहीं ,तो फिर कोल्ड स्टोरेजों और बेयर हाउसों के लिये केवल किसान ही इनमें अपनी फसल की उपज रख सके , यह अनिवार्य क्यों नहीं करती , किसानों की भी समस्या हल होकर परेशानी खत्म हो जायेगी , किसानों के खाते की फसल की मेहनत की , लागत की मुनाफे की समस्या ही समाप्त हो जायेगी और आम जनता को भी पांच रू की चीज पचास रू प्रतिकिलो में लेने की फर्जी व कृत्रिम मंहगाई से हमेशा के लिये मुक्ति मिल जायेगी , किसान भी चैन से अपना परिवार पाल सकेगा और दो रोटी शान व इज्जत से खा सकेगा और आम आदमी भी जो आज केवल साग सब्जी के दाम पूछ कर मन मसोस कर लाचार होकर रह जाता है और देशी घी की तरह सब्जी वाले के ठेले के दर्शन कर पाव भर , या आधा किलो एकाध चीज कभी कभार खरीद कर रह जाता है और हर चुनाव के बाद हर सरकार से आस लगाता है कि अब दाम कम हो जायेंगें और हम चैन से ख पी सकेंगें । 

सरकारी साग रोटी खा रहे नेताओं और अफसरों को यह सारी बातें समझ नहीं जायेंगीं क्योंकि उनका समझदानी का लेवल हाई ( गोल्ड यानि सोने के लेवल ) रहता है और ये साग सब्जी , आम आदमी वगैरह जरा लो लेवल की बातें हैं , सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों के लेवल की बातें हैं । 

दूसरी भाषा में कहें तो ..... रोजाना खपत होने वाली चीजों को नकदी की यानि रोजाना मुनाफा देने वाली चीजें कहा जाता है , मसलन ... माचिस , नमक , साग सब्जी , तेल , दाल , मसाले ( हर कोई नहीं डालता) आदि रोजाना बिकने , खपत होने वाली चीजें हैं और हर आदमी के इस्तेमाल की चीजें हैं , अगर यही आम आदमी से दूर हो गयीं और बेतहाशा बेलगाम मंहगीं इसी तरह ही रहीं और होतीं रहीं तो ...... भई हम तो इसी तरह लिखते रहेंगें , और ग्वालियर टाइम्स इसी तरह प्रकाशित प्रसारित करती रहेगी ।   

बुधवार, 18 नवंबर 2020

कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम मुरैना ने 7 खरीदी केन्द्रों का किया निरीक्षण

मुरैना जिले में इस समय बाजरा की खरीदी युद्ध स्तर पर है। किसानों को बाजरे की फसल बेचने में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। इसको ध्यान में रखते कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने जिले के समस्त एसडीएमों को निर्देश दिये है कि स्वयं एसडीएम खरीदी केन्द्रों पर पहुंचे। बाजरे की तुलाई में विलंब क्यों ? इसका अवलोकन कर मुझे अवगत करायें। कलेक्टर के निर्देश पर यूं तो जिले के सभी एसडीएम प्रत्येक केन्द्रों पर भ्रमण कर वहां पर आ रहीं बाजरे की तुलाई में समस्या का समाधान कर रहे है। वहीं एसडीएम मुरैना श्री आरएस बाकना ने स्वयं 7 खरीदी केन्द्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तुलाई के समय बारदाने की समस्या आ रही थी, एसडीएम ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर खरीदी केन्द्रों की गति बढ़ाई। एसडीएम मुरैना ने खरीदी केन्द्र निटहरा, पढ़ावली, भैंसरौली, चैना, शिवलाल का पुरा, धनेला और मार्केटिंग केन्द्रों का निरीक्षण किया। जिसमें 5 केन्द्र ऐसे थे, जिनके किसानों की ट्रॉलियां रोड़ पर खड़ी हुई थी, उन्हें तत्काल कृषि उपज मंड़ी में तौल कांटा, बारदाना का प्रबंध कर शीघ्र विक्रय कराई। जिनमें निटहरा, पढ़ावली, भैंसरौली, चैना और शिवलाल का पुरा केन्द्रों के नाम शामिल थे। भ्रमण के समय डीएसओ श्री तोमर, तहसीलदार श्री भरत कुमार, श्री विपन श्रीवास्तव, श्री अरूण जैन प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

