सोमवार, 31 मार्च 2008

हूँ.....लो हो गया एनकाउण्‍टर कर दिया शॉट डेड साले को

हास्‍य/व्‍यंग्‍य

हूँ.....लो हो गया एनकाउण्‍टर कर दिया शॉट डेड साले को

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

शहर ए आजम इन दिनों तफरी पर हैं, उनका स्‍टाफ आजाद इन दिनों पूरी आजादी और लोकतंत्र का आनन्‍द ले रहा है । साहब के कार्यालय में इन दिनों मार्च क्‍लोजिंग चल रहा है, साहब को हुकुम मिला कि बजट पूरा निबटाना है, एक पाई भी सरैण्‍डर नहीं होनी चाहिये । निपटाओं कैसे भी कहीं भी ।

साहब और साहब के सैनिक हर साल कुछ पैसा सरैण्‍डर कर लौटाने के आदी थे और बजट सरैण्‍डर करना तथा पैसा वापस सरकार को भेजना उनकी सालानाचर्या का अहम भाग थी । वे इसे सरकारी पैसे की बचत मानते आये थे । पैसा लौटा कर छाती ठोक के सीना तान के अपनी तारीफ में खुद ही कशीदे बॉंच लिया करते थे ।

अबकी बार ससुरी मुसीबत हो गयी, सब उल्‍टा हो गया गुल गपाड़ा हो गया । ऊपर से आदेश हैं सरैण्‍डर नहीं एनकाउण्‍टर चाहिये, वापसी नहीं उपयोगिता प्रमाण चाहिये ।

रटी रटाई लाइनों पर ट्रेडीशनलीया स्‍टाइल में काम करने वाले सरकारी कार्यालय नये किस्‍म के आदेश से चक्‍कर में पड़ गये । सरकारी बचत की जगह अब सरकारी खपत में सरकारी खुपडि़या दौड़ा दौड़ा कर बेहाल हो गये मगर ससुरा बजट था कि जित्‍ता खर्च करो बढ़ता ही जाता था ।

ऑफिस के बाबूओं के चकरघिन्‍नी हो जाने के बाद भी जब बजट का निकाल ( यह सरकारी शब्‍द है) जब पल्‍ले नहीं पड़ा तो साहब से मार्गदर्शन चाहा गया, साहब ने मोबाइल से मार्गदर्शन दिया, कि पहले लिस्‍ट बना लो कि अपने ऑफिस में क्‍या क्‍या होता है, और उसमें क्‍या क्‍या सामान लगता है या क्‍या क्‍या खर्च होता है फिर उसके सामने खर्चा डालना शुरू करो ।

बाबूओं ने साहब के निर्देशानुसार लिस्‍ट बनाना शुरू की, लिस्‍ट बनी तो ठाकुर साहब द्वारा हवन के लिये लिखाई जाने वाली सूची की तरह बन गयी । अब इस लिस्‍ट में खर्चा डालने का काम शुरू हुआ, सारे खर्चे डालने के बाद भी बजट फिर भी एनकाउण्‍टर नहीं हुआ, फिर सरैण्‍डर हुआ जा रहा था, बाबूओं ने फिर ऊपर से मार्ग दर्शन चाहा, ऊपर से मोबाइल पर आकाशवाणी स्‍टायल में साहब फिर भगवान कृष्‍ण की तरह मुस्‍कराते हुये उवाचे कि ऐसा करो कि मनमानी रकम भर दो, बाबू अर्जुन के मानिन्‍द घिघियाये कि साहब पहले से हम 400 के 3400 और 700 के 70000 लिख लिख कर रखे हैं पर फिर भी साला सरैण्‍डर कर रहा है अब कैसे एनकाउण्‍टर करें ।

