सोमवार, 13 अप्रैल 2015

तो अब क्या यह मान लिया जाये कि अगला बड़ा और दमदार मुकाबला ‘’आप’’ और ‘भाजपा’’ के बीच होगा



तो अब क्या यह मान लिया जाये कि अगला बड़ा और दमदार मुकाबला ‘’आप’’ और भाजपा’’ के बीच होगा
आप ‘’ के विरोध प्रदर्शन की भोपाल रैली में उमड़ा जन सैलाब और जिलों में चल रही आप की सक्रिय गतिविधि‍यों से भाजपा की पेशानी पर चिंता की लकीरें खिंचीं  
* कांग्रेस से खतरा मुक्त हुई भाजपा के लिये ‘’आप’’ ने बजाया खतरे का अलार्म * भाजपा में ‘’आप’’ के बढ़ते सैलाबी तूफान को लेकर अंदरूनी हाई अलर्ट * भाजपा ने तैयार की रणनीति खेल सकती है राजनीति का तिकड़मी पेच
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
Gwalior Times
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मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मरणासन्न सन्नाटे में धकेलकर तकरीबन जमींदोज व नेस्तनाबूद कर चुकी बेफिक्री व निशंक तेवरों में जी रही लेकिन केन्द्र सरकार से परेशान और आंतरिक झंझावात और भंवर में उलझी म.प्र. की भारतीय जनता पार्टी के लिये एक चुनौती के रूप में लगातार आगे बढ़ रही ‘’आम आदमी पार्टी’’ की निरंतर सक्रियता ने और उसमें लगातार बढ़ते जा रहे जन सैलाब ने म.प्र. भाजपा की पेशानी पर चिंता की लकीरें खींच कर , आने वाले वक्त में बड़े मुकाबले और खतरे का अलार्म बजा कर आगे होने वाली कबड्डी की ताल ठोक दी है । 
राजनीतिक तौर पर इसका दूसरा संदेश यह जाता है कि म.प्र. की भाजपा सरकार के विरूद्ध आम आदमी पार्टी और कांग्रेस लगभग एक ही जैसे मुद्दों या एक जैसे सियासी शतरंजी दांव पेंच खेलने जा रहे हैं । और जाहिर है कि इसका सीध सीधा जमीनी नुकसान भाजपा को कम और कांग्रेस को ज्यादा होगा । वर्तमान हालात देखकर लगता है कि यह बहुत ज्यादा संभव है , आने वाली म.प्र. विधानसभा में कांग्रेस की जगह ‘’आप’’ ले ले , हालांकि आम आदमी पार्टी यह दावा कर रही है कि वह म.प्र. विधानसभा में 150 से ज्यादा सीटें हासिल करेगी ।
लेकिन अगर जमीनी हकीकत को टटोला जाये तो आज की तारीख में इस वक्त आम आदमी पार्टी 150 विधानसभा सीटों पर तो नहीं लेकिन करीब 50 से 80 तक विधानसभा सीटों पर और करीब 6 से 8 लोकसभा सीटों पर बेहद मजबूत स्थि‍ति में नजर आ रही है ।
दोनों पार्टीयों में अंदरूनी नूराकुश्ती और रणनीतिक खेमेबाजी शुरू
अगर भाजपा और आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालातों की बात करें या अंदरखाने जो चल रहा है उस गोपनीय रणनीति की बात करें तो स्थ‍िति कही अधि‍क साफ हो जायेगी ।
भाजपा ने भी बदली रणनीति