विशेष सूचना बैंक कभी भी ओटीपी नही मांगता इस तरह से आने वाली सभी फ्रॉड कॉल है ( लोेकल लेवल से राष्ट्रीय स्तर तक शामिल है सायबर ठग इस रैकेट में )

 अनजाने व्यक्ति का काल न उठायें 

अगर कोई व्यक्ति आपको कॉल कर कहे कि आपके लोन खाते की तीन EMI आगे बढ़ानी है। आपके पास एक OTP (ONE TIME PASSWORD) आएगा। कृपया बतायें। इस तरह से पूछता है तो वह एक फ्रॉड कॉल है। कोई भी बैंक OTP नही माँगता। ध्यान रखे व अपना OTP नही बताये अन्यथा आपके साथ फ्राड हो जाएगा। यह सूचना सभी को भेजे। ऐसे लोग सक्रिय हो गए है।

अंबाह, पोरसा में अतिरिक्त 6 सोसायटी और खोली हैं , बाजरा खरीदी के लिये 15 दिवस और बढ़ाये, किसान चिन्तित न हों बाजरे का एक-एक दाना सोसायटी क्रय करेंगी - कलेक्टर

 


कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने जिले के किसानों से कहा है कि वे बाजरा विक्रय करने के लिये चिन्तित न हों। किसान का एक-एक दाना बाजारे का सोसायटी क्रय करेंगी। किसान की मांग के अनुसार अंबाह, पोरसा में 6 खरीदी केन्द्र और बढ़ा दिये गये है। जिन्होंने अपना कार्य आज से प्रारंभ कर दिया है। कलेक्टर ने बताया कि अंबाह अनुभाग के अन्तर्गत नवीन खरीदी केन्द्र स्थापित किये है। जिनमें प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति बिरेहरूआ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति खड़ियाहार, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति उसेतपुर, सेवा सहकारी संस्था गोठ, विपणन सहकारी संस्था लीड पोरसा और विपणन सहकारी संस्था अंबाह उपार्जन केन्द्र खोले गये है।   

    कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि इनके अलावा जिले में 49 खरीदी केन्द्र पहले से ही संचालित है। सभी केन्द्रों पर बारदाना सहित अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों दिये गये है। किसान की उपज बेचने में विलंब न हो। इस प्रकार के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि अंबाह में इसके पहले 7, पोरसा में 4, मुरैना में 10, जौरा में 15, कैलारस में 7, सबलगढ़ में 6 खरीदी केन्द्रों पर बाजरा की खरीदी की जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि खरीदी 21 नवम्बर तक नहीं। इसके लिये अतिरिक्त 15 दिवस और बढ़ा दिये गये है। हर किसान का एक-एक दाना सोसायटी क्रय करेंगी। किसान चिन्तित नहीं हो। 

ओले से प्रभावित प्रत्येक खेत का सर्वे होगा- कलेक्टर वर्मा

 


रविवार को सबलगढ़ विकासखण्ड के 8 गांवों में ओलावृष्टि हुई है। जिससे किसानों की फसल क्षति का नुकसान हुआ है। इसके लिये कलेक्टर श्री अनुराग वर्मा ने एसडीएम सबलगढ़ सुश्री अंकिता धाकरे को कड़े निर्देश दिये है कि ओलावृष्टि वाले क्षेत्रों में राजस्व अधिकारियों की टीम लगाकर खेत-खेत का सर्वे किया जाये। ओलावृष्टि से हुये नुकसान की भरपाई का मुआवजा दिया जायेगा। इसके लिये राजस्व अधिकारी खेत-खेत की मेड़ पर पहुंचकर सर्वे कार्य को प्राथमिकता दें। इस कार्य में मुझे लापरवाही नहीं मिलना चाहिये। उन्होंने कहा कि खेत का सर्वे करते समय कृषक को भी मौके पर बुलायें। ऐसा न हो, कि एक स्थान पर बैठकर पूरे क्षेत्र का सर्वे कर लिया जाये। मुझे किसी गांव या कृषक की शिकायत नहीं मिले। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि ओलावृष्टि के सर्वे का कार्य 3 दिवस के अंदर पूर्ण कर लिया जाये। किसान की जो भी फसल है, उस फसल का नाम, सर्वे क्रमांक पत्रक पर अंकित रहे।

