सोमवार, 14 मार्च 2016

मिलावटखोरी , कालाबाजारी के गढ़ मुरैना में कल होगी , एक दिन में भैस का दूध पिलाने की कवायद , कल मनायेगा हमेशा से कुम्भकर्ण की नींद सो रहा और सांड़ की तरह लगामहीन खाद्य विभाग '' उपभोक्ता जागरूकता दिवस''

मिलावटखोरी , कालाबाजारी के गढ़ मुरैना में कल होगी , एक दिन में भैस का दूध पिलाने की कवायद , कल मनायेगा हमेशा से कुम्भकर्ण की नींद सो रहा और सांड़ की तरह लगामहीन खाद्य विभाग '' उपभोक्ता जागरूकता दिवस''
ऐ जाने तुझे एक दिन जगा देंगें जिगर तू जागते रहना उसके बाद साल के पूरे 364 हमें जमकर खुर्राटे लगा कर सोना है , जाति देखकर , जगह देखकर , आसामी देखकर चरेंगें , जुगाली करते रहेंगें । तू सो गया या जाग रहा है यह कभी पता न लगायेंगें ।
मुरैना, 14 मार्च , ग्वालियर टाइम्स,  कल दिनांक 15 मार्च 2016 एम.एस.रोड जनपद पंचायत मुरैना के सभाकक्ष में ''विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस '' मनाये जाने हेतु दोपहर दोपहर 12 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें उपभोक्ताओं के हितों एवं उनके अधि‍कारों की जागरूकता हेतु संबंधि‍त विभागों के अधि‍कारीयों द्वारा विभागीय योजनाओं / संवाओं की जानकारी दी जायेगी ।

ऐ दुश्मन तुझे डरने की जरूरत क्या है, तू आगे है और हम गोली पीछे चला रहे हैं , शेरों का क्या , कुत्ता भी हो सामने , पत्थर आगे नहीं , हम तो पीछे को फेंक रहे हैं