सुनने में आ रहा है कि भाजपा ने अपना हाल ही में 15 तारीख तक किया जाने वाला म.प्र. सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टाल दिया है । और यह विस्तार बहुत जल्द या जैसा भाजपा के सूत्र बताते हैं , इसी महीने के अंत तक या मई की 10 या 15 तारीख से पहले हो लेगा , लेकिन उससे पहले अब बदली गई रणनीति के मुताबिक पहले निगमों और मंडलों में नियुक्त‍ियां की जायेंगीं , उसके बाद मंत्री मंडल का विस्तार किया जायेगा । और भरोसेमंद सूत्र यह भी बताते हैं कि आने वाले वक्त में होने वाले खतरे के सारे स्थान ( सीटें) चिह्न‍ित कर पहचान ली गईं हैं, और तदनुसार ही अब राजनीतिक व रणनीतिक दांव पेंच व भूमिकायें भाजपा अपनायेगी । और उन सीटों को कव्हरअप करेगी जहॉं या तो भाजपा जीती नहीं थी या आगे कोई और दमदारी से उस सीट पर फाइट कर सकता है या जीत सकता है ।
आने वाले तूफान व सैलाब के प्रति भाजपा व आर.एस.एस. सतर्क
बसपा अगले चुनाव में म.प्र. से समाप्त हो जायेगी वहीं कांग्रेस बमुश्क‍िल 8 या 10 सीटों पर सिमट जायेगी, जबकि ‘’आप’’ पार्टी के सशक्त विपक्ष या ‘’विकल्प’’ बन कर सन 2018 के म.प्र. विधानसभा चुनावों में सामने आ सकती है या फिर बहुत जबरदस्त कड़ी फाइट देकर खतरनाक चुनौती बन सकती है, भाजपा खेमे के अंदर चल रही मथनी से उनके व आर.एस.एस. के राजनीतिक पंडितों ने पूर्व आगाह कर दिया है । और आम आदमी पार्टी की भोपाल रैली में उमड़े जन सैलाब ने और कई जिलों चल रही निरंतर राजनीतिक सक्रियता के प्रति सचेत कर, आने वाले तूफान के प्रति आगाह कर दिया है ।
आम आदमी पार्टी की भी रणनीति में खासे फेाबदल के संकेत
इधर आम आदमी पार्टी में भी कोई कम रणनीति और राजनीतिक मंथन नहीं चल रहा, वह भी प्रदेश में जान डालने के लिये प्रदेश की कमान व जिलों की कमान बहुत बड़े फेरबदल के साथ बदल कर अनुभवी दबंग व दमदार लोगों को फ्रण्ट पर लाने की तैयारी में जुटी है , आने वाले वक्त आम आदमी पार्टी की इस खास राजनीति व रणनीति का खुलासा हो सकता है । हालांकि वर्तमान प्रदेश व जिला नेतृत्वों से पार्टी के हाईकमान को कोई शि‍कायत शि‍कवा नहीं है, लेकिन खुद आम आदमी पार्टी का ही प्रदेश नेतृत्व और जिलों का नेतृत्व ऐसी दरकार व मांग कर रहा है , यह भी सोचने की बात है जहॉं सब एक कार्यकर्ता बने रहना चाहते हैं और आम आदमी बन कर ही पदों पर या बिना पदों के पार्टी के लिये काम करना चाहते हैं और खुद ही यह मांग करते हैं कि सक्रिय व दबंग व डटे जमे अड़े रहकर सोशल व पॉलिटिकल एक्सपर्ट चाहिये , कमान और नेतृत्व उनको देकर उनके साथ काम करना है । जाहिर है इस प्रकार की नीति व रणनीति भाजपा और आर.एस.एस. के लिये निसंदेह बहुत ज्यादा चिंता का विषय है , क्योंकि अब तक केवल भाजपा को ही म.प्र. में ग्रास रूट लेवल की पार्टी माना जाता है । लेकिन आप कार्यकर्ताओं की निरंतर बढ़ती फौज व किसी दमदार नेतृत्व को प्रदेश व जिलों में सामने लाया जाना बेहद खतरनाक अलार्म है । फिलवक्त आप पार्टी हाई कमान की नजर में कुछ लोग ऐसे हैं या इस प्रकार का अंदरूनी चयन कार्य चल रहा है । और भाजपा की रणनीति के हर कदम पर आप की नजर है , वहीं आप की रणनीति के हर कदम पर भाजपा की नजर है । कुल मिलाकर दोनों का पोसंपा भाई पोसंपा चल रहा है ।