    एएसएलआर श्री सिरोमन सिंह कुशवाह ने बताया कि सबलगढ़ विकासखण्ड के अन्तर्गत 8 गांवों में ओलावृष्टि हुई है। जिनका चिन्हांकन कर लिया गया है। इनके लिये राजस्व टीम गठित कर दी गई है। जिनमें जावरौल, जारोली, पचेर, बावड़ीपुरा, कैमाराकलां, टोंगा, रामपुरकलां, बामसोली आदि ग्राम शामिल हैं। 

8573 कर्मियों को हुआ 1 करोड़ 9 लाख 7 हजार 700 रूपये के मानदेय का भुगतान

 जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्र जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी और अंबाह उपचुनाव कराने में लगे 8 हजार 573 कर्मियों को उनके खातों में 1 करोड़ 9 लाख 7 हजार 700 रूपये का भुगतान अल्पअवधि में कर दिया गया है।    

    कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अनुराग वर्मा के निर्देश पर यह भुगतान सभी मतदान कर्मियों को किया गया है। जिला पेंशन अधिकारी एवं मानदेय के नोडल अधिकारी श्री रामकुमार सिंह तोमर ने बताया कि मतदान दलों के मानदेय भुगतान में उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एलके पाण्डे, जिला पंचायत के लेखाधिकारी श्री एम बेग, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री सुनील श्रीवास्तव, सहायक श्री केपी वर्मा, जिला निर्वाचन कार्यालय के श्री दिवाकर पचौरी, श्री नरेन्द्र सिकरवार, केपी वर्मा, सुपरवाइजर श्री उमेश बंसल, संतोष रजक और सुश्री सुमन की अहम भूमिका रही। जिनके अथक सहयोग से मानदेय का भुगतान कार्य संपादित हुआ।

नगरीय निकायों एवं पंचायत निर्वाचन के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने प्रचार-प्रसार के निर्देश

 राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव श्री डी.व्ही. सिंह ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि नगरीय निकाय एवं त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2020-21 के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार (SENSE)  की गतिविधियाँ शुरू करें। प्रचार-प्रसार की गतिविधियों का कैलेण्डर सभी जिलों को भेज दिया गया है। इस संबंध में की गयी कार्यवाही की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को भेजने के निर्देश भी दिये गये है।

    श्री सिंह ने बताया है कि नवम्बर के अंतिम सप्ताह में नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में ई.व्ही.एम. के संचालन की जानकारी दी जायेगी। स्थानीय निर्वाचन विषय पर वाद-विवाद एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता, वर्ष 2014 में कम वोटिंग वाले मतदान केन्द्रों से संबंधित मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करना विकासखण्ड एवं निकाय स्तर पर युवा संवाद कार्यक्रम, नुक्कड़-नाटक, रैली आदि कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक किया जायेगा।
    निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के बाद ऑनलाइन नाम निर्देशन-पत्र भरने, मतदान के दौरान कोविड-19 संक्रमण से बचाव, मतदाताओं के लिए सुविधाओं की जानकारी, चुनाव मोबाइल एप एवं उसकी उपयोगिता के संबंध में मतदाताओं को जानकारी दी जायेगी। महिला एवं युवा मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करना, गर्भवती महिला, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांग मतदाताओं को सुगमता से मतदान किये जाने की प्रक्रिया बताना और आयोग द्वारा किये गए नवचारों एवं नियम-निर्देशों में हुए संशोधनों से मतदाताओं एवं अभ्यर्थियों को अवगत कराया जायेगा।