गुरुवार, 1 जुलाई 2010

घरेलू हिंसा की रोकथाम हेतु ऊषा किरण योजना

घरेलू हिंसा की रोकथाम हेतु ऊषा किरण योजना

ग्वालियर, 30 जून 10/  घरेलू हिसा यानि ऐसा कोई कार्य या हरकत जो किसी पीड़ित महिला एवं बच्चों (18 वर्ष से कम उम्र के बालक एवं बालिका) के स्वाथ्य,सुरक्षा,जीवन को खतरा/संकट की स्थिति,आर्थिक नुकसान, क्षति जो असहनीय हो तथा जिससे महिला व बच्चे दुखी व अपमानित होते हों । इसके तहत् शारीरिक हिंसा, मौखिक व भावनात्मक हिंसा, लैंगिक व आर्थिक हिंसा या धमकी देना आदि घरेलू हिंसा में शामिल है।

       एक ही छत/घर के नीचे संयुक्त परिवार/एकल परिवार के पारिवारिक सदस्य, जो समरक्तता/ संगोत्रता/ दत्तक/ विवाह द्वारा बनाये गए रिश्ते के रूप में रह रहे या रह चुके, महिला एवं बच्चे सभी घरेलू की परिधि में आते हैं। पीड़ित महिला विवाहित, अविवाहित के अलावा अन्य रिश्तों में रह रही विवाहित, विधवा, माँ, बहन, बेटी, बहूँ, शादी के बगैर साथ रह रही महिला या दूसरी पत्नी के रूप में रह रही या रह चुकी महिला। धोखे से किया गया विवाह/ अवैध विवाह वाली महिला। शिकायत किसी भी वयस्क पुरूष सदस्य (प्रत्यर्थी दोषी/हिंसाकर्ता) के खिलाफ,जिसके साथ महिला एवं बच्चे का घरेलू रिश्ता है या था, के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है । घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बच्चों के लिये ऊषा किरण योजना शासन ने प्रारंभ की है।

       घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला संरक्षण अधिनियम 2005 नियम 2006 एक दीवानी कानून है। इस कानून में दोषी को सजा दिलाने के बजाय पीड़ित  के संरक्षण एवं बचाव की बात कही गई है। न्यायालय का आदेश न मानने पर दोषी व्यक्ति को एक साल की अवधि की सजा या रूपये 20 हजार तक जुर्माना या दोनों हो सकते है। घटना की प्रकृति गंभीर होने पर भारतीय दण्ड संहिता या अन्य किसी विधि के अधीन पुलिस कार्यवाही कर सकती है। इस कानून के तहत् घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए न्यायाधीश, न्यायालय को आवेदन प्राप्त होने के 03 दिन के भीतर पहली सुनवाई कर बचावकारी अनन्तिम/एक पक्षीय अनन्तिम आदेश दे सकते हैं। यह अधिनियम घरेलू रिश्तों में रहते हुए भी आपत्तिजनक व्यवहारों को सुधारने का पूरा मौका देता है।

       दरअसल महिलायें सर छुपाने के लिए एक घर ही चाह में बहुत से अनचाहे समझौते करती रहती है। यह कानून महिलाओं/बच्चों को अपने घर में स्वतंत्रत व सुरक्षित रहने का अधिकार देता है, चाहे उस घर पर उनका मालिकाना हक हो या न हो। न्यायालय प्रत्येक आवेदन की प्रथम सुनवाई की तारीख से 60 दिनों के अन्दर निपटारा करने का प्रयास करेगा। न्यायालय महिला द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं बयानों को भी विश्वसीनय मानकर आदेश दे सकता है कि हिंसा रोकी जावे और महिला को संरक्षण प्रदान किया जावे। न्यायालय पीड़ित, संबंधित पुलिस थाने व यदि केस सेवा प्रदाता से जुड़ा है तो उसे मामले से संबंधित सभी आदेशों की प्रतियां नि:शुल्क उपलब्ध करावायेगा। यदि न्यायाधीश ऐसा समझते हैं कि परिस्थितियों के कारण मामले की सुनवाई बंद कमरे में किया जाना बेहतर और आवश्यक है तो या पीड़ित पक्ष ऐसी मांग करे तो मामले की कार्यवाही बंद कमरे में की जा सकेगी। यदि न्यायाधीश को पीड़ित व्यक्ति या दोषी से आवेदन प्राप्त होने पर यह समाधान हो जाता है की परिस्थितियों में सुधार हुआ है तो पूर्व आदेश में परिवर्तन, संशोधन या निरस्त कर सकते है। पीड़ित पूर्वमें चल रहे अदालत के केस के अतिरिक्त भी इस कानून की धारा 18 से 22 तक संरक्षण एवं सहायता प्राप्त कर सकती हैं। घरेलू हिंसा के केस के साथ अन्य कानून अंतर्गत कार्यवाही भी एक साथ चल सकती है। महिला घटना स्थल या वर्तमान में जहां निवासरत है, वहां केस दर्ज करा सकती है। पीड़िता जहां उचित समझे उसे क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को न्याय के लिए आवेदन दे सकती है। उसे जिला विधिक सहायता अधिकारी, न्यायालयीन प्रक्रिया हेतु नि:शुल्क वकील एवं अन्य सहायता उपलब्ध करवायेगा।

