सोमवार, 23 नवंबर 2009

आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- राकेश अचल

आसपड़ौस :  अबू नहीं, संविधान पिटा

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है।

       भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है।

       मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है।

       दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है।

       विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया।

       मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी?

       वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है।

       दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा।

       मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है।

       बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की।

       संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है।

       मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ''महा-राष्ट्र'' नही रह जाएगा।

       महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें।

       आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके।

       समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ''महान भारत'' बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ''महाराष्ट्र'' का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)

                             

                                                                                                   Rakesh Achal

 

रविवार, 22 नवंबर 2009

विहिप प्रांत मंत्री व संगठन मंत्री आज मुरैना में (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

विहिप प्रांत मंत्री व संगठन मंत्री आज मुरैना में

मुरैना...विश्‍व हिन्दू परिषद के विभाग की बैठक 22 नवंवर 09 रविवार को रखी गई जिसमें मुरैना एवं भिन्ड जिले के दायित्ववान कार्यकर्ता भाग लेंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांत मंत्री राजेश तिवारी एवं प्रांत संगठन मंत्री रोहित भाई जी मुख्य रूप से उपस्थित रहेगे । स्थानीय पंचायती धर्म शाला में आयोजित बैठक के बाद विहिप नेता सायं चार वजे प्रेस से भी रू व रू होंगे उक्त आशय की जानकारी विहिप के जिला मंत्री संजीव खेमरिया विभाग मंत्री राममिलन शर्मा ने एक प्रेस विज्ञिप्त में दी ।

 

सड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायलसड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायल (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

सड़क दुर्घटनों में एक युवक की मौत दो घायल

मुरैना..दो अलग अलग सडक दुर्घटनाओं में एक युवक की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गये घायलों को इलाज हेतु जिला अस्पताल में दाखिल करा दिया गया है जहां पर हालत खतरे सेबाहर बताई गई है।

जिले के सवलगढ थाना क्षेत्र में सवलगढ टेंटरा रोड पर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से एक युवक की दौराने उपचार मौत हो गई मृतक ग्राम केमराकला का रहने वाला था। मृतक भीमसेन रावत राति के समय अपने गांव जा रहा था उसी दौरान अज्ञात वाहन के चालक ने लापरवाही से चलाकर टक्क्रर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई मृतक के भाई गिरधर रावत की सूचना पर पुलिस ने मामला कायम कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों से मिली एक अन्य जानकारी के अनुसार अंबाह रोड पर आज दिमनी खुर्द के बीच अज्ञात वाहन की टक्कर से दो वाईक सवार घायल हो गये जिन्हे उपचार के लिये जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है प्राप्त जानकारी के अनुसार के पी चौहान निवासी गणेशपुरा मुरैना और वनकीलाल प्रजापति निवासी मुतावली डांग बसई राज. वाईक पर सवार होकर अंबाह से मुरैना की ओर आ रहे थे उसी दौरान अज्ञात वाहन चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाकर वाईक में टक्कर  मार दी जिससे दो सुवक घायल हो गये घायलों को इलाज हेतु जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस ने वाहन चालक के बिरूद्ध मामला दर्ज कर लिया है चिकित्सकों ने घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई है।

 

कर्मचारी संघों ने पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष शर्मा के निधन पर शोक सभा आयोजित की (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

कर्मचारी संघों ने पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष शर्मा के निधन पर शोक सभा आयोजित की

मुरैना.म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के पूर्व एवं म.प्र.पेशर्न्स एसो.के वर्तमान प्रांताध्यक्ष श्री नारायण प्रशाद शर्मा के आस्किमिक निधन के कारण 20 नवम्बर को म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय  कर्मचारी संघ म.प्र. लघुवेतन कर्मचारी संघ एवं म.प्र. पेंशर्न्स एसोसियन के साथियों द्वारा सयुक्त रूप से शोक सभा का आयोजन शासकीय मध्यमिक विद्यालय चम्बल कालोनी के प्रांगण में राघवेन्द्र सिंह तोमर जिलाअध्यक्ष म.प्र.तृतीय वर्ग शा.कर्मचारी संघ की अध्यक्षता में किया गया। इस  अवसर पर श्री चिम्मन सिंह सिकरवार, राघवेन्द्र सिंह तोमर, एम.एस. नांगलीय, बी.एल.टुण्डेले एवं दोलतराम शर्मा अनेक वक्ताओं द्वारा श्री शर्मा के कृतृत्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। श्री शर्मा को कर्मचारी संघ एवं वर्तमान में पेशर्न्स एसो. का जुझारू अजेय योद्धा निरूपित किया।  आपकी संघर्ष करने की क्षमता एंव शासन प्रशासन से अपनी मॉगे मागने वालों में अद्वितीय क्षमता का उल्लेख किया गया। इस अवसर पर दो मिनट का मौन धारण कर शर्मा की दिवंगत आत्मा को चिरशांन्ति प्रदान कर शोकाकुल परिवार को वह धैर्य, साहस एवं कर्तव्यपरायणता देने हेतु परमपिता परमात्मा से प्रार्थना की ताकि वे इस असहाय दु:ख को सहन करते हुए उनके शेष कर्तव्याें को पूर्ण कर सकें।

शोक सभा में मुख्य रूप से उपस्थित राघवेन्द्र सिंह तोमर, उमाशंकर शर्मा, एमएसनांगलीय, बीएल टुण्डेल, लक्ष्मीनारायण शर्मा, चिम्मन सिंह सिकरवार, भगवान सिंह तोमर, नरेश सिंह,दिनेश कुमार शर्मा, दौलत राम शर्मा, गजराज सिह, नरेन्द्र सिंह चौहान, आशारानी चौहान, उर्मिला शर्मा, मंजूजैन, चन्द्रकांता पाठक, राजकुमारी शर्मा, आशा पाराशर, अजय कुमार जैन, एस.के.एस. चौहान, रामेश्वर प्रशाद तिवारी, मुन्ना लाल शर्मा राममूर्ति शर्मा आदि।

 

कांग्रेस के जिला महामंत्री बने कुलदीप सिंह तोमर (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

कांग्रेस के जिला महामंत्री बने कुलदीप सिंह तोमर

मुरैना. केन्द्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया आर्शीदबाद  व म.प्र.युवा कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी की सहमति से गिर्राज डण्डोतिया जिला अध्यक्ष ग्रामीण युवा कांग्रेस ने कुलदीप सिह तोमर निवासी सिहोनिया को जिला कांग्रेस महामंत्री के पद पर मनोनीत किया गया है। तोमर कांग्रेस पार्टी में काफी समय से योगदान दे रहे है, तोमर ने अपनी नियुक्ति पर श्री सिंधिया, पटवारी, एवं डण्डौतिया का आभार किया है कुलदीप सिंह तोमर के इष्ट मित्रों ने जिला महामंत्री बनने पर उन्हे बधाई दी है।

 

बसपा छोडकर भाजपा में ली सदस्यता (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

बसपा छोडकर भाजपा में ली सदस्यता

बानमौर..बसपा नेता केदार सिंह कुशवाह एवं सुरेश कुशवाह ने किन्ही कारणों बस बसपा से नाता तोडलिया है। और उनकी इस घटना की जानकारी मिलते ही कुछ भाजपा नेता उनका पूर्व जिला अध्यक्ष  कालीचरण  कुशवाह के यहॉ ले पहुचे और उन्हेंनों ने सैकड़ो साथियों के साथ आन-फानन में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।  इस से कुछ उनके विरोधीयों में हडंकम्प मच गया श्री कुशवाह बानमोर के निवासी है। केदार सिंह कुशवाह एवं सुरेश कुशवाह के भाजपा में सदस्यता ग्रहण होने पर उनक ो बधाई दी है। बधाई देने वालों में पानसिंह, श्रीकृ ष्ण सिंह, अवतारसिंह, शियाराम सिंह, मुकेश सिंह, जहार सिंह, रघुवीर सिंह, नरेश सिंह आदि।

