रविवार, 7 मार्च 2010

मध्‍यप्रदेश हाईस्‍कूल परीक्षा का कल होने वाला गणित का पेपर आउट

मध्‍यप्रदेश हाईस्‍कूल परीक्षा का कल होने वाला गणित का पेपर आउट

केवल 200 स्‍पये में सड़क पर खुलेआम बिका पेपर, छात्र ठगे गये या सही में पर्चा आउट हुआ कल पता लगेगा

मुरैना 07 मार्च 2010, आज मुरैना में सड़कों पर मध्‍यप्रदेश माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल का कल होने वाला गणित का पर्चा मात्र 200 रूपये में धड़ल्‍ले से सड़कों पर बिका । इससे पहले हाई स्‍कूल का संस्‍कृत व इण्‍टरमीडियेट का हिन्‍दी का पर्चा भी इसी तरह सड़कों पर बिका था । इस समय अन्‍य बिक रहे पर्चों में इण्‍टर के गणित व बायलोजी के पर्चे प्रमुख हैं यह पर्चे 500 रूपये में बेचे जा रहे हैं ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स को प्राप्‍त हुये कल होने वाले हाईस्‍कूल के गणित के पर्चे की प्रति प्राप्‍त हुयी है और पूरा पर्चा प्राप्‍त हुआ है । अब देखना यह है कि कल यही पर्चा परीक्षा में आता है या कोई गिरोह विशेष बच्‍चों को गुमराह कर तगड़ी ठगी कर रहा है , कुछ भी हो मामला गंभीर है । और माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल की पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में आ गयी है ।

हमें प्राप्‍त पर्चे के चार प्रश्‍न हम यहॉं मात्र उदाहरण के तौर पर दे रहे हैं , हमारे पास पूरा पर्चा सुरक्षित है ।

प्रश्‍न कुल प्रश्‍न 17 बताये गये हैं । प्रश्‍न वस्‍तुनिष्‍ठ प्रश्‍न (3)  एक समचतुर्भुज के विकर्ण 15 मीटर व 8 मीटर हैं तो उसका क्षेत्रफल 1. 120 वर्ग मीटर 2. 60 वर्गमीटर 3. 180 वर्गमीटर  (5) एक भवन के पाद से 25 मीटर की दूरी से भवन की शिखर का उन्‍नयन कोण 45 डिग्री है भवन की ऊंचाई होगी 1. 50 मीटर 2. 25 मीटर 3. 25/2 मीटर 4. 25√3 मीटर

प्रश्‍न 11 दो अंको वाली संख्‍या के अंको का योग 7 है । यह संख्‍या अंकों के पलटने पर प्राप्‍त संख्‍या के दुगुने से 2 अधिक है वह संख्‍या ज्ञात कीजिये ।

अथवा

2 कुर्सी और 3 मेजों का मूल्‍य 800 रूपया है, और 4 कुर्सी तथा 3 मेजों का मूल्‍य 1000 रूपया है , 3 कुर्सी और 3 मेजों का मूल्‍य ज्ञात कीजिये ।

प्रश्‍न 9 दो घन जिनकी प्रत्‍येक भुजा 15 से.मी. है को आपस में सिरों पर जोड़ा गया है, इस प्रकार प्राप्‍त घनाभ का सम्‍पूर्ण पृष्‍ठ ज्ञात कीजिये ।

अथवा

एक ही त्रिज्‍या व एक ही ऊंचाई वाले बेलन व शंकु के अनुपात ज्ञात कीजिये ।

 

प्रश्‍न 13 एक बेलन के आधार की त्रिज्‍या और ऊंचाई में 2:3 का अनुपात है यदि बेलन का आयतन 1617 घन से.मी. है तो बेलन का सम्‍पूर्ण पृष्‍ठ ज्ञात कीजिये ।

 

गुरुवार, 4 मार्च 2010

सचिन: क्रिकेट के महानायक- राकेश अचल

सचिन: क्रिकेट के महानायक

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल के वरिष्‍ठ एवं विख्‍यात पत्रकार हैं )

 

      दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर मे एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलते हुए सचिन रमेश तेंदुलकर ने एक नया इतिहास लिख दिया। सचिन ने नाबाद दोहरा शतक लगाकर साबित कर दिया कि क्रिकेट की दुनिया में वे इस सदी के सबसे बडे महानायक है।

      क्रिकेट इतिहास में सचिन ने जो किया, वह पहले कभी नही हुआ। सचिन की इस उपलब्धि पर क्रिकेट के समीक्षको ने सचिन की क्रिकेट का भगवान तक कह डाला। वे लोग जो कल तक सचिन के एनर्जी लेबल को लेकर आशंकित थे अब सचिन के सबसे बडे प्रसंशक है।

      सचिन की आतिशी पारी के गवाह ग्वालियर के रूपसिंह स्टेडियम में 24 फरवरी 2010 को जो हुआ सो अविश्वसनीय, अकल्पनीय और अकथनीय था। मै सचिन को पहले दिन से खेलते देख रहा हूं। मैने सचिन को लडखडाते और सम्हलते कई बार देखा है। सचिन को रनों का पहाड खडा करते भी देखा है, लेकिन 24 फरवरी को सचिन ने रनों का एवरेस्ट तान दिया। रनों के इस एवरेस्ट को दक्षिण अफ्रीका की फौलादी क्रिकेट टीम भी नही लांघ सकी।

      भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता ने रातों रात कई खिलाडियो को साधारण खिलाडी से नायक और महानायक बनाया है। भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी इसका उदाहरण है। धोनी सचिन की कप्तानी में खेले है अब अपनी कप्तानी में सचिन को खिला रहे है। इससे सचिन का न तो रूतबा कम हुआ न उन्हे कोई चुनौती मिली। वे निरंतर क्रिकेट का इतिहास लिखते जा रहे है।

      भारतीय क्रिकेट के महानायक कपिल देव भी सचिन की इस उपलब्धि पर लट्टू है। उन्हे लगता है कि सचिन ने जो किया वह केवल सचिन ही कर सकते है। कपिल को सचिन की तुलना इग्लेंड में क्रिकेट के देवता माने जाने वाले सर ब्रेडमेन से करने में संकोच होता है। कपिल कहते है कि मैने सर ब्रेड मैन को खेलते नही देखा। मैने सचिन को देखा है इसलिए मे कह सकता हूं कि सचिन सचमुच महान है।

सचिन तेंदुलकर को तलाशने और तराशने का काम कर चुके भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर तो सचिन के दोहरे शतक के बाद इतने ज्यादा अभिभूत हो गए है कि कह बैठे कि मै सचिन के पैर छू लूंगा। यह अतिरेक है ा सचिन के पैर छूने की जरूरत नही है जरूरत है सचिन के हाथ चूमने की। क्योकि सारा ज्यादू इन्ही मजबूत हाथो का है।

      24 फरवरी 2010 को देश के हर समाचार चैनल और अखबार सचिन को विचलित न कर दे इसलिए आवश्यक है कि सचिन को सचिन ही बनाकर रखा जाए। सचिन को भगवान बना देने से बात नही बनेगी। भगवान क्रिकेट नही खेलते। क्रिकेट सचिन खेलते है। उन्हे अगले विश्वकप तक क्रिकेट खेलना है। अत: सचिन की पीठ थपथपाइए, शाबासी दी जाए, अभिनंदन किया जाए। कीजिए।

      सचिन की उपलब्धियों पर देश को गर्व है। हम भारत के लोग सचिन को लेकर इतरा सकते है। देश की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के अलावा प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के भी सचिन को बधाईया दी है। पूरा देश सचिन की उपलब्धि की खुशिया मना रहा है। रोशनी की जा रही है जाहिर है कि सचिन अब सिर्फ एक क्रिकेटर नही बल्कि एक किंवदंती बन गए है सचिन देश की थाती है। सचिन पर पूरे देश को नाज है।

      दरअसल सचिन के बल्ले से निकलने वाले रन किसी भूखे का पेट नही भर सकते, लेकिन किसी भी भूखे की आंखो में सचिन के रन देख कर चमक जरूर आ जाती है। यही सचिन की कामयाबी है। सचिन ने क्रिकेट जीवन में 17 हजार से ज्यादा रन बनाए। 47 शतक ठोके। हमारी कामना है कि उनका रनो की खातिर शुरू किया गया अश्वमेघ यज्ञ लगातार चलता रहे-चलता रहे (भावार्थ)

मकबूल पर फिदा है हिंदुस्तान- राकेश अचल

मकबूल पर फिदा है हिंदुस्तान

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल के वरिष्‍ठ एवं विख्‍यात पत्रकार हैं )

      मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन फिर चर्चा में है इस बार चर्चा की वजह हुसैन का ब्र नही बल्कि उन्हे कतर गणराज्य की ओर से पेश की गई नागरिकता है।

      95 वर्ष के मकबूल फिदा हुसैन भारत मे जन्मे है। उनके कैनवास पर सातो रंग पूरी शिद्दत के साथ सांस लेते है। मकबूल साहब अपनी मौलिकता की वजह से सदैव विवादो में रहते है। कभी विवाद की जड़ उनका अपना सौदंर्यबोध होता है, तो कभी भारतीय मान्यताओं, आस्थाओं को लेकर उकेरी गई आकृतियां।

      मकबूल फिदा हूसैन वर्षो से पेरिस में रह रहे है। भारत के कट्टरवादी हिंदू संगठन कई बार मकबूल साहब को कबूल करने के बजाय उन्हे नकार चुके है। उनके पुतले जला चुके है, गिरफ्तार की मांग कर चुके है। मकबूल फिदा हुसैन पर आरोप है उन्हे हिंदू देवी देवताओ की आपत्जिनक आकृतियां बनाकर उनका मजाक उडाया।

मकबूल साहब जिस मजहब से ताल्लुक रखते है, उसमें बुतपरस्ती की साफ मुमानियत है। बावजूद इसके मकबूल फिदा हुसैन ने अपनी पूरी उम्र कागजो पर बुत बनाने में खर्च कर दी। कभी  उनके बुश से पशु-पक्षी जीवित हुए तो कभी जीवन की जटिल जाएं। कभी उन्होने नारी सौदंर्य को गजगमिनी बनाकर उकेरा तो कभी भारतीय देवी देवताओं की नृत्य करती मुद्राएं। इस पर मकबूल का विरोध करने वालो से पूछा जाना चाहिए कि क्या कोई व्यक्ति भारतीय दर्शन को समझे बिना यह सब कर सकता है?

      मकबूल फिदा हुसैन अगर अश्लील होते, असामान्य होते,  अराजक होते तो क्या दुनिया उनकी कृतियों को हीरे-जवाहरात की कीमत पर खरीदती? शायद नहीं। लेकिन मकबूल के हर केनवास की कीमत है। यह कीमत ही साबित करती है कि मकबूल के हर रंग में इंसानियत की जिंदगी पर फिदा होने की ताकत देने का माद्दा है।

      जिंदगी को अपने ठंग से जीने वाले इस महान और सर्वकालिक कलाकार पर पूरा देश गर्व करता है। मकबूल साहब पूरी दुनियां में भारतीय कला का प्रतिनिधित्व करते है। कला के माध्यम से जीवन मूल्यो को समझने परखने की अंर्तदृष्टि किसी भी कट्टरपंथी के पास नही होती। अगर होती तो मकबूल फिदा हुसैन को गरियाया नहीं जाता। धमकाया नही जाता।

      भारत में फिलहाल दोहरी नागरिकता का प्रावधान नही है। इसलिए मकबूल साहब के लिए कतर की नागरिकता कबूल करना उचित नही है। वे अपनी सरजमीन पर आकर सुकून से रह सकते है। यह मुल्क उनका अपना है, वे मुल्क के अपने है।

      जो लोग मकबूल फिदा हुसैन को जानते है उन्हे पता है कि वे आम हिंदुस्तानी से कहीं ज्यादा समर्पित हिंदुस्तानी है। उन्होने एक बार भी ऐसा नहीं कहा कि वे अपनी जन्मभूमि से मुक्ति चाहते है। उनका पेरिस में रहकर काम करना कोई अजूबा नही है पेरिस दुनियां के तमाम मकबूल कलाकारों की कर्मस्थली रही है। पेरिस में होने का मतलब यह कतई नहीं होता कि वहा रहने वाले दूसरे मुल्को के लोग अपना वतन भूल गए।

      मकबूल फिदा हूसैन पर हम भारतवासियों को उसी तरह गर्व है, जिस तरह कि हरगोविंद खुराना पर है, अर्मत्य सेन पर है, मदर टैरेसा पर है। इन सबकी वजह से दुनियां में हिंदुस्तान का मान बढा है। दुनिया से मकबूल की कद्र उनकी कूची की वजह से तो ही है, लेकिन एक उम्दा हिंदुस्तानी होने के नाते भी है।

      मकबूल साहब को कतर की पेशकश की वजह से एक बार फिर राजनीति में घसीटा जा रहा है, लेकिन ऐसा करने वालो को नही पता मकबूल को मशहूर करने वाली कोई राजनीतिक पार्टी या खानदान नही है। मकबूल अपनी कला की दम पर मशहूर और दुनिया भर में कबूल किए गए है। इसलिए उन्हे मशविरा देने या कोसने का हक किसी भी राजनीतिक दल को नही है। (भावार्थ)

 

 

श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन सागर में 6 व 7 को

श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन सागर में 6 7 को

ग्वालियर। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय अधिवेशन 6 7 मार्च को सागर में आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव संगठनात्मक चर्चा की जाएगी। यह जानकारी संघ के प्रांतीय संयुक्त सचिव विनय अग्रवाल व संभागीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने दी है।

श्री अग्रवाल व श्री शर्मा ने सभी जिला इकाईयों को कहा है कि वह अधिक से अधिक संख्या में सागर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संभाग भर से बड़ी संख्या में पत्रकार सागर जाएंगे।