       घरेलू हिंसा की शिकायत निम्न स्थानों, व्यक्तियों के पास दर्ज करायी जा सकती है:- सीधे क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट, स्थानीय पुलिस थाना, संरक्षण अधिकारी (परियोजना अधिकारी,महिला एवं बाल विकास विभाग) सेवा प्रदाता पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र अथवा पंजीकृत आश्रय गृह में पीड़ित महिला और उसके बच्चे। पड़ोसी परिवार का सदस्य सेवा प्रदाता संस्थाएं संरक्षण अधिकारी पुलिस या अन्य व्यक्ति जिसे घरेलू हिंसा होने की या घटना की जानकारी है।

इस कानून के तहत मिलने वाली राहत

       परामर्श- न्यायाधीश यह समझाता है कि नियम के तहत् किसी पीड़ित व हिंसाकर्ता को अकेले या संयुक्त रूप से सेवा प्रदाता (पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र) के किसी सदस्य जो परामर्श देने की पात्रता और अनुभव रखते हो से परामर्श लेने का निर्देश दे सकते है। परामर्श में हुई समझौते की कार्यवाही अनुसार मजिस्ट्रेट संरक्षण एवं सहायता के आदेश जारी कर सकेंगे।

       संरक्षण आदेश धारा 18- यदि न्यायाधीश को लगता है कि घरेलू हिंसा हुई है और पीड़ित व्यक्ति को हिंसाकर्ता से आगे भी खतरा है, ऐसी स्थिति में संरक्षण हेतु निम्नलिखित व्यवहारों से रोकने के आदेश हिंसाकर्ता को देगा। घरेलू हिंसा करने, हिंसा में सहयोग करने या प्रेरित करने से रोकना। किसी भी रूप में व्यक्तिगत, मौखिक, लिखित टेलीफोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सम्पर्क करने से मना करना। पीड़ित पर आश्रित व्यक्ति बच्चों या सहायता करने वाले व्यक्तियों पर हिंसा से रोकतना। संयुक्त या जिस सम्पत्ति पर पीड़ित का हक बनता है ऐसे सम्पत्तियों का लेन-देन या संचालन पर रोक। स्त्रीधन, आभूषण,कपड़ों इत्यादित का कब्जा देना। आपसे विवाह के संबंध में बात करने या उनकी प्रसंद के किसी व्यक्ति से विवाह के लिए मजबूर  न करना। दहेज की मांग के लिए परेशान करने से रोकना। न्यायालय के आदेश के बिना बैंक से संधारित लॉकर्स एवं सुयक्त बैंक खातों से राशि, सामग्री नहीं निकाल सकेगा। पीड़िता और उसके बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई अन्य उपाय।

       निवास का आदेश धारा 19- पीड़िता का साझी गृहस्थी में रहना महिला का अधिकार है, चाहे उसमें उसका मालिकाना हक न हो। अगर जरूरत महसूस हो तो अदालत आरोपी को यह आदेश दे सकती है कि पीड़िता जैसी सुविधा में साझे रूप में निवास कर रही थी वैसा ही किराए का धर उसे रहने के लिए उपलब्ध करावें। पीड़िता एवं उसके बच्चे घर में या धर के किसी भाग में निवास करते हैं, या कर चुके हैं, तो उसे धर के उस भाग में रहने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। हिंसाकर्ता उस मकान को न तो बेच सकता है न उस पर .ऋण ले सकता है न ही किसी के नाम से हस्तातरित कर सकता है। अगर पीड़ित की रिपोर्ट से जज को ऐसा लगता है कि पीड़ित को हिंसाकर्ता से आगे भी खतरा है, तो हिंसाकर्ता पुरूष को धर के बाहर रहने का आदेश भी दे सकता है या घर के जिस भाग में पीड़ित व्यक्ति का निवास है या विद्यालय महाविद्यालय में जाने से मना कर सकता है।

       बच्चों की अभिरक्षा का आदेश धारा 21 :-  न्यायालय पीड़िता की मांग पर उसे उसके बच्चों को अभिरक्षा में देने का अस्थायी आदेश दे सकता है। पीड़िता की रिपोर्ट से न्यायाधीश यह समझते हैं कि हिंसाकर्ता के बच्चे से मिलने भेंट करने से खतरा उत्पन्न हो सकता है तो यह हिंसाकर्ता को कही भी बच्चें से नहीं मिलने का आदेश दे सकता हैं।

       आर्थिक राहत एवं क्षतिपूर्ति का आदेश धारा 20 एवं 22:-  पीड़िता और उसके बच्चों का भरण-पोषण, चिकित्सीय खर्च, कपड़ेहिंसा की वजह से हुए किसी सम्पत्ति के नुकसान या हटाये जाने के कारण हुए नुकसान का मुआवजा देने का आदेश देगा। अदालत मानसिक यातना और भावनात्मक पीड़ा जो रिस्पॉडेंट द्वारा घरेलू हिंसा के कृत्यद्वार पहुंचायी गई है कि क्षतिपूर्ति और जीविका की क्षतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए दोषी को आदेश दे सकेगी।

       पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र :- घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज कर कानून अनुसार समुचित कार्यवाही कर सहायता पहुंचाना कोर्ट के आदेश पर पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र के परामर्शदाता,पीड़ित या दोषी से अकेले या संयुक्त रूप से परामर्श देने का कार्य करेंगे और समझौते की रिपोर्ट कोर्ट को प्रस्तुत करेंगे। जहां समझौता न हो पा रहा है, तो ऐसी कार्यवाही की रिपोर्ट न्यायालय को प्रस्तुत करेंगे, जिसके पश्चात् न्यायालय पीड़िता को उसके हित में जैसा उचित समझे आदेश जारी कर सकेगा।

       पंजीकृत आश्रय गृह :- न्यायालय/संरक्षण अधिकारी/ सेवा प्रदाता के आदेश से या पीड़िता के आवेदन पर शासन द्वारा पंजीकृत संस्था में आश्रय दिया जावेगा। जहां पीड़िता व उसके बच्चों के लिए नि:शुल्क भोजन, कपड़े,चिकित्सा,पुनर्वासएवं अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

       संरक्षण अधिकारी के कर्तव्य :- पीड़िता की ओर से घरेलू हिंसा की रिपोर्ट प्रारूप 1 में तैयार करना और स्थानीय पुलिस थाना,सेवा प्रदाता,विधिक सहायता अधिकारी एवं मजिस्ट्रेट को भेजना। पीड़ित व्यक्ति के अनुरोध पर आश्रय गृह एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाना। कोर्ट आने-जाने, आश्रय गृह आदि के लिए परिवहन की नि:शुल्क व्यवस्था उपलब्ध करवाना। न्यायालय में आवेदन फाईल करने के लिए भारत सरकार के निर्धारित प्रारूप 2.3 एवं 5 में आवेदन तैयार करने में सहयोग करना। पीड़ित व्यक्ति को राज्य विधिक सहायता प्राधिकरण द्वारा नि:शुल्क सहायता उपलब्ध करवाना। न्यायालय के समन्स/नोटिस तामील करवाना। मजिस्ट्रेट के निर्देश पर घरेलू हिंसा की घटना की जॉच कर रिपोर्ट देना। इस प्रकार संरक्षण अधिकारी मजिस्ट्रेट और पीड़िता के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करेगा और उसकी जिम्मेदारी है कि पीड़ित महिला और उसके बच्चों को सुरक्षा एवं सहायता प्रदान करने संबधित सभी कार्यवाही कानून एवं उषा किरण योजना अंतर्गत उपलब्ध कराना।

       पुलिस का दायित्व :- यदि संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता को किसी भी माध्यम से यह विश्वसनीय सूचना प्राप्त होती है कि कहीं पर घरेलू हिंसा का कृत्य हो रहा है या सम्भावना है तो ऐसी आपातकालीन स्थिति में पुलिस अधिकारी,संरक्षण अधिकारी/सेवा प्रदाता के साथ घटना स्थल पर जाएगा और घरेलू दुर्घटना की रिपोर्ट तैयार कर इस अधिनियम के अधीन समुचित आदेश प्राप्त करने के लिए अविलम्ब मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करेगा। घरेलू दुर्घटना की रिपोर्ट में उपलब्ध कराई गई सूचना से भारतीय दण्ड संहिता या अन्य विधि के अधीन किया गया अपराध प्रकट होता है तो नियमानुसार कार्यवाही करना। .

 

रविवार, 27 जून 2010

मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प

मुरैना में दिन भर की बिजली कटौती के साथ रात भर की जाने वाली बिजली कटौती से हडकम्प

मुरैना 27  जून 10 , चम्बल में यू तो भ्रष्ट व बेईमान अधिकारीयों को पदस्थ कर जनता का लहू चूसना आम बात है, स्थानीय नेताओं के पालतू और कमाई अधिकारीयों का जुल्मो सितम इस हद तक पार कर गया है कि साल भर चलने वाली बिजली कटौती भारी भीषण गर्मी और घुआंधार मच्छरों के बीच बढ़ा कर दिन भर की बिजली कटौती के साथ पिछले दो दिनों से रात में भी शुरू कर दी गयी है ! उल्लेखनीय है स्थानीय भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारीयों और नाकारा हो चुकी नगर पालिका के सितमो आलम ये हैं कि भारी मच्छरों से त्रस्त शहर में पिछले तीन साल से मच्छरों के लिये न तो कोई दवा कभी छिड़कावायी गई और न फोगिंग ही करवाई गई ! जबकि नगरपालिका के पास फोगिंग मशीन उपलब्ध है !

और बढ़ाई बिजली कटौती

जब से दैनिक भास्‍कर ने बिजली कटौती के समाचारों का प्रकाशन प्रारंभ किया है , तबसे विद्युत कम्‍पनी ने और अधिक कटौती शहर में बढ़ा कर 15 घण्‍टे से 16 घण्‍टे प्रतिदिन तक पहुँचा दी है । कल भी दैनिक भास्‍कर ने शहर में हो रही अनाप शनाप बिजली कटौती और कटौती के बारे में ऊपर आला अधिकारीयों को फर्जी रिपोर्ट भेजकर गुमराह करने सम्‍बन्‍धी लम्‍बा चौड़ा समाचार प्रकाशित किया था , जिसका दण्‍ड शहर वालों को पूरे दिन की बिजली कटौती के बाद रात 8 बजे दनादन चालू की गयी बिजली कटौती के रूप में झेलना पड़ा , यह कटौती इस खबर को लिखे जाने और प्रकाशित किये जाने के वक्‍त देर रात में भी जारी है । इस समय शहर में पिछले एक घण्‍टे से बिजली सप्‍लाई शट डाउन है ।   

ऐसे में पूरे दिन भर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक और फिर अब रात में भी इसी कदर की जाने वाली बिजली कटौती ने शहरवासीयों का जीना मुहाल कर दिया है ! जहाँ शहरवासी इस बिजली कटौती से न केवल सकते में हैं बल्कि उनमें भारी आक्रोश भी भड़क गया है ! जहाँ गर्मी की मौसमी बीमारीयों की चपेट में आकर लोगों में मजीलस,खुजली और चिकनगुनियां जैसे रोग फैल गये हैं वहीं पिछले दिनों बानमौर के एक सरकारी छात्रावास के 30 में से 29 बच्चों के एक साथ चपेट में आ जाने से सारे बच्चे छात्रावास से भगा दिये गये थे और बिना कोई चिकित्सा कराये हरिजन दलित गरीब बच्चों से छात्रावास खाली करा लिया गया है ! अंचल में व्याप्त सरकारी लापरवाही के बदइंतजामी का शिकार होकर जहाँ बीमारीयों और मच्छरों से जनता त्रस्त है वहीं रात भर और दिन भर की बिजली कटौती से चारों ओर कोहराम मचा है व आक्रोश व्याप्त हो गया है !