खतरनाक राजनीतिक चूक से बच रहे हैं दोनों राजनीतिक दलों की राजनीति और रणनीति पर ध्यान दें तो साफिया तौर पर जाहिर हो जायेगा कि ये दोनों ही दल ‘’कांग्रेस’’ को और कांग्रेस नेताओं को ल तो लक्ष‍ित या टारगेट कर रहे हैं और न उसका कहीं जिक्र तक कर रहे हैं । मतलब साफ है कि इनकी रणनीति में कांग्रेस आउट ऑफ फोकस और जमीनी चर्चा से बाहर का विषय है  । सनद रहे कि यह दोनों दल इस गेम को दिल्ली विधानसभा चुनावों में खेल चुके हैं और कांग्रेस का सफाया कर चुके हैं , वही रणनीति म.प्र. में अपनाई जा रही है । ‘’नजर अंदाजी की भी एक जुबां और एक भाषा होती है ‘’
भाजपा और आर.एस.एस. भी तुरूप के इक्के मैदान में ला सकती है या कहिये कि अब पूरी तरह से तैयारी में है कि अपनी जंगी राजनीतिक बिसात अब बिछा दे, और इसका पता आने वाले समय में होने वाली निगम व मंडल की नियुक्त‍ियों सहित होने वाले मंत्रीमंडल विस्तार में झलकना चाहिये , यदि यह नहीं झलकता है तो यह मानना चाहिये कि भाजपा यह मान चुकी है कि अब म.प्र. में सरकार बदलेगी और इसके साथ ही आप पार्टी के बदलावों और रणनीति से भी यह खुलासा आने वाले वक्त में हो जायेगा कि वह म.प्र. विधानसभा में विपक्ष में बैठने जा रही है या सरकार व सत्ता में । कुल मिलाकर इतना तो साफ है कि अगला तगड़ा व जंगी मुकाबला ‘’आप’’ और भाजपा के बीच ही म.प्र. में होना है । और उस ‘’विकल्प रिक्त‍ि’’ या ‘’ सब्स्टीट्यूट गैप’’ की पूर्ति हो जायेगी ।
यदि दोनों ही दल इस रणनीति पर अमल करते नजर आते हैं तो यह भी बहुत ज्यादा संभव है कि आने वाले कुछ स्थानीय निकायों के चुनावों में भी ये दोनों पार्टीयां ही आमने सामने टकरा जायें और तब बसपा और कांग्रेस के लिये यह स्पष्ट अलार्म और ताबूत की अंतिम कील ठोके जाने का स्पष्ट आगाज होगा । हालांकि अभी मुरैना में भी नगर निकाय चुनाव होना है , लेकिन नगरीय निकाय चुनावों तक यदि ये दोनों दल सुनिश्च‍ित रणनीति के तहत अमल नहीं करते तो सारी रणनीति को दूरगामी परिणामों अर्थात म.प्र. विधानसभा चुनाव 2018 और लोकसभा चुनाव 2019 के नजरिये से देखा जाना चाहिये । ज्ञातव्य है कि म.प्र. की भाजपा सरकार के लिये केन्द्र की मोदी सरकार भी अंदरूनी तौर पर बहुत बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हुई है और तथाकथि‍त आर्थ‍िक सुधारों के नाम पर भाजपा की राज्य सरकार का बेड़ा गर्क करने पर तुली है , वहीं जनता का परिवर्तन का मूड भांपते हुये आम आदमी पार्टी अपने अलग कसीदे पढ़ना शुरू कर चुकी है ।