साहब ने गीता के सोलहवें अध्‍याय के कृष्‍ण के मानिन्‍द कहा कि आसुरी सम्‍पदा से काम नहीं चल पा रहा तो दैवीय सम्‍पदा भी शामिल कर लो, फिर भी बात न बने तो सत्रहवें अध्‍याय वाले त्रय गुण विभाग कर लो, बाबूओं ने फिर अफसर से मार्गदर्शन चाहा और कहा प्रभो आपकी बातें कुछ समझ नहीं आ पा रहीं, अगर हिन्‍दी में बतायें तो शायद समझ में आ जाये । या फिर मुरैना के अंग्रेजी स्‍कूलों वाली इंग्लिश स्‍टायल में बता दें तो कुछ पल्‍ले पड़ जाये ।

अफसर मोबाइल वाली आकाशवाणी पर फिर कृष्‍ण स्‍टाइल को छोड़ मुरैना के अंग्रेजी स्‍कूलों के टीचर स्‍टाइल में अपनी व्‍याख्‍या सुनाने लगे और बोले, ऐसो करियो जित जित में कोमा लगे होयं तहॉ तहॉं ऐसी ऐसी मद डार दियो तिनके प्रूफ न होतई, और दो चार दिना बाद डिलीट हे जातें । जैसें दीवाल की लिखाई हर महीना के खच्‍च में एण्‍ट्री कर देओ, दीवाल की लिखाई हप्‍ता आठ दिना में मिटरत रही, हम लिखवावत रहे, ऐसेंई लिखीयो हमने भोंपू बजवाये प्रचार के काजें, रिक्‍शान में लाउडस्‍पीकर धरकें बजवाये, गामन में ऐलान करवाये, नास्‍ता फास्‍ता डीजल फीजल सिग डार डूर के देखो अब तिहाई बैलेन्‍स सीट का कहि रही है, फिरऊ बचें तो पेड़ पौधा लगाइबो दिखाय दीयो, कोऊ स्‍पष्‍टीकरण आवे तो कहि दीयो हमने तो लगाये हते, अब गैया भैंसे चर गयीं तो का करें । और बिनकी जाली को खच्‍च डारों तो लिख दीयो के पानी नहीं परो सो सूख साख गये, अबऊ कछु खच्‍च बच परे तो फैक्‍स में और फोनन में दिखाय दीओ, जे सिग कर करू के फिर हमें फोन लगाय लीयो, दूसरे नम्‍बर पे लगईयो, जा नम्‍बर को हम बन्‍द राखेंगे, पबलिक डिस्‍टरब करति है । काऊ को पानी ना आय रहो, काऊ की बिजली नाने तो काऊ की गली में सफाई ना हे रही, अब हम झाड़ू लेके जायें का, सिगुई देस परेसान है, कौन कौन की सुनें सो वा नम्‍बर की सिम खेंच देत हैं ।

बाबूओं ने साहब की समझाइस के अनुसार फिर से बजटिंग का एनकाउण्‍टर करना शुरू किया, फिर भी बजट था कि सरैण्‍डर कर रहा था । हैरान परेसान बाबूओं ने आखिर खेंच के दारू का मद भी चढ़ा दिया, साहब की डेली इत्‍ती, बाबूओं ने इत्‍ती और आने जाने वाले अतिथियों ने इत्‍ती और रोज टाइमपासीयों ने इत्‍ती पी ......। आखिर जब हिसाब लगाया तो अब न केवल बजट एनकाउण्‍टर हो गया बल्कि शॉट डेड हो गया, बल्‍कन ओवर बजट हो गया ।

मार्च क्‍लोजिंग हो गया, अब जब साहब पर्सनल टूर से लौटेंगे तो पीठ ठोकेंगे वाह भई वाह, हूं साला बार बार सरैण्‍डर कर रहा था, कर दिया एनकाउण्‍टर हो गया शॉट डेड । निबट गया गड़रिया की तरह, जादा ही अति धर रखी थी ।

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

अतर सिंह डण्‍डोतिया (तहसील संवाददाता)

मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्‍या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्‍होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्‍ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्‍थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्‍टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्‍टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्‍छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है ।   

दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्‍स पता होते थे, और लोगों को अच्‍छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्‍ा गर्मी व मच्‍छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्‍द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्‍हें अपदस्‍थ कर दिया था ।

आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्‍यादा है ।

वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्‍टलों मच्‍छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्‍ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्‍यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्‍द करने के वायदे और सत्‍ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्‍टे अबाध सप्‍लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।            

 

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा

बच्‍चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्‍टलों मच्‍छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल

अतर सिंह डण्‍डोतिया (तहसील संवाददाता)

मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्‍या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्‍होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्‍ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्‍थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्‍टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्‍टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्‍छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है ।   

दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्‍स पता होते थे, और लोगों को अच्‍छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्‍ा गर्मी व मच्‍छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्‍द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्‍हें अपदस्‍थ कर दिया था ।

आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्‍यादा है ।

वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्‍टलों मच्‍छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्‍ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्‍यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्‍द करने के वायदे और सत्‍ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्‍टे अबाध सप्‍लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।            

 

गरज चमक के साथ गिरा पानी, गर्मी से हल्‍की राहत किसान की मुसीबत

गरज चमक के साथ गिरा पानी, गर्मी से हल्‍की राहत किसान की मुसीबत

अतर सिंह डण्‍डोतिया (तहसील संवाददाता)

मुरैना 31 मार्च 08 कल शाम बादलों की भारी गरज और बिजली की भारी चमक के बीच पानी बरसा । हालांकि बरसात अधिक देर तक नहीं हुयी और आवेग भी अधिक तेज नहीं था, लेकिन गर्मी के अभिमान को दबाने में कामयाब हुयी और बरसात के बाद गर्मी व मच्‍छरों से जूझ रहे बिजली कटौती में ब्‍लडप्रेशर व हार्ट अटैक जैसी व्‍याधियों से परेशान लोगों को ठण्‍डी हवाओं ने काफी राहत व सूकून दिया । रात भर चली ठण्‍डी हवायें लोगों को तरोताजा कर गयीं वहीं आज सुबह बच्‍चों की हाईस्‍कूल परीक्षा का अंतिम पर्चा भी है । बच्‍चों को भी ठण्‍डक ने पढ़ाई में मदद की । हालांकि पूरे दिन हुयी बिजली कटौती के बाद देर रात एक बजे तक हर आधा घण्‍टे बाद, बीस मिनिट बाद एक एक घण्‍टे के लिये कटी बिजली ने जहॉं आम जनता को परेशान रखा वहीं बच्‍चों के रिवीजन में भी वे बेहाल हो गये ।

दूसरी ओर किसानों के चेहरों पर अचानक बरसात आने से हवाईयां उड़ने लगीं हैं, उनकी फसल इस समय खलिहानों और थ्रेशरों पर पड़ी है कई जगह तो अभी कटाई जारी है । ऐसे में आंधी पानी उनकी फसल को पूरी तरह नष्‍ट कर देगा । जबकि पहले से ही अंचल में बरसात न होने, नहर से सिचाई का पानी न मिल पाने और अन्‍धाधुन्‍ध बिजली कटौती के चलते वह अपनी फसल इस साल पूरी नहीं कर पाया है और जैसे तैसे जो चन्‍द फसल राशि सामने आ भी गयी है वह आंधी पानी के खतरे में है ।  

 

बुधवार, 26 मार्च 2008

बीच शहर में दो को गोली मारी, बका मार कर भी किया व्‍यापारीयों को घायल

बीच शहर में दो को गोली मारी, बका मार कर भी किया व्‍यापारीयों को घायल

व्‍यापारीयों में भारी आक्रोश, शहर में फैला आतंक

Atar Singh Dandotiya, Tehsil Sanvadddata Morena  

मुरैना 26 मार्च 08, अभी समाचार लिखे जाने से दो घण्‍टे पहले शाम लगभग 6:15 बजे बीच मुरैना शहर में गांधी औषधालय के सामने स्थित एक मोबाइल आयल एजेन्‍सी की दूकान पर दो अज्ञात व्‍यक्तियों ने हमला कर दूकान के मालिक सुरेश चन्‍द्र गुप्‍ता पुत्र फतेहचन्‍द्र गुप्‍ता तथा अमित गुप्‍ता पुत्र सुरेश चन्‍द्र गुप्‍ता को गोली मार दी तथा बका से हमला कर घायल कर दिया ।