बिजली के अभाव में लघु उद्योग बंद होने की कगार पर (दैनिक मध्‍यराज्‍य)

बिजली के अभाव में लघु उद्योग बंद होने की कगार पर

मुरैना.नगर मुरैना स्थित लघु एवं मध्यस्तर के उद्योग बिजली आपूर्ति के अभाव में बंद होने के कगार पर खड़े हुये है। आज-कल बिजली की आपूर्ति पूरी तर अनियमित हो गयी है। शासन द्वारा निधार्रित समयाअवधि में भी कभी विद्युत रख रखाव के नाम पर कभी मरम्मत के नाम पर विद्युत विभाग द्वारा बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। परिणाम तह 24 घंटे में मात्र 3-4 घंटे ही बिजली व मुश्किल तमाम मिल पाती है। इस सबंध में विद्युत मंण्डल मुरैना के सक्ष्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों से समय समय पर जब भी सम्पर्ककिया जाता है तो वे कोई संतोष जनक उत्तर न देकर  केवल यह कह कर टाल देते है कि ठीक करा रहे है। अनेक बार जिला प्रशासन, सभ्भागीय प्रशासन राज्य शासन, एवं शासन के वरिष्ट तम सभी मंत्रीयों के लिये पत्रचार, व निजी भेट की जा चुकी है किन्तु किसी भी स्तर से छोटे उद्योग कर्मियों को आज परिर्यत कोई राहत प्राप्त नही हो सकी है। ऐसी दशा में यह विचार्णीय प्रश्न है कि विधुत आपूर्ति के अभाव में यदि नगर के लघु एवं मध्यस्तर के उद्योगो को बंद करने की स्थिति निर्मित होती है तब इस  उद्योगों से रोजगार प्राप्त बैरोजगारियों कि जीवन यापन की व्यवस्था किस प्रकार सम्भव होगी। अत: समाचार पत्र के माध्य से शासन को इन उद्योग कर्मियों द्वारा यह चेतावनी दी गयी हौ कि यह विद्युत आपूर्ति निरंतर नही की जाती है तो उद्योगों के होने वाली हानि एवं उद्योगों से जुडे रोजगार प्राप्त उन व्यक्तियों द्वारा वे वेरोजगार होगे शासन के विरूद्ध हानि पहुचाने के लिये उचित कदम उठाया जावेगा।

औद्योगिक क्षेत्र मुरैना की छोटी ईकाईयां बन्द  होने के कगार पर

मुरैना..जिले में बिजली कटोती के चलते यहा पर व्यापारियों का काम पूर्ण से बंद होने के कगार पर है। पता नही बिजली कब चली जाये, कटौती तो होती है लेकिन कटौती के अलावा विद्युत सप्लाई के समय में बिघुत कटौती भी की जाती है। जब विघुत मंण्उलके अधिकारियों से लाइट के जाने के बारे में पूछा जाता है तो उनका जबाब होता है कि शहर में लाईन का तार टुटजाने से काम चलरहा है इसलिये लाईट बंद कर दी है।  मुख्य मंत्री ने उद्योगों के लिए निर्वाध विद्युत सप्लाई की घोषणा की थी परन्तु मुरैना के औद्यौगिक क्षेत्र में स्थापित सूक्ष्म औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाई जो एल टी से जुडे हुए है। प्रति दिन 6 घंटा रेगूलर कटौती व 1 से 3 घंटे तक अघोषित कटौती का सामना करना पढ़रहा है। इस कारण कुछ इकाईयां बन्द हो चुकी है व कुछ इकाईया बन्द होने की स्थिति में हैे शासन से अनुरोध है कि आद्योगिक क्षेत्र मुरैना में एक सब स्टेशन कायम कर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जावे।