अरविन्द केजरीवाल की निजी रूचि ने बढ़ाया आने वाले आगाजी तूफान का खतरा
म.प्र. में आम आदमी पार्टी की भोपाल में विगत दिवस हुई विरोध प्रदर्शन रैली को और उसमें हुई भीड़ के चित्रों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा रिट्वीट किये जाने व म.प्र. के मुख्यमंत्री शि‍वराज सिंह चौहान के नाम संदेश व उपदेश का ट्वीट किये जाने से सारा मामला राजनीतिक गर्मी पकड़ गया है, साथ यह भी स्पष्ट हो गया है कि म.प्र. की पल पल की गतिविधि‍ पर आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व न केवल बहुत गहरी नजर रख रहा है बल्क‍ि , आप के बढ़ते जन सैलाब व पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता से बेहद गंभीर व उत्साहित भी है । निसंदेह केजरीवाल की म.प्र. में निजी व गहरी रूचि कयामती व कहर ढा कर मंजर बदलने वाली मानी जा सकती है ।   
सुप्रीम कोर्ट  का बड़ा  फैसला, बिना शादी के साथ रहने वालों जोड़े विवाहित माने जायेंगे
 नई दिल्ली :: बिना शादी के साथ रहने वालों जोड़े विवाहित माने जायेंगे: सुप्रीम कोर्ट
सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। आज उसने कहा कि यदि कोई अविवाहित जोड़ा मियां-बीवी के रूप में अगर साथ रह रहा है तो उन्हें कानूनी रूप से शादीशुदा माना जाएगा और और उसे वो सारे अधिकार मिलेंगे जो कि विवाहित कपल को मिलते हैं यहां तक कि अपने साथी की मौत के बाद महिला उसकी संपत्ति की हकदार होगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक संपत्ति के मामले में सुनाया है। यह फैसला जस्टिस एमवाय इकबाल और जस्टिस अमिताव रॉय की बैंच ने लिया है। बैंच ने कहा कि लेकिन दोनों को इस सूरत में यह साबित करना होगा कि यह फैसला उन्होंने शादी करने के लिहाज से ही लिया है।
साथ रहने वाले जोड़े माने जायेंगे शादी-शुदा
जिस केस के तहत कोर्ट ने यह फैसला किया है वो एक संपत्ति विवाद का मामला था जिसमें परिवार का कहना था कि उनके दादा अपनी पत्नी की मौत के बाद एक महिला के साथ 20 साल से रह रहे थे इसलिए उनकी संपति में उसका हिस्सा नहीं दिया जा सकता। परिवार वालों का कहना है कि वह महिला उनके दादा की मिस्ट्रेस थी। जिस पर पीड़ित महिला ने कानून से मदद मांगी और संपति में हिस्सा भी।
कपल को मिलेंगे सारे पति-पत्नी के हक
जिस पर आज कोर्ट ने सुनवाई की और पीड़ित महिला को मृतक की कानून पत्नी मान लिया और फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि एक मर्द और औरत लंबे समय से साथ रह रहे हैं तो समाज उसे भले ही जो उपमा देता हो लेकिन अगर दोनों के साथ रहने का फैसला शादी के मद्देनजर है तो ऐसे में दोनों विवाहित माने जायेंगे । 


शनिवार, 11 अप्रैल 2015

दिल्ली की किल्ली : जब कांप उठी धरा , थर्रा गये सब धरा मेरू , कंपित हो कांपे शेषनाग , आया सारी धरती पर भूकंप महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमरों का साम्राज्य- 3

दिल्ली की किल्ली : जब कांप उठी धरा , थर्रा गये सब धरा मेरू , कंपित हो कांपे शेषनाग , आया सारी धरती पर भूकंप
महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमरों का साम्राज्य- 3
* पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास * भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत * ययाति और पुरू के वंशज चन्द्रवंशीय क्षत्रिय राजपूत ( पौरव - पांडव )
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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( गतांक से आगे भाग-3 ) पिछले अंक में दिल्ली की किल्ली का जिक्र आ चुका है, या कहिये कि ‘’दिल्ली की किल्ली’’ जिसे आज लौह स्तम्भ या भीमलाट कहा जाता है और आज के महरौली नामक स्थान पर कुतुब मीनार जिसे आजकल कहा जाता है , के निकट मौजूद व स्थापित है ( इस स्थान का नाम जबकि वंशावली एवं शास्त्रों एवं प्राप्त शि‍लालेखों एवं दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख के अनुसार अलग है, जिसका जिक्र हम आगे करेंगें, इसे जिसे कुतुब मीनार कहा जाता है,  उसका असल नाम विजय आरोह पूजन स्तंभ या श्री हरिपूजनध्वज पताका फहराने के लिये बनवाया गया एक समानांतर आरोही स्थल है , तोमर राजवंश की वंशावली में यह कीर्ति पताका ध्वज स्तंभ एवं श्री हरि दर्शन पूजन का आरोही स्थल के रूप में वर्ण‍ित है ।
दिल्ली की किल्ली की स्थापना तोमर राजवंश की महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की राजघराने की मूल वंशावली,  इंद्रप्रस्थ के किले , लालकोट परिसर व आसपास मिले प्राचीन शि‍लालेखों और स्वयं दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख में , किल्ली की स्थापना का व उस पर लेख खोदे जाने के समय काल का वर्णन है , जो कि विक्रम संवत 1109 से महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर (द्वितीय) के महाराजा बनने का समय अंकित है, जिसमें महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर   ( द्वितीय ) द्वारा इसे गाड़कर स्थापित करने एवं भूकंप कर धरती व शेषनाग को थर्रा देने का जिक्र है । शि‍लालेखों एवं तत्समय लिखे गये ग्रंथों ‘’विबुध श्रीधर’’ और ‘’पृथ्वीराज रासो’’  में उल्लेख है कि शेषनाग जो अपने शीष पर मणि‍यों की महामणि‍यां धारण करते हैं , उन्हें कंपा देने वाला या हिला दे कर थर्रा देने वाला कार्य आज तक किसी ने नहीं किया , वह कार्य चन्द्रवंश के राजपूत क्षत्रिय महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर ने कर दिखाया , महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के एक ही हाथ से, एक ही हुंकार में कील धरा में बल भर कर ठोक देने से शेषनाग कंपित हो गये और बुरी तरह थरथरा गये , यह कार्य सूर्यवंश , चन्द्र वंश ही कोई भी नहीं बल्क‍ि इस चर अचर संपूर्ण जगत में  , सुर , असुर , लोक परलोक में आज तक कोई नहीं कर पाया, शेषनाग के थरथरा कर कांप जाने से से सारी भूमि धरा पृथ्वी कांप गई और समूची भूमि कंपित हो कर बुरी तरह हिल उठी । खैर यह जिक्र व विषय विस्तार हम आगे करेंगें और इन ग्रंथों में कही गयी बातों पर एवं इस किल्ली की स्थापना की वजह एवं स्थापित करने का तरीका और कारण पर आगे विस्तृत विस्तार से चर्चा करेंगें ।
लौह स्तंभ यानि कि दिल्ली की किल्ली पर खुदे लेख , तोमर राजवंश की वंशावली और प्राप्त शि‍लालेखों या शि‍लापट्ट‍िकाओं या अन्य चिह्नों व निशानों पर महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर का राजतिलक व शासनकाल की शुरूआत व इस कील के स्थापना लेखादि में,  इस कील या लौह स्तम्भ या किल्ली पर लेख में महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर का शासन काल विक्रम संवत 1109 से एवं अग्रेजी में सन के हिसाब से कहें तो ( ईसवी सन के अनुसार ई. सन 1052)  से शुरू होना व कील की स्थापना करना अंकित है और इस लेख व किल्ली स्थापना ( गाड़े जाने) के  लेख में चन्द्रवंश के प्रतापी राजपूत क्षत्रिय महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर ( द्वितीय) द्वारा इसकी स्थापना का उल्लेख है ।
....  क्रमश: अगले अंक में जारी

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण का लोकतंत्र , संसद , कानून और प्रजातांत्रिक राजाज्ञायें