 

शुक्रवार, 25 जून 2010

चंबल की बिजली सप्लाई फिर बंद

खेद सूचना
हमें खेद है कि मुरैना म.प्र. में चल रही पिछले दस दिन से बिजली कटोती विगत चार दिनों से पूरे दिन और रात की बिजली कटोती में बदल जाने के कारण समाचार अद्यतन नहीं हो पा रहा है । फेलुअर विद्युत व्यवस्था सही होने पर पूर्ववत अद्यतन किया जा सकेगा । अभी शहर मुरैना में हर दिन सुबह 5:30 बजे से देर रात 11 बजे तक बिजली कटौती चल रही है । तथा रात को 1 बजे से सुबह 5 बजे तक चल रही बिजली कटोती के कारणवश घण्टे दो घण्टे के लिये भी नियमित बिजली नहीं मिल पा रही है हर दस पंद्रह मिनिट बाद बिजली गुल हो जाने पर जिसमें समाचार अद्यतन संभव नहीं है । फोटो एवं समाचारों का प्रकाशन भी बिजली बहाल होने पर किया जा सकेगा । इस समाचार के लिखे व प्रकाशित किये जाने के वक्त तक बिजली सप्लाई सुबह से ही बन्द है ।
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गुरुवार, 24 जून 2010

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी , पारा फिर पचास के पार.. लोगों में घबराहट और बैचेनी के साथ बीमारीयॉं फैलीं

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी , पारा फिर पचास के पार.. लोगों में घबराहट और बैचेनी के साथ बीमारीयॉं फैलीं

मुरैना/ ग्‍वालियर/ भिण्‍ड/ श्‍योपुर/दतिया 24 जून 10 , पिछले दिनों अचानक दो दिनी वारिश और ठण्‍डी हवाओं तथा काली घटाओं से मौसम के रूख में आये बदलाव और गर्मी से थोड़ी राहत मिलने के बाद, सूर्यदेव के पुराने प्रचण्‍ड तीखे तेवर हालांकि छ: सात दिन पहले ही लौट आये थे लेकिन विगत चार दिन से गर्मी रौद्र और भयावह रूप में अचानक बड़ गई है , जिससे लोगों में भारी घबराहट व बैचेनी फैल गई है , साथ ही भीषण गर्मी के चलते मौसमी बीमारीयों के साथ, सामान्‍य लोगों में ब्‍लडप्रेशर तथा रक्‍त व दिल से जुड़ी बीमारीयों के लोगों में संकट अधिक फैल गया है ।

चम्‍बल अंचल में तापमान जहॉं पचास पार कर 51-52 डिग्री पर चल रहा है , वहीं ग्‍वालियर अंचल में भी पारा पचास के आसपास ही घूम रहा है । हालात इतने बदतर हैं कि अब तो रिहायशी मकानों के ईट पत्‍थर भी आग उगल रहे हैं , एकदम बढ़ी गर्मी से जानवरों और पक्षियों के जीवन भारी संकट में पड़ गये हैं । पानी और चारा के अभाव में अनेक पशु पक्षी काल कवलित हो चुके हैं , वहीं भीषण गर्मी अब तक सम्‍पूर्ण ग्‍वालियर चम्‍बल अंचल में दो सैकड़ा से अधिक लोगों को भी लील चुकी है  ।

राष्‍ट्रीय पक्षी मोर चम्‍बल अंचल विशेषकर मुरैना क्षेत्र में भारी संख्‍या में भीषण गर्मी से मर रहे हैं , पानी व चारे की आस में फड़फड़ाते मोर इन दिनों शहर मुरैना में लोगों के घरों में घुस घुसकर चारा पानी तलाशते हैं और उन्‍हें तड़पते फड़फड़ाते आसानी से देखा जा सकता है । ग्‍वालियर टाइम्‍स ने अपने मुरैना कार्यालय के बगीचे में ऐसे मोरों के कुछ चित्र खींचे हैं ।

जानलेवा हुयी बिजली कटौती

विकराल गर्मी पर और भी अधिक हालात नियमित होने वाली बिजली कटौती और ऊपर से अघोषित बिजली कटौती , रात्रिकालीन बिजली कटौती से बिगड़ रहे हैं । जहॉं भीषण गर्मी से कूलर , पंखें पहले ही फेल हो चुके हैं ऊपर से अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती ने लोगों की जिन्‍दगी हराम कर दी है । लोगों में भारी बिजली कटौती के चलते गर्मी से चक्‍कर आना, जी मिचलाना, मितली आना, ब्‍लड प्रेशर बढ़ना, दिल के दौरे, ब्रेन हैमरेज जैसे मामले काफी बढ़ गये हैं ।

स्‍वास्‍थ्‍य महकमा भी फेल

मौसमी बीमारीयों के चलते जहॉं म.प्र. का स्‍वास्‍थ्‍य महकमा भी फेल हो गया है और भारी संख्‍या में रोजाना अस्‍पताल पहुँचने वालों की तादाद में अचानक हुयी बढोत्‍तरी और विशिष्‍ट इलाज व सम्‍यक इलाज की जगह टालू चालू प्रक्रिया के तहत ही फौरी तोर पर सामान्‍य इलाज कर  लोगों को अस्‍पतालों से भगाया जा रहा है । ब्‍लड प्रेशर और दिल की बीमारीयों, ब्रेन हैमरेज, स्‍ट्रोक, अटैक के लोगों का मुरैना, भिण्‍ड, श्‍योपुर, दतिया जैसे शहरों में इलाज उपलब्‍ध ही नहीं है और इन्‍हें ऑंख बन्‍द कर सीधे ग्‍वालियर रैफर कर दियर जाता है, अधिकतर लोग ग्‍वालियर तक पहुँचने से पहले ही रास्‍ते में ही दम तोड़ देते हैं । 

बढ़ गये अग्निकाण्‍ड

जहॉं गर्मी अन्‍य उत्‍पात और उपद्रव मचा कर लोगों की जान की दुश्‍मन बनी हुयी है वहीं पिछले दिनों ग्‍वालियर में ऐतिहासिक विक्‍टोरिया मार्केट के जल कर खाक होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजाना दनादन बढ़ रहे अग्निकाण्‍डों से जहॉ लोगों के पूरे पूरे गॉंव और घर जल कर खाक हो गये हैं वहीं किसानों की फसल एवं लॉंक भी जलकर भस्‍म हो चुके हैं । अब तक लाखों की फसल जलकर भस्‍म हो चुकी है । हाल ही में मुरैना शहर में एक कबाडि़ये का गोदाम भी जल कर भस्‍म हो चुका है, बताया जाता है कि बीमा लेने के लिये इस कबाडि़ये द्वारा हा साल अपने गोदाम को इसी तरह जला दिया जाता है । 

मंगलवार, 22 जून 2010

आ तुझे तेरा भगवन पुकारता, आ मेरे पास आ कब से बुला रहा.... नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

 

आ तुझे तेरा भगवन पुकारता, आ मेरे पास आ कब से बुला रहा....

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

 

राह भगवान की आसान है मगर, मंदिरों में भगवान कभी कैद न रहते ।

सर्वत्र व्‍यापक, सम रूप से बन्‍दों के दिल में हैं बसते ।

जब से मंदिरों में धनवान घुस गया, अहंकारी नेता और पुजारी चोर जा बैठा ।

भगवान मंदिरों से बाहर निकल गया, जाकर किसी गरीब की कुटिया में है बैठा ।

क्‍यों ढूंढ़ते भगवान को मंदिरों में फिर रहे, वह तो गीता में पहले ही कह गया ।

सर्व धर्म परित्‍यज्‍यो मामैंकं शरणं व्रज:, पहले सब छोड़ आ फिर मेरे पास आ, जाते जाते संदेश दे गया ।

मैं मिलूंगा वहॉं जहॉं पाप बहुत बढ़े, दुष्‍ट अधर्मी कुकर्म की प्रवृत्ति जहॉं बढ़े ।

आऊंगा हर बार सदा धर्म बचाने, साधु संत और निर्मलों के प्राण बचाने ।

पत्‍ते पत्‍ते कण कण में हर मनुज के सीने में मैं मिल जाऊंगा तुझे, जो दिल से कभी मुझे बुलाओगे ।

मुझे पाना है तो जा किसी गरीब को खोज ले, किसी जाति के अछूत को, मासूम गरीब अबला को खोज ले ।

लाज अबला की बचा , आबरू गरीब की, दे रोटी दो वक्‍त की, प्रभु जान उनको सम्‍मान दे, ये राह भगवान की ।

रोक कर चीर हरण द्रोपदी का कोई , विप्र सुदामा जान किसी को मान दे, देख फिर कहॉं हूं मैं, पहचान ले मुझे ।

मित्रता निभा अर्जुन को खोज ले, बीच रण में निहत्‍था हो, रथ उसका थाम ले, हो शत्रु से घिरा हुआ शर्त ये जान ले ।

भरे संग्राम में सशक्‍त बली के सामने न्‍याय कर, महाभारत सा कोई धर्मयुद्ध तो रचा ।

जा किसी कुब्जा कुबड़ी को रूप दे, जा त्‍याग राजभोग को किसी विदुर का साग खा ।

जा पहले किसी आतातायी कंस से निबट, कुछ अहंकारीयों के मानमर्दन तो करके आ ।

मुझे न तीर्थों में न किसी मंदिर में पायेगा, पायेगा गर तो मुझे तू खुद में ही पायेगा ।

सोमवार, 21 जून 2010

मुरैना में कबाडि़ये के गोदाम में भीषण आग, प्रशासन मौके पर पहुँचा

मुरैना में कबाडि़ये के गोदाम में भीषण आग, प्रशासन मौके पर पहुँचा

मुरैना 21 जून 10, स्‍थानीय सीताराम धर्मशाला के सामने स्थित एक कबाडि़ये के गोदाम में आज शाम को भीषण आग लग जाने से अफरा तफरी मच गई ।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक स्‍थानीय सीताराम पतिराम की धर्मशाला के सामने स्थित स्‍वदेश- भोपाल अखबार कार्यालय के बगल में स्थित एक कबाडि़ये के गोदाम में वहॉं से गुजर रही एक बारात में चली आतिशबाजी से आग लग गई । खबर लिखे जाने तक कबाड़ा धू धू कर जल रहा था, ओर भारी धुऑं आसमान में छाया हुआ था। मौके पर सिटी कजिस्ट्रेट एस.डी.एम. पुलिस सहित प्रशासन मौके पर पहुंच चुका था और आवश्‍यक कार्यवाही में जुटा था। बारात को वहॉं रोक कर बिठाल कर रखा गया है । उल्‍लेखनीय है कि कई साल पुरानी यह कबाड़े की गोदाम नाला नंबर एक पर संचालित है, और गोदाम खुले में सुरक्षित स्‍थान पर था। लेकिन बारात में चल रही आतिशबाजी से लगभग खुले गोदाम में रखे किसी कबाड़े ने आग बैठ गई , और धीरे धीरे पूरे गोदाम में आग लग गई ।

समाचार अपडेशन- बिजली कटोती के कारण नहीं

खेद सूचना
हमें खेद है कि मुरैना म.प्र. में चल रही दिन भर और रात्रिकालीन बिजली कटौती के कारण समाचार अद्यतन नहीं हो पा रहा है । फेलुअर विद्युत व्यवस्था सही होने पर पूर्ववत अद्यतन किया जा सकेगा । बिजली कटोती के कारणवश घण्टे दो घण्टे के लिये भी नियमित बिजली नहीं मिल पा रही है हर दस पंद्रह मिनिट बाद बिजली गुल हो जाने पर जिसमें समाचार अद्यतन संभव नहीं है । फोटो एवं समाचारों का प्रकाशन भी बिजली बहाल होने पर किया जा सकेगा । इस समाचार के लिखे व प्रकाशित किये जाने के वक्त तक बिजली सप्लाई बन्द है ।
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