हमें लौटना होगा दोबारा पुरानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर
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- नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
काफी चिन्तन के बाद एक निष्कर्ष तो लगभग तय है कि तथा कथि‍त अर्थशास्त्रीयों द्वारा तय की गई आधुनिक व आज की भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है , यद्यपि अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण ( ग्लोबलाइजेशन) और रूपये का प्रसार व फैलाव बढ़ाना तो ठीक बात है लेकिन इसके कारण बढ़ती मुद्रा स्फीति का बेलगाम होना और देश भर में मंहगाई का सुरसा के मुँह की तरह फैलना बेशक ही सोचनीय व चिन्तनीय बात है और इस जगह आकर ही आप साबित कर देते हैं कि भारत की प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था संबंधी प्रणाली बेहद पुख्ता और सुदृढ़ रही है जिसमें मुख्य विनिमय आधार पारस्परिक सेवा विनिमय या वस्तु विनिमय रहा है और बीच में ''रूपया'' जैसे माध्यम के लिये बहुत ही संकीर्ण और लगभग '' ना'' के बराबर स्थान रहा है । जब से अर्थव्यस्था के सुदृढ़ीकरण के नाम पर बीच में माध्यम यानि ''रूपया'' डाला गया है, तब से बेशक ही तथाकथि‍त विदेशों में जाकर पढ़ लिख कर समय व धन बर्बाद करके आये अर्थशास्त्री देश के लिये या भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये  स्वत: ही अपरिचित , अन्जाने एवं अप्रासंगिक हो गये और उनके लिये यह भारत देश एक अर्थशास्त्र के प्रयोगों को करने की प्रयोगशाला मात्र बनकर रह गया । प्रयोगधर्मिता व ''विकासशील'' के नाम पर किये गये सारे ही प्रयोग भारत के ढांचे के अनुसार असफल और विनाशकारी ही सिद्ध हुये , हमने मुद्रास्फीति बढ़ाकर हमेशा सोचा कि हम विकास दर बढ़ा कर आगे जा रहे विकासशील देश हैं और कभी सोचा कि हम मुद्रास्फीति घटा कर विकास दर बढ़ा रहे हैं , आदमी की या साधारण आदमी की क्रय शक्त‍ि घटाते बढ़ाते रहने के फार्मूले में हमने इतने कीमती वर्ष गंवा दिये और आज हम अपने देश को गंवा देने और विदेशी धन के देश में विनियोग की या किसी भीख मांगते भि‍खारी की तरह दयनीय हालत में पहुँच चुके हैं । आज प्रदेशों व राज्यों की हालत बहुत नाजुक एवं खस्ता है , वे किसी अमीर उद्योगपति या औद्योगिक घरानों के तलुये चाट चाट कर पूरा राज्य लाल कारपेट बिछा कर उसे बदले में देने को तैयार हैं भले ही विधि‍ की सत्ता की यह अवधारणा हो कि ''राज्य जनता व वहॉं रहे प्रत्येक प्राणी की अमूल्य निधि‍ व संपत्त‍ि है, लेकिन राजनेताओं को विधि‍ की सत्ता की इस अवधारणा से कुछ लेना देना नहीं , वे अपने बाप का माल समझ कर पूरे प्रदेश को जैसे चाहे जिसे चाहे , जब चाहें सौंप देते हैं , इसके लिये उन्हें लगता है कि जनता ने उन्हें 5 साल के लिये खुद को और खुद की सारी निधि‍यों व संपत्त‍ि को ( जिसमें जनता की सामूहिक व निजी व्यक्त‍िगत प्रतिष्ठा एवं सम्मान भी शामिल है) किसी को भी सौंप देने का लायसेन्स दे दिया है और वे सब कुछ कर सकते हैं । उनकी अज्ञानता , अनुभवहीनता व विशेषज्ञता हीनता उन्हें स्वयं कुछ सोचने समझने विचारने की शक्त‍ि से विहीन करके उन्हे किराये के टट्टू  सुझाव देने वाले सलाहकार या किसी अन्य बैसाखी लगा कर चलने वाले पंगु व मतिहीन की तरह बाध्य कर देती है । लिहाजा पहले तो इसका उसका परामर्शदाता , सलाहकार सुझाव मंडल , परामर्शदाता मंडल चाहिये , यानि कि आपके पास स्वयं का दिमाग नहीं और ऊपर से आप चीख चीख कर साबित करते हैं कि आपके आसपास खड़ी करोड़ों कर्मचारीयों और अफसरों से भरी पड़ी , सातवें वेतनमान ( जनसंपत्ति‍ ) से पल पोस कर बढ़ रही पूरी की पूरी फौज बेमतलब की , नाकारा व मतिहीन , दिमाग विहीन तथा योजना परियोजना विहीन , वैसे ही यूं ही नियुक्त कर लिये गये गधों व टट्टूओं की फौज है , लिहाजा हर काम के लिये आपको कंसल्टैण्ट चाहिये , फिर ये सरकारी अफसरों व कर्मचारीयों की अनावश्यक सरकारी सातवें वेतनमान की इस फौज का मतलब भी क्या है , हटाइये इसे और कंसल्टैण्ट ही पालिये , कुल मिलाकर धारणा अवधारण तोड़कर पूरी तरह से पंगु हो चुकी राजनीति में आज हालत इतनी दयनीय व नाजुक है कि हर कोई यानि कि राज्य सरकार से लेकर देश की सरकार तक किसी न किसी को यह देश दे देने या सौंपने को हर पल तैयार है ।
पूर्णत: आश्रित स्थति से गुजर रहा आज की तारीख में यह भारत देश अभी तक ''विकासशील '' देश है , जबकि सच कुछ अलग व जुदा है , भारत तो बर्षों वर्ष पहले से विकसित देश रहा है और पूरे विश्व का पालनहार देश रहा है , पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था का हजारों लाखों साल तक संचालन कर चुका देश है । विकासशील तो 70 साल का बुढ्ढा भी सदा रहता है वह 71 की ओर बढ़ रहा विकासशील है और 69 की तुलना में वह विकसित है , हम हमेशा बगल वाले किसान के खेत की फसल देख कर ही उसे उन्नत समझते आये हैं औ और वह किसान हमारे खेत की फसल देख कर हमें उन्नत समझता रहा है लेकिन शब्द विकासशील का तात्पर्य है अपने से बड़े की ओर देखना व हमेशा खुद को विकासशील कहना , विकसित का अर्थ है हमेशा अपने से छोटे की ओर देखना और खुद को विकसित कहना, हमने अपनी नसों में या तथाकथि‍त अर्थशास्त्रीयों ने देश को इतनी दयनीय व नाजुक हालत में पहुँचा दिया है कि हम हमेशा ही ''विकासशील'' देश ही बने रहेंगें और कभी विकसित देश नहीं बन पायेंगें , दूसरी भाषा में इसे ही 99 का फेर कहा जाता है , जो हमेशा पूरे 100 होने की प्रतीक्षा में सदैव ही ''विकासशील'' बना रहता है और वह कभी पूरा 100 नहीं बन पाता ।
जिहाजा कुल मिला कर जाहिर है कि जिन मस्त‍िष्क विहीन पंगु राजनेताओं ने पूरे के पूरे देश को ही प्रयोगशाला बना कर बर्बादी के कगार में इस कदर झोंक दिया हो कि उस देश में सरकारें वस्तुत: निर्वाचित नेताओं के हाथ में नहीं , बल्क‍ि किसी व्यापारिक व्यक्ति‍यों द्वारा या औद्योगिक घरानों के विनियोग या कुछ दे देने के लिये 24 घंटे भीख मांगने की हालत में पहुँच चुकी हों और प्रदेश व देश बेच देने के लिये पूरी तरह आतुर व रहम की पात्र बन चुकीं हों , बेशक जहॉं तीन चार पीढ़ीयां  पूरी तरह से बेरोजगार बैठीं हों , जिनके घरों का पालन पोषण बाप या दादा की पेंशन पर आश्रित होकर चल रहा हो , उन्हें कितना और बातों के बतासे बांट कर बहला बहला कर ये राजनेता वक्त गुजार सकेगें यह तो वही जानें , किन्तु इतना तो जाहिर है कि असल बेरोजगारी देश में 90 फीसदी से ऊपर जा चुकी है और पेंशनधारी भी कब तक जिन्दा रहेंगें , कब तक इस देश में लोगों के चूल्हे पेंशन पर जलते रहेंगें , एक आदमी की पेंशन में आठ दस लोग जिन्दा हैं , यह दशा कब तक इस देश में बनी रहेगी । यह तो ईश्वर ही जाने मगर यह तो जाहिर है कि इंतहा की भी सरहदें समाप्त हो चुकीं हैं और आने वाले दौर में या वक्त में कुछ ठोस नहीं हुआ तो भारत को जो कि आतंकवाद की प्रयोगशाला भी साथ ही साथ पनप कर बनता चला जा रहा है बेशक वह दिन दूर नहीं जब प्रयेग कर सरकारें बदल बदल कर बार बार उम्मीद लगा रही जनता का अंदरूनी आक्रोश फूट पड़े और ये सब्स‍िडी वो सब्स‍िडी , ये कार्ड , वो कार्ड के सारा खेल खत्म होकर गृहयुद्ध भारत देश में छिड़ जाये , विधि‍ की सत्ता पूर्णत: समाप्त हो जाये और लोग सड़कों पर आ जायें , एक दूसरे को खुलेआम लूटने मारने लगें , यह दिन दूर नहीं , इस लिहाज से आज एक ललित मोदी या विजय माल्या पी खा कर उड़ा कर बाहर भागने के रास्ते टटोलता फिर रहे हैं , पता लगे कि सारे ही नेता देश छोड़ छोड़ कर भाग गये , और जनता के पास उन्हें लूटने के लिये भी कुछ नहीं छोड़ गये । मंजर खतरनाक है , सचेत हो जाईये , सब्जबागों के दिखाते चले जाने से किसी के पेट नहीं भरते , हर फिल्म को एक निश्च‍ित वक्त पर समाप्त होना है , भारतवासी भूखे हैं उन्हें रोटी और रोजगार चाहिये , अवसरों की भरमार चाहिये , वरना खत्म हो यह लंबा इंतजार चाहिये ।       

ऐ दुश्मन तुझे डरने की जरूरत क्या है, तू आगे है और हम गोली पीछे चला रहे हैं , शेरों का क्या , कुत्ता भी हो सामने , पत्थर आगे नहीं , हम तो पीछे को फेंक रहे हैं
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आज की राजनीति में उपरोक्त उदाहरण व दृष्टांत प्रासंगिक व स्मरणीय हो गये हैं जहॉं जरा सा पद पा कर ही मानव इतराने इठलाने लगता है और स्वयंभू ईश्वर स्वयं को मानने लगता है तथा अन्य प्राणीमात्र का उपहास उड़ाने लगता है या अहंकार , गर्व व मद से चूर होकर उसे पीड़ा देने लगता है । अंतत: परिणाम यह होता है कि वह स्वयं ही सबके लिये उपहास व पीडि़त रहने या होते रहने का पात्र बना लेता है । बेशक यह वाक्य उन राजनीतिज्ञों के लिये है जिन्हें मदांधता या पदांधता हो गई है और सबको उपहास का पात्र मानने लगा है ।
अब इस आलेख के शीर्षक पर आते हैं , अपने भाईयों से हम कहना चाहेंगें कि , राजनीति में किसी व्यक्त‍ि विशेष पर ज्यादा पोस्ट लिखने की जरूरत नहीं है और संभवत: इससे ज्यादा आपकी बेवकूफी का इससे बेहतरीन इस टॉपिक का शीर्षक संभव भी नहीं । जिस व्यक्त‍ि विशेष से केवल कांग्रेस संसद में ही लड़ सकते हैं , बाहर वालों के लिये उस व्यक्त‍ि का नाम लेना अब पूरी तरह से बीती बात हो चुकी है , और आपके सांसद लोकसभा व राज्यसभा में मौजूद हैं , और आप कहीं के भी सांसद नहीं हैं , आपके लिये केवल विधानसभा की लड़ाई ही फिलवक्त बेहतर है , फिलवक्त संसद में बैठे व्यक्त‍ि आपके टारगेट नहीं , अभी आपको तीन साल संसद में बैठे व्यक्त‍ि को टारगेट करने के लिये बेसब्री से प्रतीक्षा करनी है , उससे पहले फिलहाल किसी व्यक्त‍ि विशेष को छोड़ , जो कि अप्रांसगिक और इस वक्त असमय हैं  या अपरिपक्व बुद्धि के लिये हर समय बारहों महीने 24 घण्टे जो टेन्शन हैं , फिलहाल जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उन्हें टारगेट करिये , जो दुश्मन आगे है , उसी पर पत्थर व गोलियां चलाईये या फेंकिये , संसद में बैठा व्यक्त‍ि विशेष तो बहुत पीछे रह गया टारगेट हैं जो दो साल पहले टारगेट थे या तीन साल बाद टारगेट होंगें , अभी आपके टारगेट हालिया हो रहे व आगे होने वाले प्रदेशों के विधानसभा के चुनाव हैं । जिसमें व्यक्त‍ि विशेष से पहले होने वाला म.प्र. विधानसभा का भी चुनाव है । हमें बड़ी हैरत है कि आपके टारगेट पीछे हैं , यानि आप हाथ में आये पत्थर पीछे की ओर फेंक रहे हैं , और आगे खड़ा दुश्मन न केवल मस्ती से मुस्करा रहा है , बल्क‍ि आपकी बेवकूफी का पूरा आनंद भी ले रहा है , और बड़ी आसानी से हर जगह जीत दर जीत दर्ज कराता जा रहा है । आप पीछे की ओर गोलियां चला रहे हैं , या पत्थर फेंक रहे हैं और आपके पीछे आप ही के लोगों की फौज यानि सेना है । कुल मिला कर पीछे की ओर पत्थर फेंकने या गोली चलाने से कुछ होना जाना नहीं , इसी लिये आपके पीछे कोई नहीं है , पीछे की कतार खाली है , आपके पीछे आने से या चलने से हर आदमी डरता है क्योंकि बकौल आपकी रणनीति आपकी बहुत पुरानी आदत है पीछे की ओर बंदूक कर गोली चलाना या पत्थर फेंकना और अपने पीछे चल रही अपनी ही सेना के जवानों या अपनी ही फौज के लोगों का शि‍कार करना , और सामने चढ़े व खड़े दुश्मन से मुस्करा कर हाथ मिलाना व बात करना । इसलिये हर आदमी छाती ठोक कर आपके आगे आने को तैयार है , आपके पीछे आने को कोई तैयार नहीं ।

रविवार, 20 दिसंबर 2015

फेसबुक पर कृपया इस प्रोफाइल में अब मित्रता अनुरोध न भेजें , हमारी अन्य प्रोफाइलें भी हैं , कृपया वहॉं जाकर हमसे जुड़ें - एक विनम्र अनुरोध - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

This Post already Published yesterday at my Facebook Profile https://www.facebook.com/narendrasinghtomar/ and also at automatically tweeted by Facebook at my Twitter Account https://twitter.com/narendra_singh and already shared some super top official of Govt. of India . Now it is Broadcasting through our wireless over to air system to throughout the world and releasing also through Gwalior Times worldwide with our channel partners Google and 300 more worldwide partners of our network. its copy through broadcasting also sending to C. B. I. Madhya Pradesh and also to officials of Lokayukt of Madhya Pradesh with All Ministers og Govt. of India and other States with Madhya Pradesh All concerned I. A. S's and I. P. S.'s. with Prime Minister of India, All Super Top Politicians and officials of All Parties and Govt's. Look just it is Published yesterday .
फेसबुक पर कृपया इस प्रोफाइल में अब मित्रता अनुरोध न भेजें , हमारी अन्य प्रोफाइलें भी हैं , कृपया वहॉं जाकर हमसे जुड़ें - एक विनम्र अनुरोध - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''
प्रिय मित्रगण , फेसबुक की हमार इस प्रोफाइल पर आपके रोजाना निरंतर व दनादन मित्रता निवेदन मिल रहे हैं, और कुछ अनावश्यक या आवश्यक टैगिंग भी बहुत ज्यादा मिल रही है । अत: यह अनुरोध लिखना आवश्यक प्रतीत हुआ । दरअसल एक तो हमारी यह प्रोफाइल वर्षों से मित्रता सूची के तौर पर 5 हजार मित्रों की पूरी संख्या से भरी पूरी होकर एकदम से फुल चल रही है । एकाध दो चार कभी कोई मित्र कम होता है तो हम नया कोई मित्र उसमें जोड़ कर फिर पूरी 5 हजार कर देते हैं । अभी हमने देखा कि इस समय करीब 500 से ज्यादा मित्रता अनुरोध स्वीकृति के लिये लंबित हैं । अत: दो बातें हम कहना चाहेंगें कि एक तो यह कि जो हमारे बहुत वर्षों से पुराने मित्र हैं और हमसे जुड़े हैं , उन्हें हम अपनी सूची से हटाना नहीं चाहते , यहॉं तक कि हमारे पुराने मित्र प्रसिद्ध पत्रकार स्व. आलोक तोमर और बंगाल के शंभूनाथ पाण्डेय जी को उनके निधन के बाद भी हमने अपनी सूची से आज तक विलोपित नहीं किया यानि हटाया नहीं है , उनसे इस फेसबुक पर हमारी बहुत सी यादें जुड़ी हैं । इसी प्रकार यह भी कि जो निष्क्र‍िय मित्र हैं और हमें यह लगता है कि उन्हें हमारी मित्र सूची में रखने या न रखने का कोई औचित्य नहीं है और वे कभी हमारी प्रोफाइल की ओर आते भी नहीं , उनके संबंध में हटाये जाने व सूची खाली किये जाने संबंधी निर्णय हम अब अगले साल ही यानि जनवरी 2016 में ही लेंगें , कम से कम इस साल तो कतई नहीं , और इस साल के समाप्त होने में महज अब 12 दिन बाकी हैं । तीसरी अहम बात यह कि हमारे फैसलों के पीछे हमारा मन , आत्मा , ईश्वरीय , शास्त्रीय व ग्रंथों में में उपलब्ध सिद्धांत , कुदरत के इशारे आदि काम करते हैं , हम तदनुसार ही अपने फैसले करते हैं और विशेषकर ज्योतिष इसमें अहम भूमिका अदा करता है , और ज्योतिषीय सिद्धांतों व संकेतों के आधार पर अपने कार्य व निर्णय तय करते हैं । जनवरी में बहुत बड़े दो ज्योतिषीय परिवर्तन होने जा रहे हैं , तथा 22 दिसंबर से सूर्य उत्तरायण होने जा रहे हैं और देवताओं की रात्रि समाप्त होकर उनका दिन शुरू होगा व राक्षसों का दिन समाप्त होकर उनका रात्रिकाल शुरू होगा और सब बदलावों पर हमारी गहरी नजर है , उसके बाद का गणि‍त फलित क्या कहता है , इसके विश्लेषण के बाद ही हम अपने कार्य व नीतियों का निर्धारण करेंगें । तब फैसला लेंगें कि अपनी फेसबुक मित्रसूची से किसे निकालें और किसे जोड़ें । तथा असली जीवन में भी अपनी कार्य व नीति निर्धारण करेंगें । यही वह खास वजह है कि हमारी टेबल पर मुरैना जिला से संबंध रखने वाले दो बहुत बड़े पुलिस केस दर्ज कराये जाने हेतु लंबित हैं , जो बड़े बड़े तीस मरखाओं के न केवल होश उड़ा देंगें , वरन उन्हें राजा से रंक बना कर जेल तक पहुँचा देंगें , दोनों ही केस बहुत बड़ी व बहुत छोटी हस्त‍ियों से ताल्लुक रखते हैं । किन्तु इन्हीं ज्योतिषीय व ईश्वरीय सिद्धांतों , संकेतो व नीतियों पर अमल करने की हमारी आदत बहुत पुरानी है , लिहाजा उन्हें भी हम लंबे समय से रोके हुये हैं , हमारी आदत चौतरफा हमला करने की है , हम चारों ओर से घेरकर मारते हैं या मौत के घाट उतारते हैं । और तीन तरफा घेरा हम पहले से ही डाल चुके हैं , बस अब सीधा हमला बाकी है । जब इतने महत्वपूर्ण कार्य को हमने रोका हुआ है , जिसमें ऐसे महत्वपूर्ण व जीतने वाले श्रेयपूर्ण कार्यो के लिये लोग तरसा करते हैं , ऐसे न जाने कितने काम हम कर चुके हैं , लेकिन नाम से या प्रचार से बचते हैं । लिहाजा हमारा टारगेट केवल टारगेट रहता है , उसका चर्चा नहीं । नाम तो हमारा पहले से ही बहुत नामवर कह लीजिये या बदनाम कह लीजिये , बहुत जबरदस्त विख्यात या कुख्यात हैॅ । अत: जिसे मारना है, बचाना हैॅ सब काम अगले साल ही करेंगें । दूसरे चूंकि अब हमारे पास व्यस्तता और काम की बहुत ज्यादा मसरूफियत है , हमें न केवल मीडिया का ही वरन , घर परिवार , खेती बाड़ी, वकालत, गांव , रिश्तेदारी , व्यवहार सहित तमाम भूमिकायें निभाने के साथ , परेशान प व मजलूम लोगों को सुनना व उनकी समस्या का समाधान व निराकरण भी करना पड़ता है , कभी कभी कई गांवों में जाकर पंचायतें सुननी पड़ती व उनमें अपने फैसले सुनाने पड़ते हैं । दूसरे चूंकि अब आगे अले साल से और बड़ी कुछ जिम्मेवारीयां आने वाली हैं , कुछ पारिवारिक तो कुछ व्यावसाय‍िक , कुछ संपत्त‍ि संबंधी , अत: अब व्यस्तता और ज्यादा बढने वाली है । उधर ग्वालियर में मकान बनना है , दिल्ली में जबरदस्ती अपने आप ही कुलदेवी की कृपा व आशीर्वाद से आश्रम शुरू हो गया है , वहां भी अब दौड़धूप लगातार रहेगी , दिल्ली का दूसरा दौरा भी जनवरी में करना है । वहॉं और भी कुछ दैवीय कृपा से कुछ गोपनीय व बहुत बड़े काम निबटाने हैं । लिहाजा दूसरी बात यह कि राजनीति से हम स्वयं बाहर निकल कर या छोड़ कर आये हैं , अत: राजनीतिक दल यह उम्मीद कतई न करे कि हम उनकी मर्जी से कोई काम करेंगें या कुछ लिखेंगें । मुरैना का बिजली विभाग हम पर खासा मेहरबान है, जिसकी तमाम अनिराकृत कंपलैंटस पहले से ही दर्ज हैं,ओर दो कंपलैंटस भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार व कार्मिक मंत्रालय में दर्ज हैं जो आज तक अनिराकृत हैं , जिनमें से एक कंपलैंट सीधे मुरैना सांसद, मुरैना कलेक्टर व ऊर्जा विभाग म.प्र. के प्रमुख सचिव सहित कई अन्य लोगों के विरूद्ध दर्ज है , जो कि अभी कार्यवाही के आधीन है । इस कंपलैंट के बाद तो जैसा आमतौर पर भारत में होता है , वही धमकाना , आतंकित करना और कंपलैंट वापस लेने के लिये हर किस्म की जोर आजमाइशें व पूरी ताकत लोग लगाते हैं सो लगाई जा रहीं हैं , हमारी बिजली लिहाजा जरूररत से ज्यादा रोजाना जानबूझ कर काटी जा रही है । खैर चुकि भ्रष्टाचार व सरकारी नाकारापन सरकारी बदतमीजी से जंग लड़ने के हम बहुत पुराने जंगबाज हैं , और धूल चटा कर जमींदोज कर नाम नक्शा इतिहास भूगोल सब मिटा देने का हमारा बहुत पुराना इतिहास है , वह तो खैर हम निबट ही लेंगें । ये तो बहुत ही छोटे जीव जंतु हैं जो अपनी जात व औकात के साथ अपने पदों की पॉवर दिखा रहे हैं , और यह सब हम बहुत बार बहुत सी ऐसी जंगों में देख चुके हैं और उनके अंजाम भी लिख चुके हैं । खैर माजरे से वाकिफ हैं हम, मगर अंजाम से वाकिफ नहीं है वे , हमारी पुरानी हिस्ट्री देख लेते या पता लगा लेते तो शायद ऐसी हिमाकत और जुर्रत न करते । बस यही अनुरोध है आप सबसे कि कृपया अभी नवीन मित्रता निवेदन यहॉं फेसबुक पर न भेजें , फिलहाल इस साल न हम किसी को हटाने जा रहे हैं और न जोड़ने , जो हैं सो फिलवक्त जस के तस ही रहेंगें , अगर एकाध दो चार कम हुये तो उसकी पूर्ति अवश्य कर देंगें । चूंकि म.प्र. या मुरैना में या विशेषकर हमारे यहां बिजली का कोई भरोसा नहीं रहता और नये साल पर बिजली रहे या न रहे अत: बीते और जाते साल 2015 की विदाई की इस घडी में आप सभी को नवीन आगत वर्ष 2016 की अग्रिम शुभकामनायें व बधाईयां जय श्री कृष्ण ... जय जय श्री राधे - आपका अपना नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द''

बुधवार, 18 नवंबर 2015

मुरैना पुलिस ने 30 हजार के इनामी आज डकेत पान सिंह बघेल को अरेस्ट कर लिया है

मुरैना पुलिस ने 30 हजार के इनामी आज डकेत पान सिंह बघेल को अरेस्ट कर लिया है
विस्तार से ब्यौरा इस प्रकार है -
आज जौरा SDOP के.डी सोनकिया ने दिन में 1 वजे से 3 वजे तक फरारी बदमाश पानसिंह बघेल पुत्र देवलाल नि ग्राम रसोंधना बेहड़ की तलाश में उसके गांव और कुंवारी नदी के बीहड़ में तलाश अभियान चलाया ।जिसमे उनके साथ टी आई सबलगढ़ और so देवगढ़ रूबी सिंह ,si ऋतू चौहान और si दीपेंद्र तथा पुलिस फ़ोर्स के अलावा रिमांड पर लिया गया डकैत लाखन धाकड़ और अपहृत नृपाल यादव और ग्रामीण भी थे ।बदमाश ने नृपाल को छिपाकर रखने वाला वह गड्ढा भी दिखाया जिसमे 7 दिनों तक छिपाकर रखा था और 12-13 नबम्बर की रात को ही गड्ढे से निकालकर बदरपुरा के जगदीश त्यागी की ट्यूबवैल की तिबरिया में छिपा दिया था जहाँ 13 नवंबर को उसे मुक्त कराया था।
यह गड्ढा ग्राम रसोंधना बेहड़ केनीचे कुंवारी नदी की तलहटी में एक टीले के निचे था जो करीबन 7 फिट गोलाकार व् 3 फीट गहरा है ।उसे लकड़ियों और घास काटों तथा करब के पुरों से ढक कर रखा गया था जिसके पास से निकलने पर भी पता नहीं चल सकता था ।
उसके साथी पप्पू उर्फ़ पोरा गुसाईँ नि समाधि पर भी 10000 का इनाम घोसित किया गया है।जल्दी ही इन बदमाशों पर और शिकंजा कसा जा रहा है।
के.डी सोनकिया ने माइक से ग्राम रसोंधना में व् आसपास के पुरों पर यह भी announce किया कि पानसिंह पर 10000 हजार का इनाम था जिसे 30000 किया गया है।।
जानकारी एवम् खबर-:के.डी सोनकिया(SDOP जौरा)

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

अकेले चले थे जानिब ए मंजिल मगर , लोग साथ आते गये , कारवां बनता गया



ग्वालियर टाइम्स ने पूरे किये 11 साल , आज से बारहवीं साल में प्रवेश
अकेले चले थे जानिब ए मंजिल मगर , लोग साथ आते गये , कारवां बनता गया
विशेष सम्पादकीय
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’

हम चाहे रहें न रहें , चाल हमने वह चली है दोस्त कि पसेमर्ग हमें सदा याद करेंगें ।
काम हमने वह किया और वह करेंगें,  जमाने में नाम लोग हमारा सदा याद करेंगें ।।
सन 2004 में 16 नवम्बर को ग्वालियर टाइम्स वेब पोर्टल का पंजीयन होने के साथ ही एक बहुत छोटी सी शुरूआत हमने आज से 11 साल पहले की थी ।
आहिस्ते आहिस्ते अपने काम के दम पर ग्वालियर टाइम्स ने अपना नाम भी कमाया और वेब की दुनियां में अपने नाम का सिक्का व धाक जमा ली ।
सन 2011 में नवम्बर तक लगातार सन 2004 से लेकर ग्वालियर टाइम्स डॉट कॉम डोमेन पर चलती रही , उसके बाद कुछ परिस्थि‍तियां ऐसीं बनीं कि ग्वालियर टाइम्स के हाथ से डॉट कॉम डोमेन निकल गया , महज तीन दिन की चूक हुई और बरसों से चल रहा डॉट कॉम डोमेन ग्वालियर टाइम्स के हाथों से निकल गया , उसके बाद आगे एकाध साल ग्वालियर टाइम्स डॉट कॉम को छोड़कर , डॉट को डॉट इन पर चलती रही ।
इधर कुछ बरस राजनीतिक वापसी करके उसमें समय बर्बाद हुआ और ग्वालियर टाइम्स पर ध्यान देने का वक्त नहीं मिला , फिर अंतत: दीर्घकालिक अनुभव के बाद हमने यह निर्णय लिया कि राजनीति को छोड़ कर पूरा ध्यान ग्वालियर टाइम्स पर ही लगाना होगा । और ग्वालियर टाइम्स को डॉट इन डोमेन पर स्थि‍र किया । और इस साल भी ज्यादा वक्त राजनीति से या राजनीतिक पापों से पिण्ड छुड़ाने में गुजर गया ।
खैर हमारे 11 साल के इस सफर में जब ग्वालियर टाइम्स डाट कॉम डोमेन पर काम कर रही थी तब 86 लाख हिटस लेकर अपना रूतबा बुलंद किये हुये थी और एक जलजला व एक जलवा बिखेर कर वेब दुनिया के मैदान ए जंग में अपना परचम सारी दुनिया में बिखेरे हुई थी । ग्वालियर टाइम्स का एक खास पेज चम्बल की आवाज वेब पर बहुत प्रसिद्ध हिट रहा है । ग्वालियर टाइम्स जहॉं 85 लाख हिटस खींच रही थी , तो चम्बल की आवाज जो कि ग्वालियर टाइम्स का महज  एक छोटा सा हिस्सा थी , उस समय 35 लाख हिटस लेकर अपना एक अलग ही रूतबा बनाये हुये थी ।
खैर अब तो ग्वालियर टाइम्स डॉट इन डोमेन पर है । और इसी पर भविष्य में सदैव स्थ‍िर रहेगी ।
11 साल की अल्पावधि‍ में हमने बहुत कुछ देखा , ग्वालियर टाइम्स का तो रूतबा और बुलंदी निरंतर बढ़ती ही रही , बढ़ती ही गई, बढ़ती ही जा रही है , तब जब हमने  काम शुरू किया था तब काम करना और वेब ट्रेफिक पाना बहुत कठिन काम था , आज की तारीख में वही काम तकरीबन एक लाख गुना ज्यादा आसान हो गया है । आज करो़ड़ों हिटस लेना व वेब ट्रेफिक हासिल करना बहुत आसान है, आज काम करने के तरीके बहुत बदल गये हैं , बहुत से बदलाव आ गये हैं । और चूंकि स्वयं इंजीनियरिंग व टैक्नॉलॉजी में एक्सपर्ट होने के कारण हमने स्वयं ही बिना संसाधनों के ही अनेक अत्याधुनिक टैक्नालॉजीयों का प्रयोग आज से दस साल पहले शुरू किया था , खैर अब तो नया बहुत कुछ करना है , और साल भर से पहले यानि कि जब ग्वालियर टाइम्स अपने 12 साल पूरे करे तो , एक अदद व खास मुकाम व बेहतरीन उदाहरण व प्रेरणा स्त्रोत के रूप में ग्वालियर टाइम्स खड़ी हो ।  
इस दरम्यां बहुत से लोग ग्वालियर टाइम्स में आये और गये , कई टीमें बनीं बिखरीं , खैर यह सब व्यवसाय का एक हिस्सा है । और ग्वालियर टाइम्स रही हो चाहे नेशनल नोबलयूथ अकादमी , अपने नियमों , शर्तो , उसूलों पर कभी समझौते नहीं करती , यह इतिहास ही हमारी बुलंद धरोहर रही है ।
जिसने भी ग्वालियर टाइम्स में या नेशनल नोबल यूथ अकादमी में आकर खुदा बनने की या राजनीति करने की हिमाकत की या अन्य किसी तरह से अपना महत्व दिखाने की कोशि‍श की , ग्वालियर टाइम्स और नेशनल नोबल यूथ अकादमी ने उठा कर उसे न केवल बाहर फेंक दिया बल्क‍ि धूल में भी मिला दिया ।
खैर लोगों का आना जाना किसी भी व्यावसायिक संस्थान की नियमित व एक चालू प्रक्रिया रहती है । बस इतना बहुत खूब रहा कि न कभी नेशनल नोबलयूथ अकादमी ने और न कभी ग्वालियर टाइम्स ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता किया , न कभी किसी के सामने सिर झुकाया । एक विश्वसनीयता व योग्यता साबित की व कमाई ।
अपने से ज्यादा योग्य व अनुभवी के सामने झुको , विेवेक बुद्धि व चातुर्य जागृत रखकर ही इस दुनिया में टिका जा सकता है , चाहे वह वेब की दुनिया हो या असल वास्तविक दुनिया हो । ग्वालियर टाइम्स को और नेशनल नोबलयूथ अकादमी को दोनों ही कामों का गहरा मैदानी अनुभव है , असल धरातल पर भी और आकाशीय आसमानी दुनिया का भी ।
मात देने की कोशि‍श ही आपको मात दिलाती है । खैर यह खुशी की बात है कि नेशनल नोबलयूथ अकादमी भी बरसों बाद अगले साल यानि सन 2016 में अपना मैदानी काम दोबारा शुरू करने जा रही है । चूंकि ग्वालियर टाइम्स और नेशनल नोबल यूथ अकादमी का अटूट व माता पुत्री पुत्र जैसा एक पारिवारिक रिश्ता है । अत: बेशक ही दोनों ही अब एक दूसरे के लिये मददगार साबित होंगें ।
जिन लोगों ने हमारे साथ पिछले समय में कभी भी काम किया उन सभी को , अपनी आज की टीम को , आने वाली नई टीम को , अपने सहयोगीयों व साथि‍यों , पाठकों, दर्शकों के प्रति हृदय से आभार व कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं । और आने वाले वक्त में चूंकि बहुत बड़े बदलावों की प्रक्रिया और उन्नति‍ व प्रगति के नये पथ पर नये परचम फहराने के लिये आपकी अपनी ग्वालियर टाइम्स और नेशनल नोबलयूथ अकादमी दोनों ही तैयार हैं । वर्ष सन 2016 में बहुत कुछ करके बहुत कुछ नया पाना है , हमारे पास देने को भी बहुत है और पाने को भी बहुत है, और बारहवां साल पूरा करके तेरहवें साल में दम रखना है , इसी की तैयारी के साथ आपके पूर्ववत सहयोग, प्यार व साथ की सदैव ही नेशनल नोबलयूथ अकादमी को और ग्वालियर टाइम्स को आवश्यकता रहेगी ।
इब्ति‍दा ए इश्क है, रोता है क्या , आगे आगे देखि‍ये कि होता है क्या .....
हवायें लाख रोकें रास्ता आंधीयां बनकर , मगर वो छा ही जाते हैं, जो बादल घि‍रकर आते है ....... 
आपका अपना
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’
17 नवम्बर 2015    

रविवार, 25 अक्टूबर 2015

दो व्यक्तियो के विरूद्ध शस्त्र के दुरूपयोग पर कार्रवाई

दो व्यक्तियो के विरूद्ध शस्त्र के दुरूपयोग पर कार्रवाई
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मुरैना | 24-अक्तूबर-2015
 
 
   शस्त्र के दुरूपयोग करने के आरोप में दो व्यक्तियों के विरूद्ध कार्रवाई की है। जिनमें प्रमोद पाठक पुत्र रामनिवास पाठक निवासी जोटई रोड हॉल हास्टल अधीक्षक श्योपुर और बेताल सिंह पुत्र अजीत सिंह तोमर निवासी मान सिंह का पुरा जोटई के विरूद्ध शस्त्र पुलिस अधीक्षक मुरैना के प्रतिवेदन के आधार पर शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।