द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण का लोकतंत्र , संसद , कानून और प्रजातांत्रिक राजाज्ञायें
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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प्रथम भाग – प्रथम अंक
भारत जैसे देश में अक्सर लोकतंत्र या प्रजातंत्र की बातें भी सुनाई कही जातीं हैं और यह भी बताया जाता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा , सबसे बेहतरीन लोकतंत्र वाला देश है । इसके साथ ही यह भी बताया जाता है कि भारत में इससे पूर्व राजतंत्र था और राजतंत्र बहुत बुरा था तथा राजतंत्र के अनेक दोष व खामीयां गिनाई जातीं हैं ।
यदि जो कहा बताया या पढ़ाया जाता है उसके आधार पर लोकतंत्र की परिभाषा लिखी जाये तो कुछ यूं बनेगी ‘’ जनता का, जनता द्वारा , जनता के लिये शासन’’ ही लोकतंत्र है , और यदि राजतंत्र की परिभाषा बकौल इन के की जाये तो ये लिखी जायेगी कि राजा का प्रजा पर प्रभुत्व संपन्न एकक्ष व एकमात्र राज्य या शासन ही राजतंत्र कहलाता है ।
खैर इस विषय में विद्वानों में गहरे मतभेद हैं और विद्वान , बुद्धिजीवी, इतिहासकार, एवं कानूनविद भी इन दोनों ही परिभाषाओं को भारत के परिप्रेक्ष्य में सही नहीं मानते । और विडम्बनावश भारत में ‘’लोकतंत्र’’ या प्रजातंत्र अभी आज दिनांक तक तो केवल मात्र एक सैद्वांतिक अवधारणा है और व्यावहारिक रूप से यह आज तक भारत देश में तथाकथि‍त प्रजातंत्र अभी तक नहीं आया है, केवल व्यवस्था का नाम बदल देने या पद नाम बदल देने या मात्र व्यक्त‍ि बदल देने से न तो व्यवस्था बदलती है और न उसमें सुधार ही संभव होता है ।
यहॉं यह उदाहरण देना सटीक होगा कि ‘’महाराजा’’ का नाम राष्ट्रपति रख दिया जाये और किसी रियासत या राज्य के राजा का नाम राज्यपाल रख दिया जाये , बाकी सब वही अर्थात प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सभासद या दरबारी गण ( सांसद और विधायक) और भी कुछ है जिस पर आगे इसी आलेख में सब कुछ चर्चा में आयेगा । बस गुड़ का नाम शक्कर रख देने से और शक्कर का नाम गुड़ रख देने से कभी भी न तो गुड़ का और शक्कर का रूप रंग स्वाद व सवभाव बदलेगा ।
किसी भी शासन व्यवस्था हो या गृह व्यवस्था केवल व्यवस्था कान , पद नाम व व्यक्त‍ि मात्र बदल दिये जाने से वह व्यवस्था नहीं बदलती, बल्क‍ि उसका रूप व स्वभाव एवं व्यावहारिक अमल विकृत एवं दूषि‍त व विद्रूपित हो जाता है , प्रणाली दोषपूर्ण एवं दोषगत हो जाती है, व्यवस्था अपना चरित्र एवं नैतिकतायें खो देती है । और अत्यंत कुरूप व भयावह स्वरूप में प्रकट हो उठती है ।
हम जो आगे विषयवस्तु लिखने जा रहे हैं कि ‘’द्वापरकाल में श्री कृष्ण का लोकतंत्र’’ यह पूर्णत: प्रमाणि‍क एवं सौ प्रतिशत साबित एवं शास्त्रीय है । सारी शासन व्यवस्था का एक सिंहावलोकन एवं विद्वजनों व सुविज्ञों के लिये यह प्रश्न छोड़कर जायेगा कि तब ( द्वापर के श्रीकृष्ण काल) और अब आज के लोतंत्र काल में , क्या फर्क है अब में और तब की शासन व्यवस्था में या उस समय के संविधान संसद कानून राजाज्ञाओं और आज के संसद , कानून, संविधान और सरकारी आदेशों में ।
हम इस विषय को सौ फीसदी प्रमाणि‍कता के साथ विषयवस्तु व समग्र सिंहावलोकनीय सामग्री के साथ पूर्ण करने के साथ ही हमारे लगातार चल रहे एक अन्य आलेख ‘’दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली सं चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा’’ में भी आगे भारत यानि तोमर राजवंश के शासन व्यवस्था के ऊपर भी कुछ प्रकाश डालेंगें व उस शासन व्यवस्था का भी एक सिंहावलोकन प्रस्तुत करेंगें ।  
.......... क्रमश: जारी अगले अंक में     

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

हर जिले में बनेगा प्रेस क्लब * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि इसी साल से 51 हजार से बढकर हुई दोगुनी * इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्टता पुरस्कार अगले साल से

आंचलिक पत्रकारों के लिए लागू होंगी स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा योजनाएं
* हर जिले में बनेगा प्रेस क्लब * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि इसी साल से 51 हजार से बढकर हुई दोगुनी
* इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्टता पुरस्कार अगले साल से * आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की घोषणाएँ
नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनंद’’ ( एडवोकेट )
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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंचलिक पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा योजनाएँ लागू करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इसी साल से आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार की राशि 51 हजार से बढाकर दोगुनी करने की घोषणा की। आज पुरस्कृत सभी पत्रकारों के खाते में शेष राशि जमा कर दी जायेगी।
आज यहाँ समन्वय भवन में जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्थापित आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में श्री चौहान ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर भी प्रेस क्लब के लिए भूमि देने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। इससे आंचलिक पत्रकारों को काम करने में सहूलियत होगी। श्री चौहान ने कहा की भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रेस क्लब बनाने के लिए रोड मैप तैयार कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अगले साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और फ़ोटो पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार स्थापित करने की भी घोषणा की।
आंचलिक पत्रकारिता की कठिनाइयों और विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने का साहस रखने वाले आंचलिक पत्रकारों की सराहना करते हुए श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्कृष्टता को सम्मानित करने की पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे काम को सामाजिक मान्यता और सराहना मिलना ही चाहिए। पत्रकार समाज के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं इसलिए समाज का भी दायित्व है कि उन्हें सम्मानित करे। उन्होंने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार हर साल समय पर दिए जायेंगे। श्री चौहान ने कहा कि गाँवों और कस्बों से तथ्यात्मक समाचार पाठकों तक पहुँचाना कठिन काम है। समाज में हो रहे अच्छे कामों को अभिव्यक्ति देना अपने आप में समाज की सेवा है। आंचलिक पत्रकार व्यवस्था को जगाने और सतर्क करने का काम करते है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ आलोचना को सरकार ने हमेशा सादर स्वीकार किया है और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की कोशिश की है।

बुधवार, 8 अप्रैल 2015

प्रेस क्लब का सदस्यता आवेदन पत्र - निशुल्क डाउनलोड करें

कोई भी पत्रकार, साहित्यकार, लेखक, स्वतंत्र या किसी मीडिया संस्थान से जुड़ा हुआ हो या नहीं हो , चाहे प्रिट मीडिया , इलेक्ट्रानिक मीडिया, अन्य किसी मीडिया या सोशल मीडिया से संबंध रखता हो , प्रेस क्लब की निशुल्क सदस्यता प्राप्त कर सकता है , प्रेस क्लब की सदस्यता पूरी तरह से निशुल्क है, और इसके लिये कोई शुल्क नहीं देना है । अपना आवेदन पत्र पूर्ण रूपेण भर कर हमारे व्हाटस एप्प नंबर 094257 38101 पर या हमारे ई मेल पते gwaliortimes@gmail.com  पर भेज दें । विशेष संपर्क या अन्य जानकारी हेतु हमारी वेबसाइट ग्वालियर टाइम्स www.gwaliortimes.in देखें । सदस्यता आवेदन पत्र निम्न है , इसे डाउनलोड कर इसका प्रिंट निकाल लें और अपने हाथ से भरकर हस्ताक्षरित कर इसे भेजें ।  - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद'' , अध्यक्ष - चम्बल संभाग एवं मुरैना जिला म.प्र