घटना में सुरेश चन्‍द्र गुप्‍ता को गोली के छर्रे लगने से तथा अमित गुप्‍ता को सिर में बका लगने से घायल होने पर गंभीर अवस्‍था में मुरैना जिला चिकित्‍सालय में भर्ती कराया गया । दोनों की हालत अब खतरे से बाहर है । घायलों के घर में ही उनकी दूकान है ।

घटना के कारण ज्ञात नहीं हो सके हैं, अमित गुप्‍ता ने इस संवाददाता को बताया कि उसे कतई नहीं मालुम कि हमलावर कौन थे और उन्‍होंने हमला क्‍यों किया ।  

घटना से व्‍यापारी भारी आक्रोश व गुस्‍से में हैं तथा ऐसी घटना से शहर में भारी आतंक फैल गया है ।

 

    

शिक्षा विभाग ने प्रायवेट स्‍कूलों को हड़काया - शासकीय मान्यता हेतु शुल्क 26 मार्च तक जमा कराएं

शिक्षा विभाग ने प्रायवेट स्‍कूलों को हड़काया - शासकीय मान्यता हेतु शुल्क 26 मार्च तक जमा कराएं

गैर मदीय फर्जी शुल्‍क जमा कराना जरूरी, वर्ष 2001 से अब तक करोड़ों वसूल चुका है शिक्षा विभाग बिना किसी मद के

करोड़ों की अंधेरगर्दी और घोटाले का पर्दाफाश पर विशेष आलेख ग्‍वालियर टाइम्‍स प्रकाशित करेगी (कृपया प्रतीक्षा करें)

मुरैना 25 मार्च 08/ जिला शिक्षा अधिकारी श्री सी.एम. उपाध्याय की जानकारी के अनुसार अशासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों की सत्र 2008-09 के लिए मान्यता हेतु निरीक्षण प्रतिवेदन माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल को भेजा जाना है । लेकिन कतिपय विद्यालयों द्वारा विभागीय शुल्क जेसे क्रीड़ा, पर्यावरण, रेडक्रॉस, स्काउट- गाइड आदि शुल्क जमा नहीं किया है अथवा 75 प्रतिशत से कम जमा किया गया है । कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी के निर्देशों के अनुसार उक्त शुल्कों की कम से कम 75 प्रतिशत राशि 26 मार्च, 2008 तक जमा कराना अनिवार्य है । इसके अभाव में निरीक्षण प्रतिवेदन विपरीत टीप अंकित कर माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल की ओर भेज दिए जाएंगे ।

 

मजदूरी का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से होगा

मजदूरी का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से होगा

 

मुरैना 25 मार्च 08/ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी स्कीम मध्यप्रदेश के अन्तर्गत कार्यरत श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान बैंक एकाउन्ट के माध्यम से किया जायेगा ।

              कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि मजदूरों को नकद मजदूरी भुगतान किसी भी स्थिति में नहीं किया जायेगा । निर्माण एजेन्सी द्वारा मजदूरों के नाम से एकाउंट पेई चैक से मजदूरी का भुगतान किया जायेगा । संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच और निर्माण एजेंसी खाता खुलवाने में मजदूरों और बैंक को आवश्यक सहयोग देंगे । खाता शून्य राशि से खोला जायेगा । सभी बैंक शाखा प्रबंधकों को भी खाता खोलने के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा गया है । मजदूरों को मजदूरी का भुगतान बैंक एडवाइस के माध्यम से किया जायेगा । सभी बैंकों के जिला समन्वयक प्रत्येक माह के अंत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को खोले गये खातों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध करायेगें । खाता नहीं खुलने तथा समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं होने की स्थिति में दोषी अधिकारी व कर्मचारी के विरूध्द नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी ।